इस ब्लॉग में हम आचार्य रामचंद्र शुक्ल के ‘हिंदी साहित्य का इतिहास’ से आधुनिक गद्य साहित्य पर आधारित 50 महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs) और दिए गए हैं। ये सभी quiz हिंदी गद्य का द्वितीय उत्थान पर आधारित हैं जो PGT, TGT, DSSSB, LT Grade और Assistant Professor जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक होंगे। यहाँ दिए गए प्रश्न न केवल परीक्षा दृष्टि से उपयोगी हैं, बल्कि हिंदी साहित्य की गहराई को समझने में भी मदद करेंगे।
आइए, हिंदी गद्य का द्वितीय उत्थान के वस्तुनिष्ठ प्रश्न को Quiz के माध्यम से सरल और रोचक ढंग से जानें-
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[question] 1. रामचंद्र शुक्ल के अनुसार हिंदी गद्य साहित्य के ‘द्वितीय उत्थान’ का प्रारंभ कब से माना जा सकता है? [/question]
[answer] संवत् 1950
[explanation] शुक्लजी के अनुसार द्वितीय उत्थान का आरंभ संवत् 1950 से माना जा सकता है, जिसमें शिक्षित समाज को नए गद्य साहित्य का परिचय हो गया था। [/explanation]
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[wrong] संवत् 1900 [/wrong]
[wrong] संवत् 1925 [/wrong]
[wrong] संवत् 1975 [/wrong]
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[question] 2. द्वितीय उत्थान के भीतर ‘व्याकरण की शुद्धता और भाषा की सफाई’ के प्रवर्तक कौन थे? [/question]
[wrong] बालमुकुंद गुप्त [/wrong]
[answer] महावीर प्रसाद द्विवेदी
[explanation] शुक्ल जी स्पष्ट कहते हैं कि व्याकरण की शुद्धता और भाषा की सफाई के प्रवर्तक महावीर प्रसाद द्विवेदी जी ही थे। ‘सरस्वती’ के संपादक के रूप में उन्होंने लेखकों को बहुत सावधान किया। [/explanation]
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[wrong] किशोरीलाल गोस्वामी [/wrong]
[wrong] रामचंद्र शुक्ल [/wrong]
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[question] 3. ‘विभक्ति विचार’ नामक पुस्तक लिखकर किसने हिंदी की विभक्तियों को मिलाकर लिखने की सलाह दी थी? [/question]
[wrong] महावीर प्रसाद द्विवेदी [/wrong]
[wrong] माधव प्रसाद मिश्र [/wrong]
[wrong] जगन्नाथ प्रसाद चतुर्वेदी [/wrong]
[answer] पं. गोविन्द नारायण मिश्र
[explanation] इस आंदोलन के नायक पं. गोविन्द नारायण मिश्र थे, जिन्होंने ‘विभक्ति विचार’ द्वारा हिंदी विभक्तियों को शुद्ध विभक्तियाँ बताकर मिलाकर लिखने की सलाह दी थी। [/explanation]
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[question] 4. ‘चंद्रकला भानुकुमार’ नाटक के रचयिता कौन हैं, जिसे शुक्ल जी ने ‘बहुत बड़े डीलडौल’ का नाटक कहा है? [/question]
[wrong] बाबू रामकृष्ण वर्मा [/wrong]
[answer] राय देवीप्रसाद ‘पूर्ण’
[explanation] राय देवीप्रसाद ‘पूर्ण’ ने यह नाटक लिखा था, पर भाषणों की कृत्रिमता और वस्तुवैचित्र्य के अभाव के कारण यह उतना प्रसिद्ध न हो सका। [/explanation]
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[wrong] राधाकृष्ण दास [/wrong]
[wrong] माधव शुक्ल [/wrong]
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[question] 5. शुक्ल जी ने ‘साहित्य की दृष्टि से’ किसे हिंदी का ‘पहला उपन्यासकार’ कहना चाहिए माना है? [/question]
[wrong] देवकीनंदन खत्री [/wrong]
[wrong] लज्जाराम मेहता [/wrong]
[wrong] गोपालराम गहमरी [/wrong]
[answer] किशोरीलाल गोस्वामी
[explanation] शुक्ल जी के अनुसार, किशोरीलाल गोस्वामी जी ने साहित्य की दृष्टि से ‘उपन्यास’ क्षेत्र को अपनाया और 65 छोटे-बड़े उपन्यास लिखे, इसलिए वे पहले उपन्यासकार माने गए। [/explanation]
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[question] 6. ‘चंद्रकांता’ उपन्यास के संदर्भ में शुक्ल जी का कौन-सा कथन सही है? [/question]
[answer] इसे पढ़ने के लिए बहुत से उर्दूजीवी लोगों ने हिंदी सीखी।
[explanation] बाबू देवकीनंदन खत्री का स्मरण इसलिए बना रहेगा क्योंकि उन्होंने जितने पाठक उत्पन्न किए उतने और किसी ने नहीं; ‘चंद्रकांता’ पढ़ने के लिए बहुत से उर्दूजीवी लोगों ने हिंदी सीखी। [/explanation]
[/answer]
[wrong] यह एक गंभीर चरित्र प्रधान उपन्यास है। [/wrong]
[wrong] इसने हिंदी के साहित्यिक गौरव को बहुत बढ़ाया। [/wrong]
[wrong] यह उच्चकोटि की मौलिक रचना है। [/wrong]
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[question] 7. ‘ग्यारह वर्ष का समय’ कहानी के लेखक कौन हैं? [/question]
[wrong] किशोरीलाल गोस्वामी [/wrong]
[wrong] बंगमहिला [/wrong]
[wrong] मास्टर भगवानदास [/wrong]
[answer] रामचंद्र शुक्ल
[explanation] ‘सरस्वती’ में प्रकाशित मौलिक कहानियों की सूची में संवत् 1960 में रामचंद्र शुक्ल की ‘ग्यारह वर्ष का समय’ का उल्लेख है। [/explanation]
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[question] 8. ‘सरस्वती’ में प्रकाशित ‘दुलाईवाली’ कहानी की लेखिका कौन हैं? [/question]
[wrong] सुभद्रा कुमारी चौहान [/wrong]
[wrong] शिवानी [/wrong]
[answer] बंगमहिला
[explanation] बंगमहिला (बाबू रामप्रसन्न घोष की पुत्री) की कहानी ‘दुलाईवाली’ संवत् 1964 की ‘सरस्वती’ में प्रकाशित हुई थी। [/explanation]
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[wrong] महादेवी वर्मा [/wrong]
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[question] 9. ‘उसने कहा था’ (1915 ई.) कहानी के संदर्भ में शुक्ल जी ने क्या विशेषता बताई है? [/question]
[wrong] इसमें केवल ऐतिहासिक वीरता का वर्णन है। [/wrong]
[wrong] यह एक अनुवादित कहानी है। [/wrong]
[wrong] इसमें पात्रों के बोलने की अधिकता है। [/wrong]
[answer] इसमें यथार्थवाद के बीच प्रेम का स्वर्गीय स्वरूप झाँक रहा है।
[explanation] गुलेरी जी की इस कहानी में पक्के यथार्थवाद के बीच सुरुचि की मर्यादा में प्रेम का स्वर्गीय स्वरूप निपुणता के साथ संपुटित है। उसमें भीतर से प्रेम का एक स्वर्गीय स्वरूप झाँक रहा है। [/explanation]
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[question] 10. ‘यदि गद्य कवियों या लेखकों की कसौटी है तो निबंध गद्य की कसौटी है’ – यह प्रसिद्ध कथन किसका है? [/question]
[wrong] महावीर प्रसाद द्विवेदी [/wrong]
[wrong] बालकृष्ण भट्ट [/wrong]
[wrong] माधव प्रसाद मिश्र [/wrong]
[answer] रामचंद्र शुक्ल
[explanation] यह शुक्ल जी का अत्यंत प्रसिद्ध विचार है कि भाषा की पूर्ण शक्ति का विकास निबंधों में ही संभव होता है। [/explanation]
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[question] 11. ‘शिवशंभु का चिट्ठा’ के लेखक कौन हैं? [/question]
[answer] बालमुकुंद गुप्त
[explanation] बाबू बालमुकुंद गुप्त ने सामयिक और राजनीतिक परिस्थिति को लेकर ‘शिवशंभु का चिट्ठा’ नामक प्रसिद्ध मनोरंजक प्रबंध लिखे। [/explanation]
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[wrong] महावीर प्रसाद द्विवेदी [/wrong]
[wrong] गोविन्द नारायण मिश्र [/wrong]
[wrong] गुलाबराय [/wrong]
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[question] 12. ‘आचरण की सभ्यता’ निबंध के लेखक कौन हैं? [/question]
[answer] अध्यापक पूर्णसिंह
[explanation] अध्यापक पूर्णसिंह की लाक्षणिकता हिंदी गद्य में नई चीज थी। उनके तीन मुख्य निबंधों में ‘आचरण की सभ्यता’ शामिल है। [/explanation]
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[wrong] माधव प्रसाद मिश्र [/wrong]
[wrong] श्यामसुंदर दास [/wrong]
[wrong] चंद्रधर शर्मा गुलेरी [/wrong]
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[question] 13. ‘कछुआ धरम’ और ‘मारेसि मोहिं कुठाउँ’ किसके प्रसिद्ध निबंध हैं? [/question]
[wrong] बालमुकुंद गुप्त [/wrong]
[wrong] माधव प्रसाद मिश्र [/wrong]
[wrong] जगन्नाथ प्रसाद चतुर्वेदी [/wrong]
[answer] चंद्रधर शर्मा गुलेरी
[explanation] ‘कछुआ धरम’ और ‘मारेसि मोहिं कुठाउँ’ चंद्रधर शर्मा गुलेरी के प्रसिद्ध निबंध हैं। गुलेरी जी की अनूठी लेखनशैली इन निबंधों में दिखाई देती है, जहाँ गंभीर पांडित्य के साथ हास का मिश्रण है। [/explanation]
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[question] 14. हिंदी साहित्य में ‘तुलनात्मक समालोचना’ का प्रारंभ करने का श्रेय किसे दिया जाता है? [/question]
[wrong] रामचंद्र शुक्ल [/wrong]
[answer] पं. पद्मसिंह शर्मा
[explanation] हिंदी साहित्य में ‘तुलनात्मक समालोचना’ का प्रारंभ करने का श्रेय ‘पं. पद्मसिंह शर्मा’ को दिया जाता है। शर्मा जी ने बिहारी की ‘सतसई’ की तुलना ‘आर्यासप्तशती’ और ‘गाथासप्तशती’ से करके तारतमिक आलोचना का शौक पैदा किया। [/explanation]
[/answer]
[wrong] मिश्रबंधु [/wrong]
[wrong] महावीर प्रसाद द्विवेदी [/wrong]
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[question] 15. ‘हिंदी नवरत्न’ नामक समालोचनात्मक ग्रंथ के लेखक कौन हैं? [/question]
[wrong] कृष्णबिहारी मिश्र [/wrong]
[answer] मिश्रबंधु
[explanation] मिश्रबंधुओं ने ‘मिश्रबंधु विनोद’ से पहले ‘हिंदी नवरत्न’ निकाला, जिसमें ‘देव’ को हिंदी का सबसे बड़ा कवि बताया गया था। [/explanation]
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[wrong] श्यामसुंदर दास [/wrong]
[wrong] पद्मसिंह शर्मा [/wrong]
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[question] 16. महावीर प्रसाद द्विवेदी ने किस पत्रिका के माध्यम से व्याकरण और भाषा की अशुद्धियाँ दिखाकर लेखकों को सावधान किया? [/question]
[wrong] सुदर्शन [/wrong]
[wrong] इंदु [/wrong]
[wrong] आनंदकादंबिनी [/wrong]
[answer] सरस्वती
[explanation] द्विवेदी जी ने ‘सरस्वती’ के संपादक के रूप में व्याकरण की अशुद्धियाँ दिखाकर हिंदी गद्य का परिष्कार किया। [/explanation]
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[question] 17. शेक्सपियर के नाटकों ‘रोमियो-जूलियट’, ‘एज़ यू लाइक इट’ और ‘वेनिस का व्यापारी’ का अनुवाद किसने किया? [/question]
[wrong] रामकृष्ण वर्मा [/wrong]
[answer] पुरोहित गोपीनाथ
[explanation] संवत् 1950 के आसपास जयपुर के पुरोहित गोपीनाथ एम.ए. ने शेक्सपियर के इन तीन नाटकों का अनुवाद किया। [/explanation]
[/answer]
[wrong] लाला सीताराम [/wrong]
[wrong] मथुराप्रसाद चौधरी [/wrong]
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[question] 18. संस्कृत के ‘उत्तररामचरित’ और ‘मालती माधव’ का अत्यंत सरस अनुवाद किसने किया? [/question]
[answer] पं. सत्यनारायण ‘कविरत्न’
[explanation] पं. सत्यनारायण ‘कविरत्न’ जी के ये अनुवाद बहुत सरस हुए और पद्य ब्रजभाषा के सवैयों में हैं। [/explanation]
[/answer]
[wrong] लाला सीताराम [/wrong]
[wrong] ज्वालाप्रसाद मिश्र [/wrong]
[wrong] बालमुकुंद गुप्त [/wrong]
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[question] 19. ‘ठेठ हिंदी का ठाठ’ और ‘अधखिला फूल’ उपन्यासों के लेखक कौन हैं? [/question]
[wrong] किशोरीलाल गोस्वामी [/wrong]
[wrong] लज्जाराम मेहता [/wrong]
[wrong] ब्रजनंदन सहाय [/wrong]
[answer] अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’
[explanation] अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ जी ने ये उपन्यास ‘भाषा के नमूने’ की दृष्टि से लिखे थे, जिनमें हिंदी का ठेठपन दिखाया गया है। [/explanation]
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[question] 20. ‘इन्दुमती’ कहानी का प्रकाशन वर्ष क्या है? [/question]
[wrong] संवत् 1960 [/wrong]
[wrong] संवत् 1968 [/wrong]
[answer] संवत् 1957
[explanation] ‘सरस्वती’ के प्रथम वर्ष (संवत् 1957) में किशोरीलाल गोस्वामी की ‘इन्दुमती’ प्रकाशित हुई थी। [/explanation]
[/answer]
[wrong] संवत् 1950 [/wrong]
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[question] 21. शुक्ल जी के अनुसार, किस लेखक की शैली को ‘प्रलाप शैली’ कहा जा सकता है, जिसका चलन बंगला की देखा-देखी हुआ? [/question]
[wrong] वर्णनात्मक [/wrong]
[wrong] ऐतिहासिक [/wrong]
[answer] भावात्मक
[explanation] भावात्मक निबंधों की विक्षेप रीति के भीतर ‘प्रलाप शैली’ आती है, जिसका प्रभाव बंगला से हिंदी में आया। [/explanation]
[/answer]
[wrong] विचारात्मक [/wrong]
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[question] 22. ‘सुदर्शन’ नामक मासिक पत्र कहाँ से और किसके सहयोग से निकला था? [/question]
[wrong] प्रयाग, महावीर प्रसाद द्विवेदी [/wrong]
[wrong] जयपुर, गुलेरी जी [/wrong]
[wrong] कलकत्ता, बालमुकुंद गुप्त [/wrong]
[answer] काशी, देवकीनंदन खत्री
[explanation] संवत् 1957 में बाबू देवकीनंदन खत्री की सहायता से काशी से पं. माधवप्रसाद मिश्र ने ‘सुदर्शन’ निकलवाया था। [/explanation]
[/answer]
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[question] 23. ‘वेबर का भ्रम’ नामक लेख किसने लिखा था? [/question]
[answer] माधव प्रसाद मिश्र
[explanation] पाश्चात्य विद्वान वेबर द्वारा भारतीय ग्रंथों के संबंध में दिए गए मतों के विरोध में माधव प्रसाद मिश्र ने यह लेख लिखा था। [/explanation]
[/answer]
[wrong] श्यामसुंदर दास [/wrong]
[wrong] महावीर प्रसाद द्विवेदी [/wrong]
[wrong] चंद्रधर शर्मा गुलेरी [/wrong]
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[question] 24. ‘हिंदी कोविद-रत्नमाला’ के लेखक कौन हैं? [/question]
[answer] बाबू श्यामसुंदर दास
[explanation] बाबू श्यामसुंदर दास ने नए-पुराने लेखकों के संक्षिप्त जीवनवृत्त ‘हिंदी कोविद-रत्नमाला’ के दो भागों में संगृहीत किए हैं। [/explanation]
[/answer]
[wrong] महावीर प्रसाद द्विवेदी [/wrong]
[wrong] मिश्रबंधु [/wrong]
[wrong] रामचंद्र शुक्ल [/wrong]
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[question] 25. ‘आदर्श हिंदू’ उपन्यास के रचयिता कौन हैं? [/question]
[wrong] देवकीनंदन खत्री [/wrong]
[wrong] ब्रजनंदन सहाय [/wrong]
[wrong] किशोरीलाल गोस्वामी [/wrong]
[answer] पं. लज्जाराम मेहता
[explanation] पं. लज्जाराम मेहता जी ने हिंदू मर्यादा और पारिवारिक व्यवस्था दिखाने के लिए ‘आदर्श हिंदू’ (संवत् 1972) जैसे उपन्यास लिखे। [/explanation]
[/answer]
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[question] 26. समालोचना के ‘निर्णयात्मक’ और ‘व्याख्यात्मक’ भेदों का उल्लेख शुक्ल जी ने किस प्रकरण में किया है? [/question]
[wrong] नाटक [/wrong]
[wrong] निबंध [/wrong]
[answer] समालोचना
[explanation] शुक्ल जी ने समालोचना के दो प्रधान मार्गों- ‘निर्णयात्मक’ (Judicial) और ‘व्याख्यात्मक’ (Inductive) का विस्तृत वर्णन किया है। [/explanation]
[/answer]
[wrong] उपन्यास [/wrong]
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[question] 27. ‘विक्रमांकदेवचरित चर्चा’ और ‘नैषधचरित चर्चा’ समालोचनात्मक पुस्तकें किसने लिखी हैं? [/question]
[wrong] पद्मसिंह शर्मा [/wrong]
[wrong] मिश्रबंधु [/wrong]
[wrong] माधव प्रसाद मिश्र [/wrong]
[answer] महावीर प्रसाद द्विवेदी
[explanation] महावीर प्रसाद द्विवेदी जी ने संस्कृत कवियों की विशेषताओं से हिंदी पाठकों को परिचित कराने के लिए ये पुस्तकें लिखीं। [/explanation]
[/answer]
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[question] 28. ‘बिहारी और देव’ नामक पुस्तक लिखकर मिश्रबंधुओं के आक्षेपों का उत्तर किसने दिया? [/question]
[wrong] कृष्णबिहारी मिश्र [/wrong]
[wrong] पद्मसिंह शर्मा [/wrong]
[answer] लाला भगवानदीन
[explanation] लाला भगवानदीन ने ‘बिहारी और देव’ लिखकर मिश्रबंधुओं के भद्दे आक्षेपों का जवाब दिया। [/explanation]
[/answer]
[wrong] रामचंद्र शुक्ल [/wrong]
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[question] 29. ‘मजदूरी और प्रेम’ निबंध के लेखक कौन हैं? [/question]
[wrong] माधव प्रसाद मिश्र [/wrong]
[wrong] बाबू गुलाबराय [/wrong]
[wrong] श्यामसुंदर दास [/wrong]
[answer] अध्यापक पूर्णसिंह
[explanation] यह अध्यापक पूर्णसिंह का प्रसिद्ध भावात्मक निबंध है। [/explanation]
[/answer]
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[question] 30. ‘बेकन-विचार-रत्नावली’ किसका अनुवाद ग्रंथ है? [/question]
[wrong] बालमुकुंद गुप्त [/wrong]
[wrong] रामचंद्र शुक्ल [/wrong]
[answer] महावीर प्रसाद द्विवेदी
[explanation] लार्ड बेकन के निबंधों का अनुवाद महावीर प्रसाद द्विवेदी जी ने ‘बेकन-विचार-रत्नावली’ नाम से किया था। [/explanation]
[/answer]
[wrong] गंगाप्रसाद अग्निहोत्री [/wrong]
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[question] 31. शुक्ल जी के अनुसार ‘द्वितीय उत्थान’ में किस क्षेत्र में वैसी उन्नति नहीं हुई जैसी उपन्यासों में हुई? [/question]
[wrong] कहानी [/wrong]
[wrong] समालोचना [/wrong]
[answer] नाटक
[explanation] शुक्ल जी के अनुसार नाटक के क्षेत्र में वैसी उन्नति नहीं दिखाई पड़ी, मौलिक नाटकों का अभाव रहा। [/explanation]
[/answer]
[wrong] निबंध [/wrong]
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[question] 32. ‘कानों में कंगना’ कहानी के लेखक कौन हैं? [/question]
[wrong] जयशंकर प्रसाद [/wrong]
[wrong] विश्वंभरनाथ शर्मा ‘कौशिक’ [/wrong]
[wrong] प्रेमचंद [/wrong]
[answer] राजा राधिकारमण प्रसाद सिंह
[explanation] ‘कानों में कंगना’ (संवत् 1970) कहानी के लेखक राजा राधिकारमण प्रसाद सिंह हैं। यह एक अत्यंत भावुकतापूर्ण कहानी है जो ‘इन्दु’ पत्रिका में निकली थी। [/explanation]
[/answer]
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[question] 33. ‘रक्षाबंधन’ कहानी के लेखक कौन हैं? [/question]
[wrong] चंद्रधर शर्मा गुलेरी [/wrong]
[answer] विश्वंभरनाथ शर्मा ‘कौशिक’
[explanation] विश्वंभरनाथ शर्मा ‘कौशिक’ जी की पहली कहानी ‘रक्षाबंधन’ 1913 की ‘सरस्वती’ में छपी थी। [/explanation]
[/answer]
[wrong] ज्वालादत्त शर्मा [/wrong]
[wrong] चतुरसेन शास्त्री [/wrong]
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[question] 34. ‘अन्याय’ का विरोध करने के लिए ‘जूता लेकर या मुक्का तानकर खड़ा हो जाना’ मनु ने नहीं बताया – यह व्यंग्य किस लेखक का है? [/question]
[wrong] बालमुकुंद गुप्त [/wrong]
[answer] चंद्रधर शर्मा गुलेरी
[explanation] चंद्रधर शर्मा गुलेरी जी ने अपने निबंध ‘कछुआ धरम’ में मनुस्मृति की व्याख्या पर यह अनूठा हास्य प्रकट किया है। [/explanation]
[/answer]
[wrong] अध्यापक पूर्णसिंह [/wrong]
[wrong] महावीर प्रसाद द्विवेदी [/wrong]
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[question] 35. ‘मल्लिका देवी या बंग सरोजिनी’ उपन्यास की भाषा कैसी है? [/question]
[wrong] उर्दू-ए-मुअल्ला [/wrong]
[wrong] ठेठ हिंदी [/wrong]
[wrong] हिंदुस्तानी [/wrong]
[answer] संस्कृतप्राय समासबहुला
[explanation] किशोरीलाल गोस्वामी ने इस उपन्यास में संस्कृतप्राय समासबहुला भाषा का प्रयोग किया है। [/explanation]
[/answer]
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[question] 36. द्वितीय उत्थान के आरंभ में उच्च शिक्षा प्राप्त लोगों द्वारा हिंदी लेखन में न आने का क्या मुख्य बहाना बनाया जाता था? [/question]
[answer] मुझे तो हिंदी आती नहीं
[explanation] शुक्ल जी के अनुसार, उच्च शिक्षा प्राप्त लोग अक्सर यह कहकर मातृभाषा से उदासीन रहते थे कि उन्हें हिंदी नहीं आती, जिस पर उन्हें जवाब मिलता था कि काम शुरू करने से हिंदी आ जाएगी। [/explanation]
[/answer]
[wrong] समय का अभाव [/wrong]
[wrong] हिंदी में पाठकों की कमी [/wrong]
[wrong] अंग्रेजी साहित्य का प्रभाव [/wrong]
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[question] 37. किस भाषा के प्रभाव से हिंदी में ‘परिमार्जित और सुंदर संस्कृत पदविन्यास’ की परंपरा आई? [/question]
[answer] बंगभाषा
[explanation] शुक्ल जी स्वीकार करते हैं कि बंगभाषा (बंगला) के अभ्यास से प्रसंग के अनुरूप सुंदर संस्कृत शब्द मिले, जिससे हिंदी में परिमार्जित संस्कृत पदविन्यास की परंपरा आई। [/explanation]
[/answer]
[wrong] मराठी [/wrong]
[wrong] अंग्रेजी [/wrong]
[wrong] गुजराती [/wrong]
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[question] 38. ‘अंग्रेजी में विचार करने वाले’ लेखकों के बारे में शुक्ल जी ने क्या टिप्पणी की है? [/question]
[wrong] उनकी भाषा बहुत ही सरल थी। [/wrong]
[wrong] उन्होंने मुहावरों का बहुत प्रयोग किया। [/wrong]
[answer] वे हिंदी और संस्कृत शब्द भर लिखते थे, हिंदी भाषा नहीं।
[explanation] ‘अंग्रेजी में विचार करने वाले’ लेखकों के बारे में शुक्ल जी ने टिप्पणी की है कि ‘वे हिंदी और संस्कृत शब्द भर लिखते थे, हिंदी भाषा नहीं।’ शुक्ल जी के अनुसार, जो लेखक अंग्रेजी में सोचकर शब्दकोश की सहायता से अनुवाद करते थे, उनके वाक्यों का तात्पर्य केवल अंग्रेजी जानने वाले ही समझ सकते थे। [/explanation]
[/answer]
[wrong] वे बहुत मौलिक लिखते थे। [/wrong]
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[question] 39. ‘मैकबेथ’ का ‘साहसेंद्र साहस’ नाम से हिंदी अनुवाद किसने किया था? [/question]
[wrong] लाला सीताराम [/wrong]
[wrong] पुरोहित गोपीनाथ [/wrong]
[wrong] बाबू रामकृष्ण वर्मा [/wrong]
[answer] पं. मथुराप्रसाद चौधरी
[explanation] उपाध्याय बदरीनारायण चौधरी के छोटे भाई पं. मथुराप्रसाद चौधरी ने संवत् 1950 में शेक्सपियर के ‘मैकबेथ’ का बहुत अच्छा अनुवाद इस नाम से किया था। [/explanation]
[/answer]
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[question] 40. ‘नागानंद’, ‘मृच्छकटिक’ और ‘अभिज्ञान शाकुंतल’ जैसे संस्कृत नाटकों के अनुवाद के लिए शुक्ल जी ने किसका आदर के साथ स्मरण किया है? [/question]
[wrong] पं. सत्यनारायण ‘कविरत्न’ [/wrong]
[answer] राय बहादुर लाला सीताराम
[explanation] लाला सीताराम ने संवत् 1940 से ही संस्कृत काव्यों और नाटकों के सरल हिंदी अनुवाद शुरू कर दिए थे। [/explanation]
[/answer]
[wrong] पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र [/wrong]
[wrong] बाबू बालमुकुंद गुप्त [/wrong]
[/quiz]
[quiz]
[question] 41. ‘ठगवृत्तांतमाला’ और ‘पुलिस वृत्तांतमाला’ जैसे अनुवादित उपन्यासों के लेखक कौन हैं? [/question]
[answer] बाबू रामकृष्ण वर्मा
[explanation] बाबू रामकृष्ण वर्मा ने संवत् 1946-51 के बीच उर्दू और अंग्रेजी से इन कथाओं का अनुवाद किया था। [/explanation]
[/answer]
[wrong] गोपालराम गहमरी [/wrong]
[wrong] देवकीनंदन खत्री [/wrong]
[wrong] किशोरीलाल गोस्वामी [/wrong]
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[quiz]
[question] 42. किशोरीलाल गोस्वामी ने किस लेखक का जीवन चरित्र ‘सरस्वती’ के शुरुआती अंकों में लिखा था? [/question]
[wrong] भारतेंदु हरिश्चंद्र [/wrong]
[answer] राजा शिवप्रसाद ‘सितारे हिंद’
[explanation] गोस्वामी जी ने राजा शिवप्रसाद ‘सितारे हिंद’ का जीवन चरित्र ‘सरस्वती’ के भाग 1 के संख्या 2, 3 और 4 में प्रकाशित किया था। [/explanation]
[/answer]
[wrong] राजा लक्ष्मण सिंह [/wrong]
[wrong] बालकृष्ण भट्ट [/wrong]
[/quiz]
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[question] 43. ‘सरस्वती’ में प्रकाशित ‘गुलबहार’ कहानी के लेखक कौन हैं? [/question]
[wrong] मास्टर भगवानदास [/wrong]
[wrong] बंगमहिला [/wrong]
[answer] किशोरीलाल गोस्वामी
[explanation] संवत् 1959 की ‘सरस्वती’ में किशोरीलाल गोस्वामी जी की ‘गुलबहार’ कहानी प्रकाशित हुई थी। [/explanation]
[/answer]
[wrong] रामचंद्र शुक्ल [/wrong]
[/quiz]
[quiz]
[question] 44. महावीर प्रसाद द्विवेदी की गद्य शैली को शुक्ल जी ने किस प्रकार की शैली कहा है? [/question]
[answer] व्यास शैली
[explanation] द्विवेदी जी एक ही बात को कई वाक्यों में हेरफेर करके समझाते थे, जिसे शुक्ल जी ने ‘व्यास शैली’ कहा है, जो विपक्षी को कायल करने में उपयोगी थी। [/explanation]
[/answer]
[wrong] विक्षेप शैली [/wrong]
[wrong] प्रलाप शैली [/wrong]
[wrong] समास शैली [/wrong]
[/quiz]
[quiz]
[question] 45. ‘अनस्थिरता’ शब्द के प्रयोग को लेकर महावीर प्रसाद द्विवेदी की आलोचना ‘आत्माराम’ के नाम से किसने की थी? [/question]
[wrong] माधव प्रसाद मिश्र [/wrong]
[wrong] चंद्रधर शर्मा गुलेरी [/wrong]
[wrong] जगन्नाथ प्रसाद चतुर्वेदी [/wrong]
[answer] बालमुकुंद गुप्त
[explanation] बाबू बालमुकुंद गुप्त ने ‘आत्माराम’ छद्म नाम से द्विवेदी जी के ‘भाषा और व्याकरण’ लेख की चुहलबाजी के साथ आलोचना की थी। [/explanation]
[/answer]
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[question] 46. पं. गोविंदनारायण मिश्र की गद्य शैली पर किन संस्कृत कवियों का प्रभाव शुक्ल जी ने बताया है? [/question]
[wrong] भास और अश्वघोष [/wrong]
[answer] बाण और दंडी
[explanation] मिश्र जी की धारणा ‘गद्यकाव्य’ की थी और लिखते समय बाण और दंडी उनके ध्यान में रहा करते थे। [/explanation]
[/answer]
[wrong] कालिदास और माघ [/wrong]
[wrong] श्रीहर्ष और भवभूति [/wrong]
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[question] 47. ‘समालोचक’ पत्र के संपादक कौन थे, जिन्होंने एक अनूठी लेखन शैली का विकास किया? [/question]
[wrong] श्यामसुंदर दास [/wrong]
[wrong] महावीर प्रसाद द्विवेदी [/wrong]
[wrong] मिश्रबंधु [/wrong]
[answer] चंद्रधर शर्मा गुलेरी
[explanation] गुलेरी जी ने संवत् 1960 के आसपास ‘समालोचक’ (जयपुर) पत्र निकाला, जिसमें उनकी गंभीर और पांडित्यपूर्ण हास वाली शैली दिखाई दी। [/explanation]
[/answer]
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[question] 48. समालोचना की वह पद्धति क्या कहलाती है जिसमें कवि की अंतर्वृत्तियों का अध्ययन उसके स्वभाव और जीवनक्रम के आधार पर किया जाता है? [/question]
[answer] मनोवैज्ञानिक आलोचना
[explanation] शुक्ल जी के अनुसार, कवि के जीवनक्रम और स्वभाव के अध्ययन द्वारा उसकी अंतर्वृत्तियों का अनुसंधान ‘मनोवैज्ञानिक आलोचना’ कहलाता है। [/explanation]
[/answer]
[wrong] ऐतिहासिक समीक्षा [/wrong]
[wrong] निर्णयात्मक आलोचना [/wrong]
[wrong] व्याख्यात्मक आलोचना [/wrong]
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[question] 49. ‘हिंदी कालिदास की आलोचना’ नामक पुस्तक के लेखक कौन हैं, जिसे शुक्ल जी ने इस क्षेत्र की पहली पुस्तक माना है? [/question]
[wrong] बालमुकुंद गुप्त [/wrong]
[wrong] पद्मसिंह शर्मा [/wrong]
[answer] महावीर प्रसाद द्विवेदी
[explanation] द्विवेदी जी की यह पुस्तक लाला सीताराम के अनुवादों में भाषा और भाव संबंधी दोष दिखाने के लिए लिखी गई थी। [/explanation]
[/answer]
[wrong] लाला सीताराम [/wrong]
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[question] 50. ‘मतिराम ग्रंथावली’ की भूमिका में ‘तुलनात्मक समालोचना’ का अत्यधिक प्रयोग करने वाले विद्वान कौन हैं? [/question]
[wrong] पद्मसिंह शर्मा [/wrong]
[answer] कृष्णबिहारी मिश्र
[explanation] कृष्णबिहारी मिश्र ने ‘मतिराम ग्रंथावली’ की भूमिका का बड़ा हिस्सा तुलनात्मक आलोचना को ही समर्पित कर दिया था। [/explanation]
[/answer]
[wrong] मिश्रबंधु [/wrong]
[wrong] लाला भगवानदीन [/wrong]
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ये सभी प्रश्न आचार्य रामचंद्र शुक्ल के हिंदी साहित्य का इतिहास (हिंदी गद्य का द्वितीय उत्थान) पर आधारित हैं, जो परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। आशा है कि ये Quiz प्रश्न आपकी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक सिद्ध होंगे।








