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हिंदी ब्लॉग: सीमाएँ और समस्याएं | Hindi Blogs

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अब हिंदी केवल सम्प्रेषण की भाषा तक सीमित नहीं है। ज्ञान-विज्ञान के दूसरे क्षेत्रों तक उसका प्रचार-प्रसार हुआ है। लेकिन यह सब एक सीमा...
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अकाल और उसके बाद कविता की व्याख्या और समीक्षा | नागार्जुन

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नागार्जुन प्रगतिशील काव्यधारा के कवि हैं। नयी कविता के समांतर चलने वाली जो काव्यधारा है, उसके कवि हैं। इनके यहाँ सबसे ज्यादा वैविध्य और...
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सरस्वती सम्मान सूची | saraswati samman list (1991-2020)

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सरस्वती सम्मान की स्‍थापना वर्ष 1991 ई. में के.के. बिडला फाउण्‍डेशन द्वारा की गई थी। इसमें भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी...
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वर्ण विचार: स्वर और व्यंजन | varnamala: swar aur vyanjan

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वर्ण विचार व्याकरण का वह भाग है जिसमें वर्णों के आकार, भेद, उच्चारण तथा उनके मेल से शब्द बनाने के नियमों का निरूपण होता...
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संधि की परिभाषा, भेद और उदहारण | sandhi in hindi

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संधि की परिभाषा ‘संधि’ संस्कृत भाषा का शब्द है, जिसका शाब्दिक अर्थ है- ‘जोड़’ या ‘मेल’। दो निकटवर्ती वर्गों के परस्पर मेल से होने वाले...
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रंगों का पर्व होली और हिंदी कविता | holi 2021

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होली वसंत ऋतु में मनाया जाने वाला भारतीय लोगों का महत्वपूर्ण त्यौहार है। रंगो की वजह से इसका लोकहर्षक रूप दिखाई देता है। यदि...
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कवि कर्तव्य निबंध- महावीर प्रसाद द्विवेदी | kavi kartavya

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कवि-कर्तव्य से हमारा अभिप्राय हिंदी के कवियों के कर्तव्य से है। समय और समाज की रुचि के अनुसार सब बातों का विचार करके हम...
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ताई कहानी- विश्वम्भर नाथ शर्मा ‘कौशिक’ | taai kahani

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“ताऊजी, हमें लेलगाड़ी (रेलगाड़ी) ला दोगे?” कहता हुआ एक पंचवर्षीय बालक बाबू रामजीदास की ओर दौड़ा। बाबू साहब ने दोंनो बाँहें फैलाकर कहा- “हाँ बेटा,ला...
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कानों में कंगना कहानी- राजा राधिकारमण प्रसाद सिंह

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1. “किरन! तुम्हारे कानों में क्या है?” उसके कानों से चंचल लट को हटाकर कहा- “कँगना।” “अरे! कानों में कँगना?” सचमुच दो कंगन कानों को घेरकर बैठे...
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कफ़न कहानी- प्रेमचंद | kafan kahani premchand

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झोपड़े के द्वार पर बाप और बेटा दोनों एक बुझे हुए अलाव के सामने चुपचाप बैठे हुए हैं और अन्दर बेटे की जवान बीबी...