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राजा निरबंसिया कहानी की समीक्षा एवं सारांश | कमलेश्वर

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राजा निरबंसिया कहानी और कमलेश्वर का परिचय कमलेश्वर नयी कहानी आंदोलन के स्थापकों में रहे, जिसे नयी कहानी त्रयी कहा जाता है। कमलेश्वर के अलावा राजेंद्र यादव...
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गीत-फरोश कविता की व्याख्या और प्रमुख तथ्य

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गीत-फरोश: भवानीप्रसाद मिश्र भवानी प्रसाद मिश्र नई कविता के दौर के कवि हैं। दूसरे सप्तक (1951 ई.) में शामिल भवानी एक गांधीवादी कवि माने जाते हैं। ‘गीत फरोश’ कविता...
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महामारी और अकाल पर आधारित हिंदी साहित्य की प्रमुख रचनाएँ

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कोरोना के बहाने तमाम साहित्यकारों और विद्वानों का ध्यान महामारी और अकाल की तरफ गया है। यह चर्चा-परिचर्चा का प्रमुख विषय बन गया है।...
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हिंदी के प्रचार-प्रसार में राजनीतिक संस्थाओं की भूमिका

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उन्नीसवीं शताब्दी में हुए धार्मिक व सामाजिक आंदोलन के परिणाम स्वरूप शिक्षित भारतीयों के मध्य राजनीतिक चेतना का उदय हुआ। चूँकि उन्नीसवीं शताब्दी में...
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हिंदी भाषा का भौगोलिक या क्षेत्र-विस्तार | kshetr vistar

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हिंदी भाषा के क्षेत्र या भौगोलिक विस्तार पर बात करने से पहले दो-तीन बातों पर विचार कर लेना उपयुक्त होगा। जैसे की आपलोग जानते हैं की...
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कोश की परिभाषा और प्रकार | शब्दकोश

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इस पोस्ट में कोश किसे कहते हैं, कोश की परिभाषा क्या है, कोश निर्माण की प्रक्रिया क्या है, कोश के कितने प्रकार हैं, एकभाषिक कोश-...
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दिल्‍ली दरबार दर्पण निबंध- भारतेंदु हरिश्चंद्र | dilli darbar darpan

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दिल्ली दरबार दर्पण के रचनाकार भारतेंदु हरिश्चंद हैं। भारतेंदु ने दिल्‍ली दरबार दर्पण निबंध को वर्णात्मक शैली में लिखा है। यहाँ पर भारतेंदु का...
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हिंदी के प्रचार-प्रसार में साहित्यिक संस्थाओं की भूमिका

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भारतेंदु युग में हिंदी साहित्य निर्माण का कार्य प्रचुर मात्रा में हुआ, खासकर हिंदी गद्य साहित्य में। हिंदी को मजबूत धरातल प्रदान करने में भारतेंदु और भारतेंदु...
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हिंदी के प्रचार-प्रसार में धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं की भूमिका

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अंग्रेजों की सत्ता स्थापित होने के बाद राष्ट्रीयता की एक अखिल भारतीय संकल्पना उभर कर आती है। भाषा का मुद्दा प्रमुख हो उठता है।...
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पहाड़ी हिंदी की प्रमुख बोलियाँ और विशेषताएँ | pahadi hindi

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खश (कुछ नये मतों के अनुसार शौरसेनी) अपभ्रंश से पहाड़ी भाषाएँ निकली हैं। इनकी लिपि देवनागरी है। हिमालय के तराई (निचले) भागों में बोली...

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छायावादी युग के कवि और उनकी रचनाएं | Chhayavadi kavi

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छायावाद की कालावधि 1920 या 1918 से 1936 ई. तक मानी जाती है। वहीं इलाचंद्र जोशी, शिवनाथ और प्रभाकर माचवे ने छायावाद का आरंभ लगभग 1912-14...
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रीतिकालीन काव्य की प्रमुख प्रवृतियाँ | reetikal

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रीतिकालीन काव्य की रचना सामंती परिवेश और छत्रछाया में हुई है इसलिए इसमें वे सारी विशेषताएँ पाई जाती हैं जो किसी भी सामंती और...
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संप्रेषण की अवधारणा और महत्त्व | concept and importance of communication

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संप्रेषण की अवधारणा मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और उसे अपने विचार और भावनाओं को अभिव्यक्त करने के लिए संप्रेषण पर निर्भय रहना पड़ता है।...
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शब्द शक्ति की परिभाषा और प्रकार | shabd shkti

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शब्द शक्ति क्या है? शब्द या शब्द समूह में जो अर्थ छिपा होता है, उसे प्रकाशित करने वाली शक्ति का नाम शब्द शक्ति (shabd shakti)...
ज्ञानपीठ पुरस्कार सूची

Gyanpeeth Award list | ज्ञानपीठ पुरस्कार सूची

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ज्ञानपीठ पुरस्कार  gyanpeeth award भारतीय ज्ञानपीठ न्यास द्वारा भारतीय साहित्य के लिए दिया जाने वाला सर्वोच्च पुरस्कार है। भारत का कोई भी नागरिक जो आठवीं...