अंधेर नगरी नाटक MCQ | 50 महत्त्वपूर्ण प्रश्न

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UPESSC Hindi Exam Based MCQs Quiz
UPESSC हिंदी परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तरी

भरतेंदु हरिश्चंद्र, का ‘अंधेर नगरी’ एक प्रसिद्ध प्रहसन है। इसमें अन्यायपूर्ण शासन और विवेकहीन न्यायव्यवस्था पर तीखा व्यंग्य है। बाजार और राजसभा के दृश्य सामाजिक विसंगतियों को उजागर करते हैं। महंत और गोवर्धनदास के प्रसंग लोभ तथा विवेक का अंतर समझाते हैं।

इस क्विज में ‘अंधेर नगरी’ पर आधारित 50 बहुविकल्पीय प्रश्न हैं। प्रश्न पात्रों, संवादों, घटनाक्रम और नाटक की व्यंग्य-दृष्टि से जुड़े हैं। सुमेलन, कथन–कारण और बहुकथन प्रश्न भी शामिल हैं। सही–असत्य कथनों और दृश्यक्रम पर भी प्रश्न दिए गए हैं।

प्रत्येक प्रश्न के साथ सही उत्तर और संक्षिप्त व्याख्या है। यह अभ्यास यूजीसी नेट और सहायक प्रोफेसर परीक्षाओं की तैयारी में उपयोगी है। इन MCQ प्रश्न हल करके इस नाटक पर अपनी तैयारी मजबूती प्रदान करें। पहले स्वयं उत्तर चुनें। फिर सही उत्तर और व्याख्या पढ़ें। गलत हुए प्रश्नों से संबंधित प्रसंग दोबारा पढ़ें। हाँ, अंत में अपने कुल सही उत्तरों की संख्या जाँचना न भूलें।

1. “अंधेर नगरी अंग्रेजी राज्य का ही दूसरा नाम है।” -अंधेर नगरी नाटक के संदर्भ में यह टिप्पणी किस आलोचक की है?
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
डॉ. रामविलास शर्मा
रामविलास शर्मा ने नाटक की अंधेरगर्दी को अंग्रेजी शासन से जोड़कर देखा है। उनकी दृष्टि में यह नाटक अन्यायपूर्ण शासन की आलोचना और उससे मुक्ति की जनाकांक्षा व्यक्त करता है।
आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी
डॉ. नगेन्द्र
2. ‘अंधेर नगरी’ नाटक से संबंधित निम्नलिखित दो कथनों पर विचार कीजिए।
कथन–I: नाटक का आरंभ महंत और शिष्यों के भजन से होता है।
कथन–II: नाटक के अंत में महंत धर्म, बुद्धि और नीति के अभाव से विनाश का निष्कर्ष देते हैं।
दोनों कथन सत्य हैं।
आरंभ का भजन और अंत का नीतिपरक दोहा नाटक को एक नैतिक चौखटा देते हैं। इनके बीच व्यवस्था की विसंगतियाँ दिखाई गई हैं।
कथन–I सत्य है, कथन–II असत्य है।
कथन–I असत्य है, कथन–II सत्य है।
दोनों कथन असत्य हैं।
3. निम्नलिखित दृश्य-स्थलों को ‘अंधेर नगरी’ नाटक में उनके आने के क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
(i) राजसभा
(ii) बाजार
(iii) श्मशान
(iv) बाह्य प्रांत
(v) आरण्य में गोवर्धनदास का मिठाई खाना और पकड़ा जाना
(vi) जंगल में महंत और गोवर्धनदास का नगर में रहने पर संवाद
(iv), (vi), (ii), (i), (v), (iii)
(iv), (ii), (vi), (i), (v), (iii)
क्रम है—बाह्य प्रांत, बाजार, जंगल, राजसभा, आरण्य और श्मशान। इसी क्रम में परिचय से संकट और फिर उसके समाधान तक कथा बढ़ती है।
(ii), (iv), (vi), (i), (iii), (v)
(iv), (ii), (i), (vi), (v), (iii)
4. ‘अंधेर नगरी’ नाटक के दृश्य-स्थलों का सही क्रम कौन-सा है?
बाह्य प्रांत → जंगल → बाजार → राजसभा → आरण्य → श्मशान
बाह्य प्रांत → बाजार → जंगल → राजसभा → आरण्य → श्मशान
नाटक छह दृश्यों में विभाजित है। दूसरे दृश्य में बाजार, तीसरे में गुरु–शिष्य संवाद, चौथे में राजसभा और पाँचवें में गोवर्धनदास की गिरफ्तारी का प्रसंग आता है। अंतिम दृश्य श्मशान में घटित होता है।
बाह्य प्रांत → बाजार → राजसभा → जंगल → आरण्य → श्मशान
बाह्य प्रांत → बाजार → जंगल → आरण्य → राजसभा → श्मशान
5. ‘अंधेर नगरी’ में जिस सस्ती मिठाई से गोवर्धनदास आनंदित होता है, उसी के सेवन से आया मोटापा उसके प्राणसंकट का कारण बनता है। यह स्थिति किसकी सबसे उपयुक्त उदाहरण है?
वीरतापूर्ण उत्कर्ष
नाटकीय विडंबना
सुख का साधन संकट का कारण बन जाता है। गोवर्धनदास जिस नगर को अपने लिए सुविधाजनक समझता है, उसी में उसकी जान पर बन आती है।
ऐतिहासिक पुनर्निर्माण
प्रणय-संघर्ष
6. ‘अंधेर नगरी’ के पाँचवें दृश्य के गीत में व्यक्त व्यवस्था के संबंध में विचार कीजिए।
(i) सच बोलने वालों को निरंतर पदवियाँ मिलती हैं।
(ii) छली और दुष्ट लोग प्रतिष्ठा पाते हैं।
(iii) बाहर से सभ्य दिखने वालों के भीतर छल हो सकता है।
(iv) राजा की इच्छा ही न्याय का रूप ग्रहण कर लेती है।
सही कथनों का चयन कीजिए।
केवल (i) और (ii)
केवल (i), (iii) और (iv)
केवल (ii) और (iii)
केवल (ii), (iii) और (iv)
गीत में सत्यवादी अपमानित और झूठे सम्मानित दिखाए गए हैं। बाहरी सभ्यता, भीतरी छल और राजा की मनमानी उसके प्रमुख व्यंग्य-विषय हैं।
7. ‘अंधेर नगरी’ नाटक के कथन–कारण पर विचार कीजिए।
कथन (A): राजसभा की न्यायप्रक्रिया विवेकहीन और मनमानी है।
कारण (R): फरियादी की शिकायत कल्लू बनिए की दीवार के नीचे बकरी दबकर मरने से संबंधित है।
A और R दोनों सत्य हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
A और R दोनों सत्य हैं, किंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
दोनों तथ्य सही हैं। किंतु शिकायत का विषय अपने आप न्याय की मनमानी सिद्ध नहीं करता। मनमानी राजा के अतार्किक आदेशों और दंडनिर्णय से स्पष्ट होती है।
A सत्य है, किंतु R असत्य है।
A असत्य है, किंतु R सत्य है।
8. ‘अंधेर नगरी’ नाटक में बकरी की मृत्यु के मामले में आरोपित व्यक्तियों को राजसभा में बुलाए जाने के क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
(i) कल्लू बनिया
(ii) भिश्ती
(iii) कारीगर
(iv) कोतवाल
(v) कसाई
(vi) चूनेवाला
(vii) गड़ेरिया
(i), (iii), (vi), (ii), (v), (vii), (iv)
क्रम— कल्लू बनिया, कारीगर, चूनेवाला, भिश्ती, कसाई, गड़ेरिया और कोतवाल। प्रत्येक व्यक्ति दोष आगे बढ़ाता है। अंततः कोतवाल को फाँसी का आदेश मिलता है।
(i), (vi), (iii), (ii), (v), (vii), (iv)
(i), (iii), (ii), (vi), (vii), (v), (iv)
(iii), (i), (vi), (ii), (v), (iv), (vii)
9. ‘अंधेर नगरी’ नाटक के दो कथनों पर विचार कीजिए।
कथन–I: महंत नगर छोड़ने का निर्णय लेते हैं।
कथन–II: नारायणदास गुरु का साथ छोड़कर गोवर्धनदास के साथ नगर में रह जाता है।
दोनों कथन सत्य हैं।
कथन–I सत्य है, कथन–II असत्य है।
नारायणदास महंत के साथ चला जाता है। गोवर्धनदास अकेला सस्ती मिठाई के आकर्षण में नगर में रुकता है।
कथन–I असत्य है, कथन–II सत्य है।
दोनों कथन असत्य हैं।
10. ‘अंधेर नगरी’ का रचनाकाल क्या है?
1873 ई.
1875 ई.
1881 ई.
‘अंधेर नगरी’ की रचना 1881 ई. में हुई। इसमें हास्य और व्यंग्य के माध्यम से शासन तथा समाज की विसंगतियों को उजागर किया गया है।
1884 ई.
11. “जहाँ न धर्म्म न बुद्धि नहिं, नीति न सुजान समाज।” -यह नीतिपरक निष्कर्ष ‘अंधेर नगरी’ नाटक के किस पात्र का है?
नारायणदास
मंत्री
गोवर्धनदास
महंत [/wrong]
महंत अंत में धर्म, बुद्धि, नीति और समझदार समाज के अभाव को विनाश से जोड़ते हैं। यह दोहा नाटक की घटनाओं का नैतिक निष्कर्ष प्रस्तुत करता है।
12. निम्नलिखित कथनों को ‘अंधेर नगरी’ नाटक में उनके आने के क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
(i) हम तो हुक्मी बन्दे हैं।
(ii) लोभ पाप को मूल है…
(iii) सेत सेत सब एक से, जहां कपूर कपास।
(iv) राजा के आछत और कौन बैकुण्ठ जा सकता है।
(ii), (i), (iii), (iv)
(iii), (ii), (iv), (i)
(ii), (iii), (iv), (i)
(ii), (iii), (i), (iv)
लोभ संबंधी शिक्षा प्रथम दृश्य में है। कपूर–कपास का उदाहरण तीसरे में आता है। प्यादे का कथन पाँचवें और राजा का कथन छठे दृश्य में है।
13. साहित्यिक स्वरूप की दृष्टि से ‘अंधेर नगरी’ को किस श्रेणी में रखा जाता है?
प्रहसन
इसमें हास्यास्पद घटनाओं, विचित्र तर्कों और व्यंग्यपूर्ण संवादों से सामाजिक तथा राजनीतिक अव्यवस्था पर प्रहार किया गया है।
व्यायोग
ऐतिहासिक त्रासदी
भाण
14. ‘अंधेर नगरी’ नाटक में गोवर्धनदास को चुनने के पक्ष में प्यादों द्वारा दिए गए तर्कों पर विचार कीजिए।
(i) राजा के न्याय के डर से नगर में कोई मोटा नहीं होता।
(ii) दूसरे व्यक्ति को पकड़ने पर वह दोष उन्हीं पर पलट सकता है।
(iii) गोवर्धनदास ने बकरी मारने का अपराध स्वीकार कर लिया है।
(iv) इस राज्य में साधु-महात्माओं की दुर्दशा है।
पाठ के अनुरूप कथनों का चयन कीजिए।
केवल (i), (ii) और (iv)
प्यादे गोवर्धनदास की असुरक्षित स्थिति का लाभ उठाते हैं। वह बकरी मारने का अपराध स्वीकार नहीं करता। उसका मोटापा ही उसे दंड का पात्र बना देता है।
केवल (i) और (iii)
केवल (ii) और (iii)
(i), (ii), (iii) और (iv)
15. ‘अंधेर नगरी’ नाटक से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
कथन–I: कोतवाल दुबला है, इसलिए उसके लिए फाँसी का फंदा बड़ा पड़ता है।
कथन–II: राजा फंदा ठीक कराने के स्थान पर किसी मोटे व्यक्ति को पकड़कर फाँसी देने का आदेश देता है।
दोनों कथन सत्य हैं।
दंड का आधार अपराध से हटकर शरीर का आकार बन जाता है। यह प्रसंग न्यायव्यवस्था की चरम अतार्किकता को सामने लाता है।
कथन–I सत्य है, कथन–II असत्य है।
कथन–I असत्य है, कथन–II सत्य है।
दोनों कथन असत्य हैं।
16. ‘अंधेर नगरी’ के पूर्ण पाठ में कुल कितने दृश्य हैं?
चार
छह
नाटक छह दृश्यों में विभाजित है। इनके माध्यम से नगर का बाहरी परिचय, बाजार, गुरु–शिष्य संवाद, राजसभा और फाँसी के प्रसंग सामने आते हैं।
सात
आठ
17. बाजार के पात्रों का उनके कथनों के प्रमुख विषय से सुमेलन कीजिए।
सूची–I (पात्र) – सूची–II (प्रमुख विषय)
(a) घासीराम – (i) पैसे के लिए धर्म और प्रतिष्ठा बेचना
(b) पाचकवाला – (ii) रूपजाल और विरह की अभिव्यक्ति
(c) जातवाला – (iii) हाकिमों द्वारा दूना कर लगाना
(d) मछलीवाली – (iv) रिश्वत, धन और कानून ‘हजम’ करना
(a)–(iv), (b)–(iii), (c)–(ii), (d)–(i)
(a)–(iii), (b)–(i), (c)–(iv), (d)–(ii)
(a)–(i), (b)–(ii), (c)–(iii), (d)–(iv)
(a)–(iii), (b)–(iv), (c)–(i), (d)–(ii)
विक्रेताओं की बोलियाँ अलग-अलग सामाजिक अर्थ रखती हैं। मछलीवाली की पुकार में प्रेम और विरह के बिंब हैं। अन्य पात्र प्रशासनिक तथा नैतिक भ्रष्टाचार पर प्रहार करते हैं।
18. नाटक के बाजार-दृश्य की सबसे उपयुक्त आलोचनात्मक व्याख्या कौन-सी है?
यह केवल मिठाइयों की सूची देने के लिए रखा गया है।
इसका शेष नाटक की मूल्यव्यवस्था से कोई संबंध नहीं है।
यह विभिन्न सामाजिक वर्गों के माध्यम से भ्रष्टाचार और मूल्यविघटन को व्यापक बनाता है।
बाजार में वस्तुओं के साथ धर्म, प्रतिष्ठा और सच्चाई भी बिकाऊ बनते हैं। विक्रेताओं की बोलियाँ नगर की अव्यवस्था को व्यापक सामाजिक आधार देती हैं।
यह राजसभा में होने वाले मुकदमे का प्रत्यक्ष न्यायिक अभिलेख है।
19. निम्नलिखित में कौन-सी पंक्तियाँ भरतेंदु के ‘अंधेर नगरी’ नाटक से संबंधित हैं?
निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल।
अंधाधुंध मच्यौ सब देसा। मानहुं राजा रहत बिदेसा॥
ये पंक्तियाँ पाँचवें दृश्य में गोवर्धनदास के गीत में आती हैं। इनमें देश की अव्यवस्था और शासन की उदासीनता का संकेत है।
अरुण यह मधुमय देश हमारा।
हम कौन थे, क्या हो गए हैं, और क्या होंगे अभी।
20. ‘अंधेर नगरी’ नाटक की भाषा और प्रस्तुति के संबंध में विचार कीजिए।
(i) इसमें गद्य और पद्य दोनों का प्रयोग है।
(ii) विक्रेताओं की पुकारों में तुक और लय का प्रयोग मिलता है।
(iii) पात्रों की भाषा में बोलचाल तथा उच्चारण की विविधता मिलती है।
(iv) सभी पात्र केवल एक जैसी तत्समप्रधान भाषा बोलते हैं।
सही कथनों का चयन कीजिए।
केवल (i) और (iv)
केवल (ii) और (iv)
केवल (i), (iii) और (iv)
केवल (i), (ii) और (iii)
भजन, दोहे, विक्रय-पुकार और संवाद नाटक की भाषिक विविधता बनाते हैं। पात्रों की भाषा उनके सामाजिक परिवेश और मंचीय प्रभाव से जुड़ी है।
21. ‘अंधेर नगरी’ नाटक से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
कथन–I: महंत को नगर में सभी वस्तुएँ टके सेर मिलने की सूचना सबसे पहले गोवर्धनदास देता है।
कथन–II: नारायणदास से यह सूचना सुनते ही महंत ने उसे सत्य मान लिया था।
दोनों कथन सत्य हैं।
कथन–I सत्य है, कथन–II असत्य है।
कथन–I असत्य है, कथन–II सत्य है।
दोनों कथन असत्य हैं।
महंत बताते हैं कि नारायणदास पहले ही यह सूचना दे चुका था। उस समय उन्हें उसकी बात पर विश्वास नहीं हुआ था।
22. दृश्य-संख्या का संबंधित स्थान से सुमेलन कीजिए।
सूची–I (दृश्य) – सूची–II (स्थान)
(a) दूसरा दृश्य – (i) राजसभा
(b) तीसरा दृश्य – (ii) श्मशान
(c) चौथा दृश्य – (iii) बाजार
(d) छठा दृश्य – (iv) जंगल
(a)–(iii), (b)–(iv), (c)–(i), (d)–(ii)
दूसरे दृश्य में बाजार है। तीसरे में गुरु–शिष्य संवाद जंगल में होता है। चौथे में राजसभा और छठे में श्मशान का प्रसंग है।
(a)–(iv), (b)–(iii), (c)–(i), (d)–(ii)
(a)–(iii), (b)–(iv), (c)–(ii), (d)–(i)
(a)–(i), (b)–(ii), (c)–(iii), (d)–(iv)
23. ‘अंधेर नगरी’ नाटक किस संस्था के लिए लिखा गया था?
पारसी थियेट्रिकल कम्पनी
पृथ्वी थियेटर
इंडियन पीपुल्स थियेटर
काशी का नेशनल थियेटर
‘अंधेर नगरी’ नाटक बनारस के नेशनल थियेटर के लिए लिखा गया प्रहसन है। भारतेन्दु इस संस्था के संरक्षक थे।
24. ‘अंधेर नगरी’ नाटक से संबंधित कथन–कारण पर विचार कीजिए।
कथन (A): गोवर्धनदास मानता है कि राजकाज से असंबद्ध होने के कारण उसे डरने की आवश्यकता नहीं है।
कारण (R): नगर में साधुओं को राजदंड से वैधानिक छूट मिली हुई है।
A और R दोनों सत्य हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
A और R दोनों सत्य हैं, किंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
A सत्य है, किंतु R असत्य है।
गोवर्धनदास स्वयं को राजकाज से अलग मानकर निश्चिंत होता है। साधुओं को दंड से छूट मिलने का कोई विधान नाटक में नहीं है।
A असत्य है, किंतु R सत्य है।
25. ‘अंधेर नगरी’ की विषयवस्तु के संबंध में कौन-से कथन उपयुक्त हैं?
(i) नाटक न्यायव्यवस्था की जड़ता और मनमानी उजागर करता है।
(ii) धर्म और प्रतिष्ठा के बिकाऊ बनने पर व्यंग्य करता है।
(iii) बाजार के कथनों में औपनिवेशिक शोषण का संकेत मिलता है।
(iv) नाटक का पूरा आशय राजनीति से असंबद्ध मनोरंजन तक सीमित है।
केवल (i) और (iv)
केवल (ii) और (iii)
केवल (i), (ii) और (iii)
नाटक का हास्य सामाजिक और राजनीतिक अर्थ रखता है। बाजार, राजसभा और दंडप्रक्रिया के प्रसंग उसके व्यापक व्यंग्य को पुष्ट करते हैं।
(i), (ii), (iii) और (iv)
26. ‘अंधेर नगरी’ में राजा के न्याय के भय से नगरवासियों का मोटा न होना किस बात का संकेत है?
न्याय के नाम पर व्याप्त आतंक
यह प्यादे का व्यंग्यपूर्ण कथन है। जिस व्यवस्था से सुरक्षा मिलनी चाहिए, उसी के भय से लोगों का जीवन नियंत्रित होता है।
जनस्वास्थ्य की सफल नीति
स्वैच्छिक उपवास की परंपरा
सभी नागरिकों का संन्यास
27. ‘अंधेर नगरी’ नाटक के आरंभ में ‘राम भजो’ वाला गीत किनके सामूहिक प्रवेश के साथ आता है?
राजा और मंत्री
बाजार के विक्रेता
महंत और उनके दोनों शिष्य
प्रथम दृश्य में महंत, नारायणदास और गोवर्धनदास भजन गाते हुए आते हैं। इससे गुरु–शिष्य समुदाय की धार्मिक पृष्ठभूमि स्थापित होती है।
कोतवाल और सिपाही
28. ‘अंधेर नगरी’ नाटक से संबंधित निम्न कथनों पर विचार कीजिए।
कथन–I: पाचकवाले के कथन में साहबों द्वारा ‘सारा हिंद हजम’ करना औपनिवेशिक शोषण की व्यंजना करता है।
कथन–II: पुलिस द्वारा ‘कानून हजम’ करना कानून की निष्पक्ष रक्षा का सकारात्मक चित्र है।
दोनों कथन सत्य हैं।
कथन–I सत्य है, कथन–II असत्य है।
पाचकवाले का कथन शोषण और भ्रष्टाचार पर व्यंग्य है। कानून ‘हजम’ करने का अर्थ उसकी रक्षा करना नहीं, उसे निष्प्रभावी करना है।
कथन–I असत्य है, कथन–II सत्य है।
दोनों कथन असत्य हैं।
29. ‘अंधेर नगरी’ का गोवर्धनदास भिक्षा में मिले सात पैसों से कितनी मिठाई खरीदता है?
डेढ़ सेर
ढाई सेर
तीन सेर
साढ़े तीन सेर
गोवर्धनदास सात पैसों में साढ़े तीन सेर मिठाई खरीदता है। सस्ते भोजन का आकर्षण ही उसे नगर में रहने के लिए प्रेरित करता है।
30. ‘अंधेर नगरी’ के शीर्षक और व्यंजना के संदर्भ में कौन-सा कथन असत्य है?
शीर्षक लोकप्रचलित उक्ति से जुड़ा है।
‘चौपट राजा’ नाम शासक के अविवेक को संकेतित करता है।
‘अंधेर नगरी’ व्यापक अव्यवस्था का अर्थ ग्रहण करती है।
शीर्षक का अर्थ केवल वस्तुओं की कम कीमत तक सीमित है।
सस्ती वस्तुएँ व्यापक मूल्यहीनता का प्रवेशबिंदु हैं। नाटक का शीर्षक अन्याय, अराजकता और विवेकहीन शासन तक अर्थ का विस्तार करता है।
31. ‘अंधेर नगरी’ नाटक में लोभ की भूमिका के संबंध में विचार कीजिए।
(i) गोवर्धनदास सस्ते भोजन के आकर्षण में नगर में रुकता है।
(ii) राजा बैकुंठ जाने के आकर्षण में स्वयं फाँसी चाहता है।
(iii) मंत्री भी बैकुंठ जाने का अवसर प्राप्त करना चाहता है।
(iv) महंत की युक्ति का वास्तविक उद्देश्य स्वयं फाँसी चढ़कर बैकुंठ जाना है।
सही कथनों का चयन कीजिए।
केवल (i) और (iv)
केवल (i), (ii) और (iii)
भोजन का लोभ गोवर्धनदास को संकट में डालता है। बैकुंठ का लोभ राजा को विनाश की ओर ले जाता है। महंत की योजना शिष्य को बचाने के लिए है।
केवल (ii), (iii) और (iv)
(i), (ii), (iii) और (iv)
32. ‘अंधेर नगरी’ नाटक के अंतिम दृश्य के संबंध में कौन-सा तथ्य सही है?
राजा फरियादी को धन देकर मुकदमा समाप्त करता है।
महंत दीवार की मरम्मत का आदेश देकर शिष्य को छुड़ाते हैं।
राजा बैकुंठ जाने के लोभ में स्वयं को फाँसी चढ़ाने का आदेश देता है।
राजा तत्काल बैकुंठ जाने के अवसर पर अपना पहला अधिकार जताता है। अंतिम मंचनिर्देश में उसे टिकठी पर खड़ा किया जाता है।
कोतवाल गोवर्धनदास को राजा का उत्तराधिकारी घोषित करता है।
33. ‘अंधेर नगरी’ नाटक में राजसभा में फरियादी के प्रवेश से पहले ‘दुहाई है दुहाई’ की आवाज़ सुनाई देने का निर्देश किससे संबंधित है?
स्वगत-कथन
जनान्तिक संवाद
नेपथ्य-ध्वनि
आवाज़ पात्र के मंच पर आने से पहले सुनाई देती है। यह श्रव्य संकेत अगले प्रसंग की भूमिका बनाता है।
भरतवाक्य
34. ‘अंधेर नगरी’ के अंतिम दृश्य की निम्नलिखित घटनाओं को सही क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
(i) राजा पहुँचकर फाँसी चढ़ने की होड़ का कारण पूछता है।
(ii) महंत गोवर्धनदास के कान में कुछ समझाते हैं।
(iii) गोवर्धनदास फाँसी चढ़ने की तत्परता दिखाता है।
(iv) महंत उस समय मरने वाले के सीधे बैकुंठ जाने की बात कहते हैं।
(v) राजा स्वयं को फाँसी चढ़ाने का आदेश देता है।
(ii), (i), (iii), (iv), (v)
(i), (ii), (iii), (iv), (v)
(ii), (iii), (i), (iv), (v)
पहले महंत शिष्य को युक्ति समझाते हैं। फिर गुरु–शिष्य की होड़ देखकर राजा कारण पूछता है। बैकुंठ का प्रलोभन सुनकर वह स्वयं फाँसी का आदेश देता है।
(ii), (iii), (iv), (i), (v)
35. “चूरन पूलिसवाले खाते। सब कानून हजम कर जाते॥” -‘अंधेर नगरी’ नाटक में यह कथन किसका है?
घासीराम
जातवाला
पाचकवाला
पाचकवाला चूरन बेचते हुए विभिन्न वर्गों पर व्यंग्य करता है। यहाँ कानून को ‘हजम करना’ पुलिस द्वारा कानून की अवहेलना का संकेत है।
गोवर्धनदास
36. ‘अंधेर नगरी’ नाटक से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
कथन–I: बाजार का मुगल पात्र अंतिम दृश्य में राजा के साथ श्मशान पहुँचता है।
कथन–II: पाँचवें दृश्य में गोवर्धनदास के गीत के लिए ‘राग काफी’ का निर्देश मिलता है।
दोनों कथन सत्य हैं।
कथन–I सत्य है, कथन–II असत्य है।
कथन–I असत्य है, कथन–II सत्य है। [/wrong]
मुगल बाजार के दृश्य का पात्र है। अंतिम दृश्य में उसके आने का निर्देश नहीं है। पाँचवें दृश्य का गीत राग काफी में निर्दिष्ट है।
दोनों कथन असत्य हैं।
37. पाचकवाले के कथनों के संदर्भ में विचार कीजिए।
(i) महाजन जमा धन हजम कर जाते हैं।
(ii) अमले दूनी रिश्वत पचा जाते हैं।
(iii) एडिटरों के पेट में बात नहीं पचती।
(iv) पुलिस कानून की पवित्रता की रक्षा करती है।
‘अंधेर नगरी’ पाठ के अनुरूप कथनों का चयन कीजिए।
केवल (i), (ii) और (iii)
पाचकवाला ‘पचाने’ और ‘हजम करने’ की क्रियाओं से अलग-अलग वर्गों पर व्यंग्य करता है। पुलिस के बारे में कानून हजम करने की बात कही गई है।
केवल (i) और (iv)
केवल (ii), (iii) और (iv)
(i), (ii), (iii) और (iv)
38. ‘अंधेर नगरी’ में सेवक के ‘पान खाइए महाराज’ कहने पर राजा क्या सुनकर घबरा जाता है?
कोतवाल भाग गया
सुपनखा आई
राजा पीनक में सेवक की बात गलत सुनता है। यह प्रसंग उसके भय, अस्थिरता और विवेकहीन दंड देने की प्रवृत्ति को प्रकट करता है।
राजमहल में आग लगी
मंत्री ने विद्रोह किया
39. ‘अंधेर नगरी’ नाटक से संबंधित निम्नलिखित कथन–कारण पर विचार कीजिए।
कथन (A): महंत सस्ती वस्तुओं की उपलब्धता के बावजूद नगर छोड़ने का निर्णय लेते हैं।
कारण (R): वे गुण–अवगुण का विवेक खो चुकी व्यवस्था में जीवन को असुरक्षित मानते हैं।
A और R दोनों सत्य हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
महंत के लिए सस्ता भोजन पर्याप्त नहीं है। विवेकहीन शासन में प्राणसंकट की आशंका ही उनके नगर छोड़ने का आधार है।
A और R दोनों सत्य हैं, किंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
A सत्य है, किंतु R असत्य है।
A असत्य है, किंतु R सत्य है।
40. राजसभा में प्रत्येक व्यक्ति दोष किस पर डालता है? -‘अंधेर नगरी’ के आधार पर सुमेलन कीजिए।
सूची–I – सूची–II
(a) कारीगर – (i) कसाई
(b) चूनेवाला – (ii) गड़ेरिया
(c) भिश्ती – (iii) चूनेवाला
(d) कसाई – (iv) भिश्ती
(a)–(iv), (b)–(iii), (c)–(ii), (d)–(i)
(a)–(iii), (b)–(i), (c)–(iv), (d)–(ii)
(a)–(iii), (b)–(iv), (c)–(i), (d)–(ii)
कारीगर कमजोर चूने को जिम्मेदार बताता है। चूनेवाला अधिक पानी को, भिश्ती बड़ी मशक को और कसाई बड़ी भेड़ को कारण बनाता है।
(a)–(i), (b)–(ii), (c)–(iii), (d)–(iv)
41. निम्नलिखित में ‘अंधेर नगरी’ का कौन-सा कथन–वक्ता युग्म सही नहीं है?
संकट पड़ने पर स्मरण करने का निर्देश — महंत
स्वयं को ‘हुक्मी बन्दे’ कहना — मंत्री
‘हुक्मी बन्दे’ होने का तर्क प्यादा देता है। वह आदेशपालन का हवाला देकर अपनी नैतिक जिम्मेदारी से बचना चाहता है।
अपने कारण दीवार गिरने की बात कहकर फाँसी माँगना — कोतवाल
राजा के रहते दूसरे के बैकुंठ जाने पर आपत्ति — चौपट राजा
42. ‘अंधेर नगरी’ नाटक के कथनों पर विचार कीजिए।
कथन–I: महंत राजा से औपचारिक क्षमादान प्राप्त करके गोवर्धनदास को बचाते हैं।
कथन–II: महंत की युक्ति के बाद गुरु और शिष्य दोनों फाँसी चढ़ने की होड़ दिखाते हैं।
दोनों कथन सत्य हैं।
कथन–I सत्य है, कथन–II असत्य है।
कथन–I असत्य है, कथन–II सत्य है।
बचाव का आधार क्षमादान नहीं है। महंत बैकुंठ जाने का ऐसा प्रलोभन प्रस्तुत करते हैं कि फाँसी भय के स्थान पर आकर्षण बन जाती है।
दोनों कथन असत्य हैं।
43. ‘अंधेर नगरी’ नाटक में राजसभा के आरंभिक न्यायप्रसंग से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
(i) राजा दीवार को पकड़कर लाने का आदेश देता है।
(ii) दीवार न लाए जाने पर उसके भाई, लड़के अथवा परिचित को पकड़ने की बात करता है।
(iii) राजा सबसे पहले स्वतंत्र गवाहों के बयान दर्ज कराता है।
(iv) मंत्री दीवार के निर्जीव होने के कारण राजा के आदेश की असंगति स्पष्ट करता है।
सही कथनों का चयन कीजिए।
केवल (i) और (iii)
केवल (ii) और (iii)
केवल (iii) और (iv)
केवल (i), (ii) और (iv)
राजा निर्जीव दीवार और उसके काल्पनिक संबंधियों को पकड़ना चाहता है। स्वतंत्र साक्ष्य की व्यवस्थित जाँच का प्रसंग नहीं है।
44. ‘अंधेर नगरी’ में महंत द्वारा कपूर और कपास को समान समझने का उदाहरण देने का प्रमुख आशय क्या है?
गुण और मूल्य का विवेक समाप्त हो जाना
महंत बाहरी समानता के पीछे छिपे विवेकहीन मूल्यांकन को पहचानते हैं। उनका संकेत योग्य–अयोग्य और गुणी–मूर्ख के बीच भेद मिट जाने की ओर है।
दोनों वस्तुओं का समान उपयोग होना
व्यापार में एक समान कर लगाया जाना
नगर में कपास का उत्पादन बढ़ना
45. ‘अंधेर नगरी’ नाटक में फरियादी राजा के सामने किस घटना की शिकायत करता है?
हलवाई ने मिठाई में मिलावट की है।
कोतवाल ने उसकी भेड़ छीन ली है।
भिश्ती ने उसकी दीवार गिरा दी है।
कल्लू बनिए की दीवार के नीचे उसकी बकरी दब गई है।
इसी शिकायत से राजसभा की विचित्र न्यायप्रक्रिया आरंभ होती है। दोष क्रमशः एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति पर डाला जाता है।
46. निम्नलिखित पात्रों का उनकी प्रमुख भूमिका अथवा प्रवृत्ति से सुमेलन कीजिए।
सूची–I (पात्र) – सूची–II (भूमिका/प्रवृत्ति)
(a) महंत – (i) गुरु के साथ नगर छोड़ना
(b) नारायणदास – (ii) विवेकहीन दंडव्यवस्था
(c) गोवर्धनदास – (iii) दूरदर्शी मार्गदर्शन
(d) चौपट राजा – (iv) सस्ते भोजन का आकर्षण
(a)–(iii), (b)–(iv), (c)–(i), (d)–(ii)
(a)–(iii), (b)–(i), (c)–(iv), (d)–(ii)
महंत संकट को पहले पहचानते हैं। नारायणदास उनका अनुसरण करता है। गोवर्धनदास भोजन के लोभ में रुकता है। राजा की न्यायप्रक्रिया अविवेकपूर्ण है।
(a)–(i), (b)–(iii), (c)–(ii), (d)–(iv)
(a)–(iv), (b)–(ii), (c)–(iii), (d)–(i)
47. ‘अंधेर नगरी’ नाटक से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
कथन–I: बैकुंठ जाने की बात सुनकर मंत्री और कोतवाल भी फाँसी चढ़ने की इच्छा व्यक्त करते हैं।
कथन–II: राजा प्रजा के प्राण बचाने के लिए त्यागभाव से स्वयं फाँसी चढ़ना चाहता है।
दोनों कथन सत्य हैं।
कथन–I सत्य है, कथन–II असत्य है।
मंत्री और कोतवाल भी इस अवसर का लाभ चाहते हैं। राजा का निर्णय प्रजाहित से प्रेरित नहीं है। वह बैकुंठ जाने पर अपना पहला अधिकार जताता है।
कथन–I असत्य है, कथन–II सत्य है।
दोनों कथन असत्य हैं।
48. ‘अंधेर नगरी’ नाटक के आरंभिक संस्कृत पद्य में हाथी देकर गधा खरीदने जैसी स्थिति किस व्यापक प्रवृत्ति का संकेत करती है?
पशुपालन की लाभकारी नीति
श्रेष्ठ का त्याग करके निकृष्ट को अपनाना
आरंभिक पद्य में उलटे मूल्यांकन के अनेक उदाहरण हैं। ये गुण की उपेक्षा और अवगुण के सम्मान की उस प्रवृत्ति की भूमिका बनाते हैं, जो आगे नाटक में दिखाई देती है।
परिवहन के साधनों का विकास
राजकीय व्यापार का विस्तार
49. ‘अंधेर नगरी’ के घटनाक्रम के संदर्भ में कौन-सा तथ्य असत्य है?
गोवर्धनदास दूसरे दृश्य में बाजार पहुँचता है।
चौथे दृश्य में राजा बकरी की मृत्यु का मामला सुनता है।
तीसरे दृश्य में महंत और गोवर्धनदास के रास्ते अलग होते हैं।
गोवर्धनदास को चौथे दृश्य में राजसभा के भीतर पकड़ा जाता है।
गोवर्धनदास पाँचवें दृश्य में पकड़ा जाता है। उस समय वह आरण्य में मिठाई खा रहा होता है।
50. ‘अंधेर नगरी’ नाटक के प्रथम दृश्य के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
(i) महंत गोवर्धनदास को पश्चिम की ओर भेजते हैं।
(ii) नारायणदास को पूरब की ओर जाने के लिए कहा जाता है।
(iii) महंत अधिक से अधिक लोभ करने की शिक्षा देते हैं।
(iv) भिक्षा की सामग्री से श्री शालग्राम जी का भोग तैयार करने की बात आती है।
सही कथनों का चयन कीजिए।
केवल (i) और (iii)
केवल (ii) और (iv)
केवल (i), (ii) और (iv)
दिशा और भोग-सामग्री संबंधी तीनों तथ्य सही हैं। महंत लोभ को प्रोत्साहित नहीं करते। वे उसे पाप का मूल बताते हैं।
(i), (ii), (iii) और (iv)
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