KVS/NVS PGT हिन्दी टियर 2 प्रश्न पत्र (29 मार्च 2026)

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KVS NVS PGT Hindi Question Paper | MCQ Quiz with Answers
KVS/NVS PGT Hindi प्रश्न पत्र

केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) और नवोदय विद्यालय समिति (NVS) द्वारा आयोजित PGT हिन्दी टियर 2 परीक्षा, जो 29 मार्च 2026 को आयोजित हुई थी। इस परीक्षा में पूछे गए प्रश्न न केवल पाठ्यक्रम आधारित थे, बल्कि उनकी प्रकृति विश्लेषणात्मक और अवधारणात्मक भी रही। इसमें आचार्य रामचंद्र शुक्ल के ‘हिन्दी साहित्य का इतिहास’ से अधिकतर प्रश्न पूछे गए थे।

इस प्रश्न पत्र में 60 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) और 40 अति लघुउत्तरीय प्रश्न पूछे गए थे। उनके संभावित उत्तर और विस्तृत व्याख्या सहित प्रस्तुत किए गए हैं, ताकि अभ्यर्थी न केवल सही उत्तर जान सकें, बल्कि उसके पीछे का तर्क भी समझ सकें।

आधिकारिक उत्तर कुंजी (Official Answer Key) जारी होने के बाद आवश्यक संशोधन किए जा सकते हैं। यदि किसी प्रश्न या उत्तर में आपको त्रुटि प्रतीत हो, तो कृपया कमेंट के माध्यम से अवगत कराएं।

बहुविकल्पीय प्रश्न

1. ‘काव्य और कला तथा अन्य निबंध’ के रचनाकार हैं:
जयशंकर प्रसाद
‘काव्य और कला तथा अन्य निबंध’ छायावाद के प्रवर्तक जयशंकर प्रसाद का महत्वपूर्ण आलोचनात्मक निबंध संग्रह है। इस कृति में प्रसाद जी ने काव्य की आत्मा, कला की परिभाषा और सौंदर्यशास्त्र पर अपने गंभीर दार्शनिक विचार व्यक्त किए हैं।
सूर्यकांत त्रिपाठी निराला
सुमित्रानंदन पंत
महादेवी वर्मा
2. निम्नलिखित में सुमित्रानंदन पंत की रचना नहीं है:
पथ के साथी
‘पथ के साथी’ महादेवी वर्मा द्वारा लिखित एक प्रसिद्ध संस्मरण है, जिसमें उन्होंने अपने समकालीन कवियों (जैसे निराला, पंत, प्रसाद आदि) का रेखांकन किया है। शेष तीनों रचनाएँ-शिल्प और दर्शन, शिल्पी और गद्य पथ-सुमित्रानंदन पंत की हैं।
शिल्प और दर्शन
शिल्पी
गद्य पथ
3. निम्नलिखित में माखनलाल चतुर्वेदी की रचना है:
साहित्य देवता
‘साहित्य देवता’ पं. माखनलाल चतुर्वेदी का प्रसिद्ध भावात्मक गद्य-काव्य है। अन्य विकल्पों में ‘स्वर्ण धूलि’ और ‘सत्यकाम’ सुमित्रानंदन पंत की कृतियाँ हैं, जबकि ‘प्रभावती’ सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का उपन्यास है।
स्वर्ण धूलि
सत्यकाम
प्रभावती
4. निम्नलिखित में सूर्यकांत त्रिपाठी की रचना नहीं है:
अनामिका
अणिमा
अतिमा
‘अतिमा’ सुमित्रानंदन पंत का काव्य संग्रह है। अनामिका, अणिमा और बेला छायावाद के प्रमुख कवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की विख्यात काव्य कृतियाँ हैं।
बेला
5. निम्नलिखित रचनाओं में महादेवी वर्मा का रेखाचित्र-संस्मरण नहीं है:
स्मृति रेखा
महादेवी वर्मा के प्रमुख संस्मरण और रेखाचित्र ‘अतीत के चलचित्र’, ‘स्मृति की रेखाएँ’ और ‘पथ के साथी’ हैं। ‘स्मृति रेखा’ नाम से उनकी कोई स्वतंत्र और प्रसिद्ध कृति नहीं है।
अतीत के चलचित्र
स्मृति की रेखाएँ
पथ के साथी
6. निम्नलिखित में से नामवर सिंह की पुस्तक है:
साहित्यानुशीलन
कविता के नए प्रतिमान
‘कविता के नए प्रतिमान’ डॉ. नामवर सिंह की सुप्रसिद्ध आलोचनात्मक पुस्तक है, जिसके लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार प्रदान किया गया था।
हिन्दी साहित्य के अस्सी वर्ष
साहित्य की समस्याएँ
7. निम्नलिखित में प्रगतिवादी/मार्क्सवादी आलोचक नहीं है:
रामविलास शर्मा
नामवर सिंह
शिवदानसिंह चौहान
केसरीनारायण शुक्ल
डॉ. रामविलास शर्मा, नामवर सिंह और शिवदान सिंह चौहान हिंदी के प्रमुख मार्क्सवादी या प्रगतिवादी आलोचक माने जाते हैं। केसरीनारायण शुक्ल इस आलोचनात्मक विचारधारा के प्रमुख स्तंभों में शामिल नहीं हैं।
8. निम्नलिखित में ‘दीर्घतपा’ उपन्यास के लेखक हैं:
भगवती चरण वर्मा
अमृतलाल नागर
फणीश्वरनाथ रेणु
‘दीर्घतपा’ हिंदी के प्रसिद्ध आंचलिक उपन्यासकार फणीश्वरनाथ रेणु द्वारा रचित उपन्यास है।
वृंदावनलाल वर्मा
9. निम्नलिखित कहानी और कहानीकारों के युग्मों में असंगत है:
बिसाती – जयशंकर प्रसाद
खेल – जैनेन्द्र
पिंजड़े की उड़ान – अज्ञेय
‘पिंजड़े की उड़ान’ प्रसिद्ध प्रगतिवादी लेखक यशपाल की कहानी है, न कि अज्ञेय की।
अंकुर – इलाचंद्र जोशी
10. ‘अंधा कुआँ’ नाटक के रचयिता हैं:
धर्मवीर भारती
मोहन राकेश
लक्ष्मीनारायण लाल
‘अंधा कुआँ’ (1955) डॉ. लक्ष्मीनारायण लाल का पहला और अत्यंत चर्चित नाटक है। यह नाटक ग्रामीण जीवन की समस्याओं और मानवीय कुंठाओं को चित्रित करता है।
लक्ष्मीकांत वर्मा
11. “राम को रूप निहारत जानकि कंकन के नग की परछाहीं। / याते सबै सुधि भूलि गई, कर टेकि रही, पल डारत नाहीं॥” – प्रस्तुत काव्य पंक्तियाँ तुलसीदास की किस रचना से हैं?
कवितावली
ये पंक्तियाँ तुलसीदास कृत ‘कवितावली’ के अयोध्याकांड से ली गई हैं। इसमें उस समय का वर्णन है जब वन मार्ग में श्री राम के सौंदर्य को देखकर माता सीता मुग्ध हो जाती हैं और अपनी सुध-बुध खो बैठती हैं।
रामचरित मानस
दोहावली
विनयपत्रिका
12. “चरन धरत चिंता करत चितवत चारहुँ ओर / सुवरन को ढूँढत फिरत कवि, व्यभिचारी चोर।” प्रस्तुत दोहा किस अलंकार का उदाहरण है:
श्लेष अलंकार
यहाँ ‘सुवरन’ शब्द में श्लेष अलंकार है क्योंकि इसके तीन अलग-अलग अर्थ निकलते हैं: कवि के संदर्भ में ‘सुंदर अक्षर’, व्यभिचारी के संदर्भ में ‘सुंदर रूप/रंग’ और चोर के संदर्भ में ‘सोना (स्वर्ण)’। जब एक ही शब्द से कई अर्थ चिपके हों, तो वहाँ श्लेष होता है।
यमक अलंकार
रूपक अलंकार
उत्प्रेक्षा अलंकार
13. निम्नलिखित में पश्चिमी हिन्दी की बोली नहीं है:
बुंदेली
कन्नौजी
बघेली
बघेली ‘पूर्वी हिंदी’ की बोली है (अवधी, बघेली, छत्तीसगढ़ी)। जबकि बुंदेली, कन्नौजी, खड़ी बोली (कौरवी), ब्रजभाषा और हरियाणवी पश्चिमी हिंदी की बोलियाँ हैं।
खड़ी बोली
14. भारत की संविधान सभा ने हिन्दी को संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया:
14 सितंबर 1947
14 सितंबर 1948
14 सितंबर 1949
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 343 के तहत 14 सितंबर 1949 को हिंदी को राजभाषा के रूप में स्वीकार किया गया था। इसी ऐतिहासिक निर्णय के कारण प्रतिवर्ष 14 सितंबर को ‘हिंदी दिवस’ मनाया जाता है।
14 सितंबर 1950
15. भारतीय संविधान की किस अनुसूची में भारतीय भाषाओं का उल्लेख किया गया है?
आठवीं अनुसूची
भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में भारत की आधिकारिक भाषाओं को सूचीबद्ध किया गया है। वर्तमान में इस अनुसूची में कुल 22 भाषाएँ शामिल हैं।
नौवीं अनुसूची
दसवीं अनुसूची
ग्यारहवीं अनुसूची
16. अंग्रेजी समाचार एजेंसी पी.टी.आई. की हिन्दी समाचार एजेंसी है:
यूनीवार्ता
भाषा
‘भाषा’ (Bhasha), प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (PTI) की हिंदी समाचार सेवा है। यूनीवार्ता यू.एन.आई. (UNI) की हिंदी सेवा है।
समाचार भारती
हिन्दुस्तान समाचार
17. समाचार एजेंसी ‘हिन्दुस्तान समाचार’ की स्थापना हुई:
सन् 1940 ई.
सन् 1947 ई.
सन् 1948 ई.
हिन्दुस्तान समाचार भारत की पहली बहुभाषी समाचार एजेंसी है, जिसकी स्थापना 1948 में हुई थी।
सन् 1950 ई.
18. निम्नलिखित में दुखांतक (ट्रैजेडी) का अंग नहीं है:
भाषा-शैली
चरित्र
विचार
दृश्य
अरस्तू के अनुसार दुखांतक (Tragedy) के छह तत्व होते हैं- कथानक, चरित्र, विचार, पद-योजना (भाषा-शैली), गीत और दृश्य-विधान। साहित्य समीक्षा में अक्सर ‘दृश्य’ को बाहरी प्रदर्शन का हिस्सा माना जाता है, जबकि अन्य तीन आंतरिक साहित्यिक रचना के अंग हैं।
19. निम्नलिखित में कहानी का मुख्य तत्व नहीं है:
चरित्र-चित्रण
परिवेश
द्वंद्व
कहानी के मानक छह तत्व माने जाते हैं: कथावस्तु, पात्र/चरित्र-चित्रण, कथोपकथन, देशकाल/परिवेश, भाषा-शैली और उद्देश्य। द्वंद्व कहानी या नाटक की विशेषता या आत्मा हो सकता है, लेकिन इसे स्वतंत्र ‘तत्व’ के रूप में नहीं गिना जाता।
भाषा-शैली
20. निम्नलिखित में पत्रकारिता का प्रकार नहीं है:
विशेषीकृत पत्रकारिता
वॉचडॉग
वैकल्पिक पत्रकारिता
परिवेश पत्रकारिता
पत्रकारिता के विभिन्न प्रकारों में खोजी, विशेषीकृत, वॉचडॉग (पहरेदार) और वैकल्पिक पत्रकारिता प्रमुख हैं। ‘परिवेश पत्रकारिता’ नाम से कोई मानक वर्गीकरण पत्रकारिता के क्षेत्र में प्रचलित नहीं है।
21. जन्मकाल की दृष्टि से निम्नलिखित रचनाकारों का सही अनुक्रम है:
कबीर, जायसी, मीराबाई, रहीम
इनका जन्म वर्ष इस प्रकार है: कबीर (1398 ई.), जायसी (1492 ई.), मीराबाई (1498 ई.) और रहीम (1556 ई.)।
कबीर, मीराबाई, रहीम, जायसी
कबीर, जायसी, रहीम, मीराबाई
जायसी, कबीर, रहीम, मीराबाई
22. ‘उत्तम पद कवि गंग के, कविता को बल बीर। / केशव अर्थ गंभीर को, सूर तीन गुन धीर॥’ प्रस्तुत दोहे में सर्वाधिक प्रशंसा किसकी की गई है?
गंग कवि
केशवदास
सूरदास
इस दोहे में गंग, वीरबल और केशवदास की विशेषताओं का उल्लेख करने के बाद अंत में कहा गया है कि सूरदास में ये तीनों ही गुण धैर्य के साथ समाहित हैं। अतः इसमें सूरदास की श्रेष्ठता बताई गई है।
तुलसी
23. “मेरे मात पिता के सम हौ, हरिभक्तन्ह सुखदाई। / हमको कहा उचित करिवो है, सो लिखिए समझाई॥” प्रस्तुत पंक्तियाँ घरवालों से तंग आकर मीराबाई ने किस रचनाकार को संबोधित की हैं?
सूरदास
केशवदास
तुलसीदास
मीराबाई ने जब अपने परिवार के उत्पीड़न से परेशान होकर तुलसीदास जी को पत्र लिखा था, तब उन्होंने इन पंक्तियों के माध्यम से मार्गदर्शन माँगा था। तुलसीदास ने इसके उत्तर में ‘जाके प्रिय न राम-बैदेही’ वाला पद भेजा था।
नंददास
24. “सघन कुंज छाया सुखद, सीतल मंद समीर। / मन हुवे जात अजौं वहै, वा जमुना के तीर॥” प्रस्तुत काव्य पंक्तियों के रचयिता हैं:
रसखान
सूरदास
बिहारी
यह प्रसिद्ध दोहा रीतिकालीन कवि बिहारी लाल की एकमात्र कृति ‘बिहारी सतसई’ से लिया गया है। इसमें कवि जमुना के तट के सुखद वातावरण और कृष्ण के साथ जुड़ी स्मृतियों का वर्णन कर रहे हैं।
रसलीन
25. “हिन्दी रीतिग्रंथों की परंपरा चिंतामणि त्रिपाठी से चली, अतः रीतिकाल का आरंभ उन्हीं से मानना चाहिए।” प्रस्तुत कथन है:
विश्वनाथ प्रसाद मिश्र का
विश्वनाथ त्रिपाठी का
भगीरथ मिश्र का
रामचंद्र शुक्ल का
आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने अपने ‘हिन्दी साहित्य का इतिहास’ में स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है कि यद्यपि केशवदास कालक्रम में पहले आते हैं, किंतु हिंदी में रीतिग्रंथों की अखंड परंपरा चिंतामणि त्रिपाठी से शुरू होती है, इसलिए रीतिकाल का वास्तविक प्रवर्तक उन्हें ही मानना चाहिए।
26. निम्नलिखित में चिंतामणि त्रिपाठी की रचना नहीं है-
काव्यप्रकाश
छंदसार
‘छंदसार’ (जिसे ‘वृत्तसार’ भी कहा जाता है) मतिराम की रचना मानी जाती है, जबकि कुछ विद्वान इसे सुखदेव मिश्र की रचना भी कहते हैं। चिंतामणि त्रिपाठी की प्रमुख रचनाओं में ‘काव्यप्रकाश’, ‘काव्य विवेक’, ‘कविकुल कल्पतरु’ और ‘रामायण’ (राम-अश्वमेध) शामिल हैं।
काव्य विवेक
रामायण
27. निम्नलिखित में देव की रचना नहीं है:
भाव विलास
अष्टयाम
युक्ति तरंगिणी
‘युक्ति तरंगिणी’ रीतिकाल के कवि कुलपति मिश्र की रचना है। ‘भाव विलास’, ‘अष्टयाम’ और ‘भवानी विलास’ रीतिकाल के महान कवि देव (देवदत्त) की प्रसिद्ध कृतियाँ हैं।
भवानी विलास
28. निम्नलिखित में घनानंद की रचना नहीं है:
प्रेमतंरग
‘प्रेम तरंग’ आधुनिक काल के प्रवर्तक भारतेंदु हरिश्चंद्र की काव्य कृति है। ‘सुजानसागर’, ‘विरहलीला’ और ‘कोकसार’ रीतिमुक्त काव्यधारा के प्रमुख कवि घनानंद की रचनाएँ हैं।
सुजानसागर
विरहलीला
कोकसगर
29. “आधुनिक काल में गद्य का आविर्भाव सबसे प्रधान साहित्यिक घटना है। इसलिए उसके प्रसार का वर्णन विशेष विस्तार के साथ करना पड़ता है।” प्रस्तुत मत के प्रस्तुतकर्ता हैं:
रामचंद्र शुक्ल
यह सुप्रसिद्ध कथन आचार्य रामचंद्र शुक्ल का है। उन्होंने आधुनिक काल (गद्य काल) की व्याख्या करते हुए गद्य के विकास को साहित्य की सबसे महत्वपूर्ण और युगांतरकारी घटना माना है।
हजारीप्रसाद द्विवेदी
नगेन्द्र
रामशंकर शुक्ल ‘रसाल’
30. निम्नलिखित में जयशंकर प्रसाद की रचना नहीं है:
झरना
आँसू
लहर
वाणी
‘वाणी’ सुमित्रानंदन पंत का काव्य संग्रह है। ‘झरना’, ‘आँसू’ और ‘लहर’ छायावाद के प्रमुख स्तंभ जयशंकर प्रसाद की कालजयी काव्य कृतियाँ हैं।
31. ‘सरयू पार की यात्रा’ यात्रावृत्तांत के लेखक हैं:
भारतेंदु हरिश्चंद्र
हिंदी में आधुनिक यात्रावृत्तांत लिखने की परंपरा का श्रेय भारतेंदु हरिश्चंद्र को जाता है। ‘सरयू पार की यात्रा’, ‘लखनऊ की यात्रा’ और ‘हरिद्वार की यात्रा’ उनके प्रमुख यात्रावृत्तांत हैं।
देवकी नंदन खत्री
शिवप्रसाद गुप्त
कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’
32. ‘सुधियाँ उस चंदन के वन की’ संस्मरण के लेखक हैं:
विष्णु प्रभाकर
विद्यानिवास मिश्र
विष्णुकांत शास्त्री
‘सुधियाँ उस चंदन के वन की’ डॉ. विष्णुकांत शास्त्री द्वारा लिखित एक अत्यंत भावपूर्ण संस्मरण है, जिसमें उन्होंने अपने समय के महान साहित्यकारों और व्यक्तित्वों की स्मृतियों को संजोया है।
गिरिराज किशोर
33. ‘दिल्ली शहर दर शहर’ किसकी रचना है?
कमलेश्वर
असगर वजाहत
निर्मला जैन
‘दिल्ली शहर दर शहर’ सुप्रसिद्ध आलोचिका और लेखिका निर्मला जैन की संस्मरणात्मक कृति है, जिसमें दिल्ली के बदलते परिवेश और साहित्यिक वातावरण का अंकन है।
खुशवंत सिंह
34. ‘गुड़िया भीतर गुड़िया’ आत्मकथा की रचयिता हैं:
कुसुम अंसल
सुषम बेदी
रमणिका गुप्ता
मैत्रेयी पुष्पा
यह मैत्रेयी पुष्पा की आत्मकथा का दूसरा भाग है (पहला भाग ‘कस्तूरी कुंडल बसै’ है)। इसमें लेखिका ने अपने संघर्षों और अनुभवों को बेबाकी से प्रस्तुत किया है।
35. अज्ञेय की किस पुस्तक में टी.एस. इलियट के निबंध का अनुवाद ‘रूढ़ि और मौलिकता’ नाम से प्रकाशित हुआ है?
त्रिशंकु
आत्मनेपद
सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ ने प्रसिद्ध पाश्चात्य आलोचक टी.एस. इलियट के प्रसिद्ध निबंध ‘Tradition and the Individual Talent’ का अनुवाद ‘रूढ़ि और मौलिकता’ शीर्षक से अपनी पुस्तक ‘आत्मनेपद’ में संकलित किया है।
अद्यतन
संवत्सर
36. निम्नलिखित में नंददुलारे वाजपेयी का निबंध-संग्रह है:
विचार और वितर्क
पूर्वोदय
नया साहित्य नए प्रश्न
‘नया साहित्य नए प्रश्न’ छायावादी आलोचक नंददुलारे वाजपेयी का महत्वपूर्ण निबंध संग्रह है। ‘विचार और वितर्क’ हजारीप्रसाद द्विवेदी की, ‘पूर्वोदय’ जैनेन्द्र की और ‘अर्द्धनारीश्वर’ रामधारी सिंह दिनकर का निबंध संग्रह है।
अर्द्ध नारीश्वर
37. निम्नलिखित में व्यंजन-संधि वाला शब्द नहीं है:
दिग्गज
सद्गुण
देवालय
‘देवालय’ (देव + आलय) में दीर्घ स्वर संधि है। शेष तीनों में व्यंजन संधि है: दिग्गज (दिक् + गज), सद्गुण (सत् + गुण) और दिगंबर (दिक् + अंबर)।
दिगंबर
38. निम्नलिखित समास और सामासिक शब्द-युग्म में असंगत है:
तत्पुरुष – हस्तलिखित
कर्मधारय – नीलगगन
बहुब्रीहि – मुखचंद्र
यह युग्म असंगत है क्योंकि ‘मुखचंद्र’ (चंद्रमा जैसा मुख) में कर्मधारय समास है (उपमान-उपमेय संबंध के कारण), बहुब्रीहि नहीं। वहीं हस्तलिखित (हाथ से लिखा हुआ) तत्पुरुष है, नीलगगन (नीला है जो गगन) कर्मधारय है और प्रत्येक (एक-एक) अव्ययीभाव है।
अव्ययीभाव – प्रत्येक
39. निम्नलिखित में कृष्णभक्त कवि/कवयित्री नहीं है:
मीराबाई
रसखान
नंददास
स्वामी अग्रदास
स्वामी अग्रदास रामभक्ति शाखा के कवि हैं और इन्होंने रामभक्ति में ‘रसिक संप्रदाय’ की स्थापना की थी। मीराबाई, रसखान और अष्टछाप के कवि नंददास भगवान कृष्ण के अनन्य भक्त थे।
40. निम्नलिखित में केशवदास की रचना नहीं है:
कविप्रिया
रसिक प्रिया
रहस्यमंजरी
‘रहस्यमंजरी’ (या रसमंजरी/विरहमंजरी आदि) अष्टछाप के कवि नंददास की रचना है। कविप्रिया, रसिक प्रिया और रामचंद्रिका रीतिबद्ध कवि केशवदास की प्रसिद्ध रचनाएँ हैं।
रामचंद्रिका
41. अपभ्रंश को ‘पुरानी हिन्दी’ कहने वाले हैं:
शिवदान सिंह चौहान
रामविलास शर्मा
चंद्रधर शर्मा गुलेरी
पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी ने सबसे पहले ‘उत्तर-अपभ्रंश’ को ‘पुरानी हिंदी’ नाम दिया था। उनका मानना था कि अपभ्रंश और पुरानी हिंदी के बीच कोई स्पष्ट विभाजक रेखा नहीं है।
महावीर प्रसाद द्विवेदी
42. हिन्दी साहित्य के इतिहास के विभिन्न कालों के नामकरण के बारे में निम्नलिखित मत देने वाले इतिहासकार हैं:
“जिस कालविभाग के भीतर किसी विशेष ढंग की रचनाओं की प्रचुरता दिखाई पड़ी है, वह एक अलग काल माना गया है और उसका नामकरण उन्हीं रचनाओं के स्वरूप के अनुसार किया गया है।”
हजारीप्रसाद द्विवेदी
श्यामसुंदर दास
रामचंद्र शुक्ल
यह सुप्रसिद्ध सिद्धांत आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने अपने ‘हिन्दी साहित्य का इतिहास’ की भूमिका में दिया है। इसी आधार पर उन्होंने ‘वीरगाथा काल’, ‘भक्ति काल’ आदि का नामकरण किया था।
नगेन्द्र
43. हिन्दी साहित्य के इतिहास के आदिकाल के लक्षण-निरूपण और नामकरण में बारह पुस्तकों को आधार बनाने वाले साहित्येतिहासकार हैं:
मिश्रबंधु
जार्ज ग्रियर्सन
रामचंद्र शुक्ल
आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने अपने इतिहास ग्रंथ में आदिकाल (वीरगाथा काल) के लक्षण-निरूपण और नामकरण के लिए 12 ग्रंथों को आधार बनाया था। इनमें विजयपाल रासो, हम्मीर रासो, कीर्तिलता, कीर्तिपताका, खुमान रासो, बीसलदेव रासो, पृथ्वीराज रासो, जयचंद प्रकाश, जयमयंक जस चंद्रिका, परमाल रासो, अमीर खुसरो की पहेलियाँ और विद्यापति की पदावली शामिल हैं।
गणपतिचंद्र गुप्त
44. आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी की पुस्तक ‘हिन्दी साहित्य का आदिकाल’ का प्रथम संस्करण प्रकाशित हुआ:
सन् 1950
सन् 1952
‘हिन्दी साहित्य का आदिकाल’ आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी की एक महत्वपूर्ण आलोचनात्मक कृति है, जो पहली बार सन् 1952 में प्रकाशित हुई थी। यह पुस्तक मूल रूप से उनके द्वारा बिहार राष्ट्रभाषा परिषद में दिए गए व्याख्यानों का संग्रह है, जिसमें उन्होंने आदिकाल की प्रवृत्तियों पर नवीन दृष्टि डाली है।
सन् 1954
सन् 1956
45. हिन्दी साहित्य के आदिकाल को ‘सिद्ध सामंत युग’ कहने वाले लेखक हैं:
हजारीप्रसाद द्विवेदी
राहुल सांकृत्यायन
महापंडित राहुल सांकृत्यायन ने आदिकाल की साहित्यिक प्रवृत्तियों (सिद्धों की रचनाओं) और तत्कालीन राजनैतिक परिस्थितियों (सामंती व्यवस्था) के आधार पर इस काल को ‘सिद्ध सामंत युग’ नाम दिया था।
रामचंद्र शुक्ल
रामकुमार वर्मा
46. “सरस वसंत समय भल पावलि, दछिन पवन बह धीर। / सपनहु रूप वचन इक भाषिय, मुख से दूरि करु चीरे॥” – प्रस्तुत काव्य पंक्तियों के रचनाकार हैं:
अमीर खुसरो
विद्यापति
ये पंक्तियाँ मैथिल कोकिल विद्यापति की हैं। विद्यापति अपनी शृंगारिक पदावलियों के लिए प्रसिद्ध हैं। इन पंक्तियों में वसंत ऋतु के आगमन और नायक-नायिका के मध्य की स्थितियों का अत्यंत सुंदर चित्रण किया गया है।
केशवदास
बिहारीलाल
47. “वे फारसी के बहुत अच्छे ग्रंथकार और अपने समय के नामी कवि थे।” प्रस्तुत मत अमीर खुसरो के बारे में किसने प्रस्तुत किया है?
रामचंद्र शुक्ल
आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने अमीर खुसरो की बहुमुखी प्रतिभा की सराहना करते हुए यह विचार व्यक्त किया था।
विजय देवनारायण साही
गोपीचंद नारंग
हजारीप्रसाद द्विवेदी
48. ‘द्वैतवादी वैष्णव संप्रदाय’ के चलाने वाले थे:
रामानुजाचार्य
रामानंद
मध्वाचार्य
मध्वाचार्य द्वैतवाद दर्शन के प्रवर्तक थे और उन्होंने ही द्वैतवादी वैष्णव संप्रदाय की स्थापना की थी। वहीं रामानुजाचार्य- ‘विशिष्टाद्वैतवाद’, वल्लभाचार्य- ‘शुद्धाद्वैतवाद’ और रामानंद उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन के प्रमुख संत थे।
वल्लभाचार्य
49. “सूर समाना चंद में दहूँ किया घर एक। / मन का चिंता तब भया कछु पुरबिला लेख” – प्रस्तुत दोहे के रचयिता हैं:
नामदेव
कबीर
यह दोहा निर्गुण संत कवि कबीरदास का है। इसमें कबीर ने अपनी हठयोग साधना और आध्यात्मिक अनुभव को ‘संध्या भाषा’ (उलटबाँसी शैली) के माध्यम से व्यक्त किया है।
रैदास
दादूदयाल
50. भक्ति आंदोलन को ईसाइयत की देन कहने वाले आलोचक/इतिहासकार हैं:
गार्सा द तासी
जार्ज ग्रियर्सन
अंग्रेज विद्वान जॉर्ज ग्रियर्सन का यह विवादित मत था कि भारतीय भक्ति आंदोलन पर ईसाइयत का गहरा प्रभाव है और यह उसी की देन है।
हजारीप्रसाद द्विवेदी
गणपतिचंद्र गुप्त
51. “हिन्दी साहित्य का सचमुच ही क्रमबद्ध इतिहास पं. रामचंद्र शुक्ल ने ‘हिन्दी-शब्द-सागर’ की भूमिका के रूप में प्रस्तुत किया था।” प्रस्तुत मत है:
हजारीप्रसाद द्विवेदी का
यह आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी का कथन है। उन्होंने शुक्ल जी के इतिहास ग्रंथ की महत्ता को स्वीकार करते हुए माना था कि उन्होंने ही पहली बार वैज्ञानिक और क्रमबद्ध ढंग से हिंदी साहित्य का इतिहास लिखा था।
रामविलास शर्मा का
रामकुमार वर्मा का
नगेन्द्र का
52. मात्रिक छंद ‘पद्धरी’ या ‘पद्धड़िया’ कितनी मात्राओं का छंद है?
तेरह
चौदह
सोलह
‘पद्धड़िया’ (या पद्धरी) एक सम-मात्रिक छंद है, जिसके प्रत्येक चरण में 16 मात्राएँ होती हैं। अपभ्रंश साहित्य में इस छंद का बहुत अधिक प्रयोग हुआ है, विशेषकर ‘कड़वकबद्ध’ काव्य रचनाओं में, जहाँ कई पद्धड़िया छंदों के बाद एक ‘धत्ता’ या ‘दूहा’ दिया जाता था।
बारह
53. निम्नलिखित में से किसका मानना है कि “कवि चंदबरदाई और उनके आश्रयदाता राजा का जन्म एक ही दिन हुआ था और दोनों ने एक ही दिन यह संसार भी छोड़ा था।”?
नामवर सिंह
जार्ज ग्रियर्सन
हजारीप्रसाद द्विवेदी
रामचंद्र शुक्ल
आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने अपने इतिहास ग्रंथ में पृथ्वीराज चौहान और उनके दरबारी कवि चंदबरदाई की प्रगाढ़ मित्रता का वर्णन करते हुए उल्लेख किया है कि इन दोनों का जन्म और मरण एक ही दिन हुआ था, जिसे ‘एक थाल जन्म, एक थाल मरण’ की कहावत से भी जोड़ा जाता है।
54. किस आलोचक का कथन है कि “जब से प्राकृत बोलचाल की भाषा न रह गई तभी से अपभ्रंश साहित्य का आविर्भाव समझना चाहिए।”
हजारीप्रसाद द्विवेदी
रामचंद्र शुक्ल
यह कथन आचार्य रामचंद्र शुक्ल का है।
नामवर सिंह
भोलानाथ तिवारी
55. “दीर्घ काल से हिन्दी साहित्य के इतिहास लेखक अपभ्रंश भाषा के साहित्य को भी हिन्दी साहित्य के पूर्व रूप में ग्रहण करते आए हैं। मिश्रबंधुओं ने अपनी पुस्तक में अनेक अपभ्रंश रचनाओं को स्थान दिया है।” – प्रस्तुत मत देने वाले आलोचक हैं:
नामवर सिंह
रामविलास शर्मा
हजारीप्रसाद द्विवेदी
रामचंद्र शुक्ल
यह विचार आचार्य रामचंद्र शुक्ल द्वारा व्यक्त किया गया है।

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उसपर आधारित प्रश्नों (56-60) के सटीक उत्तर दीजिए:

जल प्रदूषण के समान ही ध्वनि प्रदूषण भी आधुनिक जीवन की समस्या है। वह आवाज जो असुविधाजनक हो, अनुपयोगी हो तथा अनावश्यक महसूस होती हो- शोर है। यह शोर ही ध्वनि प्रदूषण का कारण है। शोर कई तरह से उत्पन्न होता है। एक व्यक्ति के लिए संगीत आनंददायक है, किंतु वही संगीत दूसरे व्यक्ति के लिए शोर हो सकता है। रेलगाड़ी की आवाज, सड़कों पर मोटरों की पों-पों, ट्रकों की धड़-धड़, कारखानों में मशीनों के चलने की तेज आवाज, हवाई जहाजों का भीषण गर्जन, सड़कों पर विज्ञापन का प्रचार करने वाले लाउड स्पीकरों का शोर और टी.वी. एवं रेडियो का शोर भी ध्वनि प्रदूषण के कारण हैं। ध्वनि प्रदूषण मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। यहाँ तक कि अधिक समय तक ज्यादा शोर में रहने के कारण कई बार लोगों की श्रवण शक्ति खराब हो जाती है। ध्वनि प्रदूषण से मनुष्य केवल श्रवण दोष से ग्रसित ही नहीं होता, उसे रक्तचाप, अल्सर, अनिद्रा के रोगों का शिकार भी होना पड़ता है।

56. गद्यांश के अनुसार ध्वनि प्रदूषण से उत्पन्न आधुनिक जीवन की समस्या नहीं है:
जल-प्रदूषण और खाद्य पदार्थ मिलावट
गद्यांश का मुख्य विषय ध्वनि प्रदूषण है। इसमें रक्तचाप, अनिद्रा और ध्वनि प्रदूषण को समस्या बताया गया है, लेकिन जल-प्रदूषण और खाद्य मिलावट का उल्लेख ध्वनि प्रदूषण से उत्पन्न समस्या के रूप में नहीं हुआ है।
ध्वनि प्रदूषण और रक्तचाप
ध्वनि प्रदूषण और अनिद्रा
जल प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण
57. ‘शोर’ नहीं है:
वह आवाज जो असुविधाजनक हो
वह आवाज जो अनावश्यक हो
वह आवाज जो अन्तर्मन में हो
गद्यांश के अनुसार शोर वह बाहरी आवाज है जो असुविधाजनक, अनुपयोगी या अनावश्यक महसूस होती है। ‘अन्तर्मन की आवाज’ को गद्यांश में शोर की श्रेणी में नहीं रखा गया है।
वह आवाज जो अनुपयोगी हो
58. ध्वनि प्रदूषण का कारण नहीं है:
यातायात
प्रसारण
मनोरंजन
श्रवण
गद्यांश में यातायात (गाड़ियाँ, हवाई जहाज), प्रसारण (रेडियो, टीवी) और मनोरंजन (लाउडस्पीकर) को ध्वनि प्रदूषण का ‘कारण’ बताया गया है।
59. ध्वनि प्रदूषण के कारण कौन-सा रोग नहीं होता?
रक्तचाप
अनिद्रा
मधुमेह
गद्यांश के अनुसार अत्यधिक शोर से मनुष्य रक्तचाप, अल्सर और अनिद्रा जैसे रोगों का शिकार हो सकता है। मधुमेह का उल्लेख ध्वनि प्रदूषण के प्रभाव के रूप में गद्यांश में नहीं है।
अल्सर
60. ध्वनि प्रदूषण के संबंध में सही कथन नहीं है:
ध्वनि प्रदूषण आधुनिक जीवन की समस्या है।
ध्वनि प्रदूषण मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
अधिक समय तक ज्यादा शोर में रहने के कारण वाक् शक्ति खराब हो सकती है।
गद्यांश स्पष्ट करता है कि अत्यधिक शोर में रहने से ‘श्रवण शक्ति’ (सुनने की क्षमता) खराब होती है, न कि ‘वाक् शक्ति’ (बोलने की क्षमता)। अतः यह कथन गलत है।
एक व्यक्ति के लिए संगीत आनंददायक है किंतु वही संगीत दूसरे के लिए शोर हो सकता है।

अति लघुउत्तरीय प्रश्न

1. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दीजिए। (अधिकतम एक-एक वाक्य में)
निम्नलिखित शब्दों के विलोमार्थी रूप लिखिए।

(A) अथ
उत्तर: ‘अथ’ शब्द का विलोमार्थी रूप ‘इति’ है।

(B) अवनति
उत्तर: ‘अवनति’ शब्द का विलोमार्थी रूप ‘उन्नति’ है।

(C) अंतरंग
उत्तर: ‘अंतरंग’ शब्द का विलोमार्थी रूप ‘बहिरंग’ है।

(D) अल्पज्ञ
उत्तर: ‘अल्पज्ञ’ शब्द का विलोमार्थी रूप ‘बहुज्ञ’ (या सर्वज्ञ) है।

2. सभी प्रश्नों के उत्तर दीजिए। (अधिकतम एक-एक वाक्य में)

(A) ‘विद्यापति ने अपभ्रंश से भिन्न, प्रचलित बोलचाल की भाषा को ‘देशी भाषा’ कहा है।’ विद्यापति के बारे में किसने कहा है?
उत्तर: विद्यापति के बारे में यह कथन प्रसिद्ध आलोचक आचार्य रामचंद्र शुक्ल का है।

(B) ‘गोरखनाथ के नाथपंथ का मूल भी बौद्धों की वज्रयान शाखा है।’ किसका कथन है?
उत्तर: गोरखनाथ के नाथपंथ के संबंध में यह विचार आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने व्यक्त किया है।

(C) किसका विचार है कि प्रसिद्ध ज्ञानयोगी ज्ञानदेव ने अपने को गोरखनाथ की शिष्य परंपरा में बताया है?
उत्तर: आचार्य रामचंद्र शुक्ल का विचार है कि महाराष्ट्र संत ज्ञानदेव ने, जो अलाउद्दीन के समय (सवत् 1358) में थे, अपने को गोरखनाथ की शिष्य-परम्परा में कहा है।

(D) ‘लोकभाषा का साहित्य सुरक्षित नहीं रह सका। वह लोकमुख में ही जीवित रहा है।’ किस आलोचक का मत है?
उत्तर: लोक साहित्य की परंपरा पर आधारित यह सुप्रसिद्ध विचार प्रख्यात आलोचक आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का है।

3. प्रत्येक का उत्तर अधिकतम एक-एक वाक्य में दीजिए।

(A) ‘सूरसागर में जगह-जगह दृष्टिकूट वाले पद मिलते हैं।’ रामचंद्र शुक्ल द्वारा यह किसका अनुकरण बताया गया है?
उत्तर: आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार सूरसागर के दृष्टिकूट पदों में महाकवि विद्यापति की काव्य-शैली का अनुकरण परिलक्षित होता है।

(B) “सारंग नयन, चयन सुनि सारंग, सारंग तसु संधाने।
सारंग ऊपर उगल दस सारंग केलि करथि मधुपाने॥”
प्रस्तुत काव्यपंक्तियों के रचनाकार हैं:
उत्तर: इन प्रसिद्ध काव्यपंक्तियों के रचनाकार विद्यापति हैं।

(C) “किधौं सूर को सर लग्यो, किधौं सूर की पीर।
किधौं सूर को पद लग्यो, बेध्यो सकल शरीर॥”
क्या प्रस्तुत दोहा सूरदास ने अपनी रचनाओं के बारे में स्वयं लिखा है?
उत्तर: नहीं, सूरदास ने ये पंक्तियाँ अपने बारे में स्वयं नहीं लिखी हैं; यह उनके काव्य की प्रशंसा में किसी अन्य कवि द्वारा कहा गया है।

(D) “मुरली तऊ गोपालहिं भावत” काव्यपंक्ति का भाव क्या है?
उत्तर: इस काव्यपंक्ति का मुख्य भाव कृष्ण की मुरली के प्रति गोपियों का ‘सौतिया डाह’ (ईर्ष्या) है।

4. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर अधिकतम एक-एक वाक्य में दीजिए।

(A) कालिंजर के राजकुमार रजकुँवर और आगमपुर की राजकुमारी इंद्रावती की प्रेमकहानी का वर्णन करने वाली रचना का क्या नाम है?
उत्तर: इस प्रेमकहानी का वर्णन करने वाली रचना का नाम ‘इन्द्रावती’ है, जिसके रचनाकार नूर मोहम्मद हैं।

(B) राजा हंस और रानी जवाहिर की कथा प्रस्तुत करने वाली रचना का क्या नाम है?
उत्तर: राजा हंस और रानी जवाहिर की कथा प्रस्तुत करने वाली रचना का नाम ‘हंस जवाहिर’ है, जिसके रचयिता कासिम शाह हैं।

(C) राजा ज्ञानदीप और रानी देवजानी की कथा का वर्णन करने वाली रचना कौन सी है?
उत्तर: राजा ज्ञानदीप और रानी देवजानी की कथा का वर्णन करने वाली रचना ‘ज्ञानदीप’ है, जिसके रचनाकार शेख नबी हैं।

(D) जायसीकृत रचना का नाम बताइए जिसमें कयामत का वर्णन किया गया है।
उत्तर: मलिक मोहम्मद जायसी की वह रचना ‘आखिरी कलाम’ है, जिसमें कयामत (प्रलय) का वर्णन किया गया है।

5. सभी प्रश्नों के उत्तर दीजिए। (अधिकतम एक-एक वाक्य में)

(A) शंकराचार्य के दार्शनिक सिद्धांत का क्या नाम है?
उत्तर: शंकराचार्य के दार्शनिक सिद्धांत का नाम ‘अद्वैतवाद’ है।

(B) ‘श्रीरामार्चन पद्धति’ के रचयिता का क्या नाम हैं?
उत्तर: रामभक्ति शाखा के प्रमुख आचार्य और भक्ति आंदोलन के प्रणेता स्वामी रामानंद ‘श्रीरामार्चन पद्धति’ के रचयिता हैं।

(C) ‘भक्तमाल’ में रामानंद जी के कितने शिष्यों का उल्लेख हैं?
उत्तर: नाभादास कृत ‘भक्तमाल’ में स्वामी रामानंद जी के बारह (12) शिष्यों का उल्लेख किया गया है।

(D) ‘अस्थि चर्म मय देह मम तामें जैसी प्रीति।’ रत्नावली द्वारा तुलसीदास को कही बात का अभिप्राय है:
उत्तर: रत्नावली की इस बात का अभिप्राय तुलसीदास को नश्वर शरीर के प्रति आसक्ति (मोह) छोड़कर ईश्वर (राम) से प्रेम करने की सीख देना था।

6. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दीजिए। (अधिकतम एक-एक वाक्य में)

(A) तत्सम शब्द ‘अग्नि’ का तद्भव रूप क्या है?
उत्तर: तत्सम शब्द ‘अग्नि’ का तद्भव रूप ‘आग’ है।

(B) तत्सम शब्द ‘वायु’ का तद्भव रूप क्या है?
उत्तर: तत्सम शब्द ‘वायु’ का तद्भव रूप ‘बयार’ (या हवा) है।

(C) तत्सम शब्द ‘कर्ण’ का तद्भव रूप क्या है?
उत्तर: तत्सम शब्द ‘कर्ण’ का तद्भव रूप ‘कान’ है।

(D) तत्सम शब्द ‘अंगुष्ठ’ का तद्भव रूप क्या है?
उत्तर: तत्सम शब्द ‘अंगुष्ठ’ का तद्भव रूप ‘अंगूठा’ है।

7. सभी प्रश्नों के उत्तर दीजिए। (अधिकतम एक-एक वाक्य में)

(A) रसखान कहाँ के रहने वाले थे?
उत्तर: कृष्ण भक्त कवि रसखान मूल रूप से दिल्ली के निवासी थे, जो बाद में ब्रजभूमि की भक्ति महिमा से मुग्ध होकर वहीं बस गए।

(B) ‘मानस का हंस’ के रचयिता का नाम है:
उत्तर: गोस्वामी तुलसीदास के जीवन पर आधारित प्रसिद्ध उपन्यास ‘मानस का हंस’ के रचयिता अमृतलाल नागर हैं।

(C) क्या ‘दो सौ बावन वैष्णवों की वार्ता’ में रसखान का उल्लेख किया गया है?
उत्तर: हाँ, गोकुलनाथ कृत ‘दो सौ बावन वैष्णवों की वार्ता’ में रसखान का उल्लेख मिलता है।

(D) ‘अनामदास का पोथा’ उपन्यास की प्रमुख उस स्त्री पात्र का नाम क्या है जिससे रैक्व प्रेम करते हैं?
उत्तर: आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी कृत ‘अनामदास का पोथा’ उपन्यास में  उस प्रमुख स्त्री पात्र का नाम जाबाला है जिससे ऋषि रैक्व प्रेम करते हैं।

8. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग एक-एक वाक्य में दीजिए।

(A) प्रश्न: फारसी किस भाषा परिवार से संबंधित भाषा है?
उत्तर: फारसी भाषा का संबंध ‘भारोपीय’ (भारत-यूरोपीय) भाषा परिवार की ‘इंडो-ईरानी’ शाखा से है।

(B) प्रश्न: अरबी किस भाषा परिवार से संबंधित भाषा है?
उत्तर: अरबी भाषा का उद्भव ‘सामी-हामी’ (एफ्रो-एशियाटिक) भाषा परिवार की ‘सामी’ शाखा से माना जाता है।

(C) प्रश्न: इंडोआर्यन परिवार की एक भाषा का नाम लिखिए।
उत्तर: इंडोआर्यन परिवार की एक प्रमुख भाषा हिंदी है।

(D) प्रश्न: शामी भाषा परिवार की एक भाषा का नाम बताइए।
उत्तर: ‘इब्रानी’ (हिब्रू) अथवा अरबी भाषा को शामी (सामी) भाषा परिवार की एक प्रतिनिधि भाषा के रूप में जाना जाता है।

9. सभी प्रश्नों के उत्तर दीजिए। (अधिकतम एक-एक वाक्य में)

(A) सूरदास और तुलसीदास में अवस्था (उम्र) में कौन छोटा था?
उत्तर: सूरदास और तुलसीदास में गोस्वामी तुलसीदास अवस्था में छोटे थे।

(B) ‘सुरतिय, नरतिय, नागतिय, सब चाहति अस होय।’ काव्यपंक्ति के रचयिता कौन हैं?
उत्तर: इस प्रसिद्ध काव्यपंक्ति के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी हैं।

(C) घर छोड़ने के बाद गोस्वामी तुलसीदास कहाँ जाकर रहे?
उत्तर: घर छोड़ने के बाद गोस्वामी तुलसीदास मुख्य रूप से काशी (वाराणसी) में जाकर रहे।

(D) रामचंद्र शुक्ल के अनुसार ‘गीतावली’ की रचना गोस्वामी जी ने किस कवि के अनुकरण पर की है?
उत्तर: आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार, गोस्वामी तुलसीदास जी ने ‘गीतावली’ की रचना महाकवि सूरदास की पद-शैली के अनुकरण पर की है।

10. निर्देश: प्रत्येक प्रश्न का उत्तर अधिकतम एक-एक वाक्य में दीजिए।

(A) ‘रूढ़ शब्द’ किन शब्दों को कहते हैं?
उत्तर: वे शब्द जिनके सार्थक खंड करना संभव नहीं होता और जो परंपरा से किसी विशेष अर्थ के लिए नियत हो गए हैं, ‘रूढ़ शब्द’ कहलाते हैं।

(B) ‘यौगिक शब्द’ किस तरह के शब्दों को कहते हैं?
उत्तर: दो या दो से अधिक सार्थक शब्दों के मेल से निर्मित शब्द, जिनके प्रत्येक खंड का अपना स्वतंत्र अर्थ होता है, ‘यौगिक शब्द’ कहे जाते हैं।

(C) विकारी शब्द कौन-से होते हैं?
उत्तर: जिन शब्दों के रूप में लिंग, वचन, कारक या काल के अनुसार परिवर्तन (विकार) आता है, उन्हें विकारी शब्द (जैसे- संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया) कहते हैं।

(D) अविकारी शब्द कौन-से होते हैं?
उत्तर: जिन शब्दों के रूप में लिंग, वचन, कारक या काल के प्रभाव से कभी कोई परिवर्तन नहीं होता, उन्हें अविकारी शब्द या ‘अव्यय’ कहते हैं।

यह प्रश्न पत्र KVS/NVS PGT हिन्दी टियर 2 परीक्षा की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए एक उपयोगी संसाधन है। 60 MCQs और 40 अति लघुउत्तरीय प्रश्नों के माध्यम से आप अपने ज्ञान का आकलन कर सकते हैं और महत्वपूर्ण विषयों पर पकड़ मजबूत बना सकते हैं। नियमित अभ्यास और सही रणनीति के साथ, सफलता निश्चित है।

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