आचार्य रामचंद्र शुक्ल: हिंदी साहित्य का इतिहास रीतिकाल के अन्य कवि (वस्तुनिष्ठ प्रश्न सेट 2)

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आचार्य रामचंद्र शुक्ल: हिंदी साहित्य का इतिहास – महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तरी

इस ब्लॉग में हम आचार्य रामचंद्र शुक्ल के ‘हिंदी साहित्य का इतिहास’ से रीतिकाल के अन्य कवि पर आधारित 35 महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs) और दिए गए हैं। ये सभी quiz रीतिकाल प्रकरण 3 पर आधारित हैं जो PGT, TGT, DSSSB, LT Grade और Assistant Professor जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक होंगे। यहाँ दिए गए प्रश्न न केवल परीक्षा दृष्टि से उपयोगी हैं, बल्कि हिंदी साहित्य की गहराई को समझने में भी मदद करेंगे।

आइए, रीतिकाल के वस्तुनिष्ठ प्रश्न को Quiz के माध्यम से सरल और रोचक ढंग से जानें-

41. शुक्ल जी ने रीतिकाल के उन कवियों को जिन्होंने लक्षण-ग्रंथ न लिखकर प्रबंध काव्य या फुटकल रचनाएँ कीं, मुख्य कवियों से किस आधार पर भिन्न माना है?
रचना शैली के आधार पर
केवल इस बात में कि उन्होंने लक्षणों के अंतर्गत अपने पद्यों को नहीं रखा
शुक्ल जी के अनुसार, ये कवि भी अधिकांशतः श्रृंगारी ही थे और इनकी रचना शैली में भी कोई विशेष भेद नहीं था। केवल इस बात में कि उन्होंने लक्षणों के अंतर्गत अपने पद्यों को नहीं रखा।
भाषा के आधार पर
रस के आधार पर
42. किस कवि के संबंध में शुक्ल जी का मत है कि उन्हें कोई बंधन नहीं था, जो भाव जब सूझा वे लिख गए?
भूषण
घनानंद और रसखान
घनानंद और रसखान, रीतिबद्ध कवियों को लक्षण के उदाहरण के लिए पद्य लिखना पड़ता था, जबकि रीतिमुक्त कवियों पर ऐसा कोई दबाव नहीं था।
बिहारी
मतिराम
43. ‘हम्मीर रासो’ की रचना को शुक्ल जी ने कैसा माना है?
अत्यंत शिथिल
नीरस
अप्रामाणिक
बहुत ही प्रशस्त
जोधराज कृत ‘हम्मीर रासो’ (संवत् 1875) की रचना को शुक्ल जी ने बहुत ही प्रशंसनीय और ऐतिहासिक वीरगाथा परंपरा का सफल ग्रंथ माना है।
44. शुक्ल जी ने ‘सूक्तिकार’ की श्रेणी में किन्हें रखा है?
भूषण और गोरेलाल को
सूदन और जोधराज को
वृंद, गिरिधर, घाघ और बैताल को
शुक्ल जी के अनुसार, केवल वाग्वैदग्ध्य (वाक्चातुर्य) से काव्य की सृष्टि नहीं होती, इसलिए नीति के फुटकल पद्य कहने वालों को वे (वृंद, गिरिधर, घाघ और बैताल को) ‘सूक्तिकार’ कहते हैं।
घनानंद और आलम को
45. वे ज्ञानोपदेशक जो केवल ब्रह्मज्ञान और वैराग्य की बातें पद्य में कहते हैं, उन्हें शुक्ल जी ने क्या कहा है?
महाकवि
दार्शनिक
ऋषि
पद्यकार
यदि रचना केवल बोधवृत्ति जाग्रत करने के लिए है और रसात्मक प्रभाव नहीं डालती, तो वे उन्हें कवि न मानकर ‘पद्यकार’ मानते हैं।
46. ‘भाषा योगवाशिष्ठ’ के रचयिता कौन हैं, जिसे शुक्ल जी ने परिमार्जित गद्य माना है?
सदल मिश्र
रामप्रसाद निरंजनी
‘भाषा योगवाशिष्ठ’ (संवत् 1798) के रचयिता रामप्रसाद निरंजनी हैं। रीतिकाल के भीतर ही खड़ी बोली शिष्ट समाज के व्यवहार की भाषा हो गई थी और निरंजनी जी ने इसमें बहुत ही परिमार्जित गद्य लिखा था।
लल्लूलाल
सदासुखलाल
47. शुक्ल जी के अनुसार ‘आनंदरघुनंदन’ नाटक की भाषा क्या है?
खड़ी बोली
अवधी
राजस्थानी
ब्रजभाषा गद्य
यद्यपि इसमें पद्यों की प्रचुरता है, पर संवाद सब ब्रजभाषा गद्य में हैं।
48. ‘साहजहाँ की गोद में, हन्यो सलावत खान’ पंक्ति किस कवि की है?
बनवारी
बनवारी कवि ने अमरसिंह राठौर की वीरता का वर्णन करते हुए यह ओजपूर्ण पद्य लिखा था।
लाल कवि
भूषण
सूदन
49. सबलसिंह चौहान ने किस विशाल ग्रंथ की रचना दोहों-चौपाइयों में की है?
रामायण
भागवत पुराण
पृथ्वीराज रासो
महाभारत
सबलसिंह चौहान ने संवत् 1718 और 1781 के बीच सारे महाभारत की कथा लिखी थी।
50. ‘वृंदसतसई’ में कितने दोहे हैं?
500
1000
1100
700
वृंद मेड़ता के रहने वाले थे और उनकी सतसई (संवत् 1761) में नीति के 700 दोहे संकलित हैं।
51. बैताल कवि अपनी कुंडलियों में किसे संबोधित करते हैं?
राजा विक्रम को
बैताल की प्रत्येक कुंडली राजा ‘विक्रम’ (विक्रमसाहि) को संबोधन करके कही गई है।
श्रीकृष्ण को
शिव को
अकबर को
52. आलम किसके प्रेम में फँसकर मुसलमान हो गए थे?
शेख रँगरेजिन
आलम जाति के ब्राह्मण थे, पर शेख नाम की रँगरेजिन के प्रेम में पड़कर मुसलमान हो गए।
सुजान
सुभान
रत्नावली
53. ‘कनक छरीसी कामिनी काहे को कटि छीन’ पंक्ति को किसने पूरा किया था?
शेख रँगरेजिन ने
शेख ने ‘कटि को कंचन काटि बिधि कुचन मध्य धरि दीन’ लिखकर इस दोहे को पूरा किया था।
आलम ने
घनानंद ने
ठाकुर ने
54. गुरु गोविंद सिंह जी ने व्याकरण, साहित्य और दर्शन के अध्ययन के लिए सिखों को कहाँ भेजा था?
मथुरा
वृंदावन
प्रयाग
काशी
गुरु साहब ने सिखों में शास्त्रज्ञान के अभाव को दूर करने के लिए उन्हें काशी भेजा था।
55. ‘छत्रप्रकाश’ के विषय में कौन-सा कथन सत्य है?
यह एक श्रृंगारिक ग्रंथ है
इसकी रचना ब्रजवासी दास ने की है
इसमें महाराज छत्रसाल का संवत् 1764 तक का ऐतिहासिक वृत्तांत है
‘छत्रप्रकाश’ में महाराज छत्रसाल का संवत् 1764 तक का ऐतिहासिक वृत्तांत है। शुक्ल जी के अनुसार, इसमें वर्णित घटनाएँ और संवत् ऐतिहासिक दृष्टि से बिल्कुल ठीक हैं।
यह एक काल्पनिक कथा है
56. घनानंद की मृत्यु किस आक्रमण के दौरान हुई थी?
मरहठों के
अहमदशाह अब्दाली के समय
नादिरशाह के आक्रमण के समय
संवत् 1796 में नादिरशाह की सेना के सिपाहियों ने वृंदावन में घनानंद की हत्या कर दी थी।
मुगलों के
57. ‘नेही महा, ब्रजभाषाप्रवीन और सुंदरताहु के भेद को जानै’ यह उक्ति किसके विषय में है?
देव
पद्माकर
घनानंद
घनानंद के संबंध में यह उक्ति उनकी काव्य प्रतिभा और भाषा पर अधिकार को दर्शाती है।
बिहारी
58. शुक्ल जी के अनुसार, ‘लक्षणा का विस्तृत मैदान खुला रहने पर भी किस कवि ने उसमें अच्छी दौड़ लगाई’?
मतिराम
भूषण
सेनापति
घनानंद
घनानंद, लाक्षणिक मूर्तिमत्ता और प्रयोग वैचित्र्य घनानंद की भाषा की मुख्य विशेषता है।
59. ‘अति सूधो सनेह को मारग है’ सवैया किसका है?
ठाकुर
घनानंद
यह घनानंद का सबसे प्रसिद्ध सवैया है जो प्रेम के सीधे मार्ग का वर्णन करता है।
आलम
बोधा
60. ‘रतनहजारा’ के रचयिता कौन हैं?
पजनेस
रसनिधि
रसनिधि (पृथ्वीसिंह) दतिया के जमींदार थे और उन्होंने बिहारी के अनुकरण पर यह ग्रंथ लिखा।
रसखान
रसलीन
61. भक्त कवि नागरीदास का प्रसिद्ध नाम क्या था?
महाराज उदितनारायण सिंह
महाराज सावंतसिंह
भक्त कवि नागरीदास का प्रसिद्ध नाम महाराज सावंतसिंह था, ये कृष्णगढ़ के राजा थे जो बाद में विरक्त होकर वृंदावन चले गए।
महाराज राजसिंह
महाराज बहादुरसिंह
62. ‘सनेहसागर’ के रचयिता बख्शी हंसराज का जन्म कहाँ हुआ था?
ओरछा
दतिया
रीवाँ
पन्ना
हंसराज पन्ना नरेश अमानसिंह के दरबारियों में थे।
63. ‘चाचा’ हित वृंदावन दास किसके शिष्य थे?
चैतन्य महाप्रभु
हित हरिवंश
स्वामी हरिदास
गोस्वामी हितरूपजी
गोस्वामी हितरूपजी के शिष्य होने के कारण इन्हें सब ‘चाचाजी’ कहते थे।
64. नीति की कुंडलियों के लिए कौन से कवि प्रसिद्ध हैं, जिनकी भाषा बिल्कुल सीधी-सादी है?
सम्मन
दीनदयाल गिरि
गिरिधर कविराय
गिरिधर कविराय की कुंडलियाँ ग्राम-ग्राम में प्रसिद्ध हैं क्योंकि उनमें कोरा तथ्य कथन है।
वृंद
65. ‘राधासुधाशतक’ के रचयिता श्री हठीजी किस संप्रदाय के थे?
निंबार्क संप्रदाय
सखी संप्रदाय
राधावल्लभ संप्रदाय
श्री हठीजी राधावल्लभ संप्रदाय के थे, वे श्री हितहरिवंश जी की शिष्य परंपरा में थे।
वल्लभ संप्रदाय
66. ‘सुजानचरित’ में सूदन ने किस ऐतिहासिक नायक के युद्धों का वर्णन किया है?
छत्रसाल
शिवाजी
हम्मीरदेव
सुजान सिंह
भरतपुर के महाराज सूरजमल (सुजान सिंह) के पराक्रम का इसमें ऐतिहासिक वर्णन है।
67. ‘ब्रजविलास’ प्रबंध काव्य के रचयिता कौन हैं?
सूरदास
ब्रजवासी दास
संवत् 1827 में ब्रजवासी दास ने तुलसी के अनुकरण पर दोहों-चौपाइयों में यह ग्रंथ लिखा।
नागरीदास
रसखान
68. काशीराज महाराज उदितनारायण सिंह की आज्ञा से ‘विशाल महाभारत’ का अनुवाद किन तीन कवियों ने किया?
मतिराम, भूषण और जटाशंकर
गोकुलनाथ, गोपीनाथ और मणिदेव
काशीराज महाराज उदितनारायण सिंह की आज्ञा से ‘विशाल महाभारत’ का अनुवाद गोकुलनाथ, गोपीनाथ और मणिदेव ने किया। यह हिन्दी साहित्य का बहुत बड़ा काम था जो लगभग 50 वर्षों में पूरा हुआ।
सुरति मिश्र, सोमनाथ और कुलपति मिश्र
देव, बिहारी और भिखारीदास
69. ‘विरहवारीश’ और ‘इश्कनामा’ के रचयिता बोधा का वास्तविक नाम क्या था?
बुद्धि प्रकाश
प्रबोध चंद्र
ज्ञान सेन
बुद्धि सेन
बोधा का वास्तविक नाम बुद्धि सेन था। पन्ना महाराज उन्हें प्यार से ‘बोधा’ कहते थे।
70. ‘रामाश्वमेधा’ के रचयिता मधुसूदनदास ने इसे किसका परिशिष्ट ग्रंथ माना है?
रामचरितमानस का
‘रामाश्वमेधा’ (संवत् 1839) की रचना शैली, पदविन्यास और भाषा बिल्कुल रामचरितमानस जैसी है।
रामायण का
रामललानहछू का
बरवै रामायण का
71. शुक्ल जी ने किस कवि को ‘अत्यंत सहृदय और भावुक कवि’ कहा है, जिसकी अन्योक्तियाँ हिंदी में अद्वितीय हैं?
बाबा दीनदयाल गिरि
बाबा दीनदयाल गिरि की अन्योक्तियाँ अपनी सरसता और परिष्कृत भाषा के लिए प्रसिद्ध हैं।
सम्मन
ठाकुर
सम्मन
72. ‘हम्मीरहठ’ के रचयिता चंद्रशेखर वाजपेयी किसके आश्रय में रहे?
जोधपुर नरेश महाराज मानसिंह
पटियाला नरेश महाराज कर्मसिंह
दरभंगा के राजा
उपर्युक्त सभी के
वे दरभंगा, जोधपुर और अंत में पटियाला नरेश के यहाँ रहे।
73. भारतेंदु हरिश्चंद्र के पिता गिरिधरदास (बाबू गोपालचंद्र) ने कुल कितने ग्रंथों की रचना की?
30
50
40
भारतेंदु जी के अनुसार ‘रचे ग्रंथ चालीस’।
20
74. शुक्ल जी ने रीतिकाल की ‘समूची श्रृंगार परंपरा’ में अंतिम प्रसिद्ध कवि किसे माना है?
सेनापति
द्विजदेव
द्विजदेव (अयोध्या नरेश महाराज मानसिंह) की सरस और भावमयी फुटकल श्रृंगारी कविता रीतिकाल की अंतिम प्रसिद्ध कड़ी है।
पद्माकर
ग्वाल कवि
75. ‘अन्योक्तिकल्पद्रुम’ किस कवि की प्रसिद्ध रचना है?
गिरिधर कविराय
वृंद
बाबा दीनदयाल गिरि
‘अन्योक्तिकल्पद्रुम’ बाबा दीनदयाल गिरि की प्रसिद्ध रचना है। यह अन्योक्तियों का एक अनमोल ग्रंथ है।
सम्मन

उपर्युक्त प्रश्न आचार्य शुक्ल के इतिहास में दिए गए कवियों के परिचय और उनकी विशिष्ट कृतियों पर आधारित हैं, जो परीक्षाओं की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी हैं। ये प्रश्न आपकी टीजीटी (TGT), पीजीटी (PGT) और डीएसएसएसबी (DSSSB) जैसी परीक्षाओं के लिए शुक्ल जी के इतिहास के महत्वपूर्ण तथ्यों को कवर करते हैं। उम्मीद है ये अतिरिक्त प्रश्न आपकी तैयारी में सहायक सिद्ध होंगे।

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