यदि आप UGC NET Hindi, UPHESC Assistant Professor या अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, तो हिंदी साहित्य के विभिन्न वादों का गहन अध्ययन अत्यंत आवश्यक है। उत्तरआधुनिकता, मार्क्सवाद, मनोविश्लेषणवाद, अस्तित्ववाद, यथार्थवाद, आदर्शवाद, अतियथार्थवाद, मानववाद, प्रभाववाद, आधुनिकतावाद, संरचनावाद और रूपवाद जैसे सिद्धांत साहित्य की समझ को नई दृष्टि प्रदान करते हैं। उदाहरण के लिए, Modernism पारंपरिक रूपों से अलग होकर नई अभिव्यक्ति की खोज करता है, जबकि Structuralism साहित्य को संरचनाओं और संकेत-प्रणालियों के रूप में समझने पर बल देता है। इन्हीं महत्वपूर्ण वादों पर आधारित यह 130 MCQs quiz आपकी परीक्षा तैयारी को मजबूत बनाने के लिए तैयार किया गया है। यह quiz न केवल आपके ज्ञान का मूल्यांकन करेगा, बल्कि concepts को revise करने का भी एक प्रभावी माध्यम बनेगा।
1. आधुनिकतावाद (Modernism)
1. आधुनिकतावाद का उदय मुख्य रूप से किस शताब्दी के प्रारंभ में माना जाता है?
20वीं शताब्दी
आधुनिकतावाद 20वीं शताब्दी के शुरुआती दशकों में उभरा, जिसने पारंपरिक कला और साहित्य के रूपों को चुनौती दी।
17वीं शताब्दी
18वीं शताब्दी
19वीं शताब्दी
2. आधुनिकतावादी साहित्य की मुख्य विशेषता क्या है?
स्पष्ट और सरल कथानक
ईश्वरीय सत्ता में अटूट विश्वास
विखंडन, व्यक्तिवाद और प्रयोगधर्मिता
आधुनिकतावाद में जीवन की जटिलता को दिखाने के लिए टूटी हुई संरचनाओं और व्यक्तिगत अनुभवों पर जोर दिया जाता है।
परंपरा का पूर्ण समर्थन
3. ‘द वेस्ट लैंड’, जिसे आधुनिकतावाद का एक मील का पत्थर माना जाता है, के रचयिता कौन हैं?
जॉन कीट्स
पी.बी. शेली
टी.एस. एलियट
1922 में प्रकाशित टी.एस. एलियट की यह कविता आधुनिक समाज के खालीपन और आध्यात्मिक गिरावट को दर्शाती है।
विलियम वर्ड्सवर्थ
4. आधुनिकतावाद के विकास में किन ऐतिहासिक घटनाओं ने प्रमुख भूमिका निभाई?
फ्रांसीसी क्रांति
औद्योगिक क्रांति
पुनर्जागरण काल
प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध
विश्व युद्धों की विभीषिका ने पुराने मूल्यों को ध्वस्त कर दिया, जिससे मोहभंग और आधुनिकतावाद का जन्म हुआ।
5. ‘चेतना का प्रवाह’ तकनीक का प्रयोग किस साहित्यिक आंदोलन की देन है?
आधुनिकतावाद
इस तकनीक के माध्यम से पात्रों के मन में चल रहे विचारों के अविरल प्रवाह को चित्रित किया जाता है (जैसे वर्जीनिया वुल्फ के उपन्यासों में)।
छायावाद
प्रगतिवाद
रीतिकाल
6. हिंदी साहित्य में आधुनिकताबोध को प्रतिष्ठित करने का श्रेय किस आंदोलन को जाता है?
भक्तिकाल
प्रयोगवाद और नई कविता
अज्ञेय के संपादन में निकले ‘तार सप्तक’ से हिंदी कविता में आधुनिकतावादी प्रयोगों की शुरुआत मानी जाती है।
भारतेंदु युग
द्विवेदी युग
7. आधुनिकतावाद और आधुनिकता के बीच मुख्य अंतर क्या है?
दोनों एक ही हैं
आधुनिकता एक साहित्यिक शैली है
आधुनिकतावाद केवल तकनीक है
आधुनिकता एक सामाजिक-आर्थिक प्रक्रिया है, जबकि आधुनिकतावाद एक कलात्मक प्रतिक्रिया
आधुनिकता औद्योगिक विकास से जुड़ी है, जबकि आधुनिकतावाद उस विकास से उपजी मानसिक स्थिति की कलात्मक अभिव्यक्ति है।
8. निम्नलिखित में से कौन-सा सिद्धांत आधुनिकतावाद से गहराई से जुड़ा है?
अस्तित्ववाद
‘मानव अपनी नियति का स्वयं निर्माता है’ – यह अस्तित्ववादी विचार आधुनिकतावादी लेखन का आधार बना।
मार्क्सवाद
आदर्शवाद
सामंतवाद
9. आधुनिकतावाद के अनुसार ‘सत्य’ की प्रकृति कैसी है?
केवल धार्मिक ग्रंथों में निहित
पूर्णतः वस्तुनिष्ठ
व्यक्तिपरक और सापेक्ष
आधुनिकतावादी मानते हैं कि सत्य व्यक्ति की दृष्टि और अनुभव के अनुसार बदलता रहता है।
सार्वभौमिक और स्थिर
10. निम्नलिखित में से कौन आधुनिकतावादी विचारक/लेखक की श्रेणी में आते नहीं आता है?
जेम्स जॉयस
चार्ल्स डिकेंस
चार्ल्स डिकेंस 19वीं सदी के महान यथार्थवादी लेखक हैं। वहीं अन्य तीनों लेखक अपनी रचनाओं में पारंपरिक कथा-शिल्प को तोड़कर आधुनिक संवेदनाओं को व्यक्त करने के लिए जाने जाते हैं।
1. ‘उत्तरआधुनिकतावाद महा-आख्यानों के प्रति अनास्था है’ – यह प्रसिद्ध परिभाषा किसकी है?
ज्यां बॉद्रिलार
मिशेल फूको
जैक्स डेरिडा
ज्यां-फ्रांस्वा ल्योतार
ल्योतार ने अपनी पुस्तक ‘The Postmodern Condition’ (1979) में स्पष्ट किया कि उत्तरआधुनिकतावाद उन बड़े सिद्धांतों (जैसे मार्क्सवाद, ज्ञानोदय) को नकारता है जो पूरी दुनिया को एक ही नज़रिए से समझाने का दावा करते हैं।
2. उत्तरआधुनिकतावाद का मुख्य दार्शनिक आधार किसे माना जाता है?
धार्मिक कट्टरपंथ
साम्यवाद
विखंडनवाद
जैक्स डेरिडा का विखंडनवाद उत्तरआधुनिकता का मूल है, जो किसी भी पाठ के निश्चित अर्थ को चुनौती देता है और भाषा की अस्थिरता को दर्शाता है।
तर्कवाद और विज्ञान
3. प्रसिद्ध विचारक ज्यां बॉद्रिलार ने उत्तरआधुनिक युग की व्याख्या के लिए किस अवधारणा का प्रयोग किया?
सिमुलेशन और हाइपर-रियलिटी
बॉद्रिलार के अनुसार, आज के दौर में ‘प्रतीक’ और ‘मीडिया की छवियां’ असलियत से ज्यादा प्रभावी हो गई हैं, जिससे वास्तविकता और आभास का अंतर खत्म हो गया है।
वर्ग संघर्ष
चेतना का प्रवाह
कल्पित सत्य
4. फ्रेडरिक जेमसन ने उत्तरआधुनिकतावाद को किसका ‘सांस्कृतिक तर्क’ कहा है?
सामंतवाद का
औद्योगिक क्रांति का
उत्तर-पूंजीवाद का
जेमसन के अनुसार, उत्तरआधुनिकतावाद कोई केवल कलात्मक आंदोलन नहीं है, बल्कि यह देर से आने वाले पूंजीवाद की सांस्कृतिक अभिव्यक्ति है।
आदिम समाज का
5. उत्तरआधुनिकतावाद किस पर सबसे अधिक बल देता है?
पूर्ण सत्य की खोज पर
बहुलतावाद और स्थानीयता पर
यह विचारधारा मानती है कि कोई एक सार्वभौमिक सत्य नहीं होता, बल्कि कई छोटे-छोटे सत्य और स्थानीय संस्कृतियाँ होती हैं।
केंद्रवाद पर
लेखक की संप्रभुता पर
6. ‘लेखक की मृत्यु’ की घोषणा किस उत्तरआधुनिक विचारक ने की थी?
कार्ल मार्क्स
टी.एस. एलियट
रोलां बार्थ
बार्थ के अनुसार, रचना का अर्थ लेखक की मंशा से नहीं बल्कि पाठक के नजरिए से तय होता है, इसलिए लेखक की भूमिका समाप्त हो जाती है।
सिगमंड फ्रायड
7. उत्तरआधुनिक वास्तुकला और साहित्य में ‘पास्टिश’ का क्या अर्थ है?
केवल भविष्य की कल्पना
यथार्थवादी चित्रण
विभिन्न शैलियों का मिश्रण
पास्टिश में पुरानी शैलियों की नकल या मिश्रण किया जाता है, लेकिन इसमें अक्सर पैरोडी (व्यंग्य) जैसा उपहास नहीं होता।
ऐतिहासिक तथ्यों का खंडन
8. ज्ञान और शक्ति के आपसी संबंध का विश्लेषण करने वाला उत्तरआधुनिक विचारक कौन है?
मिशेल फूको
फूको ने तर्क दिया कि ‘सत्य’ और ‘ज्ञान’ स्वतंत्र नहीं हैं, बल्कि ये सत्ता (Power) द्वारा निर्मित किए जाते हैं।
ज्यां-पॉल सार्त्र
अल्बर्ट कामू
एडमंड हुसर्ल
9. आधुनिकता और उत्तरआधुनिकता के बीच मुख्य अंतर क्या है?
आधुनिकता विज्ञान विरोधी है
उत्तरआधुनिकता इतिहास को महत्व देती है
आधुनिकता अराजकता का समर्थन करती है
आधुनिकता ‘व्यवस्था’ और ‘सत्य’ की खोज करती है, जबकि उत्तरआधुनिकता इसे नकारती है
आधुनिकतावाद टूटे हुए संसार में एकता खोजने की कोशिश करता है, जबकि उत्तरआधुनिकतावाद उस बिखराव का उत्सव मनाता है।
10. निम्नलिखित में से कौन सी विशेषता उत्तरआधुनिकतावाद की नहीं है?
वस्तुनिष्ठ सत्य और निश्चित अर्थ का समर्थन
वस्तुनिष्ठ सत्य और एक निश्चित अर्थ की खोज करना आधुनिकतावाद और परंपरावाद का लक्षण है। उत्तर-आधुनिकतावादी मानते हैं कि कोई भी अर्थ अंतिम नहीं होता और सत्य हमेशा खंडित और व्यक्तिगत होता है।
विडंबना और व्यंग्य
अंतर्पाठनीयता
महा-आख्यानों का विरोध
3. मार्क्सवाद (Marxism)
1. ‘वैज्ञानिक समाजवाद’ का जनक किसे माना जाता है?
जे. एस. मिल
कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स
मार्क्स ने समाजवाद को काल्पनिक आधार से हटाकर आर्थिक और ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित किया, इसलिए इसे ‘वैज्ञानिक समाजवाद’ कहा जाता है।
प्लेटो
एडम स्मिथ
2. मार्क्सवाद के अनुसार, इतिहास की प्रेरक शक्ति क्या है?
भौतिक परिस्थितियों और वर्ग संघर्ष
मार्क्स का मानना था कि समाज का ढांचा आर्थिक उत्पादन की प्रणालियों से तय होता है, न कि विचारों से। इसे ‘ऐतिहासिक भौतिकवाद’ कहा जाता है।
महान व्यक्तियों के विचार
धार्मिक विश्वास
राष्ट्रीय गौरव
3. प्रसिद्ध नारा ‘दुनिया के मजदूरों, एक हो जाओ!’ – किस पुस्तक के अंत में दिया गया है?
द जर्मन आइडियोलॉजी
कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो
1848 में प्रकाशित इस घोषणापत्र में मार्क्स और एंगेल्स ने सर्वहारा वर्ग को क्रांति के लिए ललकारा था।
दास कैपिटल
होली फैमिली
4. मार्क्स ने ‘अतिरिक्त मूल्य का सिद्धांत’ किसलिए प्रतिपादित किया?
व्यापार को बढ़ावा देने के लिए
मुद्रास्फीति को समझने के लिए
कर प्रणाली के सुधार के लिए
पूंजीवाद में श्रमिकों के शोषण को उजागर करने के लिए
अतिरिक्त मूल्य वह लाभ है जो श्रमिक पैदा करता है लेकिन पूंजीपति उसे हड़प लेता है। यही शोषण का मुख्य आधार है।
5. मार्क्स के अनुसार ‘आधार’ और ‘अधिसंरचना’ में क्या संबंध है?
अधिसंरचना आधार को नियंत्रित करती है
आर्थिक ढांचा (आधार) ही समाज की कानूनी और राजनीतिक अधिसंरचना को निर्धारित करता है
अर्थव्यवस्था नींव है, जिस पर कला, धर्म, कानून और राजनीति की इमारत खड़ी होती है।
दोनों का एक-दूसरे से कोई संबंध नहीं है
धर्म और संस्कृति ही आधार हैं
6. ‘धर्म जनता के लिए अफीम है’ – यह प्रसिद्ध कथन किसका है?
स्टालिन
माओत्से तुंग
कार्ल मार्क्स
मार्क्स का मानना था कि धर्म लोगों को उनके वास्तविक आर्थिक दुखों से बेखबर रखता है और उन्हें भाग्य के भरोसे छोड़ देता है।
लेनिन
7. मार्क्सवाद में ‘सर्वहारा वर्ग’ का तात्पर्य क्या है?
जमींदार वर्ग
वह श्रमिक वर्ग जिसके पास उत्पादन के साधन नहीं हैं और जो अपनी श्रम-शक्ति बेचता है
पूंजीवादी व्यवस्था में समाज दो मुख्य वर्गों में बंटा होता है: बुर्जुआ (पूंजीपति) और सर्वहारा (श्रमिक)।
मध्यम वर्ग के व्यापारी
शासक वर्ग
8. मार्क्सवाद का अंतिम लक्ष्य क्या स्थापित करना है?
वर्गविहीन और राज्यविहीन समाज
मार्क्स की कल्पना के अनुसार, साम्यवाद के आने पर न कोई वर्ग रहेगा और न ही राज्य की आवश्यकता होगी।
एक मजबूत तानाशाही
कल्याणकारी राज्य
नियंत्रित पूंजीवाद
9. द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद में मार्क्स ने ‘द्वंद्व’ का विचार किससे ग्रहण किया था?
कांट से
हीगल से
हीगल ने द्वंद्ववाद को ‘विचारों’ पर लागू किया था, जबकि मार्क्स ने इसे उलट कर ‘भौतिक जगत’ पर लागू किया।
रूसो से
लॉक से
10. निम्नलिखित में से कौन सी कृति कार्ल मार्क्स की नहीं है?
दास कैपिटल
द पॉवर्टी ऑफ फिलॉसफी
क्रिटिक ऑफ द गोथा प्रोग्राम
द सोशल कॉन्ट्रैक्ट
‘द सोशल कॉन्ट्रैक्ट’ पुस्तक रूसो की है, बाकी तीनों मार्क्स की अत्यंत महत्वपूर्ण रचनाएं हैं।
4. मनोविश्लेषणवाद (Psychoanalysis)
1. मनोविश्लेषणवाद का संस्थापक और प्रवर्तक किसे माना जाता है?
सिगमंड फ्रायड
ऑस्ट्रियाई न्यूरोलॉजिस्ट सिगमंड फ्रायड ने 19वीं सदी के अंत में मानसिक रोगों के उपचार और मानवीय व्यवहार को समझने के लिए इस पद्धति का विकास किया।
अल्फ्रेड एडलर
कार्ल जुंग
एरिक एरिक्सन
2. फ्रायड के अनुसार व्यक्तित्व के तीन मुख्य घटक कौन से हैं?
मन, आत्मा और शरीर
सचेतन, अचेतन और अर्धचेतन
विचार, भावना और क्रिया
ईड, ईगो और सुपर-ईगो
ईड (मूल प्रवृत्तियाँ), ईगो (यथार्थपरक मन) और सुपर-ईगो (नैतिकता) मिलकर मनुष्य के व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं।
3. ‘स्वप्न विश्लेषण’ नामक प्रसिद्ध पुस्तक, जो मनोविश्लेषण की आधारशिला मानी जाती है, के लेखक कौन हैं?
अन्ना फ्रायड
सिगमंड फ्रायड
1900 में प्रकाशित इस पुस्तक में फ्रायड ने तर्क दिया कि सपने हमारे ‘अचेतन मन’ की दबी हुई इच्छाओं की पूर्ति का जरिया हैं।
जैक्स लेकन
मेलानी क्लेन
4. मनोविश्लेषणवाद में ‘लिबिडो’ शब्द का क्या अर्थ है?
मृत्यु की इच्छा
समाज सेवा की भावना
केवल शारीरिक भूख
जीवन शक्ति या काम-शक्ति
फ्रायड ने ‘लिबिडो’ को उस मूल ऊर्जा के रूप में परिभाषित किया जो मनुष्य की सभी मानसिक और शारीरिक गतिविधियों को संचालित करती है।
5. ‘ओडिपस कॉम्प्लेक्स’ और ‘इलेक्ट्रा कॉम्प्लेक्स’ की अवधारणा किससे संबंधित है?
अस्तित्ववाद
मार्क्सवाद
मनोविश्लेषणवाद
यह अवधारणा बच्चों के अपने माता-पिता के प्रति आकर्षण और प्रतिस्पर्धा की भावना को दर्शाती है, जिसे फ्रायड ने व्यक्तित्व विकास का एक चरण माना है।
व्यवहारवाद
6. निम्नलिखित में से कौन-सा मनोवैज्ञानिक ‘सामूहिक अचेतन’ की अवधारणा के लिए जाना जाता है?
सिगमंड फ्रायड
अल्फ्रेड एडलर
विलियम जेम्स
कार्ल गुस्ताव जुंग
फ्रायड के शिष्य जुंग ने तर्क दिया कि मनुष्य के पास एक ऐसा अचेतन हिस्सा भी है जो पूरी मानव जाति के साझा अनुभवों से बना है।
7. ‘अचेतन मन’ की तुलना फ्रायड ने किससे की है?
समुद्र में तैरते हुए हिमखंड से
फ्रायड के अनुसार, मन का केवल 10% हिस्सा ही चेतन (दिखाई देने वाला) है, जबकि 90% हिस्सा अचेतन (पानी के नीचे छुपा हिमखंड) है।
एक खुली किताब से
जलते हुए दीपक से
एक विशाल जंगल से
8. ‘हीनता ग्रंथि’ के विचार का प्रतिपादन किसने किया, जो मनोविश्लेषण की एक महत्वपूर्ण शाखा है?
कार्ल जुंग
अल्फ्रेड एडलर
एडलर ने व्यक्तिगत मनोविज्ञान की स्थापना की और बताया कि मनुष्य अपने जीवन में हीनता की भावना को दूर करने के लिए संघर्ष करता है।
एरिक फ्रॉम
करेन हॉर्नी
9. ‘चेतना का प्रवाह’ शब्दावली का प्रयोग सर्वप्रथम किसने किया था?
जेम्स जॉयस
सिगमंड फ्रायड
विलियम जेम्स
हालांकि यह तकनीक मनोविश्लेषणवादी उपन्यासों में बहुत प्रसिद्ध हुई, लेकिन ‘Principles of Psychology’ (1890) में इसका पहला प्रयोग विलियम जेम्स ने किया था।
वर्जीनिया वुल्फ
10. मनोविश्लेषणवाद के अनुसार मानवीय व्यवहार का मुख्य प्रेरक क्या है?
आर्थिक लाभ
सामाजिक प्रतिष्ठा
तार्किक सोच
अचेतन इच्छाएं और बचपन के अनुभव
यह सिद्धांत मानता है कि हमारे वर्तमान व्यवहार की जड़ें हमारे बचपन के अनुभवों और अचेतन मन में दबी इच्छाओं में होती हैं।
5. अस्तित्ववाद (Existentialism)
1. अस्तित्ववाद का मूल प्रवर्तक या ‘जनक’ किसे माना जाता है?
ज्यां पॉल सार्त्र
फ्रेडरिक नीत्शे
अल्बर्ट कामू
सॉरेन कीर्केगार्ड
19वीं शताब्दी के डेनिश दार्शनिक कीर्केगार्ड ने पहली बार व्यक्ति के अस्तित्व और ईश्वर के साथ उसके निजी संबंधों पर जोर दिया, जिससे अस्तित्ववाद की नींव पड़ी।
2. ‘अस्तित्व सार से पहले है’ – यह प्रसिद्ध सूत्र किस विचारक ने दिया?
मार्टिन हाइडेगर
ज्यां पॉल सार्त्र
सार्त्र के अनुसार, मनुष्य पहले पैदा होता है (अस्तित्व) और उसके बाद वह अपने कार्यों और निर्णयों से अपनी पहचान (सार) खुद बनाता है।
कार्ल जैस्पर्स
सिमोन द बोउआर
3. ‘ईश्वर की मृत्यु हो चुकी है’ का नारा किस अस्तित्ववादी विचारक ने दिया था?
सिगमंड फ्रायड
दांते
फ्रेडरिक नीत्शे
नीत्शे का तात्पर्य यह था कि आधुनिक युग में पारंपरिक धार्मिक विश्वास और नैतिक मूल्य अपनी शक्ति खो चुके हैं, और अब मनुष्य को अपने मूल्य स्वयं बनाने होंगे।
कार्ल मार्क्स
4. ‘असंगतिवाद’ या ‘निरर्थकतावाद’ की अवधारणा को स्पष्ट करने के लिए ‘द मिथ ऑफ सिसीफस’ किसने लिखा?
अल्बर्ट कामू
कामू के अनुसार, संसार का कोई तर्क नहीं है, फिर भी मनुष्य उसमें अर्थ खोजने का प्रयास करता है। सिसीफस का पत्थर ऊपर ले जाना और उसका बार-बार लुढ़कना इसी निरर्थक संघर्ष का प्रतीक है।
गेब्रियल मार्सेल
सैमुअल बेकेट
यूजीन आयनेस्को
5. ‘मनुष्य स्वतंत्र होने के लिए अभिशप्त है’ – इस कथन का क्या अर्थ है?
स्वतंत्रता एक उपहार है
समाज उसे स्वतंत्र नहीं होने देता
स्वतंत्रता जिम्मेदारी का भारी बोझ लाती है, जिससे मनुष्य बच नहीं सकता
सार्त्र का मानना था कि चूंकि मनुष्य का भाग्य पहले से तय नहीं है, इसलिए उसे हर चुनाव खुद करना पड़ता है और उसकी पूरी जिम्मेदारी भी खुद लेनी पड़ती है।
मनुष्य कैद में रहना चाहता है
6. अस्तित्ववाद की प्रमुख महिला विचारक और ‘द सेकंड सेक्स’ की लेखिका कौन हैं?
वर्जीनिया वुल्फ
टॉनी मॉरिसन
मैरी वोलस्टोनक्राफ्ट
सिमोन द बोउआर
सिमोन ने अस्तित्ववाद और नारीवाद को जोड़ते हुए तर्क दिया कि ‘स्त्री पैदा नहीं होती, बल्कि बना दी जाती है।’
7. अस्तित्ववाद के अनुसार मानव जीवन की मुख्य स्थिति क्या है?
अकेलापन, चिंता और मृत्युबोध
यह दर्शन मानता है कि मृत्यु का बोध और जीवन की शून्यता मनुष्य को उसके वास्तविक अस्तित्व के प्रति सचेत करती है।
अत्यधिक खुशी
सामाजिक सद्भाव
वैज्ञानिक उन्नति
8. निम्नलिखित में से कौन ‘ईसाई अस्तित्ववादी’ दार्शनिक माना जाता है?
सार्त्र
गेब्रियल मार्सेल
जहाँ सार्त्र नास्तिक अस्तित्ववादी थे, वहीं गेब्रियल मार्सेल और कीर्केगार्ड ने धर्म और आस्था के भीतर अस्तित्व की खोज की।
नीत्शे
कामू
9. ‘वेटिंग फॉर गोडो’ नाटक, जो अस्तित्ववादी चेतना का प्रतिनिधित्व करता है, किसके द्वारा लिखा गया है?
शेक्सपियर
टी.एस. एलियट
बर्नाड शॉ
सैमुअल बेकेट
यह नाटक ‘एब्सर्ड थिएटर’ का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो जीवन के इंतजार, व्यर्थता और अर्थहीनता को दर्शाता है।
10. अस्तित्ववाद निम्नलिखित में से किसका प्रबल विरोध करता है?
चुनाव की स्वतंत्रता का
व्यक्तिगत उत्तरदायित्व का
भीड़-तंत्र का
अस्तित्ववाद ‘भीड़’ को मनुष्य की मौलिकता का शत्रु मानता है। कीर्केगार्ड ने कहा था कि ‘भीड़ असत्य है’।
वैयक्तिकता का
6. यथार्थवाद (Realism)
1. साहित्य और कला में ‘यथार्थवाद’ का उदय मुख्य रूप से किस शताब्दी के मध्य में हुआ?
18वीं शताब्दी
19वीं शताब्दी
1850 के आसपास फ्रांस में रोमांटिकतावाद के विरोध में यथार्थवाद का उदय हुआ, जिसने कल्पना के बजाय ठोस वास्तविकता को चुना।
16वीं शताब्दी
17वीं शताब्दी
2. यथार्थवाद का मुख्य उद्देश्य क्या है?
कल्पना की दुनिया का चित्रण
ईश्वरीय महिमा का गान
केवल सुखद घटनाओं का वर्णन
जीवन का वस्तुनिष्ठ और यथातथ्य चित्रण
यथार्थवाद ‘जैसा है, वैसा ही’ दिखाने की कला है, जिसमें समाज की विसंगतियों और सामान्य जीवन को बिना किसी सजावट के पेश किया जाता है।
3. फ्रांसीसी साहित्य में यथार्थवाद का संस्थापक किसे माना जाता है?
गुस्ताव फ़्लोबेर
फ़्लोबेर का उपन्यास ‘मैडम बोवरी’ यथार्थवादी साहित्य का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण माना जाता है।
विक्टर ह्यूगो
ज्यां-पॉल सार्त्र
अल्बर्ट कामू
4. ‘आलोचनात्मक यथार्थवाद’ शब्दावली का प्रयोग सबसे पहले किसने किया?
फ्रेडरिक एंगेल्स
व्लादिमीर लेनिन
जॉर्ज लुकाच
लुकाच ने उन लेखकों के लिए इस शब्द का प्रयोग किया जो समाज की बुराइयों का चित्रण करते हुए उसकी आलोचनात्मक व्याख्या भी करते थे।
कार्ल मार्क्स
5. हिंदी साहित्य में ‘यथार्थवाद’ को प्रतिष्ठित करने वाले प्रमुख कथाकार कौन हैं?
महादेवी वर्मा
प्रेमचंद
प्रेमचंद ने ‘आदर्शोन्मुख यथार्थवाद’ से अपनी यात्रा शुरू की और ‘कफन’ व ‘गोदान’ तक आते-आते वे शुद्ध यथार्थवाद के शिखर पर पहुँचे।
जयशंकर प्रसाद
सुमित्रानंदन पंत
6. ‘समाजवादी यथार्थवाद’ का मुख्य आधार क्या है?
मार्क्सवादी विचारधारा और वर्ग संघर्ष का चित्रण
यह शैली सोवियत संघ में विकसित हुई, जिसका लक्ष्य कला के माध्यम से समाजवाद के आदर्शों का प्रचार और श्रमिक वर्ग के संघर्ष को दिखाना था।
व्यक्ति का आध्यात्मिक विकास
सामंतवाद का समर्थन
शुद्ध कला का प्रदर्शन
7. ‘यथार्थवाद में वस्तु का यथार्थ रूप ही प्रधान है, व्यक्ति का मन नहीं’—यह दृष्टिकोण किस पर आधारित है?
भावुकता पर
अलौकिक शक्तियों पर
प्रत्यक्ष जगत और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर
यथार्थवाद आँखों देखी दुनिया पर विश्वास करता है, न कि मन की काल्पनिक उड़ानों पर।
धार्मिक मान्यताओं पर
8. ‘जादुई यथार्थवाद’ की अवधारणा किस महाद्वीप के साहित्य से अधिक जुड़ी है?
यूरोप
एशिया
उत्तरी अमेरिका
लैटिन अमेरिका
गैब्रियल गार्सिया मार्खेज जैसे लेखकों ने यथार्थवादी परिवेश में जादुई तत्वों को पिरोकर इस नई शैली को लोकप्रिय बनाया।
9. ‘गोदान’ उपन्यास का यथार्थवाद किस श्रेणी में आता है?
केवल छायावादी यथार्थवाद
सुधारवादी यथार्थवाद
स्वप्निल यथार्थवाद
होरी की त्रासदी के माध्यम से कठोर सामाजिक यथार्थवाद
गोदान भारतीय ग्रामीण समाज और किसान के शोषण का नग्न यथार्थ प्रस्तुत करता है, जहाँ अंततः आदर्श की हार होती है।
10. निम्नलिखित में से कौन-सी यथार्थवाद की एक प्रमुख उप-शाखा नहीं है?
प्रकृतिवाद
जादुई यथार्थवाद
यथार्थवाद समय के साथ कई रूपों में विकसित हुआ- एमिल जोला ने प्रकृतिवाद दिया, तो प्रेमचंद ने सामाजिक यथार्थवाद। वहीं जादुई यथार्थवाद एक अलग शैली है जो यथार्थ और फंतासी का मिश्रण करती है। इसमें वास्तविक दुनिया के चित्रण के बीच अलौकिक या जादुई तत्वों को इस तरह पिरोया जाता है जैसे वे सामान्य हों।
मनोवैज्ञानिक यथार्थवाद
समाजवादी यथार्थवाद
7. आदर्शवाद (Idealism)
1. पाश्चात्य दर्शन में आदर्शवाद का व्यवस्थित जनक किसे माना जाता है?
प्लेटो
प्लेटो ने अपने ‘विचारों के सिद्धांत’ के माध्यम से बताया कि भौतिक वस्तुएं केवल परछाईं हैं, वास्तविक सत्य ‘विचार’ हैं।
अरस्तू
जॉन लॉक
थॉमस हॉब्स
2. आदर्शवाद के अनुसार इस ब्रह्मांड का अंतिम सत्य क्या है?
शरीर और इंद्रियां
आध्यात्मिक तत्व या विचार
जहाँ यथार्थवाद पदार्थ को सत्य मानता है, वहीं आदर्शवाद मानता है कि यह संसार मन या चेतना की अभिव्यक्ति है।
पदार्थ
परमाणु
3. ‘सत्यं शिवं सुंदरम्’ किस दार्शनिक विचारधारा के मुख्य लक्ष्य हैं?
अस्तित्ववाद
प्रकृतिवाद
आदर्शवाद
आदर्शवाद इन तीन शाश्वत मूल्यों की प्राप्ति को ही जीवन और शिक्षा का अंतिम उद्देश्य मानता है।
मार्क्सवाद
4. ‘वस्तुनिष्ठ आदर्शवाद’ का सिद्धांत किस दार्शनिक ने प्रस्तुत किया?
जी.डब्ल्यू.एफ. हीगल
हीगल ने तर्क दिया कि पूरा ब्रह्मांड एक ‘निरपेक्ष विचार’ की प्रगति का परिणाम है।
रेने डेकार्ट
बर्कले
इमैनुएल कांट
5. ‘मनुष्य की अंतर्निहित पूर्णता को अभिव्यक्त करना ही शिक्षा है’ – यह आदर्शवादी विचार किसका है?
रवींद्रनाथ टैगोर
महर्षि अरविंद
स्वामी विवेकानंद
विवेकानंद जी का यह कथन आदर्शवाद के उस पक्ष को दर्शाता है जो आत्मा की पूर्णता और आध्यात्मिक विकास पर जोर देता है।
महात्मा गांधी
6. आदर्शवाद के अनुसार ज्ञान प्राप्त करने की सबसे श्रेष्ठ विधि कौन सी है?
प्रयोगशाला प्रयोग
तर्क, चिंतन और अंतःप्रज्ञा
आदर्शवादी मानते हैं कि वास्तविक ज्ञान इंद्रियों से नहीं बल्कि बुद्धि और मनन से प्राप्त होता है।
केवल इंद्रिय अनुभव
सांख्यिकीय विश्लेषण
7. निम्नलिखित में से कौन-सा दार्शनिक ‘आत्मनिष्ठ आदर्शवाद’ से जुड़ा है, जिसका मानना था कि ‘होना प्रत्यक्ष होना है’?
स्पिनोज़ा
शोपेनहावर
फिक्टे
जॉर्ज बर्कले
बर्कले के अनुसार, वस्तुओं का अस्तित्व तभी तक है जब तक कोई मन उन्हें देख रहा है या महसूस कर रहा है।
8. आदर्शवाद का शिक्षा के क्षेत्र में मुख्य योगदान क्या है?
शारीरिक कौशल का विकास
मशीनी अनुशासन
आत्मानुभूति और चरित्र निर्माण
आदर्शवादी शिक्षा व्यवस्था छात्र के नैतिक उत्थान और व्यक्तित्व के आध्यात्मिक विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है।
केवल व्यावसायिक प्रशिक्षण
9. पाश्चात्य दर्शन में ‘आलोचनात्मक आदर्शवाद’ का प्रतिपादन किसने किया?
फ्रांसिस बेकन
ऑगस्ट कॉम्टे
इमैनुएल कांट
कांट ने बुद्धिवाद और अनुभववाद का समन्वय करते हुए बताया कि हमारा मन बाहरी दुनिया के अनुभवों को अपने साँचों में ढालकर ज्ञान बनाता है।
डेविड ह्यूम
10. निम्नलिखित में से कौन-सा जोड़ा ‘आदर्शवादी विचारकों’ का सही समूह है?
सुकरात, प्लेटो और कांट
सुकरात, प्लेटो, कांट, हीगल और बर्कले प्रमुख आदर्शवादी दार्शनिक माने जाते हैं।
फ्रायड, एडलर और जुंग
मार्क्स, एंगेल्स और लेनिन
सार्त्र, कामू और नीत्शे
8. अतियथार्थवाद (Surrealism)
1. अतियथार्थवाद का उदय मुख्य रूप से किस आंदोलन के बाद और किसके विरोध में हुआ?
दादावाद
अतियथार्थवाद का जन्म 1920 के दशक के आरंभ में पेरिस में हुआ। यह ‘दादावाद’ की नकारात्मकता से निकलकर एक सकारात्मक सृजनात्मक शक्ति के रूप में उभरा।
यथार्थवाद
छायावाद
अस्तित्ववाद
2. 1924 में ‘अतियथार्थवादी घोषणापत्र’ किसने लिखा था, जिसे इस आंदोलन की शुरुआत माना जाता है?
सल्वाडोर डाली
पाब्लो पिकासो
सिग्मंड फ्रायड
आंद्रे ब्रेतों
फ्रांसीसी लेखक आंद्रे ब्रेतों को अतियथार्थवाद का सैद्धांतिक जनक माना जाता है। उन्होंने ही इस आंदोलन के नियमों और उद्देश्यों को परिभाषित किया।
3. अतियथार्थवाद किस मनोवैज्ञानिक के ‘अचेतन मन’ के सिद्धांतों से गहराई से प्रभावित है?
अल्फ्रेड एडलर
कार्ल जुंग
विलियम जेम्स
सिगमंड फ्रायड
अतियथार्थवादियों का मानना था कि तर्क और सामाजिक नियंत्रण के बिना अचेतन मन ही वास्तविक सत्य और सृजन का स्रोत है, जैसा कि फ्रायड ने बताया था।
4. ‘स्वचालित लेखन’ का प्रयोग किस साहित्यिक विचारधारा की प्रमुख विशेषता है?
प्रगतिवाद
अतियथार्थवाद
इसमें लेखक बिना किसी तर्क, नैतिकता या पूर्व-चिंतन के मन में आने वाले विचारों को तेजी से लिखता है, ताकि अचेतन मन सीधे कागज पर उतर सके।
प्रयोगवाद
आधुनिकतावाद
5. ‘तर्क के नियंत्रण के बिना, सौंदर्यशास्त्रीय या नैतिक चिंताओं से मुक्त मन की वास्तविक कार्यप्रणाली’—यह परिभाषा किसकी है?
यथार्थवाद की
अतियथार्थवाद की
यह आंद्रे ब्रेतों द्वारा दी गई अतियथार्थवाद की शुद्ध डिक्शनरी परिभाषा है, जो इसे पूरी तरह ‘मानसिक स्वचालितता’ मानती है।
आदर्शवाद की
मार्क्सवाद की
6. प्रसिद्ध पेंटिंग ‘द पर्सिस्टेंस ऑफ मेमोरी’, जिसमें पिघलती हुई घड़ियाँ दिखाई गई हैं, किस अतियथार्थवादी कलाकार की है?
रेने मैग्रिट
मैक्स अर्न्स्ट
मार्क चागल
सल्वाडोर डाली
सल्वाडोर डाली अतियथार्थवादी कला के सबसे प्रसिद्ध चेहरे हैं। उनकी यह पेंटिंग समय की सापेक्षता और सपनों जैसी स्थिति को दर्शाती है।
7. अतियथार्थवाद का मुख्य लक्ष्य क्या था?
चेतन और अचेतन के बीच की दूरी को मिटाकर एक ‘परम यथार्थ’ बनाना
यह आंदोलन सपने और वास्तविकता के बीच के विरोधाभास को सुलझाकर एक नई पूर्ण वास्तविकता बनाना चाहता था।
समाज का राजनीतिक सुधार करना
प्रकृति का सुंदर चित्रण करना
केवल धार्मिक कथाएं लिखना
8. निम्नलिखित में से कौन-सी तकनीक अतियथार्थवादी कलाकारों द्वारा उपयोग नहीं की जाती थी?
फ्रोटेज
स्वचालितता
रैखिक परिप्रेक्ष्य
‘रैखिक परिप्रेक्ष्य’ एक तर्कसंगत और वैज्ञानिक पद्धति है, जिसका उद्देश्य बाहरी दुनिया को बिल्कुल वैसा ही दिखाना होता है जैसा वह है, जबकि अतियथार्थवाद का लक्ष्य तर्क और होशोहवास के नियंत्रण से मुक्त होना था।
कोलाज
9. हिंदी साहित्य में ‘अतियथार्थवाद’ का प्रभाव मुख्य रूप से किन कवियों की रचनाओं में देखने को मिलता है?
मैथिलीशरण गुप्त
मुक्तिबोध और शमशेर बहादुर सिंह
गजानन माधव ‘मुक्तिबोध’ की कविताओं (जैसे- अंधेरे में) में दिखने वाले ‘फैंटेसी’ के तत्व और बिंब अतियथार्थवादी चेतना के करीब माने जाते हैं।
महादेवी वर्मा
सुभद्रा कुमारी चौहान
10. निम्नलिखित में से अतियथार्थवाद ने किस प्रकार की मान्यता को चुनौती नहीं दी?
कला के पारंपरिक नियमों को
यथार्थ के सतही चित्रण को
अवचेतन मन और कल्पना की स्वतंत्रता को
अतियथार्थवादियों ने तर्क, समाज की थोपी हुई नैतिकता और कला के पुराने ढर्रों का कड़ा विरोध किया। वे यथार्थ के उस चित्रण के खिलाफ थे जो केवल आँखों देखी ऊपरी दुनिया को दिखाता था।
तार्किकता और बुर्जुआ नैतिकता को
9. मानववाद (Humanism)
1. पुनर्जागरण काल में ‘मानववाद का जनक’ किसे माना जाता है?
पेट्रार्क
14वीं शताब्दी के इतालवी विद्वान और कवि पेट्रार्क को मानववाद का पिता कहा जाता है। उन्होंने प्राचीन यूनानी और रोमन साहित्यों की खोज की और मनुष्य की व्यक्तिगत भावनाओं को महत्व दिया।
दांते
मैकियावेली
थॉमस मोर
2. यूरोप में मानववादी विचारधारा और पुनर्जागरण का प्रारंभ सबसे पहले किस देश में हुआ था?
फ्रांस
इटली
इटली के फ्लोरेंस शहर को मानववाद और पुनर्जागरण का जन्मस्थान माना जाता है, जहाँ से यह पूरे यूरोप में फैल गया।
इंग्लैंड
जर्मनी
3. ‘मनुष्य ही सभी वस्तुओं का मापदंड है’ – यह प्रसिद्ध कथन किस प्राचीन विचारक का है, जो मानववाद का आधार है?
सुकरात
प्लेटो
अरस्तू
प्रोटागोरस
प्राचीन यूनानी सोफिस्ट दार्शनिक प्रोटागोरस के इस कथन का अर्थ है कि सत्य और मूल्य मनुष्य के दृष्टिकोण से ही तय होते हैं, न कि किसी ईश्वरीय सत्ता से।
4. मानववाद का मुख्य केंद्र बिंदु या दर्शन क्या है?
केवल धार्मिक कर्मकांड
मानवीय गरिमा, क्षमता, तर्क और इहलोक
मानववाद ईश्वर या परलोक की चिंता छोड़कर मनुष्य के वर्तमान जीवन को बेहतर बनाने और उसकी तार्किक क्षमता पर विश्वास करता है।
पारलौकिक सुख की प्राप्ति
रहस्यवाद और जादू-टोना
5. ‘धर्मनिरपेक्ष मानववाद’ किस पर सबसे अधिक बल देता है?
वैज्ञानिक आविष्कारों के विरोध पर
भाग्यवाद पर
अलौकिक मान्यताओं के बजाय वैज्ञानिक तर्क और मानवीय नैतिकता पर
धर्मनिरपेक्ष मानववाद मानता है कि मनुष्य बिना किसी धार्मिक अंधविश्वास या ईश्वरीय डर के भी नैतिक और परोपकारी जीवन जी सकता है।
सभी धर्मों के कट्टर पालन पर
6. ‘मानवतावादी मनोविज्ञान’ की नींव रखने वाले प्रमुख मनोवैज्ञानिक कौन हैं?
सिगमंड फ्रायड
इवान पावलव
बी. एफ. स्किनर
कार्ल रोजर्स और अब्राहम मास्लो
मास्लो (आवश्यकताओं का पदानुक्रम) और रोजर्स ने मनोविश्लेषण और व्यवहारवाद के विरोध में इसे विकसित किया, जो मनुष्य की ‘स्व-प्राप्ति’ पर जोर देता है।
7. ‘ओरेशन ऑन द डिग्निटी ऑफ मैन’, जिसे पुनर्जागरण काल के मानववाद का ‘घोषणापत्र’ कहा जाता है, के लेखक कौन हैं?
पिको डेला मिरांडोला
1486 में लिखे गए इस ग्रंथ में पिको ने तर्क दिया कि मनुष्य ब्रह्मांड की सबसे अद्भुत रचना है क्योंकि उसके पास अपना भाग्य खुद चुनने की स्वतंत्र इच्छा (Free will) है।
गैलीलियो
इरास्मस
लियोनार्डो दा विंची
8. पुनर्जागरण कालीन मानववादियों ने शिक्षा के क्षेत्र में किन विषयों के अध्ययन पर जोर दिया जिसे ‘मानविकी’ कहा गया?
व्याकरण, इतिहास, कविता और नैतिक दर्शन
मानववादियों का मानना था कि एक संपूर्ण और सभ्य नागरिक बनने के लिए इन मानवीय विषयों का अध्ययन करना आवश्यक है।
केवल सैन्य प्रशिक्षण
केवल धर्मशास्त्र
केवल तंत्र-मंत्र
9. आधुनिक संदर्भ में मानववाद निम्नलिखित में से किसका प्रबल विरोध करता है?
वैज्ञानिक अनुसंधान का
विश्व शांति का
मानवाधिकारों का
अंधविश्वास, रूढ़िवाद और नियतिवाद का
मानववाद मनुष्य को उसकी किस्मत के भरोसे छोड़ने (नियतिवाद) का विरोध करता है और उसे अपने जीवन का निर्माता मानता है।
10. समग्र रूप से मानववाद के बारे में कौन-सा कथन असत्य है?
यह मनुष्य की गरिमा और स्वतंत्र चिंतन का समर्थक है।
यह परलोक के बजाय ‘इहलौकिक’ समस्याओं पर बल देता है।
यह मनुष्य को जन्मजात पापी के बजाय विवेकशील मानता है।
यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर कट्टर धार्मिक नियंत्रण का पक्षधर है।
मानववाद किसी भी प्रकार के धार्मिक कट्टरपंथ या रूढ़िवादी नियंत्रण का विरोध करता है। यह मनुष्य की संप्रभुता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की वकालत करता है, न कि उसे धार्मिक बेड़ियों में जकड़ने की।
10. प्रभाववाद (Impressionism)
1. प्रभाववादी कला आंदोलन का जन्म 19वीं सदी के उत्तरार्ध में किस देश में हुआ था?
जर्मनी
इंग्लैंड
फ्रांस
1870 के दशक में फ्रांस (मुख्य रूप से पेरिस) में कुछ स्वतंत्र कलाकारों के समूह द्वारा इस आंदोलन की शुरुआत की गई, जिन्होंने अकादमिक कला के पारंपरिक नियमों को चुनौती दी।
इटली
2. ‘प्रभाववाद’ शब्द का नामकरण क्लॉड मोने के किस प्रसिद्ध चित्र के आधार पर हुआ था?
द स्टार्री नाईट
द लास्ट सपर
इम्प्रेसन, सनराइज
1874 में एक कला प्रदर्शनी में मोने की पेंटिंग ‘Impression, soleil levant’ (Impression, Sunrise) को देखकर एक आलोचक ने व्यंग्य में ‘प्रभाववादी’ शब्द का प्रयोग किया था, जिसे बाद में इन कलाकारों ने गर्व से अपना लिया।
मोना लिसा
3. चित्रकला में प्रभाववाद की सबसे प्रमुख विशेषता क्या मानी जाती है?
पूरी तरह से काल्पनिक चित्रण
प्रकाश और रंग के बदलते प्रभावों का त्वरित चित्रण
प्रभाववादी कलाकार बंद स्टूडियो के बजाय खुले आसमान के नीचे जाकर काम करते थे, ताकि किसी विशेष क्षण में प्रकाश के तात्कालिक प्रभाव को कैनवस पर कैद कर सकें।
ऐतिहासिक घटनाओं का सटीक चित्रण
गहरी और काली रूपरेखा का प्रयोग
4. निम्नलिखित में से कौन प्रभाववादी चित्रकला के प्रमुख स्तंभ नहीं माने जाते हैं?
कैमिली पिसारो
पीटर पॉल रूबेन्स
रेनोइर, देगास और पिसारो तीनों ही 19वीं सदी के फ्रांसीसी प्रभाववाद के संस्थापक सदस्य और प्रमुख स्तंभ थे। इन कलाकारों ने प्रकाश और क्षणिक दृश्यों को कैनवास पर उतारने में महारत हासिल की थी।
पियरे-ऑगस्टे रेनोइर
एडगर देगास
5. प्रभाववादी चित्रकार अपनी कलाकृतियों में रंगों का प्रयोग किस विशिष्ट तकनीक से करते थे?
केवल काले और सफेद रंगों का प्रयोग
रंगों को पैलेट पर अच्छी तरह मिलाकर सपाट रूप से लगाना
केवल ज्यामितीय आकृतियों में रंग भरना
रंगों को मिलाए बिना शुद्ध रंगों के छोटे और स्पष्ट स्ट्रोक्स लगाना
वे रंगों को कैनवस पर मिलाए बिना पास-पास लगाते थे, ताकि जब दर्शक दूर से देखे तो उसकी आँखों में रंग स्वयं मिश्रित होकर एक जीवंत और स्पंदनशील प्रभाव पैदा करें।
6. हिंदी साहित्य में ‘प्रभाववादी आलोचना’ में आलोचक का मुख्य आधार क्या होता है?
शास्त्रीय नियमों का कठोर पालन
लेखक की जीवनी की जाँच
कृति को पढ़ने पर आलोचक के मन पर पड़ा व्यक्तिगत ‘प्रभाव’ या अनुभूति
साहित्यिक आलोचना में प्रभाववादी आलोचक किसी नियम में बंधे बिना यह बताता है कि रचना ने उसके हृदय पर क्या छाप छोड़ी है। यह पूरी तरह से आत्मपरक समीक्षा होती है।
समाजशास्त्रीय विश्लेषण
7. निम्नलिखित में से कौन-सा लेखक ‘प्रभाववादी आलोचक’ नहीं माना जाता है?
रामचंद्र शुक्ल
यद्यपि हिंदी में प्रभाववादी आलोचना कोई स्वतंत्र संप्रदाय नहीं बनी, लेकिन शांतिप्रिय द्विवेदी, पद्मसिंह शर्मा और बाबू गुलाबराय की समीक्षाओं में सहृदयता, आत्मीयता और प्रभाववादी दृष्टिकोण स्पष्ट झलकता है।
शांतिप्रिय द्विवेदी
पद्मसिंह शर्मा
बाबू गुलाबराय
8. साहित्य में ‘प्रभाववाद’ की एक प्रमुख तकनीक क्या है?
कहानी को केवल सीधे घटनाक्रम से समझाना
पात्रों की मानसिक अनुभूतियों और खंडित संवेदी छापों के माध्यम से यथार्थ का चित्रण
साहित्यिक प्रभाववाद में वास्तविकता को वैसे नहीं दिखाया जाता जैसी वह बाहर से दिखती है, बल्कि वैसे दिखाया जाता है जैसी वह किसी पात्र के मन (चेतना) पर अपनी छाप छोड़ती है।
लेखक द्वारा सीधे नैतिक उपदेश देना
एकदम निष्पक्ष और वस्तुनिष्ठ वर्णन
9. प्रभाववाद की प्रतिक्रिया में और उसकी सीमाओं को पार करने के लिए बाद में किस नए कला आंदोलन का जन्म हुआ?
घनवाद
यथार्थवाद
अतियथार्थवाद
उत्तर-प्रभाववाद
विन्सेंट वैन गॉग और पॉल सेज़ान जैसे कलाकारों ने प्रभाववाद के बाद ‘उत्तर-प्रभाववाद’ का विकास किया, जिसमें प्रकाश के साथ-साथ भावनाओं और ठोस संरचना पर भी अधिक जोर दिया गया।
10. समग्र रूप से, ‘प्रभाववाद’ के बारे में कौन-सा कथन असत्य है?
यह वस्तुओं के सूक्ष्म विवरण और स्थिर रेखांकन पर बल देता है
प्रभाववाद में सूक्ष्म विवरण और स्थिर रेखांकन को महत्व नहीं दिया जाता। प्रभाववाद ने कला की पुरानी और जड़ मान्यताओं को तोड़कर उसे एक नया, तात्कालिक और व्यक्तिपरक रूप प्रदान किया।
यह जीवन की क्षणभंगुरता को पकड़ता है
यह अकादमिक और रूढ़िवादी नियमों का विरोध करता है
यह प्रकाश, वातावरण और अनुभूति की भूमिका को सर्वोपरि मानता है
11. आधुनिकतावाद (Modernism)
1. आधुनिकतावाद का उदय मुख्य रूप से किस ऐतिहासिक कालखंड की उथल-पुथल के परिणामस्वरूप माना जाता है?
पुनर्जागरण काल के दौरान
फ्रांसीसी क्रांति के समय
प्रथम विश्व युद्ध के दौरान और उसके बाद
प्रथम विश्व युद्ध (1914-1918) की विभीषिका ने मानवता के पुराने विश्वासों को तोड़ दिया, जिससे कला और साहित्य में एक नई दिशा ‘आधुनिकतावाद’ का जन्म हुआ।
औद्योगिक क्रांति के आरंभ में
2. आधुनिकतावादी साहित्य की सबसे प्रमुख विशेषता क्या है?
परंपरा का अंधानुकरण
स्पष्ट और रेखीय कथा प्रवाह
ईश्वर और धर्म की सर्वोच्चता
विखंडन, आत्मपरकता और नवीन प्रयोग
आधुनिकतावाद ने पारंपरिक कहानी कहने के तरीकों को छोड़कर जीवन के बिखराव और व्यक्तिगत मानसिक स्थितियों को दिखाना शुरू किया।
3. प्रसिद्ध आधुनिकतावादी कविता ‘द वेस्ट लैंड’ के रचयिता कौन हैं, जिसे इस आंदोलन का आधार स्तंभ माना जाता है?
विलियम बटलर यीट्स
टी. एस. एलियट
यह कविता आधुनिक समाज के खालीपन, मोहभंग और सांस्कृतिक गिरावट का सबसे सटीक चित्रण करती है।
एज़रा पाउंड
जेम्स जॉयस
4. निम्नलिखित में से कौन ‘चेतना का प्रवाह’ तकनीक का प्रयोग करने वाला लेखक नहीं है?
जेम्स जॉयस
वर्जीनिया वुल्फ
मार्सेल प्रुस्त
अर्नेस्ट हेमिंग्वे
इस तकनीक में पात्र के मन में उठने वाले विचारों को बिना किसी तार्किक क्रम के, जैसे वे आते हैं, वैसे ही प्रस्तुत किया जाता है। जेम्स जॉयस, वर्जीनिया वुल्फ और मार्सेल प्रुस्त ने पात्रों के अंतर्मन के विचारों को बिना किसी तार्किक रुकावट के प्रस्तुत करने वाली ‘चेतना का प्रवाह’ तकनीक को स्थापित किया।
5. आधुनिकतावाद का मूल मंत्र ‘Make it New’ किसने दिया था?
एज़रा पाउंड
एज़रा पाउंड ने आधुनिक कवियों को पुरानी रूढ़ियों को छोड़कर भाषा और शिल्प में नए प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया था।
टी. एस. एलियट
डी. एच. लॉरेंस
अर्नेस्ट हेमिंग्वे
6. हिंदी साहित्य में ‘आधुनिकतावाद’ की शुरुआत किस काव्य आंदोलन से प्रभावी ढंग से मानी जाती है?
द्विवेदी युग
प्रयोगवाद
‘तार सप्तक’ (1943) के माध्यम से हिंदी कविता में नए बिंबों, प्रतीकों और आधुनिक जीवन की जटिलताओं का प्रवेश हुआ।
छायावाद
प्रगतिवाद
7. निम्नलिखित में से कौन-सा विचारक आधुनिकतावाद के उदय और विकास की वैचारिक पृष्ठभूमि से संबंधित नहीं है?
कार्ल मार्क्स (वर्ग संघर्ष)
फ्रेडरिक नीत्शे (ईश्वर की मृत्यु)
सेंट थॉमस एक्विनास (मध्यकालीन धर्मशास्त्र)
फ्रायड के मनोविज्ञान, मार्क्स के समाजशास्त्र और नीत्शे के दर्शन ने आधुनिकतावादी सोच की आधारशिला रखी।
सिगमंड फ्रायड (अचेतन मन)
8. आधुनिकतावाद में ‘नायक’ की अवधारणा कैसी है?
वह सर्वगुण संपन्न और अजेय होता है
वह केवल दैवीय शक्तियों से युक्त होता है
वह समाज का रक्षक और आदर्श पुरुष होता है
वह अक्सर एक ‘एंटी-हीरो’ होता है जो अकेला और भ्रमित है
आधुनिक उपन्यासों का नायक अब महान नहीं, बल्कि एक साधारण, संशयग्रस्त और समाज से कटा हुआ व्यक्ति होता है।
9. दृश्य कला में आधुनिकतावाद का प्रतिनिधित्व करने वाली प्रमुख शैली ‘घनवाद’ के जनक कौन थे?
विन्सेंट वैन गॉग
साल्वाडोर डाली
क्लाउड मोने
पाब्लो पिकासो
पिकासो ने वस्तुओं को पारंपरिक रूप में दिखाने के बजाय उन्हें ज्यामितीय टुकड़ों में तोड़कर आधुनिक दृष्टि प्रदान की।
10. आधुनिकतावाद का अंत और ‘उत्तर-आधुनिकतावाद’ का आरंभ लगभग कब से माना जाता है?
19वीं सदी के अंत से
प्रथम विश्व युद्ध के बाद
1930 की मंदी के बाद
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद
द्वितीय विश्व युद्ध (1945) के बाद की वैचारिक क्रांतियों ने आधुनिकतावाद की सीमाओं को पार कर उत्तर-आधुनिकतावाद का मार्ग प्रशस्त किया।
12. संरचनावाद (Structuralism)
1. आधुनिक संरचनावादी भाषाविज्ञान का जनक किसे माना जाता है?
रोलां बार्थ
क्लाउड लेवी-स्ट्रॉस
फर्डिनेंड डी सॉसुर
सॉसुर की पुस्तक ‘Course in General Linguistics’ (1916) को संरचनावाद का प्रस्थान बिंदु माना जाता है। उन्होंने भाषा को संकेतों की एक स्वायत्त प्रणाली के रूप में व्याख्यायित किया।
नोम चॉम्स्की
2. सॉसुर के अनुसार, भाषा के नियमों की अमूर्त व्यवस्था को क्या कहा जाता है?
संकेत
लाँग
सॉसुर ने ‘लाँग’ (नियमों की व्यवस्था) और ‘पैरोल’ (व्यक्तिगत वाक्/बोलना) के बीच अंतर किया। संरचनावाद का मुख्य ध्यान ‘लाँग’ के अध्ययन पर होता है।
पैरोल
विखंडन
3. संरचनावाद के अनुसार किसी शब्द या संकेत का अर्थ कैसे निर्धारित होता है?
शब्द के स्वतंत्र अस्तित्व से
व्यवस्था के भीतर अन्य संकेतों के साथ उसके ‘अंतर’ से
संरचनावाद मानता है कि ‘पेड़’ का अर्थ ‘पेड़’ इसलिए है क्योंकि वह ‘पौधा’, ‘झाड़ी’ या ‘पत्थर’ नहीं है। अर्थ व्यवस्था के भीतर संबंधों से निकलता है।
शब्द की ऐतिहासिक उत्पत्ति से
शब्द के ईश्वरीय अर्थ से
4. नृविज्ञान में संरचनावाद को प्रतिष्ठित करने वाले विचारक कौन हैं?
मिखाइल बाख्तिन
क्लाउड लेवी-स्ट्रॉस
लेवी-स्ट्रॉस ने सॉसुर के भाषाई सिद्धांतों को संस्कृतियों, मिथकों और नातेदारी के अध्ययन पर लागू किया।
मिशेल फूको
जैक्स लेकन
5. संरचनावाद की मुख्य अवधारणा क्या है?
मानवीय चेतना ही सब कुछ है
सत्य केवल इतिहास में निहित है
व्यक्ति की स्वतंत्रता सर्वोपरि है
घटनाएँ और वस्तुएँ एक अंतर्निहित ‘गहरी संरचना’ द्वारा नियंत्रित होती हैं
संरचनावाद सतही घटनाओं के पीछे छिपी हुई उन व्यवस्थाओं या ढांचों को खोजने का प्रयास करता है जो उन्हें अर्थ प्रदान करते हैं।
6. ‘द्विआधारी विरोध’ का सिद्धांत, जो संरचनावाद का आधार है, क्या दर्शाता है?
मानवीय चिंतन विपरीत युग्मों के माध्यम से अर्थ बनाता है
लेवी-स्ट्रॉस ने तर्क दिया कि मानव मन दुनिया को समझने के लिए द्वैधों या विरोधों का सहारा लेता है।
समाज में केवल दो ही वर्ग होते हैं
स्त्री और पुरुष की समानता
भाषा का विकास केवल दो शब्दों से हुआ है
7. ‘संकेत’ के दो अनिवार्य भाग सॉसुर ने कौन से बताए हैं?
संकेतक और संकेतित
‘संकेतक’ वह शब्द या छवि है और ‘संकेतित’ वह मानसिक अवधारणा है जो उस शब्द को सुनकर मन में आती है।
रूप और रंग
ध्वनि और लिपि
कर्ता और कर्म
8. संरचनावाद निम्नलिखित में से किस आंदोलन के उदय का मार्ग प्रशस्त करता है?
उत्तर-संरचनावाद
संरचनावाद की सीमाओं और उसकी ‘निश्चित अर्थ’ की अवधारणा को चुनौती देने के लिए बाद में उत्तर-संरचनावाद (डेरिडा, फूको आदि) का विकास हुआ।
यथार्थवाद
छायावाद
मार्क्सवाद
9. संरचनावाद किस प्रकार के अध्ययन पर अधिक बल देता है?
ऐतिहासिक अध्ययन पर
एककालिक अध्ययन पर
संरचनावाद इतिहास के बजाय किसी एक समय बिंदु पर व्यवस्था की आंतरिक संरचना के अध्ययन को प्राथमिकता देता है।
केवल भविष्योन्मुखी अध्ययन पर
व्यक्तिपरक अध्ययन पर
10. निम्नलिखित में से कौन संरचनावादी विचारकों के समूह में शामिल नहीं है?
लुई अल्थुसर
जैक्स लेकन
जैक्स डेरिडा
ये सभी विचारक क्रमशः साहित्य, मार्क्सवाद और मनोविश्लेषण के क्षेत्रों में संरचनावादी पद्धति का प्रयोग करने के लिए जाने जाते हैं। वहीं जैक्स डेरिडा को ‘उत्तर-संरचनावाद’ और ‘विखंडन’ का जनक माना जाता है। उन्होंने संरचनावाद के इस विचार को चुनौती दी कि किसी शब्द या संरचना का कोई निश्चित या स्थिर केंद्र/अर्थ होता है।
ए.जे. ग्रेमास
13. रूपवाद (Formalism)
1. रूसी रूपवाद का उदय मुख्य रूप से किस शताब्दी के प्रारंभ में हुआ था?
19वीं शताब्दी
21वीं शताब्दी
20वीं शताब्दी
रूसी रूपवाद का विकास 1915-1916 के आसपास रूस में हुआ, जिसने साहित्य को समाजशास्त्र या मनोविज्ञान के चश्मे से देखने के बजाय ‘शुद्ध रूप’ (Form) के रूप में देखने पर बल दिया।
18वीं शताब्दी
2. रूपवाद के अनुसार साहित्य का मुख्य केंद्र बिंदु क्या होना चाहिए?
लेखक का निजी जीवन
तत्कालीन सामाजिक परिस्थितियाँ
रचना की आंतरिक संरचना और भाषाई प्रयोग
रूपवादी मानते हैं कि साहित्य का अर्थ उसके शब्दों, बिम्बों और प्रतीकों के भीतर होता है, न कि बाहरी दुनिया में।
पाठकों की प्रतिक्रिया
3. ‘अजनबीपन’ या ‘अपपरिचितीकरण’ की प्रसिद्ध अवधारणा किस रूपवादी विचारक ने दी थी?
मिखाइल बाख्तिन
बोरिस आयखनबाम
विक्टर श्क्लोव्स्की
श्क्लोव्स्की के अनुसार, कला का काम उन चीजों को ‘अजनबी’ बनाकर दिखाना है जिन्हें हम आदतन देखना बंद कर चुके हैं, ताकि पाठक उन्हें नए सिरे से महसूस कर सके।
रोमन जैकब्सन
4. रूपवादी आलोचना में ‘साहित्यिकता’ शब्द का प्रयोग सबसे पहले किसने किया था?
रोमन जैकब्सन
जैकब्सन का तर्क था कि साहित्य के अध्ययन का विषय ‘साहित्य’ नहीं, बल्कि ‘साहित्यिकता’ है, अर्थात वे तत्व जो किसी लिखित सामग्री को ‘साहित्य’ बनाते हैं।
टी. एस. एलियट
आई. ए. रिचर्ड्स
व्लादिमीर प्रोप
5. ‘रूसी रूपवाद’ के दो मुख्य केंद्र या समूह कौन से थे?
पेरिस स्कूल और लंदन स्कूल
मास्को भाषाई चक्र और ओपोजास
‘ओपोजास’ (काव्य भाषा के अध्ययन की समिति) और मास्को लिंग्विस्टिक सर्कल ही रूपवाद के गढ़ थे।
शिकागो क्रिटिक्स और न्यू क्रिटिसिज्म
मास्को और बर्लिन समूह
6. रूपवादियों ने कथा-साहित्य के विश्लेषण के लिए किन दो शब्दों के बीच अंतर स्पष्ट किया है?
भाषा और विचार
रूप और रंग
फाबुला और सुजेत
‘फाबुला’ का अर्थ है घटनाक्रम का कच्चा माल, जबकि ‘सुजेत’ वह तरीका है जिससे लेखक उस घटना को रचना में पिरोता है।
शब्द और अर्थ
7. नई समीक्षा, जो रूपवाद का ही एक अमेरिकी रूप है, किस बात पर सबसे अधिक जोर देती है?
‘क्लोज रीडिंग’ या पाठ का सूक्ष्म विश्लेषण
नई समीक्षा मानती है कि रचना एक ‘स्वतंत्र इकाई’ है और उसका अर्थ केवल उसके शब्दों के बारीक विश्लेषण से ही निकल सकता है।
लेखक की मंशा जानना
ऐतिहासिक शोध करना
पाठकों की भावनाओं का विश्लेषण
8. निम्नलिखित में से कौन-सा विचारक रूसी रूपवाद से गहराई से जुड़ा हुआ है?
कार्ल मार्क्स
सिगमंड फ्रायड
ज्यां पॉल सार्त्र
यूरी टायन्यानोव
टायन्यानोव एक प्रमुख रूसी रूपवादी थे जिन्होंने साहित्य को एक गतिशील ‘व्यवस्था’ के रूप में देखा।
9. रूपवाद निम्नलिखित में से किस विचारधारा के ठीक विपरीत खड़ा होता है?
प्रतीकवाद
मार्क्सवाद
मार्क्सवाद साहित्य को सामाजिक और आर्थिक संदर्भ में देखता है, जबकि रूपवाद सामाजिक संदर्भों को पूरी तरह नकार कर केवल शिल्प को प्रधानता देता है।
अस्तित्ववाद
संरचनावाद
10. रूपवादी आलोचना का सबसे बड़ा योगदान क्या माना जाता है?
साहित्य को मनोरंजन का साधन बनाना
लेखकों की जीवनी लिखना
साहित्यिक आलोचना को एक वस्तुनिष्ठ और वैज्ञानिक आधार प्रदान करना
रूपवाद ने आलोचना को व्यक्तिगत पसंद-नापसंद से निकालकर तकनीकी और संरचनात्मक विश्लेषण की ओर मोड़ा।
नैतिक उपदेश देना
विभिन्न वादों पर आधारित यह MCQ quiz UPHESC, UGC NET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी है। इस quiz को हल करके आप साहित्यिक सिद्धांतों की अपनी समझ को परख सकते हैं और महत्वपूर्ण concepts को मजबूत कर सकते हैं। नियमित अभ्यास से आपकी analytical क्षमता और accuracy दोनों में सुधार होगा। इसलिए इस quiz को अवश्य attempt करें और अपनी तैयारी को अगले स्तर तक ले जाएं।