द्विरुक्ति शब्द की परिभाषा और प्रकार

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द्विरुक्ति शब्द

दोस्तों आप ने पढ़ा होगा कि अक्षरों की द्विरुक्ति से पुलिंग शब्द बनते हैं; जैसे- मामा, नाना, पापा, चाचा, दादा, बाबा आदि। एक व्यंजन और एक स्वर वाले अक्षरों की पुनरावृत्ति से संबंध या रिश्ता बतानेवाले अनेक शब्द बने हैं। परंतु कुछ भाषाओं में केवल एक ध्वनि की ही आवृत्ति नहीं होती, अपितु कोई पूरा शब्द ही दो या अधिक बार प्रयुक्त होता है। द्विरुक्ति को द्विरुक्त भी कहा जाता है।

द्विरुक्ति की परिभाषा

शब्दकोश में द्विरुक्ति का अर्थ है- दुबारा कही हुई बात या दो बार कही हुई बात। अर्थात् द्विरुक्त का आशय है दुहराना। एक ही उक्ति को दो बार उच्चरित करना अथवा लिखना द्विरुक्त या द्विरुक्ति कहलाता है। इस प्रकार जब एक ही शब्द की उक्ति या प्रयोग दो या उससे अधिक बार किया जाता है तो उसे द्विरुक्त शब्द कहते हैं। प्राय: इन शब्दों के बीच में योजक (-) चिन्ह रहता है।

हिंदी भाषा में द्विरुक्ति की रचना सार्थक शब्दों से होती है। इन्हीं सार्थक शब्दों की आवृत्ति से विभिन्न अर्थद्योतक हेतु द्विरुक्त शब्द का प्रयोग किया जाता है; जैसे- कदम-कदम, रोते-रोते, आते-आते आदि।

(द्विरुक्त शब्दों को प्रथम शब्द के पश्चात् 2 लिखकर सूचित करना अशुद्ध है; जैसे- धीरे 2, कभी 2 आदि।)

पुनरुक्त और द्विरुक्ति शब्दों में अंतर

पुनरुक्त शब्द में द्विरुक्ति की स्थिति बन सकती है। परंतु यह जरुरी नहीं है कि एक ही शब्द की दो बार आवृत्ति हो, भिन्न शब्द भी आ सकते हैं। वहीं द्विरुक्ति में एक ही शब्द की आवृत्ति होती है, भिन्न शब्द नहीं आ सकते। इस प्रकार द्विरुक्ति शब्द पुनरुक्त का एक भेद है।

द्विरुक्ति के प्रकार

द्विरुक्ति निम्नलिखित प्रकार की होती हैं-

1. संज्ञा: पल-पल, क्षण-क्षण, कौड़ी-कौड़ी, गाँव-गाँव, घर-घर, घड़ी-घड़ी, द्वार-द्वार, डगर-डगर, नगरी-नगरी, पानी-पानी, पैसा-पैसा, बूँद-बूँद आदि।

2. सर्वनाम: सर्वनामों की द्विरुक्ति संज्ञाओं के समान होती है; जैसे-अपना-अपना, कौन-कौन, क्या-क्या, कितना-कितना, किन-किन, किस-किस, क्या-क्या, कुछ-कुछ आदि।

3. विशेषण: साफ-साफ, बढ़िया-बढ़िया, एक-एक, गोल-गोल, छोटे-छोटे, पूरा-पूरा, बड़ा-बड़ा, बड़े-बड़े, लाल-लाल, नीले-नीले आदि।

4. क्रिया: आते-आते, जाते-जाते, कहते-कहते, खाते-खाते, सोते-सोते, रोते-रोते, रहते-रहते, चलते-चलते, देखते-देखते, लड़ते-लड़ते, खेलते-खेलते, हारते-हारते, हँसते-हँसते, दौड़ते-दौड़ते, लेटे-लेटे, होते-होते आदि।

5. किया विशेषण: कभी-कभी, नीचे-नीचे, ऊपर-ऊपर, जब-जब, तब-तब, जहाँ-जहाँ, जल्दी-जल्दी, जैसे-जैसे, धीरे-धीरे, पास-पास, मंद-मंद आदि।

6. विस्मयादि बोधक: विस्मयादि बोधक अव्ययों की द्विरूक्ति मनोविकारों का उत्कर्ष अथवा आवेग सूचित करने के लिए होती हैं; जैसे- अरे-अरे!, हा-हा!, हाय-हाय!, हरे-हरे!, छि:-छि:!, राम-राम!, वाह-वाह! आदि।

कोई-कोई विस्मयादि बोधक तीन बार प्रयुक्त होते हैं; जैसे- जय-जय-जय गिरिराज किशोरी

7. विभक्ति युक्त शब्दों की द्विरूक्ति: ऊपर ही ऊपर, क्या का क्या, गाँव का गाँव, घर का घर, खेत का खेत, चारों के चारों, झुंड के झुंड, देश के देश, पास ही पास, बोलते ही बोलते, सुंदर से सुंदर, अमीर से अमीर, गरीब से गरीब आदि।

अतिशयता के अर्थ में कभी-कभी शब्दों की द्विरूक्ति के साथ-साथ उनके बीच में ही का आगमन होता है; जैसे- मन ही मन, बातों ही बातों, आगे ही आगे, साथ ही साथ, कला ही कला, दूध ही दूध आदि।

इनके आलावा एक प्रकार की द्विरुक्त और होती है जिसमें पूरे के पूरे वाक्य अथवा वाक्यांश दुहराए जाते हैं; जैसे- वह गिर कर नहीं उठा, नहीं उठा।

द्विरुक्ति के वाक्य प्रयोग

द्विरुक्ति शब्दों का प्रयोग कई अर्थों में होता है; जैसे- समग्रता, संबंध, भेद, आभाव आदि दर्शाने के लिए-

  • तीन-तीन घंटे पर यह दवाई लीजिए।
  • इस शहर में ऊँची-ऊँची इमारतें हैं।
  • मैं कल सुबह होते ही एक-एक से निपट लूँगा।
  • लड़कों को बीस-बीस और लड़कियों को पचास-पचास रूपए दे देना।
  • वह भागा-भागा मेरे पास आया।
  • बाजार में नित्य नए-नए फैशन दिखाई पड़ते हैं।
  • मीठी-मीठी बातें करना कोई तुमसे सीखे।
  • तुम कहाँ-कहाँ गए?
  • आप मेरे लिए क्या-क्या लायेंगे?
  • करीब-करीब सारा काम निपट गया है, कुछ-कुछ बाकी है।
  • हम घूमते-घूमते नदी के किनारे पहुँच गए।
  • अपना-अपना नाम बताइए।
  • धीरे-धीरे सब ठीक हो जाएगा।
  • इस कक्षा में एक से एक होशियार लड़के हैं।
  • मैं पढ़-पढ़ कर मर गया; पर समझ कुछ न पाया।

FAQ:

Q. एक ही शब्द दो बार आए तो उसे क्या कहते हैं?

Ans. जब एक ही शब्द दो बार आए तो उसे द्विरुक्ति शब्द कहते हैं।

Q. संज्ञा की द्विरुक्त हो तो उसके बीच कौन-सा चिन्ह रहता है?

Ans. संज्ञा की द्विरुक्ति हो तो उसके बीच योजक (-) चिन्ह रहता है।

Q. ‘पास ही पास’ शब्द में किस प्रकार की द्विरुक्ति हुई है?

Ans. ‘पास ही पास’ शब्द में विभक्ति की द्विरुक्त हुई है।

Q. द्विरुक्त के द्वारा किस प्रकार के शब्दों का निर्माण होता है?

Ans. द्विरुक्ति के द्वारा ‘यौगिक शब्दों का निर्माण होता है।