आर्टिकल

yah-deep-akela-kavita-ki-vyakhya

यह दीप अकेला कविता की व्याख्या और प्रमुख तथ्य | अज्ञेय

0
यह दीप अकेला कविता- अज्ञेय  अज्ञेय का मूल नाम सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन है। इनका जन्म 7 मार्च 1911 ई. को कुशीनगर, देवरिया, उत्तर प्रदेश में हुआ...
parinde-kahani-ki-sameeksha

परिंदे कहानी की समीक्षा एवं सारांश | निर्मल वर्मा

0
परिंदे कहानी और निर्मल वर्मा का परिचय निर्मल वर्मा को प्रायः स्मृति का कहानीकार माना गया है। 1956 ई. में परिदें कहानी का प्रकाशन होता है। इसी...
raja-nirabansiya-kahani-ki-sameeksha

राजा निरबंसिया कहानी की समीक्षा एवं सारांश | कमलेश्वर

0
राजा निरबंसिया कहानी और कमलेश्वर का परिचय कमलेश्वर नयी कहानी आंदोलन के स्थापकों में रहे, जिसे नयी कहानी त्रयी कहा जाता है। कमलेश्वर के अलावा राजेंद्र यादव...
geet-farosh-kavita-ki-vyakhya

गीत-फरोश कविता की व्याख्या और प्रमुख तथ्य | भवानीप्रसाद मिश्र

0
गीत-फरोश: भवानीप्रसाद मिश्र भवानी प्रसाद मिश्र नई कविता के दौर के कवि हैं। दूसरे सप्तक (1951 ई.) में शामिल भवानी एक गांधीवादी कवि माने जाते हैं। ‘गीत फरोश’ कविता...
mahamari-aur-akaal-par-aadhaarit-hindi-sahity-ke-pramukh-rachanaen

महामारी और अकाल पर आधारित हिंदी साहित्य की प्रमुख रचनाएँ

0
कोरोना के बहाने तमाम साहित्यकारों और विद्वानों का ध्यान महामारी और अकाल की तरफ गया है। यह चर्चा-परिचर्चा का प्रमुख विषय बन गया है।...
hindi-sahity-itihas-lekhan-paddhati

हिंदी साहित्य इतिहास लेखन की पद्धतियाँ | hindi sahity itihas lekhan ki paddhati

2
हिंदी साहित्येतिहास (hindi sahity ka itihas) लेखन प्रमुख रूप से 5 दृष्टियों/पद्धतियों को आधार बनाकर लिखा गया है जो निम्न हैं-1.   वर्णानुक्रम पद्धति 2.   कालानुक्रम पद्धति 3.   वैज्ञानिक पद्धति 4.   विधेयवादी पद्धति 5.   नारीवादी पद्धति उपरोक्त पद्धतियों (itihas lekhan ki paddhati) का विस्तार से...
ritikal-ki-pramukh-pravritiyan

रीतिकालीन काव्य की प्रमुख प्रवृतियाँ | reetikal

2
रीतिकालीन काव्य की रचना सामंती परिवेश और छत्रछाया में हुई है इसलिए इसमें वे सारी विशेषताएँ पाई जाती हैं जो किसी भी सामंती और...
sampreshan-ke-vibhinn-model

संप्रेषण के विभिन्‍न मॉडल | sampreshan ke vibhinn model

0
संप्रेषण मॉडल संप्रेषण पर अधिकतर पश्चिमी विचारकों ने ही अपना मत रखा है, भारतीय चिंतन परम्परा में इसका अभाव दिखाई देता है। पश्चिमी विद्वानों के प्रमुख...
error: Content is protected !!