आचार्य रामचंद्र शुक्ल के ‘हिंदी साहित्य का इतिहास’ के आधार पर, विशेष रूप से सगुण धारा (कृष्णभक्ति शाखा) से संबंधित 37 और महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) यहाँ दिए गए हैं। यह कृष्ण भक्ति शाखा का वस्तुनिष्ठ प्रश्नों का सेट 2 है। यह Quiz PGT, TGT, DSSSB, lt grade, Assistant Professor जैसी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। यह प्रश्न-संग्रह सगुण काव्यधारा के कृष्णभक्ति शाखा के कवियों, काव्यधाराओं, ऐतिहासिक संदर्भों और साहित्यिक विशेषताओं आदि पर आधारित हैं।
41. ‘अनाराधय राधापदाम्भोजयुग्ममाश्रित्य वृन्दाटवीं…’ यह श्लोक जीव गोस्वामी ने किस कवि को भेजा था?
गदाधर भट्ट
व्याख्या: गदाधर भट्ट का एक पद सुनकर जीव गोस्वामी ने उन्हें यह संस्कृत श्लोक लिखकर भेजा था, जिसके बाद भट्ट जी वृंदावन चले गए।
सूरदास
हितहरिवंश
नंददास
42. बल्लभाचार्य के अनुसार ‘अक्षर ब्रह्म’ अपनी किस शक्ति से जगत् के रूप में परिणत होता है?
माया शक्ति
संवित् शक्ति
ह्लादिनी शक्ति
आविर्भाव और तिरोभाव शक्ति
व्याख्या: बल्लभाचार्य के अनुसार, अक्षर ब्रह्म अपनी आविर्भाव और तिरोभाव की अचिंत्य शक्ति से जगत् के रूप में परिणत होता है।
43. ‘अष्टछाप’ के किस कवि ने ‘हितजू को मंगल’ नामक ग्रंथ लिखा है?
नंददास
छीतस्वामी
कुंभनदास
चतुर्भुजदास
व्याख्या: कुंभनदास के पुत्र चतुर्भुजदास ने ‘हितजू को मंगल’, ‘द्वादशयश’ और ‘भक्तिप्रताप’ नामक ग्रंथ लिखे हैं।
44. ‘जाके प्रिय न राम बैदेही’ – यह पद तुलसीदास ने किस ग्रंथ में संकलित किया है?
] विनयपत्रिका
व्याख्या: मीराबाई के पत्र के उत्तर में तुलसीदास ने विनयपत्रिका का यह पद लिखकर भेजा था।
रामचरितमानस
कवितावली
दोहावली [/wrong 45. ‘युगल शतक’ (100 पदों का ग्रंथ) किस कृष्णभक्त कवि की रचना है?
हरिराम व्यास
ध्रुवदास
श्रीभट्ट
व्याख्या: निंबार्क संप्रदाय के श्रीभट्ट का ‘युगल शतक’ कृष्णभक्तों में बहुत आदरणीय ग्रंथ माना जाता है।
हितहरिवंश
46. बल्लभाचार्य ने ‘व्यापी वैकुंठ’ के किस खंड को ‘नित्यलीला सृष्टि’ का स्थान माना है?
ब्रह्मलोक
गोलोक
व्याख्या: गोलोक इसी व्यापी वैकुंठ का एक खंड है जहाँ भगवान नित्य रूप में यमुना, वृंदावन और निकुंज में क्रीड़ा करते हैं।
साकेत
विष्णुलोक
47. ‘खंजन मीन, मृगज चपलाई, नहिं पटतर एक सैन’ – सूरदास ने यह उपमा किसके लिए दी है?
श्रीकृष्ण की चाल के लिए
राधा के अधरों के लिए
मुरली की तान के लिए
कृष्ण के चंचल नेत्रों के लिए
व्याख्या: सूरसागर में कृष्ण के चंचल नेत्रों के वर्णन में इन उपमानों का प्रयोग किया गया है।
48. ‘हित चौरासी’ में कुल कितने पद संकलित हैं?
84
व्याख्या: हितहरिवंश के पदों का संग्रह ‘हित चौरासी’ कहलाता है क्योंकि इसमें कुल 84 पद हैं।
100
50
252
49. ‘कहा करौ बैकुंठहि जाय?’ – यह प्रसिद्ध पद किस अष्टछापी कवि का है?
गोविंदस्वामी
परमानंददास
व्याख्या: परमानंददास ने ब्रज की महिमा गाते हुए कहा है कि जहाँ नंद, यशोदा और जमुना नहीं, वहाँ बैकुंठ का क्या काम।
सूरदास
कृष्णदास
50. ‘अष्टछाप’ के किस कवि को गोस्वामी विट्ठलनाथ ने ‘श्रीनाथजी के मंदिर की कीर्तन सेवा’ सौंपी थी?
नंददास
कुंभनदास
छीतस्वामी
सूरदास
व्याख्या: सूरदास की पद रचना की निपुणता देखकर बल्लभाचार्य ने उन्हें श्रीनाथजी के मंदिर की कीर्तन सेवा सौंपी थी।
51. ‘और कवि गढ़िया, नंददास जड़िया’ – यह उक्ति नंददास की किस विशेषता को रेखांकित करती है?
उनके अनुप्रासादियुक्त शब्द विन्यास को
व्याख्या: नंददास की भाषा में अनुप्रास और चुने हुए संस्कृत पदविन्यास की प्रधानता है, इसीलिए उन्हें ‘जड़िया’ कहा गया है।
उनकी भक्ति भावना को
उनकी दार्शनिक पकड़ को
उनके विरक्त जीवन को
52. ‘प्रेमवाटिका’ (संवत् 1671) के रचनाकार कौन हैं?
सूरदास मदनमोहन
मीराबाई
ध्रुवदास
रसखान
व्याख्या: रसखान की कृति ‘प्रेमवाटिका’ का रचनाकाल संवत् 1671 है।
53. ‘मानुष हों तो वही रसखान बसौं सँग गोकुल गाँव के ग्वारन’ – इस सवैये में रसखान की क्या इच्छा व्यक्त हुई है?
दिल्ली लौटने की
राजसी ठाठ की
ब्रजभूमि के प्रति अनन्य प्रेम की
व्याख्या: रसखान अगले जन्म में भी ब्रजभूमि (गोकुल, कालिंदी कूल) से जुड़ा रहना चाहते हैं।
मोक्ष प्राप्ति की
54. रसखान की भाषा की मुख्य विशेषता क्या है?
सधुक्कड़ी भाषा
राजस्थानी मिश्रित हिंदी
शुद्ध, चलती और शब्दाडंबरमुक्त ब्रजभाषा
व्याख्या: रसखान की भाषा की मुख्य विशेषता शुद्ध, चलती और शब्दाडंबरमुक्त ब्रजभाषा है। शुक्लजी के अनुसार रसखान और घनानंद की रचनाओं में ब्रजभाषा का जो चलतापन और सफाई है, वह अन्यत्र दुर्लभ है।
संस्कृतगर्भित क्लिष्ट भाषा
55. दक्षिण की वह प्रसिद्ध भक्तिन कौन थी जिसे ‘दक्षिण की मीरा’ भी कहा जाता है?
अक्क महादेवी
सहजोबाई
दयाबाई
अंडाल
व्याख्या: दक्षिण में अंडाल (जन्म संवत् 773) नामक प्रसिद्ध भक्तिन हुई हैं, जिनकी उपासना ‘माधुर्य भाव’ की थी।
56. ‘भयौ है मुदित सखी लाल को मराल मन’ – यह पंक्ति ध्रुवदास के किस ग्रंथ की है?
भजनसत
रसरत्नावली
सिंगारसत
व्याख्या: ध्रुवदास की पुस्तक ‘सिंगारसत’ से यह पंक्तियाँ उद्धृत हैं।
नेहमंजरी
57. ‘राधावल्लभी संप्रदाय’ के प्रवर्तक कौन थे?
स्वामी हरिदास
चैतन्य महाप्रभु
निंबार्काचार्य
हितहरिवंश
व्याख्या: गोसाईं हितहरिवंश ने राधावल्लभी संप्रदाय का प्रवर्तन किया था।
58. सूरदास के ‘सूरसागर’ में श्रीमद्भागवत के किस स्कंध की कथा का विस्तार मिलता है?
प्रथम स्कंध
पंचम स्कंध
द्वादश स्कंध
दशम स्कंध
व्याख्या: सूरसागर में वास्तव में भागवत के दशम स्कंध की कथा संक्षेप में इतिवृत्त के रूप में और विस्तार में पदों में दी गई है।
59. ‘अष्टछाप’ के कवियों में संगीत कला के सबसे बड़े पारखी और तानसेन के गुरु (समान) कौन माने जाते थे?
गोविंदस्वामी
छीतस्वामी
स्वामी हरिदास
व्याख्या: स्वामी हरिदास संगीत कला के कोविद थे और तानसेन उनका गुरुवत् सम्मान करते थे।
सूरदास
60. ‘अष्टछाप’ की स्थापना किस संवत् के आसपास मानी जा सकती है?
संवत् 1500
संवत् 1540
संवत् 1450
संवत् 1600
व्याख्या: बल्लभाचार्य की मृत्यु (संवत् 1587) के बाद उनके पुत्र विट्ठलनाथ ने संवत् 1600 के आसपास अष्टछाप की स्थापना की थी।
61. ‘जाति पाँति हम तें कछु नाहीं, नाहिंन बसत तुम्हारी छैयाँ’ – यह संवाद किस प्रसंग का है?
बाल कृष्ण और सखाओं के बीच खेल का झगड़ा
व्याख्या: यह संवाद बाल कृष्ण और सखाओं के बीच खेल का झगड़ा प्रसंग का है। सूरदास ने बालकों के क्षोभ के वचनों को बहुत ही स्वाभाविक रूप में ‘स्पर्धा’ और ‘अधिकार’ के प्रसंग में चित्रित किया है।
कृष्ण-उद्धव संवाद
गोपियों का यशोदा से उलाहना
निर्गुण-सगुण विवाद
62. ‘सखी संप्रदाय’ (टट्टी संप्रदाय) के संस्थापक कौन थे?
स्वामी हरिदास
व्याख्या: स्वामी हरिदास ने वृंदावन में निंबार्क मतांतर्गत टट्टी संप्रदाय की स्थापना की थी।
हितहरिवंश
हरिराम व्यास
श्रीभट्ट
63. ‘भ्रमरगीत’ प्रसंग में ‘मधुकर’ शब्द का प्रयोग किसके लिए किया गया है?
नंद बाबा के लिए
भ्रमर के लिए
व्याख्या: गोपियाँ उद्धव को सीधे न कहकर भ्रमर को माध्यम बनाकर अपनी ‘वचनवक्रता’ प्रकट करती हैं।
कृष्ण के लिए
उद्धव के लिए
64. ‘तेरह लाख सँडीले आए, सब साधुन मिलि गटके’ – यह प्रसिद्ध दोहा किस कवि से संबंधित है?
सूरदास
कृष्णदास
परमानंददास
सूरदास मदनमोहन
व्याख्या: संडीले के अमीन सूरदास मदनमोहन ने सरकारी खजाना साधुओं की सेवा में खर्च कर दिया था।
65. सूरदास की किस रचना में अपनी अवस्था 67 वर्ष कही गई है?
सूरपचीसी
सूरसारावली
व्याख्या: ‘सूरसारावली’ के भीतर ‘गुरु परसाद होत यह दरसन सरसठ बरस प्रवीन’ पंक्ति में उन्होंने अपनी आयु का उल्लेख किया है।
सूरसागर
साहित्यलहरी
66. ‘बहु बीती थोरी रही, सोऊ बीती जाय’ – यह चेतावनी भरा पद किसका है?
सूरदास
कबीर
रसखान
ध्रुवदास
व्याख्या: ध्रुवदास ने ‘भजनसत’ में संसार की नश्वरता और भक्ति की शीघ्रता पर यह पद लिखा है।
67. आचार्य शुक्ल ने ‘हिंदी काव्य गगन के सूर्य और चंद्र’ किन दो कवियों को कहा है?
तुलसी और जायसी
केशव और बिहारी
सूर और तुलसी
व्याख्या: शुक्ल जी के अनुसार, ‘ये (सूर और तुलसी) हिन्दी काव्य गगन के सूर्य और चंद्र हैं’।
सूर और कबीर
68. ‘अष्टछाप’ के किस कवि को अकबर ने फतेहपुर सीकरी आमंत्रित किया था?
कुंभनदास
व्याख्या: अकबर के बुलावे पर कुंभनदास सीकरी गए थे, जहाँ उन्होंने अपना प्रसिद्ध पद ‘सन्तन को कहाँ सीकरी सो काम’ सुनाया था।
सूरदास
परमानंददास
नंददास
69. ‘साहित्यलहरी’ के अनुसार सूरदास किस वंश के बताए गए हैं?
सारस्वत ब्राह्मण
यदुवंशी
ब्रह्मभट्ट
व्याख्या: साहित्यलहरी के एक पद के अनुसार सूरदास ब्रह्मभट्ट (पृथ्वीराज के कवि चंदबरदाई) के वंशज बताए गए हैं, हालांकि शुक्ल जी इसे बाद का प्रक्षेप मानते हैं।
क्षत्रिय वंश
70. ‘हित चौरासी’ के पदों की मुख्य भाषा क्या है?
अवधी
राजस्थानी
खड़ी बोली
ब्रजभाषा
व्याख्या: हितहरिवंश के पद अत्यंत सरस और हृदयग्राहिणी ब्रजभाषा में लिखे गए हैं।
71. मीराबाई का विवाह किस राजघराने के राजकुमार से हुआ था?
ओरछा
मेवाड़
व्याख्या: मीराबाई का विवाह मेवाड़ (उदयपुर) के महाराणा कुमार भोजराज जी के साथ हुआ था।
मारवाड़
आमेर
72. ‘मैया! कबहिं बढ़ैगी चोटी!’ – इस पद में ‘बालकों की स्पर्धा’ का वर्णन है। कृष्ण अपनी चोटी की तुलना किससे करते हैं?
नागिन से
बलराम की बेनी से
व्याख्या: यशोदा कृष्ण से कहती थीं कि दूध पीने से उनकी चोटी बलराम (बल) की बेनी जैसी लंबी-मोटी हो जाएगी।
नंद बाबा की चोटी से
सखा श्रीदामा की चोटी से
73. बल्लभाचार्य द्वारा रचित वह ग्रंथ कौन-सा है जिसमें उन्होंने तत्कालीन समाज की विपरीत दशा का वर्णन किया है?
कृष्णाश्रय
व्याख्या: ‘कृष्णाश्रय’ नामक प्रकरण ग्रंथ में बल्लभाचार्य ने अपने समय की विपरीत दशा और वेदमार्ग की कठिनाई का वर्णन किया है।
अणुभाष्य
सुबोधिनी
तत्वदीप निबंध
74. ‘व्यास न कथनी काम की, करनी है इक सार’ – यह साखी किस कवि की है?
सूरदास
कबीर
दादू दयाल
हरिराम व्यास
व्याख्या: ओरछा के हरिराम व्यास (व्यास जी) ने कर्म की प्रधानता पर यह साखी लिखी है।
75. ‘अष्टछाप’ के किस कवि ने ‘अनेकार्थनाममाला’ और ‘मानमंजरी’ जैसे कोश ग्रंथ लिखे हैं?
कृष्णदास
कुंभनदास
नंददास
व्याख्या: नंददास ने ‘अनेकार्थनाममाला’, ‘नामचिंतामणिमाला’ और ‘मानमंजरी’ जैसे ग्रंथ लिखे हैं।
सूरदास
76. ‘बसो मेरे नैनन में नंदलाल’ – यह सुप्रसिद्ध पद किसकी रचना है?
सूरदास
मीराबाई
व्याख्या: यह मीराबाई का अत्यंत प्रसिद्ध पद है जिसमें उन्होंने कृष्ण के सगुण रूप का वर्णन किया है।
रसखान
नंददास
77. ‘पुष्टिमार्ग’ में ‘पुष्टि’ शब्द का क्या अर्थ है?
शरीर को पुष्ट करना
शास्त्र ज्ञान बढ़ाना
मूर्ति पूजा
भगवान का अनुग्रह
व्याख्या: भगवान के अनुग्रह (कृपा) को ही ‘पोषण’ या ‘पुष्टि’ कहते हैं।
ये प्रश्न आचार्य रामचंद्र शुक्ल के इतिहास ग्रंथ के प्रकरण 5 (कृष्णभक्ति शाखा) के गहन अध्ययन पर आधारित हैं। आपकी आगामी परीक्षाओं (UP PGT, TGT, DSSSB, NET) के लिए ये quiz जरूर अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे। आप सभी को आगामी परीक्षाओं के लिए शुभकामनाएँ!







