उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC), प्रयागराज की Assistant Professor, Government Degree College Examination के लिए हिंदी विषय का अद्यतन पाठ्यक्रम यहाँ व्यवस्थित रूप में दिया गया है। यह सेलबस उत्तर प्रदेश के राजकीय डिग्री कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए है।
इस पोस्ट में UPPSC GDC Assistant Professor Hindi Syllabus, सामान्य अध्ययन का पाठ्यक्रम, प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा का पैटर्न तथा हिंदी के तीनों खंड दिए गए हैं। आयोग की PDF में हिंदी का पाठ बहुत सघन रूप में है; यहाँ विषयवस्तु को बदले बिना वर्तनी, विराम-चिह्न और शीर्षकों को सुव्यवस्थित किया गया है, ताकि अभ्यर्थी पाठ्यक्रम को आसानी से पढ़ और समझ सकें।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| आयोग | उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC), प्रयागराज |
| परीक्षा | Assistant Professor, Government Degree College Examination |
| पद | असिस्टेंट प्रोफेसर, राजकीय डिग्री कॉलेज |
| विषय | हिंदी |
| चयन प्रक्रिया | प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य लिखित परीक्षा और साक्षात्कार |
UPPSC GDC Assistant Professor परीक्षा पैटर्न
प्रारंभिक परीक्षा
| विवरण | जानकारी |
| प्रश्न-पत्र का प्रकार | वस्तुनिष्ठ |
| प्रश्नों की संख्या | 120 |
| प्रश्नों का विभाजन | सामान्य अध्ययन के 30 प्रश्न और हिंदी विषय के 90 प्रश्न |
| कुल अंक | 150 |
| समय | 2 घंटे |
| ऋणात्मक अंकन | प्रत्येक गलत उत्तर पर उस प्रश्न के निर्धारित अंक का एक-तिहाई (0.33) काटा जाएगा |
प्रारंभिक परीक्षा स्क्रीनिंग परीक्षा है। इसमें सफल अभ्यर्थी ही मुख्य लिखित परीक्षा में सम्मिलित होते हैं।
मुख्य लिखित परीक्षा
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| प्रश्न-पत्र का प्रकार | वर्णनात्मक |
| प्रश्न-पत्रों की संख्या | 1 |
| कुल प्रश्न | 20 |
| कुल अंक | 200 |
| समय | 3 घंटे |
- खंड ‘अ’- लघुउत्तरीय प्रश्न: 10 प्रश्न; प्रत्येक उत्तर की सीमा 125 शब्द; प्रत्येक प्रश्न 8 अंक। कुल 80 अंक।
- खंड ‘ब’- दीर्घउत्तरीय प्रश्न: 10 प्रश्न; प्रत्येक उत्तर की सीमा 200 शब्द; प्रत्येक प्रश्न 12 अंक। कुल 120 अंक।
साक्षात्कार
साक्षात्कार के लिए 25 अंक निर्धारित हैं। अंतिम श्रेष्ठता मुख्य लिखित परीक्षा और साक्षात्कार में प्राप्त अंकों के योग के आधार पर तय होती है।
सामान्य अध्ययन का पाठ्यक्रम
प्रारंभिक परीक्षा में सामान्य अध्ययन के 30 प्रश्न पूछे जाते हैं। पाठ्यक्रम के प्रमुख क्षेत्र हैं:
- सामान्य विज्ञान
- राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय महत्त्व की समसामयिक घटनाएँ
- भारत का इतिहास- भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन सहित
- भारतीय राजव्यवस्था एवं अर्थव्यवस्था
- भारत एवं विश्व का भूगोल
- मानसिक योग्यता एवं सांख्यिकीय आँकड़ों का विश्लेषण
इन विषयों के संबंध में उत्तर प्रदेश के विशेष संदर्भ सहित सामान्य जानकारी अपेक्षित है।
UPPSC GDC Assistant Professor Hindi Syllabus
खंड–1: हिंदी साहित्य का इतिहास
साहित्येतिहास और इतिहास-लेखन
- साहित्य का इतिहास दर्शन
- हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन की परम्परा और विकास
- हिंदी साहित्य के प्रमुख इतिहास-ग्रन्थ और उनकी विशेषताएँ
- हिंदी साहित्य का इतिहास- काल-विभाजन एवं नामकरण
आदिकाल (वीरगाथाकाल)
- आदिकालीन साहित्य की सामाजिक-सांस्कृतिक एवं धार्मिक पृष्ठभूमि
- आदिकाल के विविध नामकरण
- आदिकाल की प्रवृत्तियाँ/ विशेषताएँ
- आदिकालीन हिन्दी का धार्मिक साहित्य- सिद्ध साहित्य, नाथ साहित्य, जैन साहित्य, लौकिक साहित्य, रासोकाव्य
- आदिकाल के प्रमुख कवि और उनकी रचनाएँ
भक्तिकाल (पूर्व मध्यकाल)
- भक्ति-आंदोलन की पृष्ठभूमि
- भक्ति-आंदोलन के उदय के सामाजिक
- सांस्कृतिक एवं राजनीतिक कारण
- भक्तिकाल का प्रमुख संप्रदाय और उनका वैचारिक आधार
- भक्तिकाल की सामान्य प्रवृत्तियाँ/विशेषताएँ
- भक्तिकाल की विविध धाराएँ एवं उनकी प्रवृत्तियाँ-
- निर्गुणधारा (ज्ञानाश्रयी शाखा एवं प्रेमाश्रयी शाखा)
- सगुणधारा (कृष्णभक्ति शाखा एवं रामभक्ति शाखा)
- भक्तिकाल के प्रमुख कवि और उनकी रचनाएँ
रीतिकाल (उत्तर मध्यकाल)
- रीतिकाल की सामाजिक-सांस्कृतिक एवं राजनीतिक पृष्ठभूमि
- रीतिकाल के विविध नामकरण
- रीतिकाल की अन्तर्धाराएँ- रीतिबद्धधारा, रीतिसिद्धधारा, रीतिमुक्तधारा
- रीतिकाल की प्रवृत्तियाँ
- रीतिकालीन कवियों का आचार्यत्व, मौलिकता एवं महत्त्व
- रीतिकाल के प्रमुख कवि एवं उनकी रचनाएँ
आधुनिक काल
(अ) हिंदी का पद्य-साहित्य
- आधुनिककाल की सामाजिक-सांस्कृतिक, आर्थिक एवं राजनीतिक पृष्ठभूमि
- आधुनिककाल के विविध सोपान- भारतेन्दुयुग, द्विवेदीयुग, छायावाद, प्रगतिवाद, प्रयोगवाद, नयीकविता, समकालीन कविता
- भारतेन्दु युग: भारतेन्दु और हिंदी नवजागरण; भारतेन्दु युग की प्रवृत्तियाँ; प्रमुख कवि और उनकी रचनाएँ
- द्विवेदी युग: नामकरण; महावीर प्रसाद द्विवेदी और उनका युग; हिंदी नवजागरण और ‘सरस्वती’; द्विवेदीयुगीन काव्य की प्रवृत्तियाँ; प्रमुख कवि और उनकी रचनाएँ; हिंदी की राष्ट्रीय काव्यधारा और उसके प्रमुख कवि एवं काव्य
- छायावाद: सामाजिक-सांस्कृतिक तथा दार्शनिक पृष्ठभूमि; आरंभ; विभिन्न मत एवं नामकरण; परिवेश; प्रवृत्तियाँ एवं विशेषताएँ; प्रमुख कवि और उनकी रचनाएँ
- प्रगतिवाद: अवधारणा; प्रगतिवादी काव्य की प्रवृत्तियाँ एवं विशेषताएँ; प्रमुख कवि और उनकी रचनाएँ
- हालावाद: हरिवंश राय ‘बच्चन’ एवं हालावाद
- प्रयोगवाद और नई कविता: प्रवृत्तियाँ; प्रमुख कवि और उनकी रचनाएँ
- प्रपद्यवाद: नकेनवाद
- समकालीन कविता: प्रवृत्तियाँ; प्रमुख कवि और उनकी रचनाएँ
(ब) हिंदी का गद्य-साहित्य
- हिंदी गद्य का उद्भव और विकास- भारतेन्दु-पूर्व हिंदी गद्य से लेकर अद्यावधि तक
- हिंदी गद्य की विधाएँ- उपन्यास, कहानी, निबंध, नाटक, एकांकी और आलोचना साहित्य का उद्भव एवं विकास
- हिंदी की अन्य एवं नव्यतर गद्य-विधाएँ- रेखाचित्र, संस्मरण, जीवनी (परकथा), आत्मकथा, रिपोर्ताज, यात्रा-साहित्य (यात्रावृत्तांत), पत्र-साहित्य, गद्यगीत, साक्षात्कार (इंटरव्यू), डायरी और व्यंग्य आदि का उद्भव एवं विकास
- हिंदी गद्य की विविध विधाओं के प्रमुख रचनाकार और उनकी रचनाएँ
- हिंदी का प्रवासी साहित्य- अवधारणा, प्रमुख साहित्यकार और उनकी रचनाएँ
- अस्मितामूलक विमर्श- अस्मिता की अवधारणा और सिद्धांत; दलित-विमर्श; स्त्री-विमर्श एवं समकालीन स्त्री-लेखन; आदिवासी-विमर्श (आदिवासी साहित्य); किन्नर/थर्ड जेंडर विमर्श एवं साहित्य
(स) हिंदी पत्रकारिता
- पत्रकारिता का अर्थ, उद्देश्य और महत्ता
- पत्रकारिता के विविध रूप
- हिंदी पत्रकारिता का उद्भव और विकास- भारतेन्दुयुगीन, द्विवेदीयुगीन, छायावादयुगीन और समकालीन पत्रकारिता
- हिंदी की साहित्यिक पत्र-पत्रिकाएँ
- हिंदी पत्रकारिता- दशा, दिशा और संभावना
- प्रिंट मीडिया- समाचार, संपादकीय, रिपोर्ट, आलेख, फीचर-लेखन और साक्षात्कार
- श्रव्य मीडिया- रेडियो
- दृश्य एवं श्रव्य मीडिया- दूरदर्शन
- विज्ञापन-लेखन और संगोष्ठी-संचालन
हिंदी का लोकसाहित्य
- लोकसाहित्य का सामान्य परिचय- परिभाषा, क्षेत्र, महत्त्व एवं वर्गीकरण
- लोकसाहित्य में लोकसंस्कृति का चित्रण
- लोकसाहित्य की विविध विधाएँ- लोकगीत, लोककथा, लोकनाट्य, लोकनृत्य और लोकसंगीत
- लोक का प्रकीर्ण साहित्य- लोकोक्तियाँ, मुहावरे और पहेलियाँ
- लोकसाहित्य के संरक्षण के प्रयास
Hindi Sarang पर संबंधित अध्ययन सामग्री
- हिंदी साहित्य का इतिहास-लेखन और उसकी पद्धतियाँ ↗
- प्रमुख वाद एवं आंदोलन ↗
- हिंदी नाटक और नाटककार ↗
- हिंदी पत्र-साहित्य ↗
- हिंदी यात्रा-वृत्तांत ↗
- हिंदी आत्मकथाओं की सूची ↗
खंड–2: काव्यशास्त्र
(अ) भारतीय काव्यशास्त्र
- काव्य-लक्षण, काव्य-हेतु, काव्य-प्रयोजन और काव्य-भेद
- भरतमुनि का रससूत्र और उसके व्याख्याकार
- प्रमुख संप्रदाय और सिद्धांत- रस, अलंकार, रीति, वक्रोक्ति, ध्वनि और औचित्य।
- रस-निष्पत्ति और साधारणीकरण
- काव्य-गुण, काव्य-दोष और शब्द-शक्तियाँ
- प्रमुख काव्यशास्त्रीय आचार्य एवं उनके ग्रंथ
रस, छंद तथा अलंकार: लक्षण एवं उदाहरण
- छंद: दोहा, सोरठा, चौपाई, छप्पय, रोला, बरवै, हरिगीतिका, इंद्रवज्रा, उपेंद्रवज्रा, वंशस्थ, वसंततिलका, कवित्त, सवैया और कुंडलिया
- शब्दालंकार: अनुप्रास, यमक, श्लेष और वक्रोक्ति
- अर्थालंकार: उपमा, रूपक, उत्प्रेक्षा, अतिशयोक्ति, अनन्वय, अन्योक्ति, समासोक्ति, प्रतीप, व्यतिरेक, संदेह, भ्रांतिमान, विभावना, परिसंख्या, मीलित, उन्मीलित, असंगति, दृष्टांत, अपह्नुति, अर्थान्तरन्यास और काव्यलिंग
(ब) पाश्चात्य काव्यशास्त्र
- प्लेटो का काव्य-सिद्धांत
- अरस्तू का काव्य-सिद्धांत- अनुकरण सिद्धांत, त्रासदी की अवधारणा और विरेचन सिद्धांत
- लोंजाइनस का उदात्त सिद्धांत
- टी.एस. इलियट का निर्वैयक्तिकता सिद्धांत
- आई.ए. रिचर्ड्स का मूल्य सिद्धांत और संप्रेषण सिद्धांत
- क्रोचे का अभिव्यंजनावाद
- वर्ड्सवर्थ का काव्यभाषा सिद्धांत
- कॉलरिज की कल्पना और फैंटेसी संबंधी अवधारणा
(स) हिंदी एवं पाश्चात्य आलोचना के पारिभाषिक शब्द और कतिपय अवधारणाएँ
- काव्यभाषा, बिंब, प्रतीक, मिथक, कल्पना, फैंटेसी, कविसमय और काव्यरूढ़ि
- उत्तर-आधुनिकतावाद, मार्क्सवाद, मनोविश्लेषणवाद, अस्तित्ववाद, यथार्थवाद, आदर्शवाद, आधुनिकतावाद, संरचनावाद, शास्त्रीयतावाद एवं स्वच्छंदतावाद
- हिंदी आलोचना के प्रकार- सैद्धांतिक आलोचना, स्वच्छंदतावादी आलोचना, मनोविश्लेषणवादी आलोचना, मार्क्सवादी आलोचना, भाषा-वैज्ञानिक आलोचना एवं शैली-वैज्ञानिक आलोचना
- हिंदी के प्रमुख आलोचक एवं उनकी प्रमुख आलोचनात्मक स्थापनाएँ- आचार्य रामचंद्र शुक्ल, आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी, डॉ. नगेन्द्र, आचार्य नंददुलारे वाजपेयी, डॉ. रामविलास शर्मा, डॉ. नामवर सिंह और बाबू श्यामसुंदर दास
Hindi Sarang पर संबंधित अध्ययन सामग्री
- काव्यशास्त्र के प्रमुख आचार्य और ग्रंथ ↗
- रस की परिभाषा, भेद और उदाहरण ↗
- अलंकार सिद्धांत और उसके प्रमुख आचार्य ↗
- पाश्चात्य काव्यशास्त्र के प्रमुख सिद्धांत और वाद ↗
खंड-3: हिंदी भाषा और उसका विकास
हिंदी भाषा की उत्पत्ति, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और विस्तार
- हिंदी भाषा की उत्पत्ति और विकास- ‘हिंदी’ शब्द की व्युत्पत्ति और हिंदी का नामकरण
- हिंदी भाषा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:
- प्राचीन भारतीय आर्यभाषाएँ- वैदिक एवं लौकिक संस्कृत
- मध्यकालीन भारतीय आर्यभाषाएँ- पालि; प्राकृत- शौरसेनी, अर्धमागधी एवं मागधी; अपभ्रंश
- अपभ्रंश, अवहट्ट और पुरानी हिंदी का संबंध
- आधुनिक भारतीय आर्यभाषाएँ और उनका वर्गीकरण
- हिंदी का भौगोलिक विस्तार एवं हिंदी क्षेत्र
हिंदी की उपभाषाएँ और बोलियाँ
- हिंदी की उपभाषाओं का वर्गीकरण और क्षेत्र- पश्चिमी हिंदी, पूर्वी हिंदी, राजस्थानी हिंदी, पहाड़ी हिंदी और बिहारी हिंदी
- हिंदी की बोलियाँ- खड़ी बोली, ब्रज और अवधी की व्याकरणिक विशेषताएँ
- हिंदी की क्षेत्रीय बोलियों का विकास
- काव्यभाषा के रूप में अवधी तथा ब्रजभाषा का उद्भव और विकास
- साहित्यिक हिंदी के रूप में खड़ी बोली का उद्भव और विकास
- उत्तर प्रदेश की बोलियाँ
हिंदी भाषा-प्रयोग के विविध रूप
- बोली, मानक भाषा, राजभाषा, राष्ट्रभाषा, संपर्क भाषा और संचार भाषा
- हिंदी की संवैधानिक स्थिति- राजभाषा आयोग, राजभाषा अधिनियम, प्रयोजनमूलक हिंदी, कार्यालयी हिंदी और मानक हिंदी आदि
- राष्ट्रभाषा के रूप में हिंदी की स्थिति; राजभाषा का तात्पर्य एवं महत्त्व; राष्ट्रभाषा हिंदी की समस्याएँ; दशा, दिशा एवं संभावना
हिंदी-विस्तारीकरण के वैयक्तिक एवं संस्थागत प्रयास
- स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्ट्रभाषा के रूप में हिंदी का विकास
- हिंदी-प्रसार के आंदोलन तथा प्रमुख व्यक्तियों एवं संस्थाओं का योगदान
- हिंदी से संबंधित सरकारी संस्थाएँ एवं विभाग- केंद्रीय हिंदी संस्थान, केंद्रीय हिंदी निदेशालय, हिंदी संस्थान लखनऊ, हिन्दुस्तानी एकेडमी, नागरी प्रचारिणी सभा, हिंदी साहित्य सम्मेलन तथा विभिन्न मंत्रालयों की हिंदी सलाहकार समितियाँ
- सम्मान एवं पुरस्कार
- हिंदी की पत्र-पत्रिकाएँ तथा लघु पत्रिकाओं का योगदान
- हिंदी के जनसंचार-माध्यम
- हिंदी पोर्टल एवं वेबपटल
हिंदी का भाषिक स्वरूप
- हिंदी-ध्वनियाँ: हिंदी वर्णमाला/वर्ण-विचार तथा हिंदी ध्वनियों के वर्गीकरण का आधार
- हिंदी-व्याकरण: संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया, क्रियाविशेषण, लिंग, वचन, काल, अव्यय और कारक-व्यवस्था
- शब्द-रचना: हिंदी शब्द-संपदा और उसके मूल स्रोत- तत्सम, तद्भव, देशज और विदेशी शब्द; रचना के अनुसार रूढ़, यौगिक एवं योगरूढ़ शब्द; उपसर्ग और प्रत्यय; संधि एवं समास; शब्द-भेद; पर्यायवाची, विलोम, एकार्थी, अनेकार्थी, अनेक शब्दों के लिए एक शब्द तथा समोच्चरितप्राय भिन्नार्थक शब्द
- हिंदी वाक्य-रचना: अर्थ एवं रचना की दृष्टि से वाक्य का वर्गीकरण; वर्तनी तथा वाक्यगत अशुद्धियाँ और उनका संशोधन
- मुहावरे एवं लोकोक्तियाँ
- कंप्यूटर और हिंदी
- हिंदी विराम-चिह्न
- पत्र-लेखन: अर्धशासकीय एवं शासकीय पत्र, कार्यालय- आदेश, अधिसूचना, परिपत्र, अनुस्मारक और कार्यालय-ज्ञाप
- कार्यालयी हिंदी की पारिभाषिक शब्दावली
- पारिभाषिक शब्द: तात्पर्य एवं लक्षण, पारिभाषिक शब्दावली-निर्माण के सिद्धांत तथा निर्माण-प्रक्रिया
- अपठित गद्यांश और प्रश्नोत्तर: गद्यांश से संबंधित प्रश्न, रेखांकित अंशों की व्याख्या, शीर्षक और संक्षेपण।
- अर्थबोध (Comprehension)
- देवनागरी लिपि: नामकरण, उद्भव और विकास, विशेषताएँ, वैज्ञानिकता एवं मानकीकरण, दोष, समस्याएँ/सीमाएँ तथा सुधार के उपाय
- हिंदी अनुवाद: अवधारणा, परिभाषा, स्वरूप एवं महत्त्व; अनुवादक के गुण, दायित्व एवं अपेक्षाएँ; साहित्यिक, प्रशासनिक, विधि, बैंकिंग, ज्ञान-विज्ञान एवं तकनीकी अनुवाद; अनुवाद एक सांस्कृतिक सेतु के रूप में
Hindi Sarang पर संबंधित अध्ययन सामग्री
- हिंदी भाषा का उद्भव और विकास ↗
- हिंदी भाषा का क्षेत्र-विस्तार ↗
- हिंदी की उपभाषाएँ एवं बोलियाँ ↗
- हिंदी भाषा-प्रयोग के विविध रूप ↗
- हिंदी के प्रचार-प्रसार में संस्थाओं की भूमिका ↗
- विराम-चिह्न: परिभाषा और प्रकार ↗
आधिकारिक सूचना और PDF: उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की आधिकारिक वेबसाइट ↗









