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रीतिमुक्त काव्यधारा के कवि और उनकी रचनाएँ

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रीतिमुक्त कवि इस वर्ग में वे कवि आते हैं जो ‘रीति' के बन्धन से पूर्णतः मुक्त हैं अर्थात इन्होने काव्यांग निरूपण करने वाले ग्रन्थों लक्षण ग्रन्थों...
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रीतिसिद्ध काव्यधारा के कवि और उनकी रचनाएँ

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रीतिसिद्ध कवि जिन कवियों ने लक्षण और उदाहरण शैली पर काव्य सृजन तो नहीं किया परंतु रचना करते समय उनका झुकाव लक्षण ग्रंथों पर अवश्य...
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यूजीसी केयर सूची क्या है। What is UGC Care List?

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यूजीसी द्वारा अकादमिक अनुसंधान की कम गुणवत्ता और शिक्षा संस्थानों में फैकल्टी के प्रेरण को प्रभावित करने की शिकायतें मिलने के बाद नई सूची...
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UGC-CARE द्वारा स्वीकृत हिंदी पत्रिकाओं की सूची

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यूजीसी केयर सूची  यूजीसी द्वारा अकादमिक अनुसंधान की कम गुणवत्ता और शिक्षा संस्थानों में फैकल्टी के प्रेरण को प्रभावित करने की शिकायतें मिलने के बाद...
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विशेषण, विशेष्य और प्रविशेषण | visheshan

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विशेषण की परिभाषा: जिस शब्द से संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता प्रगट हो उसे विशेषण (visheshan) कहते हैं। विशेषण ऐसा विकारी शब्द होता है, जो सर्वथा संज्ञा या सर्वनाम...
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पीयर-रिव्यू जर्नल | peer reviewed journal

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पीयर रिव्यू क्या है? peer reviewed journal पर आने से पहले हम जन लेते हैं की peer review किसे कहते हैं। पीयर रिव्यू (सहकर्मी समीक्षा)...
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रीतिकालीन प्रबंध एवं मुक्तक काव्य तथा अलंकार, छंद, रस एवं काव्यांग निरूपक ग्रंथ

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यहाँ पर रीतिकालीन मुक्तक काव्य, प्रबंध काव्य, अलंकार निरूपक ग्रंथ, छंद निरूपक ग्रंथ, रस निरुपक ग्रंथ तथा काव्यांग निरूपक ग्रंथ का विवरण प्रस्तुत किया...
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हिन्दी आचार्यों एवं समीक्षकों की रस विषयक दृष्टि

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हिन्दी आचार्यों की रस विषयक दृष्टि हिन्दी के रीतिकालीन आचार्यों की रस-दृष्टि संस्कृत आचार्यों द्वारा निर्दिष्ट रस-सिद्धान्त पर ही आधारित है। वे अभिनव गुप्त, मम्मट, विश्वनाथ आदि...
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साधारणीकरण सिद्धान्त | saadhaaraneekaran sidhant

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साधारणीकरण की अवधारणा  भट्ट नायक ने सर्वप्रथम ‘साधारणीकरण’ की अवधारणा प्रस्तुत की। इसीलिए उन्हें साधारणीकरण का प्रवर्तक माना जाता है। उनके अनुसार विभाव, अनुभाव और स्थायीभाव सभी...
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मूल रस | सुखात्मक और दुखात्मक रस | विरोधी रस

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रसों की प्रधानता भरत मुनि ने ‘नाट्यशास्त्र’ में सर्वप्रथम रसों की प्रधानता-अप्रधानता पर विचार किया। उनकी दृष्टि में 4 मुख्य रस और 4 व्युत्पन्न रस...

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छायावादी युग के कवि और उनकी रचनाएं | Chhayavadi kavi

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छायावाद की कालावधि 1920 या 1918 से 1936 ई. तक मानी जाती है। वहीं इलाचंद्र जोशी, शिवनाथ और प्रभाकर माचवे ने छायावाद का आरंभ लगभग 1912-14...
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रीतिकालीन काव्य की प्रमुख प्रवृतियाँ | reetikal

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रीतिकालीन काव्य की रचना सामंती परिवेश और छत्रछाया में हुई है इसलिए इसमें वे सारी विशेषताएँ पाई जाती हैं जो किसी भी सामंती और...
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संप्रेषण की अवधारणा और महत्त्व | concept and importance of communication

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संप्रेषण की अवधारणा मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और उसे अपने विचार और भावनाओं को अभिव्यक्त करने के लिए संप्रेषण पर निर्भय रहना पड़ता है।...
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शब्द शक्ति की परिभाषा और प्रकार | shabd shkti

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शब्द शक्ति क्या है? शब्द या शब्द समूह में जो अर्थ छिपा होता है, उसे प्रकाशित करने वाली शक्ति का नाम शब्द शक्ति (shabd shakti)...
ज्ञानपीठ पुरस्कार सूची

Gyanpeeth Award list | ज्ञानपीठ पुरस्कार सूची

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ज्ञानपीठ पुरस्कार  gyanpeeth award भारतीय ज्ञानपीठ न्यास द्वारा भारतीय साहित्य के लिए दिया जाने वाला सर्वोच्च पुरस्कार है। भारत का कोई भी नागरिक जो आठवीं...