Kavi Kartavya Nibandh Mahavir Prasad Dwivedi

कवि कर्तव्य निबंध- महावीर प्रसाद द्विवेदी | kavi kartavya

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कवि-कर्तव्य से हमारा अभिप्राय हिंदी के कवियों के कर्तव्य से है। समय और समाज की रुचि के अनुसार सब बातों का विचार करके हम...
Kavita Kya Hai Nibandh Acharya Ramchandra Shukla

कविता क्या है निबंध- रामचंद्र शुक्ल | kavita kya hai nibandh

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कविता क्या है, भाग- 1 कविता से मनुष्य-भाव की रक्षा होती है। सृष्टि के पदार्थ या व्यापार-विशेष को कविता इस तरह व्यक्त करती है मानो...
Shraddha Aur Bhakti Nibandh Acharya Ramchandra Shukla

श्रद्धा और भक्ति निबंध- रामचन्द्र शुक्ल | shraddha aur bhakti

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किसी मनुष्य में जनसाधारण से विशेष गुण व शक्ति का विकास देख उसके संबंध में जो एक स्थायी आनंदपद्धाति हृदय में स्थापित हो जाती...
Shivshambhu Ke Chitthe Nibandh Balmukund Gupt

शिवशंभु के चिट्ठे निबंध- बालमुकुंद गुप्त

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1. बनाम लार्ड कर्जन माई लार्ड! लड़कपन में इस बूढ़े भंगड़ को बुलबुल का बड़ा चाव था। गाँव में कितने ही शौकीन बुलबुलबाज थे। वह...
Aacharan Ki Sabhyata Nibandh Adhyapak Purn Singh

आचरण की सभ्यता निबंध- सरदार पूर्ण सिंह

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विद्या, कला, कविता, साहित्य, धन और राजस्व से भी आचरण की सभ्यता अधिक ज्‍योतिष्‍मती है। आचरण की सभ्यता को प्राप्‍त करके एक कंगाल आदमी...
Majdoori Aur Prem Nibandh Adhyapak Purn Singh

मजदूरी और प्रेम निबंध- अध्यापक पूर्ण सिंह | majduri aur prem

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हल चलाने वाले का जीवन हल चलाने वाले और भेड़ चराने वाले प्रायः स्वभाव से ही साधु होते हैं। हल चलाने वाले अपने शरीर का...
Dharm Aur Samaj Nibandh Chandradhar Sharma Guleri

धर्म और समाज निबंध- चंद्रधर शर्मा गुलेरी | dharm aur samaj

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समाज के लिये धर्म की आवश्यकता है या नहीं? इस प्रश्न पर कुछ अपने विचार प्रकट करना ही आज इस लेख का उद्देश्य है।...
Sahitya Jansamuh Ke Hriday Ka Vikas Hai Nibandh Balkrishna Bhatt

साहित्य जनसमूह के हृदय का विकास है निबंध- बालकृष्ण भट्ट

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प्रत्येक देश का साहित्य उस देश के मनुष्यों के हदय का आदर्श रूप है। जो जाति जिस समय जिस भाव से परिपूर्ण या परिप्लुत...
Vaishnavta Aur Bharatvarsh Nibandh Bharatendu Harishchandra

वैष्णवता और भारतवर्ष निबंध- भारतेन्दु हरिश्चंद्र

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⁠इस लेख का उल्लेख ‘रामायण का समय’ नामक लेख में पहले ही आ चुका है जो सन् 1884 की रचना है। अतः यह उसके...
Dhokha Nibandh Pratap Narayan Mishra

धोखा निबंध- प्रताप नारायण मिश्र | dhokha nibandh

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इन दो अक्षरों में भी न जाने कितनी शक्ति है कि इनकी लपेट से बचना यदि निरा असंभव न हो तो भी महा कठिन...