हिंदी क्विज प्रश्न श्रृंखला TGT, PGT, Assistant Professor एवं UGC NET हिंदी
‘हिंदी गद्य का विकास’ हिंदी साहित्य के इतिहास का एक महत्त्वपूर्ण विषय है। प्रतियोगी परीक्षाओं में इससे संबंधित प्रश्न विभिन्न रूपों में पूछे जाते हैं। गद्य के आरंभिक स्वरूप, प्रमुख गद्यकारों, पत्र-पत्रिकाओं, संस्थाओं, भाषा-विकास और विभिन्न गद्य-विधाओं के क्रमिक विकास से जुड़े तथ्य विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण हैं।
विद्यार्थियों के अभ्यास की सुविधा के लिए ‘हिंदी गद्य का विकास’ विषय पर आधारित प्रश्नों को 50–50 प्रश्नों के अलग-अलग भागों में प्रस्तुत किया जा रहा है। यह क्विज TGT, PGT, Assistant Professor, UGC NET तथा हिंदी विषय की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है।
यह इस श्रृंखला का प्रथम भाग है, जिसमें कुल 50 वस्तुनिष्ठ प्रश्न दिए गए हैं। आगे इस विषय से संबंधित अन्य प्रश्न भी नए भागों के रूप में जोड़े जाते रहेंगे।
1. 778 ई. में रचित ‘कुवलय माला’ नामक गद्य कृति के रचयिता कौन हैं?
रोडा कवि
अद्योतन सूरि
अद्योतन सूरि ने 778 ई. में ‘कुवलय माला’ नामक प्रसिद्ध प्राचीन गद्य कृति की रचना की थी।
दामोदर शर्मा
ज्योतिश्वर ठाकुर
2. 10वीं-11वीं शताब्दी के आसपास रचित ‘राउलवेल’ किस प्रकार की काव्य रचना है?
केवल पद्य काव्य
केवल गद्य काव्य
गद्य-पद्य मिश्रित चंपू काव्य
‘राउलवेल’ (रोडा कृत) हिंदी की प्राचीनतम गद्य-पद्य मिश्रित चंपू काव्य कृति है।
महाकाव्य
3. ‘राउलवेल’ के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—
(a) यह एक शिलांकित कृति है।
(b) इसमें हिंदी की पाँच बोलियों के शब्द मिलते हैं।
(c) हिंदी साहित्य में नख-शिख वर्णन की शृंगार-परम्परा का आरम्भ ‘राउलवेला’ से माना जाता है।
उपर्युक्त में कौन-से कथन सही हैं?
केवल (a) और (c)
रोडा कृत ‘राउलवेला’ एक शिलांकित कृति है। इसमें हिंदी की सात बोलियों के शब्द मिलते हैं जिनमें ‘राजस्थानी’ की प्रधान है। हिंदी साहित्य में नख-शिख वर्णन की शृंगार-परम्परा का आरम्भ इसी से माना जाता है।
केवल (b) और (c)
केवल (a) और (b)
(a), (b) और (c)
4. पंडित दामोदर शर्मा के ‘उक्ति व्यक्ति प्रकरण’ के संबंध में निम्न कथनों पर विचार कीजिए-
(a) यह हिंदी का प्रथम गद्य का ग्रंथ है।
(b) यह एक व्याकरण ग्रंथ है।
(c) इसकी रचनाकाल 12वीं शताब्दी के आसपास है।
उपर्युक्त कथनों में से सही हैं-
(a) और (b)
(b) और (c)
(a), (b) और (c)
व्याकरण ग्रंथ ‘उक्ति व्यक्ति प्रकरण’ की रचना महाराज गोविन्दचन्द्र के सभा पण्डित दामोदर शर्मा ने 12वीं शताब्दी के आसपास किया था। इसे हिंदी का प्रथम गद्य ग्रंथ माना जाता है।
(a) और (c)
5. ‘वर्ण रत्नाकर’ के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—
(a) इसके रचयिता मैथिल कवि ज्योतिश्वर ठाकुर हैं।
(b) यह मैथिली हिंदी में रचित गद्य की प्रथम रचना है।
(c) इसका ढाँचा विश्वकोशात्मक है।
उपर्युक्त में कौन-से कथन सही हैं?
केवल (a) और (b)
केवल (b) और (c)
‘वर्ण रत्नाकर’ मैथिल कवि ज्योतिश्वर ठाकुर की रचना है। यह मैथिली हिंदी में रचित गद्य की प्रथम रचना है और इसका ढांचा विश्वकोशात्मक है।
केवल (a) और (c)
(a), (b) और (c)
6. हिंदी गद्य के तीन प्रारंभिक रूपों में सबसे प्राचीनतम रूप किसे माना जाता है?
खड़ी बोली गद्य
ब्रजभाषा गद्य
दक्खिनी गद्य
राजस्थानी गद्य
19वीं शती के पूर्व हिंदी गद्य के तीन रूप प्रचलित थे— राजस्थानी गद्य, ब्रजभाषा का गद्य और खड़ी बोली का गद्य। इन प्राचीन रूपों में राजस्थानी गद्य को सबसे प्राचीनतम माना गया है, जिसका सूत्रपात 10वीं शताब्दी में हुआ।
7. आचार्य शुक्ल के मत में ब्रजभाषा गद्य का आरंभिक प्रयोग किन लोगों ने किया?
वल्लभ संप्रदाय के भक्तों
जैन आचार्यों
गोरखपंथी योगियों
शुक्ल जी के अनुसार ब्रजभाषा गद्य का सर्वप्रथम प्रयोग संवत् 1400 (1343 ई.) के आसपास गोरखपंथी योगियों ने किया था।
नाथ पंथियों
8. ब्रजभाषा गद्य में रचित ग्रंथ ‘श्रृंगार रस मंडन’ के रचयिता कौन हैं?
गोस्वामी विट्ठलनाथ
महाप्रभु वल्लभाचार्य के पुत्र विट्ठलनाथ ने ब्रजभाषा गद्य में ‘श्रृंगार रस मंडन’ की रचना की।
गोसाईं गोकुलनाथ
नाभादास
वैकुण्ठमणि शुक्ल
9. संवत् 1660 के आसपास रचित ‘अष्टयाम’ पुस्तक में किसकी दिनचर्या का वर्णन है?
भगवान कृष्ण
भगवान राम
नाभादास कृत ‘अष्टयाम’ (संवत् 1660) ब्रजभाषा में रचित है, जिसमें भगवान राम की आठों पहर की दिनचर्या वर्णित है।
महाप्रभु वल्लभ
शिव जी
10. ओरछा नरेश महाराज जसवंत सिंह के आश्रित वैकुण्ठमणि शुक्ल ने संवत् 1680 के आसपास कौन-सी ब्रजभाषा गद्य पुस्तकें लिखीं?
चौरासी वैष्णवों की वार्ता
अगहन माहात्म्य और वैशाख माहात्म्य
बैकुण्ठमणि शुक्ल ने संवत् 1680 के आसपास ब्रजभाषा गद्य में ‘अगहन माहात्म्य’ तथा ‘वैशाख माहात्म्य’ लिखा।
सेवक चरित्र
राजनीति
11. ‘आईने अकबरी की भाषा वचनिका’ नामक पुस्तक किसने लिखी?
लाला हीरालाल
संवत 1852 में ‘आईने अकबरी की भाषा वचनिका’ नामक पुस्तक ‘लाला हीरालाल’ ने लिखी है।
लल्लूलाल
पं. दौलतराम
सदल मिश्र
12. 1779 ई. में ब्रजभाषा गद्य में ‘सेवक चरित्र’ किसने लिखा?
माणिकलाल ओझा
नाभादास
प्रियादास
राधावल्लभीय संप्रदाय से संबंधित और दनकौर के निवासी ‘प्रियादास’ ने 1779 ई. में ब्रजभाषा गद्य में ‘सेवक चरित्र’ लिखा।
लल्लूलाल
13. 1828 ई. में ‘सोमवंश की वंशावली’ नामक ब्रजभाषा गद्य की रचना किसने की?
माणिकलाल ओझा
माणिकलाल ओझा ने सन् 1828 ई. में ब्रजभाषा गद्य में ‘सोमवंश की वंशावली’ लिखी।
प्रियादास
लल्लूलाल
सूरति मिश्र
14. दक्खिनी हिंदी के प्रथम गद्य लेखक किसे माना जाता है?
मुल्ला वजही
मुहम्मद कुली कुतुबशाह
सैयद हुसैन अली खाँ
ख्वाजा बंदानवाज गेसूदराज
दक्खिनी हिंदी के प्रथम गद्य लेखक ख्वाजा बंदानवाज गेसूदराज (1318–1422 ई.) और उनकी प्रथम गद्य कृति ‘मेराजुल आशिकीन’ है।
15. दक्खिनी हिंदी की प्रथम गद्य पुस्तक किसे माना जाता है?
सबरस
मेराजुल-आशकीन
गेसूदराज कृत ‘मेराजुल-आशकीन’ दक्खिनी हिंदी की प्रथम गद्य पुस्तक स्वीकार की जाती है।
कुतुबमुश्तरी
चारदरवेश
16. ‘सबरस’ के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—
(a) मुल्ला वजही ने सन् 1645 ई. में ‘सबरस’ की रचना की।
(b) इसे उर्दू साहित्य की प्रथम गद्य-रचना माना जाता है।
(c) इसमें तसव्वुफ के सिद्धांतों को प्रतीकात्मक शैली में व्यक्त किया गया है।
उपर्युक्त में कौन-से कथन सही हैं?
केवल (a) और (b)
केवल (a) और (c)
(a), (b) और (c)
केवल (b) और (c)
मुल्ला वजही कृत ‘सबरस’ (1635 ई.) को उर्दू साहित्य की पहली गद्य रचना माना जाता है। ‘सबरस’ में सूफी मत या तसव्वुफ़ के गूढ़ सिद्धांतों को प्रतीकात्मक कथा के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
17. आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने खड़ी बोली गद्य का प्रारंभ अकबर के समय में रचित किस पुस्तक से माना है?
भाषा योगवाशिष्ठ
चंद छंद बरनन की महिमा
शुक्ल जी ने खड़ी बोली गद्य का आरंभ अकबर के दरबारी कवि ‘गंग कवि’ कृत ‘चंद छंद बरनन की महिमा’ से माना है।
सुखसागर
प्रेमसागर
18. आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने परिमार्जित खड़ी बोली गद्य की प्रथम पुस्तक और प्रथम प्रौढ़ गद्य लेखक किसे स्वीकार किया है?
प्रेमसागर — लल्लूलाल
नासिकेतोपाख्यान — सदल मिश्र
सुखसागर — सदासुखलाल
भाषा योगवाशिष्ठ — रामप्रसाद निरंजनी
शुक्ल जी ने संवत् 1798 (1741 ई.) में रचित ‘भाषा योगवाशिष्ठ’ को परिमार्जित खड़ी बोली की प्रथम पुस्तक और रामप्रसाद निरंजनी को प्रथम प्रौढ़ गद्य लेखक माना है।
19. हरिषेणाचार्य के ‘जैन पद्म पुराण’ का खड़ी बोली में अनुवाद किसने किया?
पं. दौलतराम
संवत 1818 (1761 ई.) में हरिषेणाचार्य कृत ‘जैन पद्म पुराण’ का खड़ी बोली में भाषानुवाद पं. दौलतराम ने किया था।
मुंशी सदासुखलाल
सदल मिश्र
पं. रतनलाल
20. खड़ी बोली गद्य में ‘पंचांग दर्शन’ नामक ज्योतिष ग्रंथ की रचना किसने की?
पं. दौलतराम
लाला हीरालाल
मथुरानाथ शुक्ल
खड़ी बोली गद्य में ‘पंचांग दर्शन’ नामक ज्योतिष ग्रंथ (1800 ई.) की रचना मथुरानाथ शुक्ल (मथुरा प्रसाद शुक्ल) ने किया है।
बैकुंठमणि शुक्ल
21. खड़ीबोली गद्य में विष्णुपुराण के आधार पर ‘सुखसागर’ की रचना किसने की?
इंशाअल्ला खाँ
लल्लूलाल
सदल मिश्र
मुंशी सदासुखलाल
खड़ीबोली गद्य में विष्णुपुराण के आधार पर ‘सुखसागर’ की रचना सदासुखलाल ने की है।
22. खड़ी बोली गद्य के प्रारंभिक चार आचार्यों में से किन दो का संबंध फोर्ट विलियम कॉलेज से नहीं था?
लल्लूलाल और सदल मिश्र
मुंशी सदासुखलाल और इंशाअल्ला खाँ
मुंशी सदासुखलाल (दिल्ली) और इंशाअल्ला खाँ (लखनऊ) का संबंध फोर्ट विलियम कॉलेज से नहीं था।
सदासुखलाल और लल्लूलाल
सदल मिश्र और इंशाअल्ला खाँ
23. ‘रानी केतकी की कहानी’ के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—
(a) इंशा अल्ला खाँ ने इसकी रचना सन् 1798–1803 ई. के मध्य की।
(b) इसे ‘उदयभान चरित’ नाम से भी जाना जाता है।
(c) इसी से खड़ी बोली गद्य-साहित्य में लौकिक शृंगारमय प्रेमकाव्य परम्परा का सूत्रपात हुआ।
(d) शैली की दृष्टि से यह करुणा प्रधान रचना है।
उपर्युक्त में कौन-से कथन सही हैं?
केवल (a), (b) और (c)
‘रानी केतकी की कहानी’ (1798-1803 ई.) को ‘उदयभान चरित’ भी कहा जाता है। शैली की दृष्टि से यह हास्यप्रधान है। इस रचना से खड़ी बोली गद्य-साहित्य में लौकिक शृंगारमय प्रेमकाव्य परम्परा का सूत्रपात हुआ।
केवल (a), (b) और (d)
केवल (a), (c) और (d)
केवल (b), (c) और (d)
24. ‘यह वह कहानी है कि जिसमें हिंदी छुट। और न किसी बोली का मेल है न पुट॥’ –यह कथन किसका है?
सदल मिश्र
मुंशी सदासुखलाल
इंशाअल्ला खाँ
यह कथन इंशाअल्ला खाँ की ‘रानी केतकी की कहानी’ का है।
लल्लूलाल
25. खड़ी बोली गद्य के आरंभिक लेखकों और उनकी भाषिक विशेषताओं का कौन-सा युग्म सुमेलित नहीं है?
महानुभाव — भाषिक विशेषता
मुंशी सदासुखलाल — संस्कृत-मिश्रित हिंदी या शिष्ट बोलचाल की भाषा
इंशाअल्ला खाँ — चटकीली, मटकीली, मुहावरेदार और चलती भाषा
लल्लूलाल — कृष्णोपासक व्यासों की ब्रजरंजित खड़ी बोली
सदल मिश्र — पश्चिमीपन लिए हुए व्यावहारिक खड़ी बोली
सदल मिश्र की भाषा पूरबीपन लिए हुए व्यावहारिक खड़ी बोली है।
26. लल्लूलाल की रचनाओं में से कौन-सी रचना ब्रजभाषा गद्य में हितोपदेश की कहानियों का अनुवाद है?
प्रेमसागर
लाल चंद्रिका
शकुंतला नाटक
राजनीति
लल्लूलाल ने 1802 ई. में ‘राजनीति’ नाम से हितोपदेश की कहानियों का ब्रजभाषा गद्य में अनुवाद किया।
27. लल्लूलाल कृत ‘लाल चंद्रिका’ किसकी प्रसिद्ध टीका है?
रामचरितमानस
बिहारी सतसई
‘लाल चंद्रिका’ (1818 ई.) लल्लूलाल द्वारा ‘बिहारी सतसई’ पर लिखी गई प्रसिद्ध ब्रजभाषा टीका है।
भागवत पुराण
भगवद्गीता
28. ‘अगहन महात्म्य’ और ‘वैशाख महात्म्य’ नामक ब्रजभाषा गद्य-पुस्तकों के लेखक कौन हैं?
बैकुंठमणि शुक्ल
संवत 1680 के लगभग ब्रजभाषा गद्य में ‘अगहन महात्म्य’ और ‘वैशाख महात्म्य’ नाम की दो छोटी-छोटी पुस्तकें बैकुंठमणि शुक्ल ने लिखी हैं।
लाला हीरालाल
नाभादास
रामप्रसाद निरंजनी
29. दक्खिनी हिंदी में ‘कुलियाते कुली कुतुबशाह’ नामक काव्यग्रंथ किसने लिखा है—
अमीर खुसरो
मुहम्मद कुली कुतुबशाह
दक्खिनी हिंदी में ‘कुलियाते कुली कुतुबशाह’ नामक काव्यग्रंथ मुहम्मद कुली कुतुबशाह ने लिखा है।
मुल्ला वजही
सैयद हुसैन अली खाँ
30. सदल मिश्र के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—
(a) उन्होंने ‘चन्द्रावली’ अथवा ‘नासिकेतोपाख्यान’ की रचना कठोपनिषद में वर्णित नचिकेता की कथा के आधार पर खड़ी बोली गद्य में की।
(b) उन्होंने ‘रामचरित्र’ की रचना ‘रामचरितमानस’ के आधार पर की।
(c) उनकी भाषा ‘पूर्वीपन’ लिए हुए व्यावहारिक खड़ी बोली है।
उपर्युक्त में कौन-से कथन सही हैं?
केवल (a) और (b)
केवल (b) और (c)
केवल (a) और (c)
सदल मिश्र ‘चन्द्रावली’ अथवा ‘नासिकेतोपाख्यान’ की रचना कठोपनिषद में वर्णित नचिकेता की कथा के आधार पर खड़ी बोली गद्य में की। उन्होंने ‘रामचरित्र’ की रचना ‘अध्यात्म रामायण’ के आधार पर की। उनकी खड़ी बोली गद्य में स्थान-स्थान पर ‘पूरबीपन’ या पूर्वी बोलियों का प्रभाव देखने को मिलता है।
(a), (b) और (c)
31. महत्त्व/कालक्रम की दृष्टि से आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने प्रारंभिक चार आचार्यों को किस क्रम में रखा है?
सदासुखलाल, इंशाअल्ला खाँ, लल्लूलाल, सदल मिश्र
शुक्ल जी ने क्रम रखा: (1) सदासुखलाल, (2) इंशाअल्ला खाँ, (3) लल्लूलाल, (4) सदल मिश्र।
लल्लूलाल, सदल मिश्र, सदासुखलाल, इंशाअल्ला खाँ
इंशाअल्ला खाँ, सदल मिश्र, लल्लूलाल, सदासुखलाल
सदल मिश्र, सदासुखलाल, इंशाअल्ला खाँ, लल्लूलाल
32. कलकत्ता में फोर्ट विलियम कॉलेज की स्थापना किसने की?
लॉर्ड विलियम बेंटिंक
मार्क्विस वेलेजली
फोर्ट विलियम कॉलेज की स्थापना 10 जुलाई 1800 ई. में कलकत्ता में हुई थी जिसके संस्थापक वेलेजली थे।
लॉर्ड मैकाले
विलियम प्राइस
33. फोर्ट विलियम कॉलेज के हिंदुस्तानी भाषा विभाग के प्रथम अध्यक्ष कौन थे?
जॉन गिलक्राइस्ट
डॉ. जॉन बौर्थविक गिलक्राइस्ट फोर्ट विलियम कॉलेज में हिंदुस्तानी विभाग के विभागाध्यक्ष थे।
विलियम प्राइस
फ्रेडरिक पिन्काट
विलियम केरे
34. खड़ी बोली की किस शैली को गिलक्राइस्ट ने ‘दि ग्रैंड पापुलर स्पीच ऑव हिंदुस्तान’ कहा?
दरबारी शैली
हिंदुस्तानी शैली
खड़ी बोली की हिंदुस्तानी शैली को गिलक्राइस्ट ने ‘दि ग्रैंड पापुलर स्पीच ऑव हिंदुस्तान’ कहा है।
संस्कृतनिष्ठ शैली
हिंदवी शैली
35. सूची-I में दी गई संस्थाओं को सूची-II में दिए गए स्थापना वर्षों से सुमेलित कीजिए—
सूची-I (संस्था) — सूची-II (स्थापना वर्ष)
(a) कलकत्ता स्कूल बुक सोसाइटी — (i) सन् 1893 ई.
(b) आगरा स्कूल बुक सोसाइटी — (ii) सन् 1817 ई.
(c) पेनी रीडिंग क्लब — (iii) सन् 1873 ई.
(d) काशी नागरी प्रचारिणी सभा — (iv) सन् 1833 ई.
सही विकल्प चुनिए—
कोड: (a), (b), (c), (d)
(iv), (ii), (i), (iii)
(ii), (iii), (iv), (i)
(i), (iv), (iii), (ii)
(ii), (iv), (iii), (i)
कलकत्ता स्कूल बुक सोसाइटी की स्थापना सन् 1817 ई. में हुई थी। आगरा स्कूल बुक सोसाइटी की स्थापना सन् 1833 ई. में हुई थी। भारतेंदु जी ने युवाओं में अध्ययन व विचार-विमर्श हेतु 1873 ई. में ‘पेनी रीडिंग क्लब’ स्थापित किया। वहीं काशी में नागरी प्रचारिणी सभा की स्थापना सन् 1893 ई. में हुई थी। इसके संस्थापक श्यामसुंदर दास, रामनारायण मिश्र और शिवकुमार सिंह थे।
36. फोर्ट विलियम कॉलेज में लल्लूलाल की नियुक्ति कब हुई?
1806 ई.
1800 ई.
1810 ई.
1802 ई.
फोर्ट विलियम कॉलेज की स्थापना 10 जुलाई, 1800 ई. और कॉलेज में लल्लूलाल की नियुक्ति 1802 ई. में हुई थी।
37. 1809 ई. में बाइबिल का हिंदी और उर्दू दोनों भाषाओं में अनुवाद किसने किया था?
विलियम केरे
जे.टी. थॉम्पसन
जॉन म्योर
हेनरी मार्टिन
1809 ई. में हेनरी मार्टिन ने बाइबिल का अनुवाद हिंदी और उर्दू दोनों भाषाओं में संपन्न किया।
38. स्वामी दयानंद सरस्वती के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—
(a) उन्होंने 1874 ई. में ‘सत्यार्थ प्रकाश’ की रचना खड़ी बोली हिंदी गद्य में की।
(b) उनके अनुयायी हिंदी को ‘आर्यभाषा’ कहते थे।
(c) उन्होंने 1875 ई. में कलकत्ता में आर्य समाज की स्थापना की।
उपर्युक्त में कौन-से कथन सही हैं?
केवल (a) और (b)
स्वामी दयानंद सरस्वती ने अपने सिद्धांतों के प्रतिपादन हेतु ‘सत्यार्थ प्रकाश’ खड़ी बोली हिंदी गद्य में लिखा। स्वामी दयानंद सरस्वती और आर्य समाज के अनुयायी हिंदी को ‘आर्यभाषा’ कहते थे। 1875 ई. में स्वामी दयानंद सरस्वती ने बंबई में आर्य समाज की स्थापना की।
केवल (b) और (c)
केवल (a) और (c)
(a), (b) और (c)
39. सन् 1900 में कचहरियों में नागरी लिपि की पुनः प्रतिष्ठा किसके अथक प्रयास से हुई?
भारतेंदु हरिश्चंद्र
पं. मदनमोहन मालवीय
पं. मदनमोहन मालवीय के अथक प्रयासों से सन् 1900 ई. में संयुक्त प्रांत की अदालतों में नागरी लिपि को स्वीकृति मिली।
राजा लक्ष्मण सिंह
महावीर प्रसाद द्विवेदी
40. ‘उदंत मार्तंड’ के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—
(a) इसके संपादक कानपुर के पं. जुगलकिशोर थे।
(b) यह कलकत्ता से प्रकाशित होने वाला हिंदी का पहला साप्ताहिक पत्र था।
(c) इसका प्रकाशन प्रत्येक रविवार को होता था।
(d) इसमें खड़ी बोली के स्थान पर ‘मध्यदेशीय भाषा’ पद का प्रयोग मिलता है।
उपर्युक्त में कौन-से कथन सही हैं?
केवल (a), (b) और (c)
केवल (b), (c) और (d)
केवल (a), (b) और (d)
‘उदंत मार्तंड’ (1826 ई.) कलकत्ता से प्रकाशित होने वाला हिंदी का पहला साप्ताहिक पत्र था जो प्रत्येक मंगलवार को निकलता था। इसके संपादक कानपुर के पं. जुगलकिशोर थे। इसमें खड़ी बोली के स्थान पर ‘मध्यदेशीय भाषा’ पद का प्रयोग मिलता है।
(a), (b), (c) और (d)
41. ‘कुवलयमाला कथा’ के रचनाकार का नाम बताइए।
पुष्पदंत
हरिषेणाचार्य
उद्योतन सूरि
‘कुवलयमाला कथा’ उद्योतन सूरि की रचना है।
हेमचंद्र
42. 1829 ई. में प्रकाशित ‘बंगदूत’ पत्र के संस्थापक व प्रेरणास्रोत कौन थे?
राजा राममोहन राय
‘बंगदूत’ (1829) बहुभाषी साप्ताहिक पत्र था, जिसके संस्थापक राजा राममोहन राय और संपादक नीलरत्न हालदार थे।
पं. जुगलकिशोर
तारामोहन मित्र
नवीनचंद्र राय
43. बनारस से राजा शिवप्रसाद ‘सितारेहिंद’ की प्रेरणा से ‘बनारस अखबार’ कब प्रकाशित हुआ?
1833 ई.
1845 ई.
बनारस से राजा शिवप्रसाद ‘सितारेहिंद’ की प्रेरणा से ‘बनारस अखबार’ 1845 ई. में काशी से प्रकाशित हुआ था। यह एक साप्ताहिक पत्र था। इसकी भाषा अरबी-फारसी मिश्रित उर्दू की ओर झुकी हुई थी।
1854 ई.
1867 ई.
44. 1850 ई. में ‘बनारस अखबार’ की भाषा-नीति के विरोध में काशी से बाबू तारामोहन मित्र के संपादन में कौन-सा पत्र निकला?
सुधाकर
‘बनारस अखबार’ की भाषा-नीति के विरोध में काशी से बाबू तारामोहन मित्र के संपादन में 1850 ई. में ‘सुधाकर’ पत्र निकला था।
समाचार सुधावर्षण
लोकमित्र
प्रजामित्र
45. हिंदी का पहला दैनिक पत्र ‘समाचार सुधावर्षण’ किसके संपादकत्व में निकला था?
पं. जुगुलकिशोर
तारामोहन मित्र
राजा राममोहन राय
श्यामसुंदर सेन
हिंदी का पहला ‘दैनिक’ समाचार पत्र ‘समाचार सुधावर्षण’ (1854 ई.) था, जिसके संपादक श्यामसुंदर सेन थे। यह पत्र कलकत्ता से निकलता था।
46. राजा शिवप्रसाद ‘सितारे हिंद’ की प्रसिद्ध रचनाओं का समूह कौन-सा है?
राजा भोज का सपना, आलसियों का कोड़ा, इतिहासतिमिर नाशक
राजा शिवप्रसाद की प्रमुख रचनाएँ: राजा भोज का सपना, आलसियों का कोड़ा, इतिहासतिमिर नाशक, भूगोल हस्तामलक, मानव धर्मसार, वर्णमाला, वीर सिंह का वृत्तांत, उपनिपदसार, हिन्दुस्तान के पुराने राजाओं का हाल, सिखों का उदय और अस्त आदि हैं।
भाग्यवती, सत्यामृत प्रवाह, तत्त्वदीपक
शकुंतला, रघुवंश, मेघदूत
सुखसागर, सुरासुर निर्णय, मुंताखबुतवारीख
47. ‘प्रजा हितैषी’ नामक समाचार पत्र किसने निकाला?
भारतेंदु हरिश्चंद्र
राजा लक्ष्मण सिंह
‘प्रजा हितैषी’ पत्र को राजा लक्ष्मण सिंह ने निकाला था।
राजा शिवप्रसाद सिंह
नवीनचंद्र राय
48. राजा लक्ष्मण सिंह ने संस्कृत के किन तीन ग्रंथों का खड़ी बोली में अनुवाद किया था?
किरातार्जुनीयम्, शिशुपालवधम्, मुद्राराक्षसम्
उत्तरामाचरितम्, मालतीमाधवम्, महावीरचरितम्
कादंबरी, हर्षचरितम्, दशकुमारचरितम्
शकुंतला, रघुवंश, मेघदूत
राजा लक्ष्मण सिंह ने कालिदास की अभिज्ञान शाकुंतलम् (1862), रघुवंशम् (1878) और मेघदूतम् (1882) का अनुवाद किया था।
49. सूची-I की संस्थाओं को सूची-II के स्थापना वर्षों से सुमेलित कीजिए—
सूची-I (संस्था) — सूची-II (स्थापना वर्ष)
(a) ब्रह्म समाज — (i) 1839 ई.
(b) तत्त्वबोधिनी सभा — (ii) 1864 ई.
(c) प्रार्थना समाज — (iii) 1828 ई.
(d) वेद समाज — (iv) 1867 ई.
सही विकल्प चुनिए—
कोड: (a), (b), (c), (d)
(iii), (i), (iv), (ii)
ब्रह्म समाज की स्थापना 1828 ई. में राजा राममोहन राय ने की थी। तत्त्वबोधिनी सभा की स्थापना 1839 ई. में देवेन्द्रनाथ ठाकुर ने की। प्रार्थना समाज की स्थापना 1867 ई. में आत्माराम पांडुरंग ने केशवचन्द्र सेन के सहयोग से बंबई में की थी। महादेव गोविन्द रानाडे इसके प्रमुख नेताओं में थे। वेद समाज की स्थापना 1864 ई. में मद्रास में केशवचन्द्र सेन की प्रेरणा से हुई थी; इसकी स्थापना से जुड़े प्रमुख व्यक्ति राजगोपाल चार्लू और सुब्बरायुलु चेट्टी थे।
(i), (iii), (iv), (ii)
(iii), (i), (ii), (iv)
(ii), (iv), (i), (iii)
50. भारतेंदु हरिश्चंद्र ने विशेष रूप से स्त्री-शिक्षा एवं उत्थान हेतु किस पत्रिका का संपादन शुरू किया?
हरिश्चंद्र चंद्रिका
कविवचनसुधा
प्रजा हितैषी
बालाबोधिनी
भारतेंदु जी ने 1874 ई. में महिलाओं के सर्वांगीण विकास एवं शिक्षा हेतु ‘बालाबोधिनी’ नामक मासिक पत्रिका निकाली।
अति महत्वपूर्ण प्रश्न, अगले भाग का इंतजार रहेगा। साधुवाद।