आचार्य रामचंद्र शुक्ल द्वारा रचित हिंदी साहित्य का इतिहास के नई धारा द्वितीय उत्थान के आधार पर आपकी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण 59 वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs) नीचे दिए गए हैं। ये quiz प्रश्न विशेष रूप से PGT, TGT, DSSSB, LT Grade, ugc net और Assistant Professor जैसी परीक्षाओं के स्तर के अनुरूप तैयार किए गए हैं। यहाँ दिए गए प्रश्न परीक्षा दृष्टि से उपयोगी हैं।
आइए, नई धारा द्वितीय उत्थान के वस्तुनिष्ठ प्रश्न को Quiz के माध्यम से सरल और रोचक ढंग से जानें-
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[question] 1. आचार्य शुक्ल के अनुसार खड़ी बोली के पद्य-प्रवाह के लिए कौन से तीन रास्ते खोले गए? [/question]
[answer] उर्दू-फारसी की बहरें, संस्कृत के वृत्त और हिंदी के छंद
[explanation] उत्तर: ‘शुक्ल जी के अनुसार खड़ी बोली पद्य के लिए तीन मार्ग अपनाए गए: उर्दू या फारसी की बहरें, संस्कृत के वर्णवृत्त और हिंदी के अपने प्रचलित छंद। [/explanation]
[/answer]
[wrong] अंग्रेजी सॉनेट, उर्दू गज़ल और लोकगीत [/wrong]
[wrong] केवल मात्रिक छंद, वर्णवृत्त और मुक्तक [/wrong]
[wrong] फारसी रुबाई, संस्कृत श्लोक और दोहा [/wrong]
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[question] 2. आचार्य शुक्ल ने खड़ी बोली के पद्य के लिए किस मार्ग के अवलंबन को ‘नैराश्य या आलस्य’ समझा है? [/question]
[wrong] मात्रिक छंदों का प्रयोग [/wrong]
[answer] उर्दू या फारसी की बहरों का प्रयोग
[explanation] उत्तर: ‘शुक्ल जी का मानना है कि उर्दू-फारसी की बहरों का सहारा लेना हिंदी काव्य का अपना मार्ग नहीं है, बल्कि यह आलस्य का परिचायक है। [/explanation]
[/answer]
[wrong] संस्कृत के वर्णवृत्तों का प्रयोग [/wrong]
[wrong] हिंदी के नए छंदों का विधान [/wrong]
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[question] 3. शुक्ल जी के अनुसार संस्कृत के वर्णवृत्तों का अधिक आश्रय लेने से खड़ी बोली के साथ क्या समस्या होती है? [/question]
[answer] भाषा जकड़ जाती है
[explanation] उत्तर: ‘संस्कृत के वर्णवृत्तों में भाषा इतनी जकड़ जाती है कि वह भावधारा के मेल में स्वच्छंद नहीं रह पाती और खड़ी बोली की स्वाभाविक गति बाधित होती है। [/explanation]
[/answer]
[wrong] भाषा बहुत सरल हो जाती है [/wrong]
[wrong] भावधारा बहुत तीव्र हो जाती है [/wrong]
[wrong] तुकबंदी करना आसान हो जाता है [/wrong]
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[question] 4. ‘खड़ी बोली की स्वाभाविक वाग्धारा का अच्छी तरह खपने के योग्य हो जाना ही उनका मँजना कहा जाएगा।’ – यह कथन किसके संदर्भ में है? [/question]
[wrong] उर्दू बहरों के [/wrong]
[wrong] केवल मुक्त छंद के [/wrong]
[wrong] अंग्रेजी छंदों के [/wrong]
[answer] हिंदी के प्रचलित छंदों के
[explanation] उत्तर: ‘शुक्ल जी के अनुसार हिंदी के प्रचलित छंदों (जैसे दंडक, सवैया) में खड़ी बोली का फिट बैठना ही भाषा का वास्तविक परिष्कार है। [/explanation]
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[question] 5. आचार्य शुक्ल ने किसकी कविताओं में ‘चलती हुई खड़ी बोली का परिमार्जित और सुव्यवस्थित रूप’ देखा है? [/question]
[answer] बाबू मैथिलीशरण गुप्त
[explanation] उत्तर: ‘मैथिलीशरण गुप्त की कविताओं में गीतिका और अन्य प्रचलित छंदों में खड़ी बोली का परिमार्जित रूप देखने को मिला। [/explanation]
[/answer]
[wrong] सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ [/wrong]
[wrong] जयशंकर प्रसाद [/wrong]
[wrong] महादेवी वर्मा [/wrong]
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[question] 6. ठाकुर गोपालशरण सिंह खड़ी बोली का मँजा हुआ रूप किन छंदों में सामने ला रहे थे? [/question]
[wrong] रोला और सोरठा [/wrong]
[wrong] बरवै और छप्पय [/wrong]
[answer] कवित्त और सवैया
[explanation] उत्तर: ‘शुक्लजी अनुसार ठाकुर गोपालशरण सिंह कवित्तों और सवैयों में खड़ी बोली का अत्यंत मँजा हुआ रूप प्रस्तुत कर रहे थे। [/explanation]
[/answer]
[wrong] दोहा और चौपाई [/wrong]
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[question] 7. शुक्ल जी के अनुसार हिंदी भाषा का परिमार्जन किनके द्वारा संभव है? [/question]
[wrong] जो केवल संस्कृत जानते हों [/wrong]
[wrong] जो नए प्रयोग करने में निपुण हों [/wrong]
[answer] जिन्हें उसकी प्रकृति की परख है
[explanation] उत्तर: ‘भाषा का वास्तविक सुधार वही कर सकते हैं जो हिंदी की प्रकृति को गहराई से समझते हैं, न कि वे जो केवल अन्य भाषाओं के अनुवाद पर निर्भर हैं। [/explanation]
[/answer]
[wrong] जिन्हें अंग्रेजी का अच्छा ज्ञान हो [/wrong]
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[question] 8. नए छंदों के व्यवहार और ‘तुक’ के बंधन के त्याग की सलाह सबसे पहले किसने दी थी? [/question]
[wrong] श्रीधर पाठक [/wrong]
[answer] महावीर प्रसाद द्विवेदी
[explanation] उत्तर: ‘द्विवेदी जी ने बहुत पहले कहा था कि तुक और अनुप्रास ढूँढ़ने से कवियों के ‘विचार-स्वातंत्र्य’ में बाधा आती है। [/explanation]
[/answer]
[wrong] आचार्य रामचंद्र शुक्ल [/wrong]
[wrong] मैथिलीशरण गुप्त [/wrong]
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[question] 9. आचार्य शुक्ल ने निराला जी की छंद-मुक्त रचनाओं को किसकी नकल बताया है? [/question]
[wrong] टी.एस. एलियट [/wrong]
[wrong] कीट्स [/wrong]
[wrong] शेली [/wrong]
[answer] वाल्ट व्हिटमैन
[explanation] उत्तर: ‘शुक्ल जी के अनुसार निराला जी की बिना छंद की रचनाएँ अमेरिका के कवि वाल्ट व्हिटमैन की नकल हैं। [/explanation]
[/answer]
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[question] 10. ‘पद्यव्यवस्था से मुक्त काव्यरचना वास्तव में पाश्चात्य ढंग के _____ के अनुकरण का परिणाम है।’ रिक्त स्थान भरें। [/question]
[wrong] उपन्यासों [/wrong]
[answer] गीतकाव्यों
[explanation] उत्तर: ‘शुक्ल जी का मानना है कि छंद-मुक्त रचनाएँ पश्चिमी ‘गीतकाव्यों’ (लीरिक्स) के अनुकरण का प्रभाव हैं। [/explanation]
[/answer]
[wrong] महाकाव्यों [/wrong]
[wrong] नाटकों [/wrong]
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[question] 11. प्रथम उत्थान के भीतर ‘भारतेंदु मंडल’ का प्रयत्न मुख्य रूप से किन भावनाओं तक सीमित रह गया? [/question]
[wrong] केवल श्रृंगारिक [/wrong]
[wrong] केवल प्रकृति चित्रण [/wrong]
[answer] सामाजिक और राजनीतिक
[explanation] उत्तर: ‘भारतेंदु मंडल का प्रयास हृदय को सामाजिक और राजनीतिक स्थिति की ओर प्रवृत्त करने तक ही सीमित रहा, जिसमें आवेश के बजाय अवसाद का स्वर था। [/explanation]
[/answer]
[wrong] केवल आध्यात्मिक और धार्मिक [/wrong]
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[question] 12. द्वितीय उत्थान में स्वदेश-प्रेम की भावना के प्रसार में किस पुस्तक का महत्वपूर्ण योगदान रहा? [/question]
[wrong] साकेत [/wrong]
[answer] भारत-भारती
[explanation] उत्तर: ‘द्वितीय उत्थान में ‘भारत-भारती’ जैसी पुस्तक ने स्वदेश-गौरव की भावना का व्यापक प्रसार किया। [/explanation]
[/answer]
[wrong] प्रियप्रवास [/wrong]
[wrong] कामायनी [/wrong]
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[question] 13. ‘अब नायिका भेद और श्रृंगार में ही बँधे रहने का जमाना नहीं है’ – यह विचार ‘सरस्वती’ के शुरुआती वर्षों में किसके माध्यम से व्यक्त किए गए? [/question]
[answer] महावीर प्रसाद द्विवेदी
[explanation] उत्तर: ‘द्विवेदी जी ने ‘सरस्वती’ के माध्यम से लगातार जोर दिया कि कविता के विषयों का विस्तार होना चाहिए और उसे श्रृंगार तक सीमित नहीं रहना चाहिए। [/explanation]
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[wrong] आचार्य शुक्ल [/wrong]
[wrong] बालकृष्ण भट्ट [/wrong]
[wrong] प्रताप नारायण मिश्र [/wrong]
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[question] 14. द्वितीय उत्थान के कवियों की प्रकृति-चित्रण के प्रति क्या सीमा थी? [/question]
[wrong] वे प्रकृति के रहस्य को समझते थे [/wrong]
[answer] वे अधिकतर ऊपरी और सुहावने रूप वर्णन तक सीमित रहे
[explanation] उत्तर: ‘द्वितीय उत्थान के कवियों ने प्रकृति के बाहरी ‘सुखद और सजीले’ रूपों को ही देखा, उसके साथ गहरा रागात्मक संबंध या व्यापक दृष्टि का अभाव था। [/explanation]
[/answer]
[wrong] उन्होंने केवल शहरी प्रकृति का वर्णन किया [/wrong]
[wrong] उन्होंने प्रकृति को मनुष्य के समान दर्जा दिया [/wrong]
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[question] 15. तृतीय उत्थान में देशभक्ति की कविताओं में ‘राजभक्ति’ का स्वर कम होने का मुख्य कारण क्या था? [/question]
[wrong] जनता की अशिक्षा [/wrong]
[wrong] राजाओं का समर्थन [/wrong]
[wrong] अंग्रेजी शिक्षा का अंत [/wrong]
[answer] आंदोलनों का सक्रिय और व्यापक रूप धारण करना
[explanation] उत्तर: ‘तृतीय उत्थान में आंदोलनों ने सक्रिय रूप लिया और वे सामान्य जनसमुदाय (किसान, मजदूर) तक पहुँचे, जिससे वाणी में अधिक बल और आवेश आया। [/explanation]
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[question] 16. ‘स्वतंत्रता देवी की वेदी पर बलिदान’ होने का प्रोत्साहन किन आंदोलनों के प्रभाव से बढ़ा? [/question]
[wrong] रीतिकाल के विरोध से [/wrong]
[wrong] केवल धार्मिक सुधारों से [/wrong]
[answer] तृतीय उत्थान के सक्रिय आंदोलनों से
[explanation] उत्तर: ‘तृतीय उत्थान में परिस्थिति बदली और कवियों ने देशवासियों को स्वतंत्रता के लिए बलिदान होने को प्रेरित करना शुरू किया। [/explanation]
[/answer]
[wrong] प्रथम उत्थान के आंदोलनों से [/wrong]
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[question] 17. हिंदी काव्य में ‘किसान आंदोलन’ और ‘मजदूर आंदोलन’ को प्रतिध्वनित करने वाले कवि कौन हैं? [/question]
[wrong] श्रीधर पाठक और हरिऔध [/wrong]
[wrong] भारतेन्दु और प्रतापनारायण मिश्र [/wrong]
[answer] दिनकर, नवीन और माखनलाल चतुर्वेदी
[explanation] उत्तर: ‘रामधारी सिंह ‘दिनकर’, बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ और माखनलाल चतुर्वेदी की वाणी में इन सामाजिक-आर्थिक आंदोलनों का तीव्र स्वर मिलता है। [/explanation]
[/answer]
[wrong] प्रसाद, पंत और निराला [/wrong]
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[question] 18. आचार्य शुक्ल के अनुसार ‘छायावाद’ का मुख्य लक्ष्य क्या था? [/question]
[answer] काव्यशैली की रोचक प्रणाली का विकास
[explanation] उत्तर: ‘शुक्ल जी के अनुसार छायावाद का प्रधान लक्ष्य काव्यशैली था, न कि वस्तुविधान; यह द्वितीय उत्थान की ‘इतिवृत्तात्मकता’ के विरुद्ध एक प्रतिक्रिया थी। [/explanation]
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[wrong] नई वस्तुभूमि की खोज [/wrong]
[wrong] समाज सुधार [/wrong]
[wrong] विदेशी शासन का विरोध [/wrong]
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[question] 19. शुक्ल जी ने हिंदी कविता की ‘नई धारा’ का प्रवर्तक विशेषतः किन्हें माना है? [/question]
[wrong] जयशंकर प्रसाद और निराला [/wrong]
[wrong] पंत और महादेवी वर्मा [/wrong]
[wrong] लोचन प्रसाद पांडेय और श्रीधर पाठक [/wrong]
[answer] मैथिलीशरण गुप्त और मुकुटधर पांडेय
[explanation] उत्तर: ‘शुक्ल जी इन दोनों कवियों को स्वच्छंद नूतन धारा का वास्तविक प्रवर्तक मानते हैं, क्योंकि इन्होंने भाषा को अधिक सजीव और मार्मिक बनाया। [/explanation]
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[question] 20. ‘छायावाद’ शब्द का प्रयोग रहस्यवाद के अलावा किस अर्थ में होने लगा? [/question]
[answer] प्रतीकवाद
[explanation] उत्तर: ‘‘छायावाद’ शब्द का प्रयोग धीरे-धीरे काव्यशैली के संबंध में ‘सिंबालिज्म’ या प्रतीकवाद के अर्थ में भी होने लगा। [/explanation]
[/answer]
[wrong] यथार्थवाद [/wrong]
[wrong] आदर्शवाद [/wrong]
[wrong] साम्यवाद [/wrong]
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[question] 21. शुक्ल जी के अनुसार छायावादी कवियों ने ‘अज्ञेय और अव्यक्त’ प्रियतम के लिए किस प्रकार के शब्दों का प्रयोग किया? [/question]
[wrong] केवल दार्शनिक शब्दों का [/wrong]
[wrong] वीरतापूर्ण शब्दों का [/wrong]
[wrong] बहुत ही सरल और ग्रामीण शब्दों का [/wrong]
[answer] कामुकता या कामवासना के शब्दों का
[explanation] उत्तर: ‘शुक्ल जी ने आलोचना की है कि छायावाद में अज्ञेय प्रियतम के प्रति कामुकता के शब्दों में प्रेम व्यंजना की गई, जो भारतीय परंपरा के विरुद्ध थी। [/explanation]
[/answer]
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[question] 22. ‘कला का उद्देश्य कला ही है’ – इस सिद्धांत का छायावाद पर क्या प्रभाव पड़ा? [/question]
[wrong] काव्य का जीवन से संबंध गहरा हुआ [/wrong]
[answer] काव्य को एक लोकातीत वस्तु माना जाने लगा
[explanation] उत्तर: ‘कलावाद के प्रभाव से काव्य को जीवन से अलग एक स्वप्निल और लोकातीत वस्तु घोषित किया जाने लगा और वस्तु विषय गौण हो गया। [/explanation]
[/answer]
[wrong] कवियों ने राजनीति में भाग लेना शुरू किया [/wrong]
[wrong] कविताओं में अधिक यथार्थवाद आया [/wrong]
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[question] 23. ‘अभिव्यंजनावाद’ के प्रवर्तक जिनका उल्लेख शुक्ल जी ने छायावाद के संदर्भ में किया है? [/question]
[wrong] आई.ए. रिचर्ड्स [/wrong]
[answer] क्रोचे
[explanation] उत्तर: ‘क्रोचे के अभिव्यंजनावाद का सहारा लेकर यह बताया गया कि काव्य में जो कुछ है, वह अभिव्यंजना के ढंग का अनूठापन ही है। [/explanation]
[/answer]
[wrong] अरस्तू [/wrong]
[wrong] प्लेटो [/wrong]
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[question] 24. ‘विचारों में बच्चों की साँस’, ‘स्वर्ण समय’ जैसे लाक्षणिक प्रयोगों को शुक्ल जी ने क्या संज्ञा दी है? [/question]
[answer] अजायबघर के जानवर
[explanation] उत्तर: ‘अंग्रेजी के लाक्षणिक प्रयोगों का ज्यों का त्यों अनुवाद करने की प्रवृत्ति पर शुक्ल जी ने ‘अजायबघर के जानवर’ कहकर कटाक्ष किया है। [/explanation]
[/answer]
[wrong] काव्य के रत्न [/wrong]
[wrong] प्रकृति के सुंदर चित्र [/wrong]
[wrong] नवीनता के प्रतीक [/wrong]
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[question] 25. छायावादी कवियों में प्रकृति के ‘कमनीय रूपों’ की ओर किसका हृदय अधिक रमा? [/question]
[wrong] निराला [/wrong]
[wrong] जयशंकर प्रसाद [/wrong]
[wrong] महादेवी वर्मा [/wrong]
[answer] सुमित्रानंदन पंत
[explanation] उत्तर: ‘शुक्ल जी के अनुसार पंत जी प्रकृति के सुंदर और कोमल रूपों की ओर विशेष रूप से आकर्षित हुए। [/explanation]
[/answer]
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[question] 26. ‘विशुद्ध काव्य की सामग्री छोटे-छोटे प्रगीत मुक्तकों में ही संभव है’ – यह विचार किस वाद से जुड़ा है? [/question]
[wrong] प्रगतिवाद [/wrong]
[answer] कलावाद
[explanation] उत्तर: ‘कलावाद के कारण लंबी प्रबंधात्मक कविताओं के बजाय छोटे प्रगीतों का चलन बढ़ा, क्योंकि इसे ही ‘विशुद्ध काव्य’ माना गया। [/explanation]
[/answer]
[wrong] प्रयोगवाद [/wrong]
[wrong] राष्ट्रवाद [/wrong]
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[question] 27. शुक्ल जी ने आधुनिक काव्यभाषा में ‘लाक्षणिकता’ का अनूठा आभास किस पुराने कवि की रचनाओं में मिलने की बात कही है? [/question]
[wrong] तुलसीदास [/wrong]
[wrong] मतिराम [/wrong]
[answer] घनानंद
[explanation] उत्तर: ‘शुक्ल जी के अनुसार लाक्षणिकता कोई नई चीज नहीं है, इसका उत्कृष्ट रूप रीतिकाल के कवि घनानंद में पहले ही दिख चुका था। [/explanation]
[/answer]
[wrong] बिहारी [/wrong]
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[question] 28. जयशंकर प्रसाद ने अपनी किस रचना में ऐतिहासिक वृत्त लेकर छायावादी शैली को विस्तृत अर्थभूमि पर ले जाने का प्रयास किया? [/question]
[wrong] आँसू [/wrong]
[wrong] झरना [/wrong]
[wrong] प्रेम-पथिक [/wrong]
[answer] लहर
[explanation] उत्तर: ‘‘लहर’ में प्रसाद जी ने कुछ ऐतिहासिक प्रसंगों को छायावादी शैली में पिरोकर काव्य का फलक विस्तृत किया। [/explanation]
[/answer]
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[question] 29. पंत जी की किस रचना में उनकी वाणी ‘वर्तमान आंदोलनों की प्रतिध्वनि’ के रूप में दिखाई देती है? [/question]
[wrong] गुंजन [/wrong]
[wrong] वीणा [/wrong]
[answer] युगवाणी
[explanation] उत्तर: ‘शुक्लजी के अनुसार ‘युगवाणी’ में पंत जी तत्कालीन सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों से प्रभावित दिखे। [/explanation]
[/answer]
[wrong] पल्लव [/wrong]
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[question] 30. ‘तोड़ती पत्थर’ कविता के माध्यम से निराला ने क्या दिखाया है? [/question]
[wrong] प्रकृति का सौंदर्य [/wrong]
[wrong] पौराणिक कथा [/wrong]
[wrong] दार्शनिक चिंतन [/wrong]
[answer] श्रमजीवी स्त्री का यथार्थ
[explanation] उत्तर: ‘निराला जी ने इस कविता के माध्यम से समाज के उपेक्षित और श्रमजीवी स्त्री की करुण और यथार्थ मूर्ति प्रस्तुत की। [/explanation]
[/answer]
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[question] 31. शुक्ल जी के अनुसार भारतीय काव्य किस भूमि की ओर प्रवृत्त रहा है? [/question]
[wrong] असामंजस्य की ओर [/wrong]
[wrong] व्यक्तित्व की चर्चा की ओर [/wrong]
[wrong] केवल व्यक्तिगत दुखों के वर्णन की ओर [/wrong]
[answer] सामंजस्य और लोक हृदय के मेल की ओर
[explanation] उत्तर: ‘भारतीय काव्य परंपरा ‘सामंजस्य’ और ‘लोक-हृदय’ के मेल पर आधारित रही है, न कि केवल व्यक्तिगत फक्कड़पन पर। [/explanation]
[/answer]
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[question] 32. तृतीय उत्थान में ‘स्वाभाविक स्वच्छंदता’ के पथ पर चलने वाले कवियों में शुक्ल जी ने किसका नाम लिया है? [/question]
[answer] रामनरेश त्रिपाठी और मुकुटधर पांडेय
[explanation] उत्तर: ‘शुक्ल जी ने रामनरेश त्रिपाठी और मुकुटधर पांडेय को ‘स्वाभाविक स्वच्छंदता’ के नूतन मार्ग का पथिक माना है। [/explanation]
[/answer]
[wrong] केवल निराला [/wrong]
[wrong] केवल प्रसाद [/wrong]
[wrong] केवल पंत [/wrong]
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[question] 33. ‘उद्धव शतक’ के रचयिता कौन हैं, जिनकी रचना को शुक्ल जी ने तृतीय उत्थान की ‘उत्कृष्ट रचना’ माना है? [/question]
[wrong] रायकृष्णदास [/wrong]
[answer] जगन्नाथ दास ‘रत्नाकर’
[explanation] उत्तर: ‘रत्नाकर जी का ‘उद्धव शतक’ ब्रजभाषा काव्य परंपरा की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उत्कृष्ट कृति है। [/explanation]
[/answer]
[wrong] वियोगी हरि [/wrong]
[wrong] दुलारे लाल भार्गव [/wrong]
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[question] 34. शुक्ल जी ने स्वयं किस काव्य ग्रंथ की रचना ‘परंपरागत काव्यभाषा’ (ब्रजभाषा) में की थी? [/question]
[wrong] रामचरित [/wrong]
[wrong] कृष्ण चरित [/wrong]
[wrong] प्रताप चरित [/wrong]
[answer] बुद्ध चरित
[explanation] उत्तर: ‘शुक्ल जी ने ‘बुद्ध चरित’ (संवत् 1979) की रचना ब्रजभाषा में की, जिसमें उन्होंने भाषा का परिष्कार भी किया। [/explanation]
[/answer]
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[question] 35. ‘वीर सतसई’ के लिए किन्हें ‘मंगलाप्रसाद पारितोषिक’ मिला था? [/question]
[answer] वियोगी हरि
[explanation] उत्तर: ‘वियोगी हरि की ‘वीर सतसई’ ब्रजभाषा की आधुनिक काल की एक पुरस्कृत रचना है। [/explanation]
[/answer]
[wrong] बिहारी [/wrong]
[wrong] सनेही [/wrong]
[wrong] केसरी सिंह बारहठ [/wrong]
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[question] 36. ‘रामचंद्रोदय’ काव्य के रचयिता कौन हैं जिन्हें ‘देव पुरस्कार’ मिला? [/question]
[answer] रामनाथ ज्योतिषी
[explanation] उत्तर: ‘अयोध्या के श्री रामनाथ ज्योतिषी को उनके काव्य ‘रामचंद्रोदय’ के लिए देव पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। [/explanation]
[/answer]
[wrong] उमाशंकर वाजपेयी [/wrong]
[wrong] गयाप्रसाद शुक्ल [/wrong]
[wrong] अनूप शर्मा [/wrong]
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[question] 37. ‘प्रताप चरित’ वीररस का एक उत्कृष्ट काव्य है, इसके रचयिता कौन हैं? [/question]
[wrong] श्यामनारायण पांडेय [/wrong]
[wrong] सुभद्रा कुमारी चौहान [/wrong]
[wrong] माखनलाल चतुर्वेदी [/wrong]
[answer] केसरी सिंह बारहठ
[explanation] उत्तर: ‘मेवाड़ के केसरी सिंह बारहठ ने ‘प्रताप चरित’ (संवत् 1992) के माध्यम से वीररस की परंपरा को जीवित रखा। [/explanation]
[/answer]
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[question] 38. शुक्ल जी ने तृतीय उत्थान में खड़ी बोली की कितनी मुख्य धाराएँ बताई हैं? [/question]
[answer] तीन
[explanation] उत्तर: ‘शुक्ल जी ने तृतीय उत्थान में खड़ी बोली की तीन स्पष्ट धाराएँ मानी हैं: द्विवेदीकालीन परिष्कृत धारा, छायावाद और स्वाभाविक स्वच्छंदता। [/explanation]
[/answer]
[wrong] दो [/wrong]
[wrong] चार [/wrong]
[wrong] पाँच [/wrong]
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[question] 39. ब्रजभाषा काव्य की धारा को जीवित रखने के लिए शुक्ल जी ने क्या सुझाव दिया है? [/question]
[wrong] उसे केवल प्राचीन विषयों तक सीमित रखना चाहिए [/wrong]
[wrong] केवल कठिन संस्कृत शब्दों का प्रयोग करना [/wrong]
[answer] वर्तमान भावों को ग्रहण करे और आधुनिक तथा सुबोध बने
[explanation] उत्तर: ‘शुक्ल जी चाहते थे कि ब्रजभाषा वर्तमान भावों को ग्रहण करे और अपनी भाषा को आधुनिक और सुबोध बनाए। [/explanation]
[/answer]
[wrong] केवल ग्रामीण शब्दों का प्रयोग करना [/wrong]
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[question] 40. ‘नक्षत्र-निपात’, ‘पुष्पांजलि’ और ‘स्वयं आगत’ कविताएँ किस कवि की रचनाएँ हैं? [/question]
[wrong] पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी [/wrong]
[answer] मैथिलीशरण गुप्त
[explanation] उत्तर: ‘ये गुप्त जी की प्रारंभिक गीतात्मक रचनाएँ हैं जो छायावाद के आगमन से पूर्व खड़ी बोली में नवीन प्रयोग कर रही थीं। [/explanation]
[/answer]
[wrong] मुकुटधर पांडेय [/wrong]
[wrong] बदरीनाथ भट्ट [/wrong]
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[question] 41. द्वितीय उत्थान की कविता का मुख्य स्वरूप शुक्ल जी ने कैसा माना है? [/question]
[wrong] अत्यंत श्रृंगारिक और दरबारी [/wrong]
[wrong] केवल कल्पना प्रधान [/wrong]
[answer] गद्यवत, रूखा और इतिवृत्तात्मक
[explanation] उत्तर: शुक्ल जी के अनुसार द्वितीय उत्थान में भाषा की सफाई तो आई, लेकिन कविता ‘इतिवृत्तात्मक’ और बाह्यार्थ निरूपक हो गई थी। [/explanation]
[/answer]
[wrong] छायावादी और रहस्यमयी [/wrong]
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[question] 42. निराला जी की मुक्त छंद वाली रचनाओं पर प्रभाव डालने वाली ‘लीव्स ऑफ ग्रास’ के रचयिता कौन हैं? [/question]
[answer] वाल्ट व्हिटमैन
[explanation] उत्तर: निराला जी की छंद-मुक्त रचनाओं को शुक्ल जी ने अमेरिका के कवि वाल्ट व्हिटमैन की नकल बताया है। [/explanation]
[/answer]
[wrong] टी.एस. एलियट [/wrong]
[wrong] शेली [/wrong]
[wrong] वर्ड्सवर्थ [/wrong]
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[question] 43. शुक्ल जी के अनुसार ‘छायावाद’ का नाम किस आधार पर पड़ा? [/question]
[wrong] कबीर की साखियों की छाया के कारण [/wrong]
[answer] ईसाई संतों के ‘छायाभास’ और यूरोपीय प्रतीकवाद के अनुकरण पर
[explanation] उत्तर: शुक्ल जी के अनुसार यूरोपीय काव्य क्षेत्र में प्रचलित ‘Phantasmata’ और ‘Symbolism’ के अनुकरण पर बँग्ला में इन्हें ‘छायावाद’ कहा गया, जहाँ से यह हिंदी में आया। [/explanation]
[/answer]
[wrong] छाया जैसी अस्पष्टता के कारण [/wrong]
[wrong] प्रकृति की छाया के वर्णन के कारण [/wrong]
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[question] 44. ‘कला का उद्देश्य कला ही है’ के प्रभाव से काव्य को कैसा माना जाने लगा? [/question]
[wrong] समाज सुधार का साधन [/wrong]
[wrong] राजनीतिक प्रचार का माध्यम [/wrong]
[wrong] केवल मनोरंजन की वस्तु [/wrong]
[answer] एक लोकातीत वस्तु
[explanation] उत्तर: कलावाद के प्रभाव में काव्य को जीवन से अलग एक ‘लोकातीत वस्तु’ घोषित कर दिया गया, जिसका मूल्य जीवन की कसौटी पर नहीं कसा जा सकता। [/explanation]
[/answer]
[/quiz]
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[question] 45. शुक्ल जी ने छायावाद के किन दो कवियों को इस धारा का वास्तविक प्रवर्तक माना है? [/question]
[wrong] पंत और महादेवी [/wrong]
[wrong] दिनकर और नवीन [/wrong]
[answer] मैथिलीशरण गुप्त और मुकुटधर पांडेय
[explanation] उत्तर: शुक्ल जी का मानना है कि छायावाद जिस शैली की ओर बढ़ रहा था, उसका स्वतंत्र विकास गुप्त जी और मुकुटधर पांडेय की रचनाओं में पहले ही शुरू हो चुका था। [/explanation]
[/answer]
[wrong] प्रसाद और निराला [/wrong]
[/quiz]
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[question] 46. छायावादी कवियों द्वारा प्रयुक्त ‘शराब, प्याला, साकी’ आदि शब्द किन कवियों की परंपरा से आए? [/question]
[wrong] अंग्रेजी रोमांटिक कवियों से [/wrong]
[wrong] संस्कृत कवियों से [/wrong]
[answer] सूफी कवियों से
[explanation] उत्तर: शुक्ल जी के अनुसार छायावाद में ‘अज्ञात प्रियतम’ के लिए सूफी कवियों के पुराने सामान (शराब, प्याला आदि) भी इकट्ठे किए गए। [/explanation]
[/answer]
[wrong] रीतिकालीन कवियों से [/wrong]
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[question] 47. ‘छायावाद’ शब्द का प्रयोग शुक्ल जी ने किन दो अर्थों में स्वीकार किया है? [/question]
[answer] रहस्यवाद और प्रतीकवाद
[explanation] उत्तर: शुक्ल जी के अनुसार यह शब्द ‘रहस्यवाद’ के साथ-साथ ‘प्रतीकवाद’ या विशेष काव्यशैली के अर्थ में प्रयुक्त होता है। [/explanation]
[/answer]
[wrong] यथार्थवाद और आदर्शवाद [/wrong]
[wrong] प्रकृतिवाद और समाजवाद [/wrong]
[wrong] भक्ति और श्रृंगार [/wrong]
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[question] 48. पंत जी की किस रचना में ‘सुख-दुख के साथ हृदय का सामंजस्य’ और ‘जीवन की गति में लय’ का अनुभव मिलता है? [/question]
[answer] गुंजन
[explanation] उत्तर: शुक्ल जी के अनुसार ‘गुंजन’ में पंत जी ने सौंदर्य चयन से आगे बढ़कर जीवन के नित्य स्वरूप पर दृष्टि डाली है। [/explanation]
[/answer]
[wrong] पल्लव [/wrong]
[wrong] वीणा [/wrong]
[wrong] ग्रंथि [/wrong]
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[question] 49. निराला की ‘तुम और मैं’ कविता में किस भाव का गान किया गया है? [/question]
[wrong] किसान की व्यथा [/wrong]
[answer] रहस्यवादी
[explanation] उत्तर: इस कविता में निराला ने रहस्यवादी तत्वों और आध्यात्मिक नाद का चित्रण किया है। (नाद वेग ओंकार सार) [/explanation]
[/answer]
[wrong] देशभक्ति [/wrong]
[wrong] प्रकृति चित्रण [/wrong]
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[question] 50. शुक्ल जी ने ‘स्वच्छंदतावाद’ के पथ पर चलने वाले कवियों में किसका उल्लेख किया है? [/question]
[wrong] केवल जयशंकर प्रसाद [/wrong]
[answer] रामनरेश त्रिपाठी और मुकुटधर पांडेय
[explanation] उत्तर: शुक्ल जी इन कवियों को कृत्रिमता से दूर ‘स्वाभाविक स्वच्छंदता’ के मार्ग का पथिक मानते हैं। [/explanation]
[/answer]
[wrong] केवल महादेवी वर्मा [/wrong]
[wrong] केवल सुभद्राकुमारी चौहान [/wrong]
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[question] 51. तृतीय उत्थान में खड़ी बोली की जो तीन धाराएँ शुक्ल जी ने बताईं, उनमें से एक कौन-सी नहीं है? [/question]
[wrong] द्विवेदीकाल की परिष्कृत धारा [/wrong]
[wrong] छायावाद [/wrong]
[wrong] स्वाभाविक स्वच्छंदता [/wrong]
[answer] रीतिकालीन श्रृंगारिक धारा
[explanation] उत्तर: शुक्ल जी ने केवल तीन धाराएँ मानी हैं: द्विवेदीकालीन, छायावादी और स्वाभाविक स्वच्छंदता। [/explanation]
[/answer]
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[question] 52. शुक्ल जी के अनुसार ‘छायावाद’ के भीतर अर्थभूमि का क्या हुआ? [/question]
[wrong] बहुत विस्तार हुआ [/wrong]
[wrong] वही रही जो द्विवेदी काल में थी [/wrong]
[wrong] केवल राजनीति तक सीमित रही [/wrong]
[answer] बहुत संकोच हो गया
[explanation] उत्तर: शुक्ल जी की आलोचना है कि छायावाद शैली पर तो केंद्रित रहा, पर उसकी अर्थभूमि (विषय) संकुचित होकर केवल अज्ञेय प्रियतम के प्रेम तक सीमित रह गई। [/explanation]
[/answer]
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[question] 53. शुक्ल जी ने अपने किस काव्य में ब्रजभाषा को ‘चलती ब्रजभाषा’ के मेल में लाने का प्रयास किया? [/question]
[answer] बुद्ध चरित
[explanation] उत्तर: शुक्ल जी ने ‘बुद्ध चरित’ (संवत् 1979) में ब्रजभाषा का परिष्कार कर उसे आधुनिक भावों के योग्य बनाया। [/explanation]
[/answer]
[wrong] रामचंद्रोदय [/wrong]
[wrong] प्रताप चरित [/wrong]
[wrong] वीर सतसई [/wrong]
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[question] 54. ‘प्रताप चरित’ (वीररस का उत्कृष्ट काव्य) के रचयिता कौन हैं? [/question]
[wrong] श्यामनारायण पांडेय [/wrong]
[answer] केसरी सिंह बारहठ
[explanation] उत्तर: मेवाड़ के केसरी सिंह बारहठ ने संवत् 1992 में इस वीररस प्रधान काव्य की रचना की। [/explanation]
[/answer]
[wrong] सुभद्रा कुमारी चौहान [/wrong]
[wrong] रामनाथ ज्योतिषी [/wrong]
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[question] 55. ‘जगत और जीवन के स्वरूप की वह अनुभूति जो काव्य को दीर्घायु प्रदान करती है’ – शुक्ल जी के अनुसार किसमें कम होती जा रही है? [/question]
[wrong] ब्रजभाषा कवियों में [/wrong]
[wrong] द्विवेदीयुगीन कवियों में [/wrong]
[answer] परिवर्तनवाद के प्रदर्शन वाले कवियों में
[explanation] उत्तर: शुक्ल जी का मानना है कि केवल ‘क्रांति’ और ‘परवर्तन’ के प्रदर्शन मात्र से काव्य में वह गहराई नहीं आती जो उसे चिरस्थायी बनाए। [/explanation]
[/answer]
[wrong] छायावाद में [/wrong]
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[question] 56. ‘लहर’ में प्रसाद जी ने किस प्रकार की शैली अपनाई है? [/question]
[wrong] केवल विरह वेदना [/wrong]
[answer] ऐतिहासिक वृत्त लेकर विस्तृत अर्थभूमि वाली छायावादी शैली
[explanation] उत्तर: ‘लहर’ के माध्यम से प्रसाद ने छायावाद को ऐतिहासिक और व्यापक धरातल पर खड़ा किया। [/explanation]
[/answer]
[wrong] शुद्ध इतिवृत्तात्मक शैली [/wrong]
[wrong] ब्रजभाषा की परंपरागत शैली [/wrong]
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[question] 57. शुक्ल जी के अनुसार भारतीय काव्य किस सिद्धांत पर आधारित रहा है? [/question]
[wrong] व्यक्तिवाद [/wrong]
[wrong] असामंजस्य [/wrong]
[wrong] कलावाद [/wrong]
[answer] सामंजस्य
[explanation] उत्तर: भारतीय काव्य परंपरा हमेशा लोक-हृदय के मेल और सामंजस्य पर जोर देती रही है। [/explanation]
[/answer]
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[question] 58. ‘जूही की कली’ और ‘शेफालिका’ निराला की कैसी रचनाएँ हैं? [/question]
[wrong] प्रगतिवादी [/wrong]
[wrong] सामाजिक यथार्थवादी [/wrong]
[answer] उन्मद प्रणय चेष्टाओं के पुष्पचित्र
[explanation] उत्तर: ये निराला की वे रचनाएँ हैं जिनमें प्रकृति के माध्यम से श्रृंगारिक और कामुक चेष्टाओं का वर्णन है। [/explanation]
[/answer]
[wrong] केवल दार्शनिक [/wrong]
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[question] 59. ‘ब्रजभारती’ किसकी रचना है जिसमें ब्रजभाषा नई सज-धज के साथ दिखी? [/question]
[answer] उमाशंकर वाजपेयी ‘उमेश’
[explanation] उत्तर: ‘उमेश’ जी की ‘ब्रजभारती’ तृतीय उत्थान की ब्रजभाषा की एक नवीन शैली की रचना है। [/explanation]
[/answer]
[wrong] वियोगी हरि [/wrong]
[wrong] रायकृष्णदास [/wrong]
[wrong] रत्नाकर [/wrong]
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उम्मीद है ये प्रश्न आपकी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक सिद्ध होंगे।








