विजयी विश्व तिरंगा प्यारा झंडा गीत

0
134
vijayi-vishv-tiranga-pyara-jhanda-geet
Jhanda Geet

‘विजयी विश्व तिरंगा प्यारा’ पद्मश्री से सम्मानित और स्वतंत्रता सेनानी श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’ द्वारा देशभक्ति गीत के रूप में मार्च 1924 में लिखा गया था। इस गीत को वर्ष 1924 में कांग्रेस द्वारा अधिकारिक ‘झंडा गीत’ के रूप में स्वीकार किया गया। इस गीत को पहली बार जलियाँवाला बाग शहादत दिवस पर 13 अप्रैल 1924 को कानपुर के फूल बाग में पं. जवाहर लाल नेहरू की नेतृत्व में सामूहिक रूप से गाया गया था। इसके बाद वर्ष 1924 में कानपुर कांग्रेस अधिवेशन में भी इसे झंडागीत के रूप में गाया गया।1

गणेश शंकर ‘विद्यार्थी’ ने ‘पार्षद’ जी को झंडा गीत लिखने के लिए प्रेरित किया था और उन्होंने ही इस गीत का प्रकाशन 1925 ई. में ‘प्रताप’ में कराया था। झंडा गीत प्रतियोगिता में यह गीत प्रथम आया था। इस गीत को उस समय हर जुलूस और हर आयोजन में गाया जाता था, हर एक की जुबान पर यही गीत था। यह गीत स्वाधीनता संग्राम का प्राण बन गया था। इसीलिए अंग्रेज इस गीत से बहुत परेशान थे। इस गीत के संबंध में सुप्रसिद्ध कथाकार गिरिराज किशोर ने एक बार कहा था कि “यह ‘प्रयाण गीत’ है। जो भी हो इतना प्रेरक झंडा गीत किसी दूसरे राष्ट्र का नहीं है।”2

श्याम लाल गुप्त ‘पार्षद’ द्वारा रचित इस गीत को कई बार संशोधित और परिमार्जित किया गया। इस गीत का सर्वप्रथम संशोधन गणेश शंकर ‘विद्यार्थी’ और पुरुषोत्तम दास टंडन ने किया। इसके बाद गाँधीजी ने भी इसमें कुछ सुधार करवाया था। पार्षद जी ने स्वतंत्रता के बाद इस गीत की पुनर्रचना भी किया जो वैश्य पत्र समिति, कानपुर द्वारा ‘पार्षद अभिनंदन अंक’ में उनके ही हस्तलिखित में प्रकाशित हुआ था। फिलहाल यहाँ पर मूल गीत दिया जा रहा है जिसे राष्ट्रीय ‘झंडा गीत’ का गौरव हासिल है-

झंडा गीत

विजयी विश्व तिरंगा प्यारा,
झंडा ऊँचा रहे हमारा।
सदा शक्ति बरसाने वाला,
प्रेम-सुधा सरसाने वाला,
वीरों को हरषाने वाला,
मातृभूमि का तन-मन सारा॥ झंडा…।
स्वतंत्रता के भीषण रण में,
लखकर बढ़े जोश क्षण-क्षण में,
कांपे शत्रु देखकर मन में,
मिट जाए भय संकट सारा॥ झंडा…।
इस झंडे के नीचे निर्भय,
लें स्वराज्य यह अविचल निश्चय,
बोलें भारत माता की जय,
स्वतंत्रता हो ध्येय हमारा॥ झंडा…।
आओ! प्यारे वीरो, आओ,
देश-धर्म पर बलि-बलि जाओ,
एक साथ सब मिलकर गाओ,
प्यारा भारत देश हमारा॥ झंडा…।
इसकी शान न जाने पाए,
चाहे जान भले ही जाए,
विश्व-विजय करके दिखलाएं,
तब होवे प्रण पूर्ण हमारा॥ झंडा…।
विजयी विश्व तिरंगा प्यारा,
झंडा ऊँचा रहे हमारा।
झंडा गीत डाउनलोड

झंडा गीत

Jhanda Geet in Hindi

vijayi vishv tiranga pyara,

jhanda uncha rahe hamara.

sada shakti barasane vala,

prem-sudha sarasane vala,

viron ko harashane vala,

matrbhomi ka tan-man sara. jhanda….

svatantrata ke bhishan ran mein,

lakhakar badhe josh kshan-kshan mein,

kampe shatru dekhakar man mein,

mit jae bhay sankat sara. jhanda….

is jhande ke niche nirbhay,

len svarajy yah avichal nishchay,

bolen bharat mata ki jay,

svatantrata ho dhyey hamaara. jhanda….

ao! pyare viro, ao,

desh-dharm par bli-bli jao,

ek sath sab milakr gao,

pyara bharat desh hamara. jhanda…

isaki shan na jane pae,

chahe jan bhale hi jae,

vishv-vijay karake dikhalaen,

tab hove pran porn hamara. jhanda…

vijayi vishv tiranga pyara,

jhanda uncha rahe hamara.

FAQ

Q. झंडा गीत के लेखक कौन है?

Ans. राष्ट्रीय झंडा गीत के लेखक श्याम लाल गुप्त ‘पार्षद’ है। इस गीत की रचना उन्होंने मार्च 1924 ई. में किया था।

Q. झंडा गीत कौन-सा है?

Ans. ‘विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊँचा रहे हमारा।’ भारत का राष्ट्रीय ‘झंडा गीत’ (jhanda geet) है।

Q.’विजयी विश्व तिरंगा प्यारा’ इस गीत को झंडा गीत के रूप में कब स्वीकार्य किया गया था?

Ans. श्याम लाल गुप्त ‘पार्षद’ द्वारा रचित गीत ‘विजयी विश्व तिरंगा प्यारा’ को ‘झंडा गीत के रूप में वर्ष 1924 में कानपुर कांग्रेश अधिवेशन में स्वीकार किया गया था।

संदर्भ सूची

1. हिंदी पत्रकारिता का वृहद इतिहास- अर्जुन तिवारी, वाणी प्रकाशन, दिल्ली- 1997, पृष्ठ- 228

2. युगपुरुष गणेशशंकर विद्यार्थी- सं. श्री तिलक, प्रभात प्रकाशन, दिल्ली- 2013, पृष्ठ- 838

Previous articleविद्यापति पदावली के पदों की व्याख्या | vidyapati pad