वस्तुनिष्ठ इतिहास

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भारतेंदु युग के कवि और उनकी रचनाएँ

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हिन्दी साहित्य के इतिहास में आधुनिक काल के प्रथम चरण को ‘भारतेंदु युग’ के नाम से जाना जाता है। भारतेंदु हरिश्चंद्र को हिन्दी साहित्य...
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द्विवेदी युग के कवि और उनकी रचनाएँ

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आधुनिक कविता के दूसरे पड़ाव (सन् 1903 से 1916) को द्विवेदी-युग के नाम से जाना जाता है। डॉ. नगेन्द्र ने द्विवेदी युग को ‘जागरण-सुधार काल’ भी कहा जाता है...
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अलंकार सिद्धांत और उसके प्रमुख आचार्य

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अलंकार संप्रदाय के प्रतिष्ठापक आचार्य भामह हैं। हलांकि आचार्य भरत मुनि ने अलंकार संबंधी कई स्थापनाएं प्रस्तुत किया परंतु उन्होंने रस सिद्धांत को ही प्रमुखता...
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पाश्चात्य काव्यशास्त्र के प्रमुख सिद्धांत और उनके प्रवर्तक

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पाश्चात्य काव्यशास्त्र पाश्चात्य काव्यशात्र का इतिहास काफी समृद्ध है। 8वीं शदी ईसा पूर्व से ही काव्यशास्त्र संबंधी साक्ष्य उपलब्ध होने लगते हैं परंतु व्यवस्थित विचार...
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पाश्चात्य काव्यशास्त्र के प्रमुख ग्रंथ और उसके लेखक

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पाश्चात्य काव्यशास्त्र पाश्चात्य काव्यशास्त्र के उद्भव ईसा के आठ शताब्दी पूर्व से मिलने लगते हैं। होमर और हेसिओड जैसे कवियों के काव्य में पाश्चात्य काव्यशास्त्रीय...
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हिंदी के प्रमुख उपन्यासकार और उनके उपन्यास | hindi upanyas list

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लाला श्रीनिवासदास कृत ‘परीक्षा गुरु’ (1882 ई.) को हिन्दी का प्रथम उपन्यास माना जाता है। रामचंद्र शुक्ल भी इसे ही अंग्रेजी ढंग का प्रथम उपन्यास...
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हिन्दी साहित्य की मिलती-जुलती नामों वाली रचनाएँ और रचनाकार

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हिंदी साहित्य में कई लेखकों की रचनाओं के नामों में काफी साम्यता है, कई रचनाओं का एक ही नाम है। इसलिए अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं...
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हिंदी साहित्य के प्रमुख त्रयी | hindi sahity ke prmukh tryi

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हिंदी साहित्य में कई त्रयी प्रसिद्ध रहे, उनमें से कुछ त्रयी जो प्रतियोगी परीक्षाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं, जिनसे प्राय: प्रश्न पूछें जाते...
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रीतिकालीन काव्य की प्रमुख प्रवृतियाँ | reetikal

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रीतिकालीन काव्य की रचना सामंती परिवेश और छत्रछाया में हुई है इसलिए इसमें वे सारी विशेषताएँ पाई जाती हैं जो किसी भी सामंती और...
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रीतिबद्ध काव्यधारा के कवि और उनकी रचनाएँ

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रीतिबद्ध कवि जिन कवियों नें शास्त्रीय ढंग पर लक्षण उदाहरण प्रस्तुत कर अपने ग्रंथों की रचना किया उन्हें रीतिबद्ध श्रेणी में रखा गया है। हिन्दी के...
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