हिंदी निबंध

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मजदूरी और प्रेम निबंध- अध्यापक पूर्ण सिंह | majduri aur prem

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हल चलाने वाले का जीवन हल चलाने वाले और भेड़ चराने वाले प्रायः स्वभाव से ही साधु होते हैं। हल चलाने वाले अपने शरीर का...
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धर्म और समाज निबंध- चंद्रधर शर्मा गुलेरी | dharm aur samaj

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समाज के लिये धर्म की आवश्यकता है या नहीं? इस प्रश्न पर कुछ अपने विचार प्रकट करना ही आज इस लेख का उद्देश्य है।...
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साहित्य जनसमूह के हृदय का विकास है निबंध- बालकृष्ण भट्ट

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प्रत्येक देश का साहित्य उस देश के मनुष्यों के हदय का आदर्श रूप है। जो जाति जिस समय जिस भाव से परिपूर्ण या परिप्लुत...
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वैष्णवता और भारतवर्ष निबंध- भारतेन्दु हरिश्चंद्र

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⁠इस लेख का उल्लेख ‘रामायण का समय’ नामक लेख में पहले ही आ चुका है जो सन् 1884 की रचना है। अतः यह उसके...
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धोखा निबंध- प्रताप नारायण मिश्र | dhokha nibandh

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इन दो अक्षरों में भी न जाने कितनी शक्ति है कि इनकी लपेट से बचना यदि निरा असंभव न हो तो भी महा कठिन...
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आप निबंध- प्रतापनारायण मिश्र | aap- pratap narayan mishra

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ले भला बतलाइए तो आप क्या हैं? आप कहते होंगे, वाह आप तो आप ही हैं। यह कहाँ की आपदा आई? यह भी कोई...

मेले का ऊँट निबंध- बालमुकुंद गुप्त | mele ka unth nibandh

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  बालमुकुंद गुप्त भारतेंदु युग के परवर्ती लेखक हैं। शिवशंभु के चिट्ठे, उर्दू बीबी के नाम चिट्ठी, हरिदास, खिलौना, खेलतमाशा, स्फुट कविता आदि उनके प्रमुख निबंध...
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दिल्‍ली दरबार दर्पण निबंध- भारतेंदु हरिश्चंद्र | dilli darbar darpan

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दिल्ली दरबार दर्पण के रचनाकार भारतेंदु हरिश्चंद हैं। भारतेंदु ने दिल्‍ली दरबार दर्पण निबंध को वर्णात्मक शैली में लिखा है। यहाँ पर भारतेंदु का...
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भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है- भारतेंदु हरिश्चंद्र

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‘भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है’ निबंध के लेखक भारतेंदु हरिश्चंद हैं। भारतेंदु जी का यह निबंध (bharat varshonnati kaise ho sakti hai) बहुत महत्वपूर्ण है। इस...
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साहित्य का उद्देश्य निबंध- प्रेमचंद | sahitya ka uddeshya

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1936 लखनऊ में होने वाले प्रगतिशील लेखक संघ के पहले अधिवेशन में प्रेमचंद द्वारा दिया गया अध्यक्षीय भाषण। सज्जनों, यह सम्मेलन हमारे साहित्य के इतिहास में स्मरणीय...
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