चंद्रगुप्त नाटक MCQ | 50 महत्त्वपूर्ण प्रश्न

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UPESSC Hindi Exam Based MCQs Quiz
UPESSC हिंदी परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तरी

जयशंकर प्रसाद का ‘चन्द्रगुप्त’ एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक नाटक है। इसमें चन्द्रगुप्त के संघर्ष और उत्कर्ष की कथा है। चाणक्य की नीति और दूरदर्शिता इसकी प्रमुख धुरी है। यह नाटक राष्ट्रीय एकता और स्वतंत्रता का संदेश देता है।

इस क्विज में नाटक पर आधारित 50 बहुविकल्पीय प्रश्न हैं। ये प्रश्न पात्रों, संवादों, गीतों और घटनाक्रम आदि से जुड़े हैं। इनमें सुमेलन और कथन–कारण प्रश्न भी शामिल हैं। हर प्रश्न के साथ सही उत्तर और संक्षिप्त व्याख्या है। पहले स्वयं प्रश्न हल करें। फिर व्याख्या पढ़कर अपनी समझ जाँचें।

1. निम्नलिखित घटनाओं को संबंधित पात्रों से सुमेलित कीजिए।
सूची–I (घटना) – सूची–II (कर्ता)
(a) बन्दीगृह से चाणक्य को मुक्त कराना – (i) शकटार
(b) व्याघ्र से चंद्रगुप्त की रक्षा – (ii) कल्याणी
(c) नन्द का वध – (iii) चंद्रगुप्त
(d) पर्वतेश्वर का वध – (iv) सिल्यूकस
(a)–(iv), (b)–(iii), (c)–(i), (d)–(ii)
(a)–(iii), (b)–(iv), (c)–(ii), (d)–(i)
(a)–(iii), (b)–(iv), (c)–(i), (d)–(ii)
चंद्रगुप्त चाणक्य को मुक्त कराता है; सिल्यूकस चंद्रगुप्त की रक्षा करता है; शकटार नन्द और कल्याणी पर्वतेश्वर का वध करती है।
(a)–(i), (b)–(ii), (c)–(iii), (d)–(iv)
2. “महत्त्वाकांक्षा के दाँव पर मनुष्यता सदैव हारी है।” इस कथन के संदर्भ में कौन-सा तथ्य सही नहीं है?
यह टिप्पणी सुवासिनी करती है।
यह टिप्पणी कार्नेलिया अपने पिता सिल्यूकस से करती है। वह उन्हें महत्त्वाकांक्षा के कारण मनुष्यता खो देने से सावधान करती है।
वक्ता अपने पिता को विजय की लालसा से सावधान करती है।
कथन में मानवीय मूल्यों की चिन्ता है।
कथन साम्राज्य-विस्तार की अनियंत्रित आकांक्षा की आलोचना करता है।
3. कार्नेलिया के संदर्भ में कौन-सा तथ्य सही नहीं है?
वह भारतीय संगीत का अध्ययन करती है।
वह फिलिप्स के दुर्व्यवहार का समर्थन करती है।
कार्नेलिया फिलिप्स के दुर्व्यवहार का विरोध करती है। चंद्रगुप्त हस्तक्षेप करके उसकी रक्षा करता है।
वह राक्षस की प्रतिशोधपूर्ण राजनीति की आलोचना करती है।
अन्त में उसका संबंध चंद्रगुप्त से निश्चित होता है।
4. ‘चंद्रगुप्त’ नाटक की केंद्रीय राष्ट्रीय भावना क्या है?
क्षेत्रीय राज्यों का स्थायी अलगाव
राष्ट्रीय एकता और विदेशी अधीनता का प्रतिरोध
चाणक्य, चंद्रगुप्त, सिंहरण और अलका की गतिविधियाँ व्यापक भारतीय एकता की ओर बढ़ती हैं। क्षेत्रीय विभाजन को विदेशी आक्रमण के सामने कमजोरी के रूप में दिखाया गया है।
केवल राजवंश की प्रतिष्ठा की रक्षा
व्यक्तिगत प्रेम को राष्ट्रहित से ऊपर रखना
5. ‘नारी-पात्रों’ के संदर्भ में कौन-सा अभिमत ‘चंद्रगुप्त’ की विचारभूमि के अनुकूल नहीं है?
स्त्रियाँ केवल निष्क्रिय शृंगारिक पात्र हैं।
अलका का राष्ट्रीय जागरण, कल्याणी का प्रतिरोध और मालविका का आत्मबलिदान स्त्री-पात्रों की सक्रियता सिद्ध करते हैं।
स्त्रियाँ राष्ट्रीय जागरण में सक्रिय भूमिका निभाती हैं।
स्त्रियों में स्वाभिमान और प्रतिरोध की क्षमता है।
स्त्रियों के चरित्रों में त्याग और आत्मबलिदान मिलता है।
6. निम्नलिखित उद्धरणों को नाटक में आने के क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
(a) यह भारत मानवता की जन्मभूमि है।
(b) मालव और मागध को भूलकर जब तुम आर्यावर्त का नाम लोगे…
(c) विजयों की सीमा है, परन्तु अभिलाषाओं की नहीं।
(d) अरुण यह मधुमय देश हमारा।
(b)–(a)–(c)–(d)
(b)–(d)–(a)–(c)
ये उद्धरण क्रमशः प्रथम, द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ अंक से संबंधित हैं।
(d)–(c)–(a)–(b)
(c)–(b)–(d)–(a)
7. निम्नलिखित में से कौन-से कथन चंद्रगुप्त के हैं?
(a) मैं लोभ से, सम्मान से, या भय से किसी के पास नहीं जा सकता।
(b) आत्म-सम्मान के लिए मर-मिटना ही दिव्य जीवन है।
(c) गांधार आर्यावर्त से भिन्न नहीं है।
(d) भारतीय कृतघ्न नहीं होते।
केवल (a) और (b)
केवल (a) और (c)
केवल (c) और (d)
केवल (b) और (d)
दूसरा और चौथा कथन चंद्रगुप्त का है। पहला दाण्ड्यायन और तीसरा सिंहरण का है।
8. चंद्रगुप्त नाटक में चाणक्य के चरित्र का सर्वाधिक उपयुक्त मूल्यांकन कौन-सा है?
राजनीतिक दूरदर्शिता, संगठन-शक्ति और राष्ट्रहित के लिए दृढ़ संकल्प
चाणक्य की कठोरता और कूटनीति के पीछे व्यापक राजनीतिक उद्देश्य सक्रिय है। अन्त में सत्ता छोड़ने की उनकी तत्परता निजी पदलिप्सा से ऊपर उठने का संकेत देती है।
केवल व्यक्तिगत प्रतिशोध से संचालित निष्क्रिय व्यक्ति
राजवैभव और निजी सुख के प्रति पूर्ण समर्पण
विदेशी सत्ता पर निर्भर रहने की प्रवृत्ति
9. सूची–I को सूची–II से सुमेलित कीजिए।
सूची–I (पात्र) – सूची–II (अन्य नाम)
(a) चाणक्य – (i) पोरस
(b) वररुचि – (ii) अलक्षेन्द्र
(c) पर्वतेश्वर – (iii) विष्णुगुप्त
(d) सिकन्दर – (iv) कात्यायन
(a)–(iii), (b)–(i), (c)–(iv), (d)–(ii)
(a)–(iv), (b)–(iii), (c)–(i), (d)–(ii)
(a)–(iii), (b)–(iv), (c)–(ii), (d)–(i)
(a)–(iii), (b)–(iv), (c)–(i), (d)–(ii)
चाणक्य–विष्णुगुप्त, वररुचि–कात्यायन, पर्वतेश्वर–पोरस और सिकन्दर–अलक्षेन्द्र सही सुमेलन हैं।
10. चंद्रगुप्त नाटक की प्रमुख राजनीतिक घटनाओं का सही क्रम कौन-सा है?
नन्द का पतन → सिल्यूकस की पराजय → सिकन्दर का अभियान
सिल्यूकस की पराजय → सिकन्दर का अभियान → नन्द का पतन
सिकन्दर का अभियान → नन्द का पतन → सिल्यूकस की पराजय
कथानक पहले सिकन्दर के अभियान और उसके प्रतिरोध से आगे बढ़ता है। इसके बाद नन्द की सत्ता समाप्त होती है और अन्तिम चरण में चंद्रगुप्त सिल्यूकस को पराजित करता है।
नन्द का पतन → सिकन्दर का अभियान → सिल्यूकस की पराजय
11. कथन–कारण पर विचार कीजिए।
कथन (A): चाणक्य मालव और मागध की क्षेत्रीय पहचान से ऊपर व्यापक राष्ट्रीय एकता पर बल देते हैं।
कारण (R): परस्पर विभाजित भारतीय राज्यों के विदेशी विजेता द्वारा पददलित होने का खतरा है।
(A) कथन और कारण (R) दोनों सत्य हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
दोनों सत्य हैं और कारण सही व्याख्या करता है। विदेशी आक्रमण का संकट ही चाणक्य के एकता-सन्देश की तत्कालीन राजनीतिक पृष्ठभूमि है।
(A) कथन और कारण दोनों सत्य हैं, परन्तु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता।
(A) कथन सत्य है, परन्तु कारण (R) असत्य है।
(A) कथन असत्य है, परन्तु कारण (R) सत्य है।
12. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
(a) अन्त में राक्षस को मन्त्रित्व सौंपा जाता है।
(b) कल्याणी पर्वतेश्वर का वध करती है।
(c) ‘अरुण यह मधुमय देश हमारा’ अलका गाती है।
(d) मालविका सिन्धु देश की कुमारी है।
सही कथनों का समूह चुनिए।
केवल (a) और (c)
केवल (b) और (c)
केवल (a), (b) और (d)
तीसरा कथन गलत है, क्योंकि ‘अरुण यह मधुमय देश हमारा’ कार्नेलिया गाती है। अन्य तीन कथन सही हैं।
सभी (a), (b), (c) और (d)
13. निम्नलिखित घटनाओं का सही क्रम चुनिए।
(a) फिलिप्स से कार्नेलिया की रक्षा
(b) दाण्ड्यायन द्वारा चंद्रगुप्त के सम्राट बनने की भविष्यवाणी
(c) चंद्रगुप्त का सम्मिलित सेना का सेनापति चुना जाना
(d) सिल्यूकस द्वारा व्याघ्र से चंद्रगुप्त की रक्षा
(b)–(d)–(a)–(c)
(a)–(c)–(d)–(b)
(b)–(a)–(c)–(d)
(d)–(b)–(a)–(c)
वन में चंद्रगुप्त की रक्षा के बाद दाण्ड्यायन के आश्रम का प्रसंग आता है। कार्नेलिया की रक्षा और संयुक्त सैन्य नेतृत्व के प्रसंग बाद में हैं।
14. निम्नलिखित में से कौन-से कथन चाणक्य के हैं?
(a) ब्राह्मण एक सार्वभौम शाश्वत बुद्धि-वैभव है।
(b) राज्य किसी का नहीं है, सुशासन का है!
(c) यह साम्राज्य मगध का नहीं है, यह आर्य-साम्राज्य है।
(d) यह भारत मानवता की जन्मभूमि है।
केवल (a) और (b)
केवल (a) और (c)
पहला और तीसरा कथन चाणक्य का है। दूसरा अलका तथा चौथा कार्नेलिया का कथन है।
केवल (b) और (d)
केवल (c) और (d)
15. निम्नलिखित में से सही कथनों का समूह चुनिए।
(a) सिकन्दर के अभियान का प्रसंग नन्द के पतन से पहले आता है।
(b) आम्भीक अन्त तक अपने पूर्व आचरण पर अडिग रहता है।
(c) चंद्रगुप्त–कार्नेलिया का संबंध राजनीतिक मैत्री को स्थायित्व देने से भी जुड़ा है।
(d) मालविका नन्द की पुत्री है।
केवल (a) और (c)
पहला और तीसरा कथन सही हैं। आम्भीक में परिवर्तन होता है तथा नन्द की पुत्री कल्याणी है, मालविका नहीं।
केवल (a) और (b)
केवल (b) और (d)
केवल (c) और (d)
16. ‘चंद्रगुप्त’ नाटक के संदर्भ में कौन-सा एक तथ्य असत्य है?
नाटक चार अंकों में विभाजित है।
इसमें ऐतिहासिक आधार के साथ कल्पना का प्रयोग हुआ है।
अन्त में चंद्रगुप्त और सिल्यूकस के बीच मैत्री स्थापित होती है।
यवनों की पराजय के बाद कार्नेलिया आत्महत्या कर लेती है।
कार्नेलिया आत्महत्या का प्रयास करना चाहती है, लेकिन चंद्रगुप्त उससे छुरी ले लेता है। वह जीवित रहती है और अन्त में चंद्रगुप्त से उसका संबंध निश्चित होता है।
17. ‘चंद्रगुप्त’ नाटक के अन्तिम भाग की घटनाओं का सही क्रम चुनिए।
(a) सुवासिनी द्वारा चाणक्य पर आक्रमण रोकना
(b) सिल्यूकस द्वारा चंद्रगुप्त और कार्नेलिया के हाथ मिलाना
(c) सिल्यूकस की पराजय
(d) राक्षस के लिए चाणक्य का मन्त्रित्व छोड़ना
(a)–(c)–(d)–(b)
(b)–(d)–(a)–(c)
(c)–(a)–(b)–(d)
सिल्यूकस की पराजय के बाद तपोवन में चाणक्य पर आक्रमण का प्रयास होता है। फिर राक्षस को मन्त्रित्व और अन्तिम दृश्य में वैवाहिक संबंध की स्वीकृति मिलती है।
(d)–(c)–(a)–(b)
18. चंद्रगुप्त नाटक का प्रथम दृश्य कहाँ आरम्भ होता है?
मगध की राजसभा में
सिकन्दर के शिविर में
तक्षशिला के गुरुकुल के मठ में
आरम्भ में चाणक्य और सिंहरण का संवाद होता है। इसी दृश्य में तत्कालीन राजनीतिक संकट और राष्ट्रीय एकता की आवश्यकता सामने आती है।
दाण्ड्यायन के आश्रम में
19. मगध के बन्दीगृह से चाणक्य को कौन मुक्त कराता है?
वररुचि
चंद्रगुप्त
चंद्रगुप्त रक्तरंजित तलवार लेकर बन्दीगृह में प्रवेश करता है और चाणक्य के बन्धन काट देता है। इससे उसका साहस और गुरु के प्रति निष्ठा प्रकट होती है।
शकटार
सिंहरण
20. ‘चंद्रगुप्त’ में निम्नलिखित वार्तालाप किन पात्रों के मध्य हुआ है?
“मैं आपका स्वागत करने के लिए अपने शिविर में निमंत्रित करता हूँ।”
“अनुगृहीत हुआ! आर्य लोग किसी निमंत्रण को अस्वीकार नहीं करते।”
सिल्यूकस और चाणक्य
पर्वतेश्वर और सिंहरण
आम्भीक और चंद्रगुप्त
सिकन्दर और चंद्रगुप्त
दाण्ड्यायन के आश्रम में सिकन्दर चंद्रगुप्त को अपने शिविर में बुलाता है। चंद्रगुप्त विनम्रता के साथ निमंत्रण स्वीकार करता है।
21. निम्नलिखित में सुमेलित नहीं है-
चंद्रगुप्त – विजयों की सीमा है, परन्तु अभिलाषाओं की नहीं।
सिंहरण – गुरुकुल में केवल आचार्य की आज्ञा शिरोधार्य होती है।
कार्नेलिया – राज्य किसी का नहीं है, सुशासन का है!
अलका आम्भीक को समझाती है कि राज्य व्यक्तिगत अधिकार की वस्तु नहीं है। उसकी सार्थकता सुशासन और जन्मभूमि की सेवा में है।
चाणक्य – अकारण रक्तपात नीति-विरुद्ध है।
22. “विचारशील होने से मनुष्य होता है और निःस्वार्थ कर्म करने से वही देवता भी हो सकता है।” – ‘चंद्रगुप्त’ नाटक में यह कथन किस पात्र का है?
दाण्ड्यायन
चंद्रगुप्त
सिंहरण
आम्भीक के कर्तव्यपालन के संकल्प के बाद सिंहरण यह कहता है। उसके अनुसार विचार और निःस्वार्थ कर्म मनुष्य के नैतिक उत्कर्ष के आधार हैं।
वररुचि
23. ‘चंद्रगुप्त’ नाटक के कथन–कारण पर विचार कीजिए।
कथन (A): मालविका चंद्रगुप्त की रक्षा के लिए उसके स्थान पर शय्या पर रहकर प्राण देती है।
कारण (R): मालविका मगध-सम्राट नन्द की पुत्री है।
(A) कथन और कारण (R) दोनों सत्य हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(A) कथन और कारण दोनों सत्य हैं, परन्तु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता।
(A) कथन सत्य है, परन्तु कारण (R) असत्य है।
मालविका का आत्मबलिदान सत्य है, लेकिन वह नन्द की पुत्री नहीं है। नन्द की पुत्री कल्याणी है; मालविका सिन्धु देश की कुमारी है।
(A) कथन असत्य है, परन्तु कारण (R) सत्य है।
24. ‘चंद्रगुप्त’ नाटक के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए-
(a) इसका प्रकाशन 1930 ई. में हुआ था।
(b) इसमें कुल 44 दृश्य हैं।
(c) यह एक ऐतिहासिक नाटक है।
(d) यह चार अंकों में विभाजित है।
इनमें से कौन-सा विकल्प सही है-
केवल (a) और (b)
केवल (b) और (c)
केवल (b), (c) और (d)
चंद्रगुप्त नाटक का प्रकाशन 1931 ई. में हुआ था। ऐतिहासिक पात्रों और घटनाओं के साथ प्रसाद ने कल्पना का भी प्रयोग किया है। नाटक के चारों अंकों में कुल 44 दृश्य हैं- प्रथम अंक में 11, द्वितीय में 10, तृतीय में 9 और चतुर्थ में 14।
(a), (b), (c) और (d)
25. ‘चंद्रगुप्त’ नाटक में ‘राक्षस’ के संदर्भ में कौन-सा कथन असत्य है?
नाटक के अन्त में चाणक्य उसे मृत्युदण्ड दिलाते हैं।
अन्त में चाणक्य राक्षस के लिए अपना मन्त्रित्व छोड़ते हैं। राजनीतिक प्रतिद्वन्द्विता का समाधान समन्वय द्वारा होता है।
वह आरम्भ में नन्द का अमात्य है।
उसका सुवासिनी से प्रेम-संबंध है।
वह सिल्यूकस के पक्ष से जुड़ता है।
26. “अन्य देश मनुष्यों की जन्मभूमि हैं, यह भारत मानवता की जन्मभूमि है।” ‘चंद्रगुप्त’ नाटक में यह कथन किसका है?
अलका
मालविका
सुवासिनी
कार्नेलिया
कार्नेलिया भारत के प्राकृतिक सौन्दर्य, ज्ञान, त्याग और प्रेम से प्रभावित है। उसका कथन भारत के प्रति सांस्कृतिक आत्मीयता व्यक्त करता है।
27. ‘चंद्रगुप्त’ नाटक में नन्द की सभा में अपमानित होने पर चाणक्य क्या प्रतिज्ञा करते हैं?
फिर कभी राजनीति में भाग न लेने की
यवनों की सेवा स्वीकार करने की
तक्षशिला का विनाश करने की
नन्दकुल के नाश तक शिखा न बाँधने की
नन्द के आदेश पर प्रतिहारी चाणक्य की शिखा पकड़कर घसीटता है। चाणक्य अपनी खुली शिखा को नन्दकुल के विनाश की प्रतिज्ञा से जोड़ देते हैं।
28. ‘चंद्रगुप्त’ नाटक के निम्नलिखित कथनों में असत्य कथन है?
कार्नेलिया यवन सेनापति सिल्यूकस की पुत्री है।
मालविका मूलतः मालव की कुमारी है।
मालविका मूलतः सिन्धु देश की कुमारी है। मालव में रहने के कारण उसे मालव की राजकुमारी नहीं कहा जा सकता है। सुवासिनी मगध के मन्त्री शकटार की पुत्री है। कल्याणी मगध की राजकुमारी और नन्द की पुत्री है। कार्नेलिया यवन सेनापति सिल्यूकस की पुत्री है।
कल्याणी नन्द की पुत्री है।
सुवासिनी शकटार की पुत्री है।
29. ‘चंद्रगुप्त’ नाटक के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए-
(a) दाण्ड्यायन निर्भीक तपस्वी हैं।
(b) नन्द का वध चंद्रगुप्त करता है।
(c) आम्भीक तक्षशिला का राजकुमार है।
(d) अलका आम्भीक की बहन है।
इनमें से कौन-सा विकल्प सही है-
केवल (a) और (b)
केवल (b) और (c)
केवल (a),(c)और (d)
चंद्रगुप्त नन्द को बन्दी बनाता है, लेकिन उसका वध शकटार करता है। दाण्ड्यायन निर्भीक तपस्वी है, जो सत्ता और वैभव से प्रभावित हुए बिना आत्मिक स्वतंत्रता का महत्त्व देता है।
(a),(b),(c)और (d)
30. निम्नलिखित वार्तालाप किन पात्रों के मध्य हुआ है?
“तुम्हारे देश में तो सुना है कि ब्राह्मण जाति बड़ी तपस्वी और त्यागी है।”
“हाँ कल्याणी, वह मेरे पूर्वजों का गौरव है। किन्तु हम लोग तो बौद्ध हैं।”
कार्नेलिया और राक्षस
यह वार्तालाप कपिशा में होता है। यहाँ ‘कल्याणी’ सम्बोधन कार्नेलिया के लिए है; इसे नन्द की पुत्री कल्याणी नहीं समझना चाहिए।
कल्याणी और राक्षस
अलका और चाणक्य
सुवासिनी और वररुचि
31. चंद्रगुप्त नाटक में मालविका के संदर्भ में कौन-सा कथन असत्य है?
वह सिन्धु देश की कुमारी है।
वह पुल का मानचित्र अलका को देती है।
वह चंद्रगुप्त की रक्षा के लिए आत्मबलिदान करती है।
‘हिमाद्रि तुंग शृंग से’ का समवेत गायन उसके नेतृत्व में होता है।
‘हिमाद्रि तुंग शृंग से’ का गायन अलका के नेतृत्व में होता है। मालविका से ‘मधुप कब एक कली का है!’ जैसे गीत सम्बद्ध हैं।
32. निम्नलिखित गीतों को उनसे सम्बद्ध गायिका अथवा गायन का नेतृत्व करने वाली पात्र से सुमेलित कीजिए।
सूची–I (गीत) – सूची–II (पात्र)
(a) अरुण यह मधुमय देश हमारा – (i) मालविका
(b) हिमाद्रि तुंग शृंग से – (ii) कार्नेलिया
(c) सुधा-सीकर से नहला दो! – (iii) अलका
(d) मधुप कब एक कली का है! – (iv) कल्याणी
(a)–(iii), (b)–(ii), (c)–(iv), (d)–(i)
(a)–(ii), (b)–(iii), (c)–(iv), (d)–(i)
क्रमशः कार्नेलिया, अलका, कल्याणी और मालविका इन गीतों से सम्बद्ध हैं। ‘हिमाद्रि…’ अलका के नेतृत्व में समवेत स्वर में गाया जाता है।
(a)–(ii), (b)–(iii), (c)–(i), (d)–(iv)
(a)–(iv), (b)–(ii), (c)–(iii), (d)–(i)
33. निम्नलिखित घटनाओं को चंद्रगुप्त नाटक के अनुसार पहले से बाद के क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
(a) नन्द की सभा में चाणक्य का अपमान
(b) शकटार द्वारा नन्द का वध
(c) गुरुकुल में आम्भीक और विद्यार्थियों का संघर्ष
(d) फिलिप्स से कार्नेलिया की रक्षा
(a)–(c)–(b)–(d)
(c)–(a)–(d)–(b)
गुरुकुल का संघर्ष आरम्भ में है। उसके बाद चाणक्य का अपमान, द्वितीय अंक में कार्नेलिया की रक्षा और तृतीय अंक में नन्द का वध होता है।
(c)–(d)–(b)–(a)
(d)–(a)–(c)–(c)
34. निम्नलिखित में कौन-सी पंक्ति जयशंकर प्रसाद के ‘चंद्रगुप्त’ से संबंधित है?
नारी! तुम केवल श्रद्धा हो
अरुण यह मधुमय देश हमारा
‘अरुण यह मधुमय देश हमारा’ कार्नेलिया के गीत का अंश है। अन्य तीन पंक्तियाँ ‘कामायनी’ के ‘लज्जा’ सर्ग से हैं।
मैं रति की प्रतिकृति लज्जा हूँ
तुमको अपनी स्मित रेखा से यह संधिपत्र लिखना होगा
35. चंद्रगुप्त नाटक से संबंधित कथन–कारण पर विचार कीजिए।
कथन (A): कार्नेलिया भारत को मानवता की जन्मभूमि कहती है।
कारण (R): कार्नेलिया सिल्यूकस की पुत्री है।
(A) कथन और कारण (R) दोनों सत्य हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(A) कथन और कारण दोनों सत्य हैं, परन्तु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता।
दोनों तथ्य सत्य हैं। परन्तु उसका पारिवारिक परिचय भारत-विषयक विचार की व्याख्या नहीं करता; वह विचार भारतीय संस्कृति और जीवन के प्रति उसके अनुराग से जुड़ा है।
(A) कथन सत्य है, परन्तु कारण (R) असत्य है।
(A) कथन असत्य है, परन्तु कारण (R) सत्य है।
36. चंद्रगुप्त नाटक में भारत को ‘मानवता की जन्मभूमि’ कौन कहता है?
दाण्ड्यायन
चाणक्य
कार्नेलिया
कार्नेलिया भारत को त्याग, ज्ञान और प्रेम की भूमि के रूप में देखती है। उसका कथन भारत के प्रति गहरे सांस्कृतिक और मानवीय लगाव को व्यक्त करता है।
सिंहरण
37. नन्द के संदर्भ में चंद्रगुप्त की टिप्पणी को सही क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
(a) हमें पशु बनने का अवसर न दीजिए।
(b) महाराज नन्द!
(c) हम सब आपकी प्रजा हैं,
(d) मनुष्य हैं,
(c)–(b)–(a)–(d)
(a)–(d)–(c)–(b)
(b)–(c)–(d)–(a)
चंद्रगुप्त नन्द को प्रजा की मनुष्यता और सम्मान का स्मरण कराता है। यह कथन निरंकुश राजव्यवहार के विरुद्ध है।
(d)–(a)–(b)–(c)
38. निम्नलिखित वार्तालाप ‘चंद्रगुप्त’ नाटक में किनके मध्य हुआ है?
“न्याय करना तो राजा का कर्तव्य है; परन्तु यहाँ पिता और गुरु का संबंध है, कर सकोगे?”
“पिताजी!”
दाण्ड्यायन और चंद्रगुप्त
राक्षस और चंद्रगुप्त
चाणक्य और चंद्रगुप्त
चंद्रगुप्त के पिता चाणक्य के वध का प्रयास करते हैं। इस स्थिति में चाणक्य और चंद्रगुप्त के बीच राजा के न्यायधर्म और पारिवारिक संबंधों को लेकर यह बात होती है।
वररुचि और चंद्रगुप्त
39. ‘चंद्रगुप्त’ नाटक की अलका के संदर्भ में कौन-सा तथ्य सही नहीं है?
वह आम्भीक की बहन है।
वह जनता में स्वतंत्रता की चेतना जगाती है।
वह यवनों की अधीनता को राष्ट्रीय सम्मान का आधार मानती है।
अलका विदेशी अधीनता का विरोध करती है। वह पारिवारिक स्वार्थ से ऊपर उठकर देश की स्वतंत्रता का समर्थन करती है।
वह आम्भीक को जन्मभूमि की रक्षा के लिए प्रेरित करती है।
40. निम्नलिखित गीतों को ‘चंद्रगुप्त’ नाटक में उनके आने के क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
(a) हिमाद्रि तुंग शृंग से
(b) सुधा-सीकर से नहला दो!
(c) मधुप कब एक कली का है!
(d) अरुण यह मधुमय देश हमारा
(d)–(c)–(d)–(b)
(c)–(a)–(b)–(d)
(a)–(d)–(b)–(c)
(d)–(b)–(c)–(a)
कार्नेलिया का गीत द्वितीय अंक में है। चतुर्थ अंक में पहले कल्याणी, फिर मालविका और उसके बाद अलका से सम्बद्ध गीत आता है।
41. प्रसाद के ‘चंद्रगुप्त’ नाटक के चाणक्य के संदर्भ में कौन-सा तथ्य सही नहीं है?
वे तक्षशिला में अर्थशास्त्र पढ़ाते हैं।
उनका दूसरा नाम विष्णुगुप्त है।
वे नन्द को पर्वतेश्वर की सहायता करने से रोकते हैं।
चाणक्य नन्द से पर्वतेश्वर की सहायता करने का आग्रह करते हैं। उनके अनुसार यवन आक्रमण का संकट पूरे आर्यावर्त के लिए है।
वे नन्दकुल के विनाश की प्रतिज्ञा करते हैं।
42. ‘चंद्रगुप्त’ नाटक में मालविका का आत्मबलिदान किस प्रकार होता है?
वह युद्ध में सिकन्दर से लड़ते हुए मारी जाती है
वह नन्द को बचाते हुए प्राण देती है
वह यवन शिविर में बन्दिनी बनकर मरती है
वह चंद्रगुप्त का परिच्छद पहनकर उसकी शय्या पर लेटती है और मारी जाती है
चंद्रगुप्त की हत्या के षड्यन्त्र की सूचना मिलने पर उसके शयन का स्थान बदल दिया जाता है। मालविका उसके स्थान पर रहकर प्राण देती है।
43. चंद्रगुप्त के भारत का भावी सम्राट बनने की भविष्यवाणी कौन करता है?
दाण्ड्यायन
दाण्ड्यायन सिकन्दर के सामने चंद्रगुप्त को भारत का भावी सम्राट बताते हैं। यह भविष्यवाणी चंद्रगुप्त की भावी भूमिका का संकेत है।
राक्षस
नन्द
फिलिप्स
44. नन्द के पतन के संदर्भ में कौन-सा कथन असत्य है?
चंद्रगुप्त नन्द को बन्दी बनाता है।
चाणक्य नन्द के अत्याचारों का उल्लेख करते हैं।
नन्द कल्याणी के साथ वन में जाने की इच्छा व्यक्त करता है।
नन्द का वध स्वयं चाणक्य करते हैं।
नन्द का वध शकटार करता है। उसके सात निरपराध पुत्रों की मृत्यु का प्रतिशोध इस कार्य की व्यक्तिगत प्रेरणा है।
45. ‘चंद्रगुप्त’ के नाटकीय प्रसंगों को उनके स्थानों से सुमेलित कीजिए।
सूची–I : (प्रसंग) –सूची–II : (स्थान)
(a) नाटक का आरम्भिक चाणक्य–सिंहरण संवाद – (i) मगध का राजकीय उपवन
(b) चतुर्थ अंक के आरम्भ में कल्याणी का आत्मसंवाद – (ii) रावी का तट
(c) चतुर्थ अंक में कार्नेलिया–राक्षस संवाद – (iii) तक्षशिला के गुरुकुल का मठ
(d) तृतीय अंक में सिकन्दर की विदाई का प्रसंग – (iv) कपिशा में एलेक्जेंड्रिया का राजमन्दिर
(a)–(iii), (b)–(i), (c)–(iv), (d)–(ii)
ये स्थान संबंधित दृश्यों के आरम्भ में दिए गए रंगनिर्देशों के अनुसार हैं। स्थान-परिवर्तन नाटक के विस्तृत राजनीतिक परिवेश को सामने लाता है।
(a)–(ii), (b)–(iv), (c)–(i), (d)–(iii)
(a)–(i), (b)–(iii), (c)–(iv), (d)–(ii)
(a)–(iv), (b)–(ii), (c)–(iii), (d)–(i)
46. ‘चंद्रगुप्त’ नाटक के कथन–कारण पर विचार कीजिए।
कथन (A): आम्भीक नाटक के अन्त तक यवनों का पक्ष लेकर भारतीय एकता का विरोध करता रहता है।
कारण (R): अलका और चाणक्य के प्रभाव से आम्भीक जन्मभूमि की रक्षा का संकल्प करता है।
(A) कथन और कारण (R) दोनों सत्य हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(A) कथन और कारण दोनों सत्य हैं, परन्तु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता।
(A) कथन सत्य है, परन्तु कारण (R) असत्य है।
(A) कथन असत्य है, परन्तु कारण (R) सत्य है।
कथन असत्य है, क्योंकि आम्भीक में परिवर्तन होता है। वह अपनी पूर्व भूल स्वीकार करके देशरक्षा में भाग लेने का निश्चय करता है।
47. निम्नलिखित में से कौन-से कथन ‘चंद्रगुप्त’ नाटक में अलका के हैं?
(a) मेरा देश है, मेरे पहाड़ हैं, मेरी नदियाँ हैं और मेरे जंगल हैं।
(b) मेरा देश मालव ही नहीं, गांधार भी है।
(c) मेरी आवश्यकताएँ परमात्मा की विभूति प्रकृति पूरी करती हैं।
(d) स्वतंत्रता के युद्ध में सैनिक और सेनापति का भेद नहीं।
केवल (a) और (d)
पहला और चौथा कथन अलका का है। दूसरा सिंहरण और तीसरा दाण्ड्यायन का कथन है।
केवल (a) और (b)
केवल (b) और (c)
केवल (c) और (d)
48. “अमर्त्य वीरपुत्र हो, दृढ़-प्रतिज्ञ सोच लो,
प्रशस्त पुण्य पंथ है—बढ़े चलो, बढ़े चलो।”
उपर्युक्त पंक्तियाँ किस नाटककार की हैं?
भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
उपेन्द्रनाथ अश्क
जयशंकर प्रसाद
ये पंक्तियाँ ‘चंद्रगुप्त’ के राष्ट्रीय उद्बोधन गीत का अंश हैं। अलका के नेतृत्व में गाए गए इस गीत में स्वतंत्रता-संघर्ष की प्रेरणा है।
मोहन राकेश
49. ‘चंद्रगुप्त’ नाटक में चतुर्थ अंक की निम्नलिखित घटनाओं को पहले से बाद के क्रम में रखिए।
(a) अलका के नेतृत्व में ‘हिमाद्रि तुंग शृंग से’ का गायन
(b) कल्याणी का आत्महत्या करना
(c) सिल्यूकस की पराजय
(d) मालविका की हत्या
(b)–(d)–(a)–(c)
चतुर्थ अंक के आरम्भ में कल्याणी का अन्त होता है। उसके बाद मालविका का बलिदान, अलका का उद्बोधन और सिल्यूकस की पराजय आती है।
(d)–(b)–(c)–(a)
(c)–(a)–(b)–(d)
(a)–(c)–(d)–(b)
50. नाटक में व्यक्त ‘राष्ट्रीय आत्मसम्मान’ के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा प्रसाद का अभिमत नहीं माना जा सकता?
क्षेत्रीय पहचान से ऊपर व्यापक राष्ट्रीय पहचान आवश्यक है।
मालव और मागध का विभाजन ही राष्ट्रीय गौरव की अंतिम सीमा है।
चाणक्य मालव और मागध की सीमित पहचान से ऊपर उठकर आर्यावर्त का नाम लेने की शिक्षा देते हैं। इसलिए क्षेत्रीय विभाजन को अंतिम आदर्श मानना पाठ के विपरीत है।
विदेशी आक्रमण के विरुद्ध एकता आवश्यक है।
आत्मसम्मान का संबंध स्वतंत्रता की रक्षा से है।

आपने 50 में से कितने प्रश्न सही किए? अपना स्कोर कमेंट में लिखें। कठिन प्रश्नों की व्याख्या दोबारा पढ़ें।

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