rekhachitra | हिंदी के प्रमुख रेखाचित्र और रेखाचित्रकार

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रेखाचित्र और रेखाचित्रकार

रेखाचित्र

रेखाचित्र अंग्रेज़ी के ‘स्केच’ (sketch) शब्द का समानार्थी है। रेखाचित्र (rekhachitra) मूल रूप से चित्रकला का शब्द है। वहीं से इस शब्द को लेकर इसे काव्य-कला अर्थात्‌ साहित्य के अंतर्गत प्रतिष्ठित किया गया है। निष्कर्ष रूप में रेखाओं के द्वारा बना हुआ चित्र रेखाचित्र है। चित्रकार रेखाचित्रों में केवल टेढ़ी-आड़ी-तिरछी रेखाओं का उपयोग करता है। वह इन्हीं रेखाओं से चित्रांकन करता है। इन चित्रों में वह रंग नहीं भरता। रेखाचित्र की विशेषता यह होती है कि इसमें साहित्यकार अपनी कल्पना या अनुभूति का अलग से कोई रंग नहीं भरता, जिस व्यक्ति, वस्तु या दृश्य का वर्णन करना है, उसका हू-ब-हू चित्र अंकित कर देता है।

इसी के अनुकरण पर जब साहित्यकार शब्द-रेखाओं द्वारा किसी वस्तु या व्यक्ति का चित्र पाठकीय-चेतना के समक्ष प्रस्तुत करता है, तब उसके इस शब्द-चित्त को साहित्यिक दृष्टि से ‘रेखाचित्र’ की संज्ञा प्राप्त होती है। इसीलिए इसका दूसरा नाम ‘शब्दचित्र’ भी है। “चित्र में रेखाएँ जो काम करती हैं, वही काम साहित्य में शब्द करते हैं।”[1] जब लेखक शब्दों के द्वारा किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, घटना या दृश्य आदि का इस प्रकार वर्णन करता है कि आँखों के आगे उस व्यक्ति, वस्तु, स्थान, घटना या दृश्य का चित्र खिंचता चला जाए, तो वह रेखाचित्र कहलाता है।

‘हिंदी साहित्य कोश’ में रेखाचित्र की परिभाषा कुछ इस प्रकार है- “रेखाचित्र किसी व्यक्ति, वस्तु, घटना या भाव का कम से कम शब्दों में मर्मस्पर्शी, भावपूर्ण एवं सजीव अंकन है।” रेखाचित्र एक भावप्रधान रचना है, जिसमें एक ही वस्तु विषय का भावप्रवण, मार्मिक एवं प्रभावी किंतु शाब्दिक रेखाओं में अंकन होता है।

रेखाचित्र वर्णन-प्रधान संस्मरण है किन्तु इनकी चित्तात्मकता संस्मरण से पृथक कर देती है। संस्मरण और रेखाचित्र दोनों में ही वर्ण्य विषय काल्पनिक न होकर यथार्थ होता है। परंतु संस्मरण में आत्मपरकता अधिक होती है वहीं रेखाचित्र में कम। बनारसीदास चतुर्वेदी ने ‘संस्मरण’ पुस्तक में लिखा है कि, “संस्मरण, रेखाचित्र और आत्मचरित इन तीनों का एक-दूसरे से इतना घनिष्ठ संबंध है कि एक की सीमा दूसरे से कहाँ मिलती है और कहाँ अलग हो जाती है, इसका निर्णय करना कठिन है।”

रेखाचित्र का कहानी से भी काफी साम्यता है। “रेखाचित्र में भी कहानी की ही भाँति चरित्र का उदघाटन होता है, किन्तु कहानी के पात्र कल्पित होते हैं और रेखाचित्र के वास्तविक।”[2] जैनेंद्र कुमार ने भी लिखा है कि,”सिनेमा का क्लोज-अप रेखाचित्र है, बाकी फिल्म की कहानी हुई। तात्पर्य है, रेखाचित्र व्यक्ति विशेष के व्यक्तित्व पर केंद्रित रहता है और कहानी में घटनाओं का फैलाव रहता है।” दरअसल रेखाचित्र अपने में कई विधाओं के गुणों को अपने में समाहित किये हुए रहता है।

हिंदी में रेखाचित्र का विकास

हिंदी का प्रथम रेखाचित्र ‘पद्म पराग’ को माना गया है, जिसके लेखक ‘पद्म सिंह शर्मा’ हैं। परंतु यह संस्मरणात्मक-रेखाचित्र है। रेखाचित्र को स्वतंत्र विधा के रूप में स्थापित करने का श्रेय पद्म सिंह शर्मा को ही है। रेखाचित्र का सम्यक विकास छायावादोत्तर काल में दिखाई देता है। परंतु इसके पहले ‘हंस’ (मार्च, 1939, सं. श्रीपति राय) और ‘मधुकर’ (1946 ई., बनारसीदास चतुर्वेदी) पत्रिकाओं ने विशेषांक निकाल कर रेखाचित्र के विकास में अहम योगदान दिया।

हिंदी के रेखाचित्रकारों में महादेवी वर्मा और रामवृक्ष बेनीपुरी के नाम विशेष उल्लेखनीय हैं। महादेवी वर्मा की कृति अतीत ‘अतीत के चलचित्र’, ‘स्मृति की रेखाएँ’, ‘मेरा परिवार’, ‘पथ के साथी’ तथा रामवृक्ष बेनीपुरी की ‘माटी की मूरतें’, ‘मील का पत्थर’ पुस्तकें रेखाचित्र के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। इनके अतिरिक्त बनारसीदास चत॒र्वेदी का ‘सेतुबंध’, श्रीराम शर्मा का ‘प्राणों का सौदा’ उल्लेखनीय रेखाचित्र हैं।

महादेवी वर्मा के रेखाचित्रों को लेकर विद्वानों के बीच काफी मतभेद रहा है। कुछ विद्वान्‌ इन्हें संस्मरण मानते हैं। उनका तर्क है कि महादेवी वर्मा ने जिन पात्रों और घटनाओं को लिया है, वे उनके जीवन में आये हुए वास्तविक पात्र और घटनाएँ हैं। परंतु इस बात का कोई ठोस प्रमाण नहीं उपलब्ध हैं कि ये पात्र लेखिका के जीवन में आये थे? महादेवी वर्मा ने जिस तटस्थता के साथ, संक्षिप्त रूप में, पात्रों और घटनाओं का चित्रात्मक अंकन किया है, वह उनकी रचनाओं को रेखाचित्र के समीप लाता है। वस्‍तुतः महादेवी के रेखाचित्रों में ‘स्मृतिचित्र’ तथा ‘संस्मरण’ दोनों समाहित हैं। महादेवी ने संस्मरणात्मक शैली में ही रेखाचित्र अधिक लिखें हैं जिन्हें भ्रमवश संस्मरण मान लिया जाता है।

रेखाचित्र के प्रकार

मुख्यतः रेखाचित्र पांच प्रकार के होते हैं- वर्णनात्मक, संस्मरणात्मक, चरित्र प्रधान, व्यंग्यात्मक तथा मनोविश्लेषणत्मक।

रेखाचित्र के बारे में विभिन्न विद्वानों के मत

जयकिशन प्रसाद खंडेलवाल- “गद्य का वह रूप, जिसमें भाषा के द्वारा किसी व्यक्ति, वस्तु या घटना का चित्रण या मानसिक प्रत्यक्षीकरण किया जाता है, रेखाचित्र कहलाता है।”

शशिभूषण सिंघल- “रेखाचित्र शब्दों के द्वारा निर्मित सांकेतिक चित्र हैं। उसमें प्रस्तुत व्यक्ति की झलक प्रस्तुत की जाती है। लेखक ने उसके विषय में जो धारणा बनाई है, उस धारणा का क्रमशः विस्तार रहता है। उसका यथासाध्य वस्तुपरक चित्रण करते हुए लेखक स्वत: गौण हो जाता है।”[3]

बनारसीदास चतुर्वेदी- ‘‘जिस प्रकार एक अच्छा चित्र खींचने के लिए कैमरे का लैंस बढ़िया होना चाहिए और फिल्म भी काफी कोमल या सैंसिटिव, उसी प्रकार साफ चित्रण के लिए रेखाचित्रकार में विश्लेषणात्मक बुद्ध तथा भावुकतापूर्ण हृदय दोनों का सामंजस्य होना चाहिए परदुःखकातरता, संवेदनशीलता, विवेक और संतुलन इन सब गुणों की आवश्यकता है।’’

बनारसी दास चतुर्वेदी- “यदि हमसे प्रश्न किया जाये कि आज तक का हिंदी का श्रेष्ठ रेखा चित्रकार कौन है तो हम बिना किसी संकोच के बेनीपुरीजी का नाम उपस्थित कर देंगे।”

महादेवी वर्मा- “चित्रकार अपने सामने रखी वस्तु या व्यक्ति या रंगहीन चित्र जब कुछ रेखाओं में इस प्रकार आंक देता है कि उसकी विशेष मुद्रा पहचानी जा सके तब उसे हम रेखाचित्र की संज्ञा देते हैं। संस्मरण में भी साहित्यकार कुछ शब्दों में ऐसा चित्र अंकित कर देता है जो उस व्यक्ति या वस्तु का परिचय दे सके, परंतु दोनों में अंतर है।”

मैथिलीशरण गुप्त- ‘‘लोग माटी की मूरतें बनाकर सोने के भाव बेचते हैं पर बेनीपुरी सोने की मूरतें बनाकर माटी के मोल बेच रहे हैं।’’

rekhachitra की प्रमुख विशेषताएँ निम्नांकित हैं-

(1) रेखाचित्र में लेखकीय प्रतिभा और सूक्ष्म निरीक्षण का उपयोग होता है।

(2) रेखाचित्र में गति की व्यंजना स्थल ही नहीं, सूक्ष्म रूप में भी होती है।

(3) शब्द-रेखाओं से चित्र-रचना की जाती है। पाठक को अपनी कल्पना के अनुसार इस शब्द-रेखा में रंग भरने का अवसर प्राप्त रहता है।

(4) यथार्थ को सजीवता प्राप्त रहती है और लेखकीय कल्पना से यथार्थ को आकर्षक बनाया जाता है।

रेखाचित्र तथा संस्मरण में अंतर

  • रेखाचित्र तथा संस्मरण एक दूसरे से मिलती-जुलती और आधुनिक विधाएँ हैं। रेखाचित्र में भी  संस्मरण की भाँति बीती हुई घटनाओं का इस तरह वर्णन किया जाता है कि उसका हू-ब-हू चित्र आँखों के आगे अंकित हो जाता है। परंतु जहाँ रेखाचित्र विषय प्रधान होता है वहीं संस्मरण विषयी प्रधान। संस्मरण प्राय: प्रसिद्ध व्यक्ति के विषय में ही लिखा जाता है। रेखाचित्र के लिए यह आवश्यक नहीं है। जहाँ रेखाचित्र के विषय विविध हो सकते हैं, वहीं संस्मरण का विषय कोई विशेष व्यक्ति या विशेष घटना ही होती है।
  • रेखाचित्र में लेखक का वर्णित घटना, व्यक्ति आदि के साथ निजी संबंध होना आवश्यक नहीं है, जबकि संस्मरण में यह आवश्यक है कि लेखक का वर्णित व्यक्ति, घटना आदि के साथ व्यक्तिगत संबंध रहा हो।
  • संस्मरण केवल अतीत का ही हो सकता है। जबकि रेखाचित्र अतीत, वर्तमान और भविष्य का भी हो सकता है।
  • संस्मरण में लेखक उन्हीं तथ्यों का वर्णन करता है जो वास्तव में घटित हो चुके हैं। उसे अपनी कल्पना से कुछ भी जोड़ने की छूट नहीं है। वहीं रेखाचित्र में इस प्रकार का कोई बंधन नहीं है।
  • रेखाचित्र में लेखक के निजी व्यक्तित्व का कोई महत्व नहीं होता। संस्मरण में लेखक के निजी विचार किसी-न-किसी प्रकार आ ही जाते हैं, क्योंकि उसका संबंध लेखक के जीवन से भी होता है।
  • विस्तार संस्मरण की विशेषता है। प्रसंगों को याद करते समय लेखक उन्हें रुचिकर बनाकर प्रस्तुत करता है और कहानी कहने के लहजे का उपयोग करता है। इससे वर्णन में फैलाव आता है।
  • रेखाचित्र में वर्णन इतना सुगठित और प्रभावपूर्ण होना चाहिए कि उसका चित्र पाठक के सामने उपस्थित हो जाए। ऐसा लगे कि किसी चित्रकार का बनाया हुआ चित्र आँखों के सामने है। शब्दों के द्वारा चित्र अंकित करने के इस गुण को चित्रात्मकता कहते हैं। यह रेखाचित्र की एक बहुत बड़ी विशेषता है। वास्तव में रेखाचित्रकार का काम शब्दों के द्वारा चित्रों की श्रृंखला प्रस्तुत करने का है। रेखाचित्र इन शब्द-चित्रों को किसी विशेष क्रम में उपस्थित करता है। क्रम के इस निर्वाह को श्रृंखलाबद्धता कहते हैं। संस्मरण में भी सटीक और प्रभावपूर्ण वर्णन तथा श्रृंखलाबद्धता आवश्यक है। अपने इस बिंदु पर रेखाचित्र और संस्मरण एक दूसरे के नज़दीक है।
हिंदी के प्रमुख रेखाचित्र और उसके लेखक

हिंदी के rekhachitra और rekhachitrakar निम्नलिखित है–

लेखकरेखाचित्र
1. श्रीराम शर्माबोलती प्रतिमा- 1937 ई.; जंगल के जीव
2. प्रकाशचन्द्र गुप्तशब्दचित्र एवं रेखाचित्र- 1940 ई.; मिट्टी के पुतले; पुरानी स्मृतियाँ नये स्केच- 1947 ई.
3. महादेवी वर्माअतीत के चलचित्र- 1941 ई.; स्मृति की रेखाएँ- 1947 ई.; स्मारिका- 1971 ई.; मेरा परिवार- 1972 ई.  
4. भदंत आनंद कौसल्यायनजो भूला न जा सका- 1945
5. रामवृक्ष बेनीपुरीलाल तारा- 1938 ई.; माटी की मूरतें- 1946 ई.; गेहूँ और गुलाब- 1950 ई.; मील के पत्थर
6. देवेन्द्र सत्यार्थीरेखाएँ बोल उठी- 1949 ई.
7. सत्यवती मलिकअमिट रेखाएं- 1932 ई.
8. बनारसीदास चतुर्वेदीरेखाचित्र- 1952 ई.; सेतुबंध- 1952 ई.
9. कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’माटी हो गई सोना; दीप जले शंख बजे- 1959 ई.; क्षण बोले कण मुस्कराए
10. विनय मोहन शर्मारेखा और रंग- 1955 ई.
11. उपेन्द्रनाथ ’अश्क’रेखाएँ और चित्र- 1955 ई.
12. प्रेमनारायण टंडनरेखाचित्र- 1959 ई.
13. माखनलाल चतुर्वेदीसमय के पाँव- 1962 ई.
14. जगदीशचन्द्र माथुरदस तस्वीरें- 1963 ई.
15. रामनाथ सुमनबाबूराव विष्णु पराड़कर
16. शिवपूजन सहायवे दिन वे लोग- 1965 ई.
17. विष्णु प्रभाकरहँसते निर्झर दहकती भट्टी; कुछ शब्द: कुछ रेखाएँ- 1965 ई.
18. महावीर त्यागीमेरी कौन सुनेगा
19. सेठ गोविन्ददासचेहरे जाने पहचाने- 1966 ई.
20. डॉ. नगेन्द्रचेतना के बिंब- 1967 ई.
21. कृष्णा सोबतीहम हशमत- 1977, भाग-1
22. भीमसेन त्यागीआदमी से आदमी तक- 1982 ई.
23. रामविलास शर्माविराम चिन्ह- 1985 ई.
हिंदी के प्रमुख रेखाचित्र और उसके लेखक

# श्रीराम शर्मा को हिंदी में शिकार साहित्य का अप्रतिम लेखक माना जाता है।

# महदेवी वर्मा के संस्मरणों-रेखाचित्रों का ‘यूनैस्को’ के लिए अंग्रेजी अनुवाद रा.प्र. श्रीवास्तव ने किया है।

रेखाचित्र से संबंधित कुछ प्रश्न

1. ‘माटी की मूरतेंनामक रेखाचित्र किसने लिखा है?

(A) महादेवी वर्मा

(B) निराला

(C) सुमित्रानंदन पंत

(D) रामवृक्ष बेनीपुरी ✅

2. ‘लालतारा की विधा है-

(A) रेखाचित्र ✅

(B) संस्मरण

(C) जर्नल

(D) यात्रावित्त

3. ‘महादेवी वर्मा’ का रेखाचित्र इनमें से कौन-सा नहीं है?

(A) अतीत के चलचित्र

(B) पथ के साथी

(C) स्मृति की रेखाएँ

(D) उपर्युक्त सभी ✅

4. महादेवी जी ने किस रचना में पशु-पक्षियों के रेखाचित्र प्रस्तुत किए हैं?

(A) पथ के साथी

(B) अतीत के चलचित्र

(C) स्मृति की रेखाएँ

(D) मेरा परिवार ✅

5. ‘जंगल के जीव’ के रचनाकार कौन हैं?

(A) महादेवी वर्मा

(B) श्रीराम शर्मा ✅

(C) रामवृक्ष बेनीपुरी

(D) शिवपूजन सहाय

6. निम्न में से कौन रेखाचित्र विधा नहीं है?

(A) कठगुलाब ✅

(B) क्षण बोले कण मुस्कराए

(C) पुरानी स्मृतियाँ

(D) रेखाएँ बोल उठीं

7. ‘गेंहू और गुलाब’ की रचना विधा है-

(A) उपन्यास

(B) कहानी

(C) संस्मरण

(D) रेखाचित्र ✅

8. ‘रेखाएँ बोल उठींरेखाचित्र किसने लिखा है?

(A) देवेन्द्र सत्यार्थी ✅

(B) शिवपूजन सहाय

(C) शांतिप्रिय द्विवेदी

(D) उपेन्द्रनाथ अश्क

9. प्रकाशनकाल के अनुसार रेखाचित्रों का सही अनुक्रम बताइए:

(A) माटी की मूरतें, अमिट रेखाएँ, अतीत के चलचित्र, कुछ शब्द कुछ रेखाएँ

(B) कुछ शब्द कुछ रेखाएँ, अतीत के चलचित्र, माटी की मूरतें, अमिट रेखाएँ

(C) अतीत के चलचित्र, माटी की मूरतें, अमिट रेखाएँ, कुछ शब्द कुछ रेखाएँ✅

(D) अतीत के चलचित्र, कुछ शब्द कुछ रेखाएँ, अमिट रेखाएँ, माटी को मूरतें

10. निम्नलिखित रेखाचित्रों और रचनाकारों को सुमेलित कीजिए:

सूची- Iसूची- II
(a) पदम पराग(i) बनारसी दास चतुर्वेदी
(b) बोलती प्रतिमा(ii) देवेंद्र सत्यार्थी
(c) माटी की मूरतें(iii) पद्म सिंह शर्मा
(d) रेखाएँ बोल उठीं(iv) श्री राम शर्मा
 (v) रामवृक्ष बेनीपुरी

कोड:

      (a)    (b)    (c)    (d)

(A)    (v)    (i)    (iv)   (ii)

(B)    (iii)   (iv)   (v)    (ii) ✅

(C)   (i)    (v)    (iii)   (iv)

(D)   (iv)   (iii)   (v)    (i)

11. ‘इस समय तो भारतीय पुरुष जैसे अपने मनोरंजन के लिए रंग-बिरंगे पक्षी पाल लेता है, उपयोग के लिए गाय और घोड़ा पाल लेता है, उसी प्रकार वह एक स्त्री को पालता है तथा पालित पशु-पक्षियों के समान ही वह उसके शरीर और मन पर अधिकार समझता है।’

-उपर्युक्त कथन किसका है?

(A) महादेवी वर्मा ✅

(B) प्रभा खेतान

(C) अनामिका

(D) मैत्रेयी पुष्पा


[1] साहित्य-शास्त्र परिचय- राधाबल्लभ त्रिपाठी, पृष्ठ- 27

[2] साहित्य-शास्त्र परिचय- प्रेमस्वरूप गुप्त, पृष्ठ- 102

[3] हिंदी साहित्य ज्ञानकोश- भाग 6, पृष्ठ- 3239

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