हिंदी साहित्य के प्रमुख रिपोर्ताज | reportaj sahity

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हिंदी साहित्य के प्रमुख रिपोर्ताज ग्रंथ

हिंदी साहित्य में रिपोर्ताज लेखन 

रिपोर्ताज फ्रांसीसी शब्द है। इस विधा का प्रादुभाव 1936 ई. के आस-पास द्वितीय विश्वयुद्ध के समय हुआ। हिंदी में इसके जनक शिवदान सिंह चौहान हैं। इनका रिपोर्ताज लक्ष्मीपुरा ‘रूपाभ’ पत्रिका में प्रकाशित हुआ था। कुछ समय बाद ही ‘हंस’ पत्रिका में उनका दूसरा रिपोर्ताज ‘मौत के खिलाफ ज़िन्दगी की लड़ाई’ शीर्षक से प्रकाशित हुआ। इसके बाद रांगेय राघव का बंगाल के अकाल पर आधारित रिपोर्ताज ‘तूफानों के बीच’ ‘हंस’ पत्रिका में प्रकाशित हुआ। प्रमुख रिपोर्ताज निम्नलिखित हैं-

प्रमुख रिपोर्ताज और उसके लेखक

hindi के प्रमुख reportaj निम्नलिखित हैं-

लेखकरिपोर्ताज
शिवदान सिंह चौहानलक्ष्मीपुरा (1938)
मौत के खिलाफ जिंदगी की लड़ाई
रांगेय राघवतूफानों के बीच (1946)
प्रकाश चन्द्र गुप्तस्वराज भवन,
अल्मोड़ा का बाज़ार,
बंगाल का अकाल
भदंत आनंद कौसल्यायनदेश की मिट्टी बुलाती है
उपेन्द्र नाथ अश्कपहाड़ों में प्रेममय संगीत
शमशेर बहादुर सिंहप्लाट का मोर्चा (1952)
कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’क्षण बोले कण मुस्काए (1953)
श्रीकांत वर्माअपोलो का रथ
शिवसागर मिश्रवे लड़ेंगे हजारों साल (1966)
धर्मवीर भारतीयुद्ध यात्रा (1972)
फणीश्वरनाथ ‘रेणु’ऋण जल धन जल (1977)
नेपाली क्रांति कथा (1978)
श्रुत-अश्रुत पूर्व (1984)
एकलव्य के नोट्स
विवेकी रायजुलूस रुका है (1977)
बाढ़! बाढ़!! बाढ़!!!
भागवत शरण उपाध्यायखून के छीटें
राम कुमार वर्मापेरिस के नोट्स
निर्मल वर्माप्राग : एक स्वप्न
कमलेश्वरक्रांति करते हुए आदमी को देखना
श्री कान्त वर्मामुक्ति फौज
यशपाल जैनरूस में छियालीस दिन
रिपोर्ताज सूची

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