hindi sahity quiz 03

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हिंदी भाषा और साहित्य क्विज

दोस्तों हिंदी साहित्य से संबंधित यहाँ पर 30 प्रश्न दिए जा रहे हैं

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[question]निम्नलिखित में से कौन-सा शब्दों के वर्गीकरण का आधार नहीं है?
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[wrong]रचना
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[wrong]प्रयोग
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[wrong]अर्थ
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[answer]व्याख्या
[explanation]शब्दों का वर्गीकरण पाँच आधारों पर किया जाता है- व्युत्पत्ति/रचना, स्रोत/उत्पत्ति, अर्थ, प्रयोग और व्याकरणिक प्रकार्य।[/explanation]
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[question]अर्थ के आधार पर शब्द के कितने भेद किए जाते हैं?
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[wrong]तीन
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[wrong]दो
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[wrong]पाँच
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[answer]चार
[explanation]अर्थ के आधार पर शब्द के चार भेद किए जाते हैं- एकार्थी, अनेकार्थी, पर्यायवाची और विलोम शब्द।[/explanation]
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[question]निम्नलिखित में असंगत युग्म चुनिए:
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[wrong]भौंरा- मधुकर
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[wrong]कनक- कंचन
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[wrong]समीर- अनिल
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[answer]नीरज- वारिद
[explanation]वारिद ‘बादल’ का पर्यायवाची शब्द है जबकि नीरज के प्रमुख पर्यायवाची शब्द- पानी, जलज, वारि, अम्बुज आदि हैं।[/explanation]
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[question]‘ऊँट के मुँह में जीरा’ लोकोक्ति का सही अर्थ है:
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[wrong]कम खाना मिलना
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[wrong]ऊँट को खाना खिलाना
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[wrong]अपेक्षा से अधिक न मिलना
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[answer]आवश्यकता अधिक लेकिन मिलना बहुत कम
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[question]निम्नलिखित में असंगत युग्म चुनिए:
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[wrong]अवनति – उन्नति
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[wrong]अंतरंग – बहिरंग
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[wrong]अक्षम – सक्षम
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[answer]आविर्भाव – विभाव
[explanation]आविर्भाव का विलोम शब्द ‘तिरोभाव’ है।[/explanation]
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[question]‘ऊँगली पर नाचना’ मुहावरे का सही अर्थ है:
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[wrong]ऊँगली के संकेत की दिशा में चलना
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[wrong]किसी की बात न मानना
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[wrong]ऊँगली दिखाना
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[answer]किसी के इशारे पर चलना
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[question]निम्नलिखित में तत्सम शब्द नहीं है:
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[wrong]अंगुष्ठ
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[wrong]अक्षि
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[wrong]आशिष
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[answer]पंख
[explanation]पंख ‘तद्भव शब्द’ है। हिंदी भाषा में संस्कृत के जो शब्द ज्यों के त्यों प्रयुक्त होते हैं उन्हें तत्सम शब्द और जो प्रकृति और संस्कृत से विकृति होकर आए हैं उन्हें तद्भव शब्द कहते हैं।[/explanation]
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[question]निम्नलिखित में असंगत युग्म है:
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[wrong]कर का मनका डारि के, मन का मनका फेर – यमक
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[wrong]तरनि तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाए – अनुप्रास
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[wrong]चरण कमल बन्दौ हरिराई – रूपक
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[answer]तेरी बरछी ने बर छीने हैं खलन के – श्लेष अलंकार
[explanation]जहाँ कोई शब्द एक से अधिक बार आये और उनके अर्थ भिन्न-भिन्न हो वहां ‘यमक अलंकार’ होता है। यहाँ पर पहले ‘बरछी ने’ का अर्थ ‘बरछी नामक हथियार ने’ है दूसरे ‘बर छीने’ का अर्थ ‘श्रेष्ट योद्धा छीन लिए’ है।[/explanation]
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[question]निम्नलिखित में से असंगत युग्म का चयन कीजिए:
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[wrong]कपीश – स्वर संधि
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[wrong]वागीश – व्यंजन संधि
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[wrong]पुनर्रचना – विसर्ग संधि
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[answer]निस्संदेह – व्यंजन संधि
[explanation]’निस्संदेह’ (निः + सन्देह) में विसर्ग संधि है क्योंकि विसर्ग के बाद श, ष, स आने पर या तो विसर्ग यथावत रहता है या अपने से आगे वाला वर्ण हो जाता है।[/explanation]
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[question]कलिंजर के राजकुमार और आगमपुर की राजकुमारी की प्रेम कहानी का वर्णन निम्नलिखित में से किस रचना में किया गया है?
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[wrong]ज्ञानदीप
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[wrong]मधुमालती
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[wrong]चित्रावली
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[answer]इंद्रावती
[explanation]कलिंजर के राजकुमार और आगमपुर की राजकुमारी की प्रेम कहानी का वर्णन नूर मुहम्मद कृत इंद्रावती (1744 ई.) में किया गया है।[/explanation]
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[question]“मीराबाई की उपासना ‘माधुर्यभाव’ की थी अर्थात्‌ वे अपने इष्टदेव श्रीकृष्ण की भावना प्रियतम या पति के रूप में करती थीं… इस भाव की उपासना में रहस्य का समावेश अनिवार्य है।” प्रस्तुत कथन किस आलोचक का है?
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[wrong]मिश्रबंधु
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[wrong]रामकुमार वर्मा
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[wrong]नंददुलारे वाजपेयी
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[answer]रामचंद्र शुक्ल
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[question]“धर्म का प्रवाह कर्म, ज्ञान और भक्ति इन तीन धाराओं में रहता है। इन तीनों के सामंजस्य से धर्म अपनी पूर्ण सजीव दशा में रहता है।” प्रस्तुत पंक्तियों के लेखक हैं:
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[wrong]हजारीप्रसाद द्विवेदी
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[wrong]राहुल सांकृत्यायन
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[wrong]जार्ज ग्रियर्सन
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[answer]रामचंद्र शुक्ल
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[question]“बिहारी ने इस सतसई के अतिरिक्त और कोई ग्रंथ नहीं लिखा। यही एक ग्रंथ उनकी इतनी बड़ी कीर्ति का आधार है। यह बात साहित्य क्षेत्र के इस तथ्य की घोषणा कर रहा है कि किसी कवि का यश उसकी रचनाओं के परिमाण के हिसाब से नहीं होता, गुण के हिसाब से होता है।”- ये पंक्तियाँ किस आलोचक की हैं?
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[wrong]विश्वनाथ प्रसाद मिश्र
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[wrong]बच्चन सिंह
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[wrong]नन्ददुलारे बाजपेई
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[answer]रामचंद्र शुक्ल
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[question]“सूर समाना चंद में दहूँ किया घर एक।
मन का चिंता तब भया कछु पुरबिला लेख॥”
उपयुक्त दोहा के रचयिता हैं:
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[wrong]नामदेव
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[wrong]गुरु नानक
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[wrong]सूरदास
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[answer]कबीरदास
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[question]“मोरा जोबना नवेलरा भयो है गुलाल, कैसे गर दीनी कस मोरी माल।
सूनी सेज डरावन लागै। बिरहा अगिन मोहे डस डस जाय।”
उपर्युक्त दोहा किस कवि का है?
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[wrong]विद्यापति
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[wrong]कबीर
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[wrong]जायसी
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[answer]अमीर खुसरो
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[question]“सजनि, रोता है मेरा गान।
प्रिय तक नहीं पहुँच पाती है उसकी कोई तान।”
-उपर्युक्त काव्य पंक्तियाँ किसकी हैं?
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[wrong]अम्बिका दत्त व्यास
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[wrong]ठाकुर जगमोहन सिंह
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[wrong]श्रीधर पाठक
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[answer]मैथिलीशरण गुप्त
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[question]“जो रहीम गति दीप की, कुल कपूत गति सोय।
बारे उजियारो लगे, बढ़े अँधेरो होय॥
-प्रस्तुत दोहे में अलंकार है:
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[wrong]यमक
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[wrong]अनुप्रास
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[wrong]उपमा
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[answer]श्लेष
[explanation]जब किसी पंक्ति में एक ही शब्द के अनेक अर्थ होते हैं तब वहाँ ‘श्लेष अलंकार होता है। यहाँ पर बारे (लड़कपन में, जलाने पर) और बढ़े (बड़ा होने पर, बुझ जाने पर) शब्द के अनेक अर्थ हैं।[/explanation]
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[question]स्थापना (R): प्रिय के वियोग में जो दुःख होता है उसमें कभी-कभी दया या करुणा का कुछ अंश मिला रहता है।
तर्क (R): करुणा का विषय दूसरे का दुःख नहीं है।
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[wrong](A) और (R) दोनों सही हैं
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[wrong](A) और (R) दोनों गलत हैं
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[wrong](A) गलत है और (R) सही है
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[answer](A) सही है और (R) गलत है
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[question]स्थापना (R): काव्य में अर्थग्रहण मात्र से काम नहीं चलता, बिम्बग्रहण अपेक्षित होता है।
तर्क (R): बिम्बग्रहण निर्दिष्ट, गोचर और मूर्त विषय का ही हो सकता है।
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[wrong](A) और (R) दोनों गलत हैं
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[wrong](A) सही है और (R) गलत है
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[wrong](A) गलत है और (R) सही है
[/wrong]

[answer](A) और (R) दोनों सही हैं
[/answer]

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[question]स्थापना (R): मनुष्येतर बाह्य प्रकृति का आलंबन के रूप में ग्रहण हमारे यहाँ संस्कृत के प्राचीन प्रबंध-काव्यों के बीच-बीच में ही पाया जाता है।
तर्क (R): वहाँ प्रकृति का ग्रहण आलम्बन के रूप में हुआ है।
[/question]

[wrong](A) और (R) दोनों गलत हैं
[/wrong]

[wrong](A) सही है और (R) गलत है
[/wrong]

[wrong](A) गलत है और (R) सही है
[/wrong]

[answer](A) और (R) दोनों सही हैं
[/answer]

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[question]स्थापना (R): कवि-वाणी से हम संसार के सुख-दुःख, आनंद-क्लेश आदि का शुद्ध स्वार्थमुक्त रूप में अनुभव करते हैं।
तर्क (R): इस प्रकार के अनुभव के अभ्यास से ह्रदय का बंधन खुलता है।
[/question]

[wrong](A) और (R) दोनों गलत हैं
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[wrong](A) सही है और (R) गलत है
[/wrong]

[wrong](A) गलत है और (R) सही है
[/wrong]

[answer](A) और (R) दोनों सही हैं
[/answer]

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[question]स्थापना (R): मनुष्यों के रूप, व्यापर या मनोवृत्तियों के सादृश्य की दृष्टि से जो प्राकृतिक वस्तु-व्यापार लाए जाते हैं उनका स्थान भी गौण ही समझना चाहिए।
तर्क (R): प्राकृतिक वस्तु-व्यापारों का नर-संबंधी भावना को तीव्र करने से कोई संबंध नहीं है।
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[wrong](A) और (R) दोनों सही हैं
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[wrong](A) और (R) दोनों गलत हैं
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[wrong](A) गलत है और (R) सही है
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[answer](A) सही है और (R) गलत है
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नीचे दिए गए गद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उससे सम्बंधित प्रश्नों 05 के उत्तर दिए गए विकल्पों में से दीजिए:
लोक में फैली दु:ख की छाया को हटाने में ब्रह्म की आनंदकला, जो शक्तिमय रूप धारण करती है, उसकी भीषणता में भी अद्भुत मनोहरता, कटुता में भी अपूर्व मधुरता, प्रचंडता में भी गहरी आर्द्रता साथ लगी रहती है। विरूद्धों का यही सामंजस्य कर्मक्षेत्र का सौंदर्य है जिसकी ओर आकर्षित हुए बिना मनुष्य का हृदय नहीं रह सकता। इस सामंजस्य का और कई रूपों में भी दर्शन होता है। किसी कोट-पतलून-हैट वाले को धारा प्रवाह संस्कृत बोलते अथवा किसी पंडित-वेशधारी सज्जन को अंग्रेजी की प्रगल्भ वक्तृता देते सुन व्यक्तित्व का जो एक चमत्कार सा दिखाई पड़ता है उसकी तह में भी सामंजस्य का यही सौंदर्य समझना चाहिए। भीषणता और सरसता, कोमलता और कठोरता, कटुता और मधुरता, प्रचंडता और मृदुता का सामंजस्य ही लोकधर्म का सौंदर्य है। आदिकवि वाल्मीकि की वाणी इसी सौंदर्य के उद्धाटन महोत्सव का दिव्य संगीत है। सौंदर्य का यह उद्धाटन असौंदर्य का आवरण हटाकर होता है। धर्म और मंगल की यह ज्योति अधर्म और अमंगल की घटा को फाड़ती हुई फूटती है। इससे कवि हमारे सामने असौंदर्य, अमंगल, अत्याचार, क्लेश इत्यादि भी रखता है; रोष, हाहाकार और ध्वंस का दृश्य भी लाता है। पर सारे भाव, सारे रूप और सारे व्यापार भीतर भीतर आनंद-काल के विकास में ही योग देते पाए जाते हैं। यदि किसी ओर उन्मुख ज्वलंत रोष है तो उसके और सब ओर करुण दृष्टि फैली दिखाई पड़ती है। यदि किसी ओर ध्वंस और हाहाकार है तो सब ओर उसका सहगामी रक्षा और कल्याण है। व्यास ने भी अपने ‘जयकाव्य’ में अधर्म के पराभव और धर्म की जय का सौंदर्य प्रत्यक्ष किया था।

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[question]निम्मलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
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[wrong]ब्रह्म की आनंदकला विध्वंस में भी देखी जा सकती है
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[wrong]भीषणता कभी-कभी अद्भुत मनोहरता का रूप लिए होती है?
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[wrong]सौंदर्य का उद्घाटन असौंदर्य का आवरण हटाकर नहीं होता
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[answer]आदि-कवि वाल्मीकि की वाणी सौंदर्य के उद्घाटन महोत्सव का दिव्य संगीत है
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[question]निम्नलिखित में से लोकधर्म का सौंदर्य है:
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[wrong]धाराप्रवाह संस्कृत बोलना
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[wrong]अंग्रेजी की प्रगल्भता
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[wrong]सरसता और कोमलता का सामंजस्य
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[answer]कटुता और मधुरता का सामंजस्य
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[question]गद्यांश के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है?
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[wrong]सामंजस्य का और कई रूपों में भी दर्शन होता है
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[wrong]रोष हाहाकार और ध्वंस का दृश्य भी लाता है
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[wrong]ज्वलंत रोष के सब ओर करुण दृष्टि दिखाई पड़ती है
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[answer]केवल सरसता और मृदुता के बीच तालमेल सामंजस्य कहलाता है
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[question]आदि-कवि व्यास ने अपने ‘जयकाव्य’ में किसका सौंदर्य प्रत्यक्ष किया था?
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[wrong]ध्वंस और हाहाकार
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[wrong]धर्म के ध्वंस अधर्म की जय
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[wrong]अन्याय के अंत और सत्य की जय
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[answer]अधर्म के पराभव और धर्म की जय
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[question]निम्नलिखित में से विरुद्धों का सामंजस्य नहीं है:
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[wrong]कटुता में भी अपूर्व मधुरता
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[wrong]प्रचण्डता में भी गहरी आर्द्रता
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[wrong]भीषणता में भी अद्भुत मनोहरता
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[answer]रहस्य में भी आध्यात्मिकता
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