आचार्य रामचंद्र शुक्ल: हिंदी साहित्य का इतिहास गद्य साहित्य का तृतीय उत्थान (वस्तुनिष्ठ प्रश्न)

0
4
Ramchandra-Shukla-Hindi-Sahitya-Itihas-MCQs-Quiz
आचार्य रामचंद्र शुक्ल: हिंदी साहित्य का इतिहास – महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तरी

आचार्य रामचंद्र शुक्ल के ‘हिंदी साहित्य का इतिहास’ के गद्य साहित्य की वर्तमान गति: तृतीय उत्थान (प्रकरण 5) पर आधारित महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) नीचे दिए गए हैं। ये quiz प्रश्न विशेष रूप से PGT, TGT, DSSSB, LT Grade, ugc net और Assistant Professor जैसी परीक्षाओं के स्तर के अनुरूप तैयार किए गए हैं। यहाँ दिए गए प्रश्न न केवल परीक्षा दृष्टि से उपयोगी हैं, बल्कि हिंदी साहित्य की गहराई को समझने में भी मदद करेंगे।

आइए, हिंदी गद्य का तृतीय उत्थान के वस्तुनिष्ठ प्रश्न को Quiz के माध्यम से सरल और रोचक ढंग से जानें-

1. आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने गद्य साहित्य के ‘तृतीय उत्थान’ का प्रारंभ कब से माना है?
संवत् 1975 से
शुक्ल जी ने गद्य साहित्य के इस काल को वर्तमान काल कहा है जो संवत् 1975 से शुरू होता है।
संवत् 1950 से
संवत् 1925 से
संवत् 1980 से
2. शुक्ल जी के अनुसार, तृतीय उत्थान के भीतर गद्य साहित्य की क्या स्थिति रही?
केवल पाश्चात्य साहित्य की नकल हुई
साहित्य के अंगों की पूर्ति हुई पर फालतू चीजें भी बिखरीं
शुक्ल जी के अनुसार, तृतीय उत्थान के भीतर गद्य साहित्य के अंगों की पूर्ति हुई पर फालतू चीजें भी बिखरीं। इस काल में लेखकों की संख्या बढ़ी, साहित्य पुष्ट हुआ, लेकिन साथ ही ‘आधुनिकता’ के नाम पर अनाड़ीपन भी फैला।
भाषा पर किसी का अधिकार नहीं रहा
केवल नाटकों की उन्नति हुई
3. ‘साहित्य को राजनीति के ऊपर रहना चाहिए; सदा उसके इशारों पर ही न नाचना चाहिए।’ यह कथन किस संदर्भ में कहा गया है?
निबंधकारों के लिए
कवियों के लिए
नाटककारों के लिए
उपन्यासकारों के लिए
शुक्ल जी का मानना था कि उपन्यासकारों को केवल राजनीतिक दलों की बातों का प्रचार नहीं करना चाहिए बल्कि वस्तुस्थिति को देखना चाहिए।
4. ‘चित्रलेखा’ उपन्यास, जिसकी प्रशंसा शुक्ल जी ने ‘जीवन के नित्य स्वरूप की मीमांसा’ के लिए की है, उसके लेखक कौन हैं?
जयशंकर प्रसाद
जैनेंद्र कुमार
भगवतीचरण वर्मा
शुक्लजी ने ‘चित्रलेखा’ (बाबू भगवतीचरण वर्मा) को एक सुंदर उपन्यास बताया है जिसमें पाप-पुण्य जैसी जीवन की गुत्थियों की मीमांसा की गई है।
प्रेमचंद
5. शुक्ल जी ने ऐतिहासिक उपन्यासों के क्षेत्र में वर्तमान में किसे एकमात्र उल्लेखनीय लेखक माना है?
बाबू वृंदावनलाल वर्मा
शुक्ल जी ने ऐतिहासिक उपन्यासों के क्षेत्र में बाबू वृंदावनलाल वर्मा एकमात्र उल्लेखनीय लेखक माना है। उनके उपन्यास ‘गढ़कुंडार’ और ‘विराटा की पद्मिनी’ की शुक्ल जी ने विशेष सराहना की है।
राखालदास बंद्योपाध्याय
किशोरीलाल गोस्वामी
चतुरसेन शास्त्री
6. प्रेमचंद के किस उपन्यास में ‘अंत:प्रकृति या शील के उत्तरोत्तर उद्धाटन’ का कौशल शुक्ल जी ने देखा है?
सेवासदन
गबन
शुक्ल जी के अनुसार शीलवैचित्र्य का विकासक्रम ‘गबन’ और जैनेंद्र के ‘सुनीता’ जैसे उपन्यासों में दिखता है।
गोदान
रंगभूमि
7. ‘उसने कहा था’ कहानी को शुक्ल जी ने किस श्रेणी की कहानी माना है?
प्रतीक खड़ी करने वाली लाक्षणिक कहानी
हास्य-विनोद प्रधान कहानी
ऐतिहासिक खंडचित्र दिखाने वाली कहानी
अत्यंत व्यंजक घटनाओं और क्षिप्र गति वाली संवेदना प्रधान कहानी
‘उसने कहा था’ (चंद्रधर शर्मा गुलेरी) कहानी को शुक्ल जी ने अत्यंत व्यंजक घटनाओं और क्षिप्र गति वाली संवेदना प्रधान कहानी का उत्तम नमूना माना है।
8. ‘उसकी माँ’ कहानी के लेखक कौन हैं, जिसमें राजनीतिक आंदोलन और स्वदेश प्रेम का चित्रण है?
रायकृष्णदास
सुदर्शन
पांडेय बेचन शर्मा ‘उग्र’
‘उसकी माँ’ कहानी के लेखक पांडेय बेचन शर्मा ‘उग्र’ हैं। उनकी यह कहानी राजनीतिक आंदोलन में सम्मिलित नवयुवकों के त्याग और साहस को दिखाती है।
प्रेमचंद
9. ‘कथामुखी’ पत्रिका में प्रकाशित कहानियों में किसका प्रमुख योगदान रहा?
जयशंकर प्रसाद
बिंदु ब्रह्मचारी और श्रीमंत समंत
‘कथामुखी’ पत्रिका (संवत् 1977-78) में प्रकाशित कहानियों में बिंदु ब्रह्मचारी और श्रीमंत समंत (पं. बालकराम विनायक) का प्रमुख योगदान रहा। इन कहानियों में प्राचीन भारतीय संस्कृति और एशिया में उसके प्रसार की अनूठी कल्पना की गई थी।
प्रेमचंद
विश्वंभरनाथ कौशिक
10. शुक्ल जी के अनुसार, हास्य रस के आलंबन के प्रति कैसा भाव होना चाहिए?
घृणा का भाव
द्वेष का भाव
दया या करुणा का भाव
एक प्रकार का राग या प्रेम भाव
शुक्ल जी के अनुसार, हास्य रस के आलंबन के प्रति ‘एक प्रकार का राग या प्रेम भाव होना चाहिए। शुक्ल जी का तर्क है कि हास्य आनंदात्मक है, इसलिए इसके साथ द्वेष या घृणा जैसे दुखात्मक भाव नहीं जुड़ सकते।
11. शुक्ल जी के अनुसार प्रसाद के नाटकों में कौन-सा पात्र ‘पुराने विदूषक’ का स्थानापन्न कहा जा सकता है?
चाणक्य
सर्वनाग
सिंहरण
मुद्गल
‘स्कंदगुप्त’ का मुद्गल ही वह पात्र है जो पुराने नाटकों के हँसोड़ विदूषक की कमी पूरी करता है।
12. जयशंकर प्रसाद के ऐतिहासिक नाटकों में शुक्ल जी ने किसे ‘श्रेष्ठ’ माना है?
स्कंदगुप्त
शुक्ल जी के अनुसार ऐतिहासिक नाटकों में प्रसाद जी के ‘स्कंदगुप्त’ का स्थान सर्वोच्च है।
चंद्रगुप्त
ध्रुवस्वामिनी
राज्यश्री
13. ‘रक्षाबंधन’ नाटक के माध्यम से श्री हरिकृष्ण ‘प्रेमी’ ने क्या संदेश दिया है?
मुगल साम्राज्य का पतन
राजपूती शौर्य का अहंकार
हिंदू-मुस्लिम दुर्भाव की शांति और एकता
श्री हरिकृष्ण ‘प्रेमी’ के इस नाटक में हुमायूँ और कर्मवती के माध्यम से हिंदू-मुस्लिम एकता का संदेश दिया गया है।
सांप्रदायिक विद्वेष
14. सेठ गोविंददास के किस नाटक में राम और कृष्ण के माध्यम से कर्तव्य के विकास की दो भूमियाँ दिखाई गई हैं?
हर्ष
प्रकाश
सेवापथ
मर्यादा
इसमें राम द्वारा मर्यादा पालन और कृष्ण द्वारा लोकहित के लिए मर्यादा उल्लंघन को दिखाया गया है।
15. ‘अंगूर की बेटी’ नाटक का मुख्य विषय क्या है?
मद्यपान के दुष्परिणाम
यह गोविंदबल्लभ पंत द्वारा लिखित एक सामाजिक नाटक है जिसका मुख्य विषय मद्यपान के दुष्परिणाम है।
स्त्री समस्या
ऐतिहासिक गौरव
किसान आंदोलन
16. नाटकों में ‘यथार्थवाद’ की शुरुआत और काव्यत्व को हटाने का श्रेय शुक्ल जी किसे देते हैं?
जयशंकर प्रसाद
पांडेय बेचन शर्मा ‘उग्र’
लक्ष्मीनारायण मिश्र
नाटकों में ‘यथार्थवाद’ की शुरुआत और काव्यत्व को हटाने का श्रेय शुक्ल जी पं. लक्ष्मीनारायण मिश्र को देते हैं। मिश्र जी के नाटकों (जैसे सिंदूर की होली) में भावुकता के स्थान पर खरी-खरी बातें और सामाजिक विषमताएँ प्रमुख हैं। मिश्र जी ने नाटकों से काव्यत्व और झूठी भावुकता को हटाकर समाज को जैसा है वैसा दिखाने का प्रयत्न किया है।
सेठ गोविंददास
17. ‘ऐतिहासिक नाटक रचना में जो स्थान प्रसाद और प्रेमी का है, पौराणिक नाटक रचना में वही स्थान भट्टजी का है।’ यहाँ ‘भट्टजी’ से तात्पर्य है:
उदयशंकर भट्ट
यहाँ ‘भट्टजी’ से तात्पर्य पं. उदयशंकर भट्ट है। शुक्ल जी ने उनके ‘अंबा’, ‘सगरविजय’ और ‘विश्वामित्र’ जैसे पौराणिक नाटकों की बहुत प्रशंसा की है।
बालकृष्ण भट्ट
बदरीनाथ भट्ट
केशवराम भट्ट
18. ‘साधना’, ‘प्रवाल’ और ‘छायावाद’ नामक भावात्मक गद्य कृतियों के लेखक कौन हैं?
रायकृष्णदास
रायकृष्णदास की ये रचनाएँ रवींद्रनाथ टैगोर की ‘गीतांजलि’ की आध्यात्मिक पद्धति पर आधारित हैं।
वियोगी हरि
चतुरसेन शास्त्री
रघुवीरसिंह
19. मुगल साम्राज्यवाद के पतन पर ‘ताजमहल’ और ‘दिल्ली का किला’ जैसे भावात्मक निबंध लिखने वाले लेखक कौन हैं?
चतुरसेन शास्त्री
भँवरलाल सिंधी
रायकृष्णदास
महाराज कुमार डॉ. रघुवीरसिंह
‘ताजमहल’ और ‘दिल्ली का किला’ जैसे भावात्मक निबंध लिखने वाले लेखक महाराज कुमार डॉ. रघुवीरसिंह हैं। शुक्ल जी ने इनके अतीतगामी मार्मिक भावना की बहुत सराहना की है।
20. समालोचना के क्षेत्र में ‘कला’ और ‘साधना’ शब्दों का प्रयोग कर कवियों की विशेषताएं बताने वाली पुस्तकों की लहर में ‘केशव की काव्यकला’ के लेखक कौन हैं?
जनार्दनप्रसाद झा ‘द्विज’
रामनाथलाल ‘सुमन’
भुवनेश्वरनाथ मिश्र ‘माधव’
कृष्णशंकर शुक्ल
‘केशव की काव्यकला’ के लेखक पं. कृष्णशंकर शुक्ल हैं। शुक्ल जी ने इसे विद्वतापूर्ण अनुसंधान और निर्णयात्मक समीक्षा माना है।
21. शुक्ल जी ने ‘प्रभावाभिव्यंजक समीक्षा’ को कैसा माना है?
यह अध्ययन और चिंतन का रास्ता छेंक लेती है
शुक्ल जी के अनुसार यह केवल व्यक्तिगत मनोरंजन है, वास्तविक आलोचना नहीं। उनके अनुसार यह अध्ययन और चिंतन का रास्ता छेंक लेती है।
यह सर्वश्रेष्ठ समीक्षा पद्धति है
यह कवियों के लिए बहुत उपयोगी है
यह भारतीय रस सिद्धांत के अनुकूल है
22. ‘साहित्यालोचन’ पुस्तक के लेखक कौन हैं?
पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी
सुमित्रानंदन पंत
श्यामसुंदरदास
‘साहित्यालोचन’ पुस्तक के लेखक बाबू श्यामसुंदरदास हैं। शुक्ल जी ने इसे शिक्षोपयोगी पुस्तक माना है।
रामचंद्र शुक्ल
23. ‘कला का उद्देश्य कला ही है’ का खंडन किस पाश्चात्य विद्वान ने अपनी पुस्तक ‘साहित्य समीक्षा सिद्धांत’ में किया है?
क्रोचे
गेटे
आई.ए. रिचर्ड्स
आई.ए. रिचर्ड्स ने मनोवैज्ञानिक पद्धति पर यह सिद्ध किया कि कला जीवन से अलग नहीं है।
डॉ. ब्रैडले
24. ‘अभिव्यंजनावाद’ के प्रवर्तक कौन हैं?
फ्रायड
क्रोचे
‘अभिव्यंजनावाद’ के प्रवर्तक इटली के क्रोचे हैं। शुक्ल जी ने इसे भारतीय ‘वक्रोक्तिवाद’ का विलायती उत्थान कहा है।
ह्विस्लर
शेक्सपियर
25. ‘सत्यं, शिवं, सुंदरम्’ शब्दावली का प्रयोग ब्रह्मसमाज के किस महर्षि ने ‘The Truth, the Good and the Beautiful’ के अनुवाद के रूप में किया?
केशवचंद्र सेन
देवेंद्रनाथ ठाकुर
‘The Truth, the Good and the Beautiful’ का हिंदी में अनुवाद ‘सत्यं, शिवं, सुंदरम्’ ब्रह्मसमाज के महर्षि देवेंद्रनाथ ठाकुर ने किया था। शुक्ल जी बताते हैं कि यह मूलतः उपनिषद् का वाक्य नहीं बल्कि अंग्रेजी का अनुवाद है।
राजा राममोहन राय
रवींद्रनाथ ठाकुर
26. शुक्ल जी के अनुसार, उपन्यास के क्षेत्र में ‘चिट्ठी-पत्री’ के ढाँचे पर लिखा गया उपन्यास कौन-सा है?
सेवासदन
दिल की आग
कुंडलीचक्र
चंद हसीनों के खतूत
इसके लेखक पांडेय बेचन शर्मा ‘उग्र’ हैं, जिसे शुक्ल जी ने पत्र-शैली का उदाहरण माना है।
27. ‘गढ़कुंडार’ उपन्यास की पृष्ठभूमि क्या है?
प्राचीन मौर्य काल
मुगल काल का पतन
आधुनिक किसान आंदोलन
बुंदेलखंड का मध्यकाल
वृंदावनलाल वर्मा ने मध्यकालीन बुंदेलखंड के परिवेश को सजीव किया है।
28. हिंदी में ‘एकांकी नाटकों’ के संग्रह ‘आधुनिक एकांकी नाटक’ में किस लेखक की रचना ‘सबसे बड़ा आदमी’ शामिल है?
भगवती चरण वर्मा
भगवती चरण वर्मा के इस संग्रह में सात प्रमुख एकांकीकारों की रचनाएँ संकलित थीं।
रामकुमार वर्मा
उपेंद्रनाथ अश्क
भुवनेश्वर
29. शुक्ल जी ने ‘साधारणीकरण’ को पाश्चात्य के किस शब्द या भाव के समकक्ष रखा है?
इमेजिनेशन
कम्युनिकेबिलिटी
रिचर्ड्स के अनुसार काव्यानुभव का एक हृदय से दूसरे हृदय में पहुँचना ही उसकी विशेषता है, जिसे हमारे यहाँ साधारणीकरण कहा गया है। यह पाश्चात्य कम्युनिकेबिलिटी या सर्वग्राह्यता शब्द या भाव के समकक्ष है।
एक्सप्रेशन
एस्थेटिक
30. ‘अरुणोदय की छटा का अनुभव कामिनी के कपोलों की लज्जा के रूप में करना’ – यह किस वाद की प्रवृत्ति है?
यथातथ्यवाद
रहस्यवाद
सौंदर्यवाद
शुक्ल जी ने इसकी आलोचना की है कि इसमें प्रकृति को केवल स्त्री रूप में देखा जाता है।
साम्यवाद
31. शुक्ल जी के अनुसार ‘मद’ और ‘मादकता’ की रूढ़ि हिंदी काव्य में कहाँ से आई?
संस्कृत साहित्य से
फारसी के सूफी प्रभाव से
शुक्लजी के अनुसार सूफी शायरों द्वारा ‘प्याले’ और ‘मद’ की रूढ़ि को हिंदी में लाया गया।
अंग्रेजी के रोमांटिक कवियों से
चीनी साहित्य से
32. ‘चंद्रगुप्त’ नाटक में शुक्ल जी ने कौन-सा बड़ा दोष माना है?
पात्रों की कमी
भाषा का सरल होना
गीतों का अभाव
घटनाओं की सघनता और 25 वर्ष का दीर्घकाल
‘चंद्रगुप्त’ नाटक में शुक्ल जी ने ‘घटनाओं की सघनता और 25 वर्ष का दीर्घकाल’ को बड़ा दोष माना है। सिकंदर के आक्रमण से सिल्यूकस की पराजय तक की घटनाओं को एक नाटक में समेटना शुक्ल जी को अखरता है।
33. ‘विराटा की पद्मिनी’ उपन्यास के बारे में शुक्ल जी का क्या विचार है?
यह एक साधारण उपन्यास है
इसमें इतिहास की बहुत गलतियाँ हैं
इसकी भाषा बहुत कठिन है
इसकी कल्पना अत्यंत रमणीय है
‘विराटा की पद्मिनी’ उपन्यास के बारे में शुक्ल जी का विचार है कि इसकी कल्पना अत्यंत रमणीय है। वृंदावनलाल वर्मा के इस कृति की शुक्ल जी ने विशेष प्रशंसा की है।
34. ‘सिंदूर की होली’ किस प्रकार का नाटक है?
पौराणिक
प्रहसन
समस्या प्रधान
‘सिंदूर की होली’ समस्या प्रधान या यथातथ्यवादी नाटक है। लक्ष्मीनारायण मिश्र ने इसमें स्त्रियों की स्थिति और सामाजिक समस्याओं को रखा है।
ऐतिहासिक
35. शुक्ल जी के अनुसार गद्य की किस विधा में ‘अर्थवैचित्र्य और भाषा शैली का नूतन विकास’ सबसे कम हुआ?
निबंध
शुक्ल जी को दुख है कि निबंधों में वह विकास नहीं दिखा जो कहानियों में हुआ।
कहानी
उपन्यास
नाटक
36. शुक्ल जी के अनुसार, तृतीय उत्थान के भीतर ‘अनधिकार चर्चा’ और ‘अनाड़ीपन’ फैलाने का मुख्य कारण क्या था?
लोकभाषा का अत्यधिक प्रयोग
पाश्चात्य साहित्य की हर बात को बिना समझे ‘आधुनिकता’ कहकर चिल्लाना
शुक्ल जी का मानना है कि कुछ लेखक योरप की सामाजिक-साहित्यिक परिस्थितियों को बिना समझे केवल उनके ‘वादों’ का अनुवाद कर रहे थे।
पुरानी परंपराओं का अत्यधिक मोह
संस्कृत व्याकरण का कठोर पालन
37. किस उपन्यासकार ने ‘पापी के प्रति घृणा नहीं दया’ वाले टालस्टाय के सिद्धांत को लेकर साहित्य की रचना की है?
प्रेमचंद
जयशंकर प्रसाद
वृंदावनलाल वर्मा
भगवतीचरण वर्मा
शुक्ल जी के अनुसार, समाज में एक पक्ष टालस्टाय के दया वाले सिद्धांत को लेकर चल रहा था, जबकि दूसरा साम्यवादी सिद्धांत को। भगवतीचरण वर्मा (संदर्भ: ‘चित्रलेखा’ में पाप-पुण्य की मीमांसा)
38. ‘साहित्य को राजनीति के ऊपर रहना चाहिए; सदा उसके इशारों पर ही न नाचना चाहिए।’ यह चेतावनी शुक्ल जी ने विशेष रूप से किसे दी है?
उपन्यासकारों को
शुक्ल जी का तर्क है कि उपन्यासकारों को केवल राजनीतिक दलों की प्रचारित बातों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि वस्तुस्थिति देखनी चाहिए।
कवियों को
निबंधकारों को
नाटककारों को
39. जयशंकर प्रसाद का कौन-सा उपन्यास अधूरा रह गया था, जिसे वे शुंगकाल (पुष्यमित्र) की पृष्ठभूमि पर लिख रहे थे?
इरावती
शुक्ल जी ने उनसे ऐतिहासिक उपन्यास लिखने का अनुरोध किया था, पर ‘इरावती’ को वे अधूरा छोड़कर ही चल बसे।
कंकाल
तितली
मंगल प्रभात
40. शुक्ल जी ने ‘गढ़कुंडार’ और ‘विराटा की पद्मिनी’ की भाषा और कल्पना के लिए किस लेखक की सराहना की है?
बाबू वृंदावनलाल वर्मा
शुक्ल जी के अनुसार ‘विराटा की पद्मिनी’ (बाबू वृंदावनलाल वर्मा) की कल्पना अत्यंत रमणीय है।
चतुरसेन शास्त्री
प्रतापनारायण श्रीवास्तव
विश्वंभरनाथ कौशिक
41. ‘गबन’ उपन्यास की प्रमुख विशेषता क्या बताई गई है?
जासूसी तत्व की प्रधानता
केवल राजनीतिक आंदोलन
ग्रामीण जीवन का यथार्थ
अंत:प्रकृति या शील का उत्तरोत्तर उद्घाटन
प्रेमचंद ‘गबन’ उपन्यास की प्रमुख विशेषता ‘अंत:प्रकृति या शील का उत्तरोत्तर उद्घाटन’ बताई गई है। शुक्ल जी ने ‘गबन’ और जैनेंद्र के ‘सुनीता’ को शीलवैचित्र्य और उसके विकासक्रम को दिखाने वाला उपन्यास माना है।
42. ‘उसने कहा था’ कहानी की सबसे बड़ी विशेषता शुक्ल जी ने क्या मानी है?
पात्रों की अधिक संख्या
क्षिप्र गति से किसी गंभीर संवेदना में पर्यवसित होना
‘उसने कहा था’ कहानी की सबसे बड़ी विशेषता शुक्ल जी ने क्षिप्र गति से किसी गंभीर संवेदना में पर्यवसित होना मानी है। उन्होंने इसे सादे ढंग से अत्यंत व्यंजक घटनाओं वाली कहानी का उत्तम नमूना मानते हैं।
ऐतिहासिक तथ्यों का विस्तार
ग्रामीण बोली का प्रयोग
43. ‘कथामुखी’ पत्रिका में प्रकाशित वे कहानियाँ कौन-सी हैं जिनमें ‘ग्रेटर इंडिया’ (बृहत भारत) में भारतीय संस्कृति के प्रसार की कल्पना की गई है?
‘अपना अपना भाग्य’ (जैनेंद्र)
‘हेरम्या और बाहुमान’ (बिंदु ब्रह्मचारी/श्रीमंत समंत)
‘हेरम्या और बाहुमान’ कहानियाँ संवत् 1977-78 में निकली थीं और इनमें एशिया में भारतीय प्रभाव की अनूठी उद्भावना थी।
‘शतरंज के खिलाड़ी’ (प्रेमचंद)
‘आकाशदीप’ (प्रसाद)
44. प्रसाद जी के ‘स्कंदगुप्त’ नाटक का वह कौन सा पात्र है जो ‘पुराने विदूषक’ की कमी पूरी करता है?
मातृगुप्त
प्रपंचबुद्धि
मुद्गल
शुक्ल जी के अनुसार, मुद्गल ही पुराने नाटकों के दरबारी विदूषक का स्थानापन्न है।
चक्रपालित
45. नाटकों में ‘मृत्यु, वध और आत्महत्या’ दिखाने के संबंध में शुक्ल जी का क्या मत है?
आधुनिक नाटकों में इसकी छूट है
यद्यपि प्राचीन भारतीय नाट्यशास्त्र में ये वर्जित थे, पर शुक्ल जी के अनुसार आजकल इस नियम के पालन की आवश्यकता नहीं मानी जाती।
इसे कभी नहीं दिखाना चाहिए
प्राचीन निषेधों का पालन करना अनिवार्य है
केवल हास्य नाटकों में इसे दिखाया जा सकता है
46. शुक्ल जी ने ‘अभिव्यंजनावाद’ को किस भारतीय सिद्धांत का ‘विलायती उत्थान’ कहा है?
रस सिध्दांत
ध्वनि सिध्दांत
अलंकारवाद
वक्रोक्तिवाद
शुक्ल जी के अनुसार इटली के क्रोचे का अभिव्यंजनावाद हमारे यहाँ के पुराने ‘वक्रोक्तिवाद’ के समान ही है।
47. सेठ गोविंददास के ‘कर्तव्य’ नाटक का मूल उद्देश्य क्या है?
कर्तव्य के विकास की दो भूमियाँ दिखाना
पूर्वार्ध में राम द्वारा मर्यादा पालन और उत्तरार्ध में कृष्ण द्वारा लोकहित के लिए मर्यादा उल्लंघन दिखाया गया है।
राम और कृष्ण के युद्ध का वर्णन
भारत का स्वतंत्रता संग्राम
सती प्रथा का विरोध
48. ‘अंगूर की बेटी’ नाटक के लेखक कौन हैं?
सेठ गोविंददास
लक्ष्मीनारायण मिश्र
पांडेय बेचन शर्मा ‘उग्र’
गोविंदबल्लभ पंत
‘अंगूर की बेटी’ नाटक के लेखक पं. गोविंदबल्लभ पंत हैं। यह मद्यपान के दुष्परिणाम दिखाने वाला एक सामाजिक नाटक है।
49. समालोचना के क्षेत्र में ‘प्रभाववादियों’ का क्या मानना है?
प्राचीन लक्षणों के आधार पर ही काव्य की जाँच होनी चाहिए
आलोचना केवल काव्य के आनंदपूर्ण प्रभाव को प्रकट करना है
प्रभाववादी मानते हैं कि जो प्रभाव चित्त पर पड़े, उसी का वर्णन समालोचना है, जो शुक्ल जी के अनुसार एक व्यक्तिगत वस्तु है।
लेखक की सामाजिक परिस्थिति का अध्ययन अनिवार्य है
आलोचना को व्याकरण सम्मत होना चाहिए
50. शुक्ल जी के अनुसार ‘हास्य रस’ के आलंबन के प्रति कैसा भाव होने पर वह ‘उपहास’ बन जाता है?
दया का भाव
भक्ति का भाव
द्वेष या घृणा का भाव
हास्य आनंदात्मक है; यदि इसमें द्वेष या घृणा आ जाए, तो वह सच्चा हास्य न रहकर उपहास मात्र रह जाता है।
प्रेम का भाव

यह MCQs सेट रामचंद्र शुक्ल की पुस्तक के ‘तृतीय उत्थान’ के मूल कथ्यों पर आधारित है। प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए इन तथ्यों का बार-बार अभ्यास अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।

Previous articleआचार्य रामचंद्र शुक्ल: हिंदी साहित्य का इतिहास हिंदी गद्य का द्वितीय उत्थान (वस्तुनिष्ठ प्रश्न)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here