आचार्य रामचंद्र शुक्ल के ‘हिंदी साहित्य का इतिहास’ के ‘भक्तिकाल की फुटकल रचनाएँ’ (प्रकरण 6) पर आधारित 40 और कुछ बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) नीचे दिए गए हैं। ये Quiz PGT, TGT, DSSSB, lt grade, Assistant Professor और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। यह प्रश्न-संग्रह भक्तिकाल की फुटकल रचनाएँ के कवियों, काव्यधाराओं, ऐतिहासिक संदर्भों और साहित्यिक विशेषताओं आदि पर आधारित हैं।
41. शुक्ल जी ने ‘भाषा हनुमन्नाटक’ और ‘देवमायाप्रपंचनाटक’ को नाटक मानने से क्यों इनकार किया है?
इनमें दृश्य वर्णन नहीं है।
ये संस्कृत के अनुवाद हैं।
एक केवल पद्य है और दूसरा ज्ञानवार्ता है।
शुक्ल जी के अनुसार हृदयराम कृत ‘भाषा हनुमन्नाटक’ को नाटक नहीं कहा जा सकता और देव कृत ‘देवमायाप्रपंचनाटक’ (संवत् 1620) नाटक नहीं बल्कि ‘ज्ञानवार्ता’ है।
इनमें संवादों का अभाव है।
42. ‘जाको जस है जगत में, जगत सराहै जाहि। ताको जीवन सफल है, कहत अकब्बर साहि’ – यह पद्य किस शासक की काव्य-रुचि को दर्शाता है?
शाहजहाँ
अकबर
यह पद्य स्वयं अकबर (अकब्बर साहि) द्वारा ब्रजभाषा में की गई कविता का उदाहरण है, जो उनकी साहित्य के प्रति उदारता और योग को दर्शाता है।
हुमायूँ
जहाँगीर
43. कृपाराम ने ‘हिततरंगिणी’ में बड़े छंदों के स्थान पर ‘दोहों’ का प्रयोग किस विचार से किया था?
पांडित्य प्रदर्शन के लिए
कवित्त छंद के कठिन होने के कारण
पाठकों की मांग पर
‘सुघरता’ के विचार से
कवि कृपाराम ने स्वयं कहा है कि उन्होंने ‘सुघरता’ (संक्षिप्तता और सुंदरता) के विचार से बड़े छंदों के विस्तार को छोड़कर दोहों में श्रृंगार रस का वर्णन किया है।
44. किस विदेशी विद्वान ने लालचदास की पुस्तक ‘भागवत दशम स्कंध भाषा’ का उल्लेख किया है?
ग्रियर्सन
मैक्समूलर
विलियम जोन्स
गार्सां द तासी
हिंदुस्तानी के फारसी विद्वान ‘गार्सां द तासी’ ने लालचदास की इस पुस्तक का उल्लेख किया है और बताया है कि इसका अनुवाद फारसी में भी हुआ है।
45. केशवदास ने अलंकारों के लक्षण ‘काव्यादर्श’ के अतिरिक्त किन संस्कृत ग्रंथों से लिए हैं?
काव्यकल्पलतावृत्ति और अलंकारशेखर
केशवदास ने अलंकारों के लक्षण दंडी के ‘काव्यादर्श’ के साथ-साथ अमररचित ‘काव्यकल्पलतावृत्ति’ और केशव मिश्र कृत ‘अलंकारशेखर’ से लिए हैं।
काव्यप्रकाश और साहित्यदर्पण
कुवलयानंद और चंद्रालोक
रसमंजरी और भावप्रकाशन
46. केशवदास ने ‘उपमा’ अलंकार के कितने भेद बताए हैं और उनमें से कितने दंडी के ‘काव्यादर्श’ से ज्यों के त्यों लिए गए हैं?
12 भेद; जिनमें से 5 दंडी के हैं
22 भेद; जिनमें से 15 दंडी के हैं
केशव ने उपमा के 22 भेद रखे हैं, जिनमें से 15 ज्यों के त्यों दंडी के हैं और 5 के केवल नाम बदले गए हैं।
10 भेद; सभी दंडी के हैं
28 भेद; जिनमें से 20 दंडी के हैं
47. शुक्ल जी के अनुसार केशवदास की कविता के ‘कठिन’ होने का मुख्य कारण क्या है?
छंदों का अत्यधिक परिवर्तन
केवल संस्कृत शब्दों का प्रयोग
भाषा पर अधिकार की कमी और अप्रांजल पदावली
शुक्ल जी कहते हैं कि उनकी कविता के कठिन होने का कारण मौलिक भावनाओं की जटिलता नहीं, बल्कि पदों/वाक्यों की न्यूनता, अशक्त शब्द और भाषा पर पूर्ण अधिकार न होना है।
उनकी मौलिक भावनाओं की गंभीरता
48. केशवदास को उनकी किस कृति में संवादों में सबसे अधिक सफलता मिली है?
रसिकप्रिया
विज्ञानगीता
रामचंद्रिका
‘रामचंद्रिका’ में केशव को संवादों में (जैसे रावण-अंगद संवाद) अद्भुत सफलता मिली है, जो तुलसी के संवादों से भी अधिक उपयुक्त कहे गए हैं।
कविप्रिया
49. रहीम ने तुर्की भाषा के किस ग्रंथ का फारसी में अनुवाद किया था?
आइने अकबरी
हुमायूँनामा
तुजुक-ए-जहाँगीरी
वाकयात बाबरी
रहीम कई भाषाओं के ज्ञाता थे और उन्होंने ‘वाकयात बाबरी’ का तुर्की से फारसी में अनुवाद किया था।
50. ‘रहीम काव्य’ और ‘खेट कौतुकम्’ की भाषा के विषय में क्या सही है?
दोनों शुद्ध ब्रजभाषा में हैं।
दोनों अवधी भाषा के ग्रंथ हैं।
दोनों फारसी भाषा में लिखे गए हैं।
‘रहीम काव्य’ हिंदी-संस्कृत की और ‘खेट कौतुकम्’ संस्कृत-फारसी की खिचड़ी है।
रहीम ने मिश्रित भाषाओं में भी रचना की; ‘रहीम काव्य’ हिंदी-संस्कृत का मिश्रण है और ज्योतिष ग्रंथ ‘खेट कौतुकम्’ संस्कृत-फारसी का।
51. ‘गुन ना हिरानो, गुनगाहक हिरानो है’ – यह प्रसिद्ध पंक्ति किस कवि की है?
कादिर
यह पंक्ति पिहानी के कवि ‘कादिर’ (कादिरबख्श) के एक प्रसिद्ध कवित्त से है, जिसमें वे कलिकाल में गुणों की उपेक्षा पर क्षोभ प्रकट करते हैं।
गंग
रहीम
बीरबल
52. बनारसीदास ने अपनी युवावस्था की श्रृंगारिक कविताओं को किस नदी में फेंक दिया था?
गोमती
ज्ञान प्राप्त होने पर बनारसीदास ने अपनी पुरानी श्रृंगार रस की कविताएँ ‘गोमती नदी’ में फेंक दी थीं।
गंगा
यमुना
सरयू
53. सेनापति के ‘कवित्त रत्नाकर’ में किनका नाम स्मरण (उपास्य रूप में) बार-बार आया है?
राम
यद्यपि सेनापति के पदों में वृंदावन का नाम आया है, पर उनके मुख्य उपास्य ‘राम’ ही जान पड़ते हैं क्योंकि उन्होंने ‘सियापति’, ‘सीतापति’ आदि नामों का स्मरण किया है।
श्रीकृष्ण
शिव
हनुमान
54. ‘दाता और सूम दोउ कीन्हें इकसार है’ – सेनापति ने यह चमत्कार किस अलंकार के माध्यम से दिखाया है?
उत्प्रेक्षा
अनुप्रास
श्लेष
सेनापति ने ‘श्लेष’ के अत्यंत साफ उदाहरण द्वारा दाता और कंजूस (सूम) का वर्णन एक ही पद्य में किया है।
यमक
55. ‘रसरतन’ (पुहकर कवि) की प्रेमकथा के नायक-नायिका कौन हैं?
रत्नसेन और पद्मिनी
माधव और कामकंदला
सूरसेन और रंभावती
संवत् 1673 में रचित ‘रसरतन’ में ‘रंभावती और सूरसेन’ की प्रेमकथा का साहित्यिक वर्णन है।
ढोला और मारू
56. लालचंद कृत ‘पद्मिनीचरित्र’ के अनुसार रत्नसेन के सिंहलद्वीप जाने का क्या कारण था?
किसी योगी द्वारा पद्मिनी का चित्र दिखाना।
दिग्विजय के लिए निकलना।
पटरानी प्रभावती द्वारा पद्मिनी को ब्याह लाने की चुनौती देना।
लालचंद की कथा जायसी से भिन्न है; यहाँ पटरानी ‘प्रभावती’ भोजन की बुराई किए जाने पर राजा को चिढ़ाकर पद्मिनी लाने को कहती है।
हीरामन तोते द्वारा पद्मिनी का वर्णन सुनना।
57. ‘ढोला मारू रा दूहा’ के प्राचीन दोहों के बीच में संवत् 1618 के आसपास किसने चौपाइयाँ जोड़ीं?
लालचंद
कुशललाभ
जैन कवि ‘कुशललाभ’ ने कथा की श्रृंखला पूरी करने के लिए लुप्त दोहों के बीच चौपाइयाँ रची थीं।
बनारसीदास
पुहकर
58. शुक्ल जी ने ‘ऐतिहासिक पौराणिक’ श्रेणी के आख्यान काव्यों में किस ग्रंथ को स्थान दिया है?
मधुमालती
रुक्मिणीमंगल
शुक्ल जी की सूची के अनुसार ‘रामचरितमानस’, ‘हरिचरित्र’, ‘रुक्मिणीमंगल’ (नरहरि/नंददास) और ‘सुदामाचरित्र’ ऐतिहासिक-पौराणिक श्रेणी में आते हैं।
सत्यवती कथा
मृगावती
59. ‘सत्यवतीकथा’ के रचयिता कौन हैं?
कुतुबन
ईश्वरदास
‘सत्यवतीकथा’ के रचयिता ईश्वरदास हैं, जिसे शुक्ल जी ने कल्पित आख्यान काव्यों की श्रेणी में रखा है।
कासिमशाह
जायसी
60. ‘बेलि क्रिसन रुकमणी री’ के रचनाकार पृथ्वीराज कहाँ के राजा थे?
मेवाड़
जयपुर
ग्वालियर
जोधपुर
पृथ्वीराज ‘जोधपुर’ के राठौड़ राजवंशीय कवि थे, जिन्होंने श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के विवाह पर यह मार्मिक रचना की।
61. शुक्ल जी के अनुसार, पठानों के शासनकाल में भारतीय कलावंत अपना निर्वाह कहाँ करते थे?
शाही दरबारों में
मंदिरों में
विदेशों में
छोटे-मोटे राजाओं के यहाँ
स्रोतों के अनुसार, पठानों के शासनकाल की अशांति के बीच भारतीय कलावंत छोटे-मोटे राजाओं के यहाँ किसी प्रकार अपना निर्वाह करते हुए संगीत को सहारा दिए हुए थे।
62. ‘देवमायाप्रपंचनाटक’ को शुक्ल जी ने नाटक न मानकर क्या माना है?
काव्य ग्रंथ
नीति ग्रंथ
वंशावली
ज्ञानवार्ता
शुक्ल जी का मानना है कि कृष्णभक्त कवि व्यास जी के शिष्य देव द्वारा रचित ‘देवमायाप्रपंचनाटक’ (संवत् 1620) वास्तव में नाटक नहीं, बल्कि एक ज्ञानवार्ता है।
63. रायबरेली के ‘लालचदास’ (संवत् 1585) किस जाति के थे?
कायस्थ
क्षत्रिय
हलवाई
‘हरिचरित’ और ‘भागवत दशम स्कंध’ के रचयिता लालचदास रायबरेली के एक हलवाई थे।
ब्राह्मण
64. शुक्ल जी ने किस ग्रंथ के दोहों के बारे में कहा है कि वे ‘बिहारी के दोहों’ से मिलते-जुलते हैं?
रसिकप्रिया
दोहावली
हिततरंगिणी
कवि कृपाराम द्वारा रचित ‘हिततरंगिणी’ (संवत् 1598) के कई दोहे बिहारी के दोहों से मिलते-जुलते पाए गए हैं।
सुदामाचरित्र
65. प्रयाग के किले के अशोकस्तंभ पर खुदे लेख के अनुसार बीरबल के पिता का क्या नाम था?
गंगादास
प्रयाग के किले के अशोकस्तंभ पर खुदे लेख में महाराज बीरबल को ‘गंगादास सुत’ (गंगादास का पुत्र) बताया गया है।
महेशदास
रत्नाकर
काशीनाथ
66. किस परवर्ती कवि ने बीरबल के निवास स्थान ‘तिकवाँपुर’ का स्पष्ट उल्लेख किया है?
भूषण
कवि भूषण ने अपने छंदों में स्पष्ट किया है कि बीरबल का जन्मस्थान तिकवाँपुर (त्रिविक्रमपुर) था, जो यमुना किनारे बसा है।
केशवदास
बिहारी
देव
67. महाराज बीरबल ने किस प्रसिद्ध कवि को एक बार ‘छह लाख रुपये’ दान में दिए थे?
तुलसीदास
केशवदास
बीरबल कवियों का बड़ा सम्मान करते थे और उन्होंने केशवदास जी को एक बार छह लाख रुपये दिए थे।
गंग
नरहरि
68. गंग कवि के हाथी से मारे जाने की घटना का संकेत किस अन्य कवि की पंक्ति ‘एक मींजि मारे हाथी’ से मिलता है?
पद्माकर
देव
गंग कवि की मृत्यु के संबंध में देव कवि ने अपनी पंक्ति में कहा है कि ‘एक भए प्रेत, एक मींजि मारे हाथी’, जो इस घटना की पुष्टि करता है।
भिखारीदास
मतिराम
69. बलभद्र मिश्र कृत ‘नखशिख’ की एक टीका संवत् 1891 में किसने लिखी थी?
केशवदास
काशीनाथ
शिवसिंह
गोपाल कवि
संवत् 1891 में गोपाल कवि ने बलभद्र मिश्र के ‘नखशिख’ ग्रंथ पर एक टीका लिखी थी।
70. केशवदास ने ‘कविप्रिया’ में ‘प्रेमालंकार’ को किसका नामांतर माना है?
रसवत्
ऊर्जस्वित
समासोक्ति
प्रेयस
केशवदास कृत ‘कविप्रिया’ का प्रेमालंकार दंडी के ‘प्रेयस’ अलंकार का ही नामांतर है।
71. शुक्ल जी के अनुसार, ‘प्रबंधकाव्य’ के लिए कौन-सी विशेषता अनिवार्य नहीं है?
कथा के गंभीर स्थलों की पहचान
उक्ति-वैचित्र्य और शब्दक्रीड़ा
शुक्ल जी के अनुसार प्रबंधकाव्य के लिए संबंध निर्वाह, मार्मिक स्थलों की पहचान और दृश्यों की स्थानगत विशेषता अनिवार्य है; जबकि उक्ति-वैचित्र्य और शब्दक्रीड़ा मुक्तक रचना के अधिक उपयुक्त हैं।
संबंध निर्वाह
दृश्यों की स्थानगत विशेषता
72. ‘रामचंद्रिका’ में पात्रों के नाम पद्यों से अलग सूचित करने का कारण शुक्ल जी ने क्या बताया है?
संस्कृत ग्रंथों का प्रभाव
कथा का चलता प्रवाह न रख सकना
कथा का निरंतर प्रवाह न रख पाने के कारण केशव को पात्रों के नाम नाटकों के अनुकरण पर पद्यों से अलग सूचित करने पड़े।
नवीन शैली का प्रयोग
पाठकों की सुविधा
73. ‘रतनबावनी’ नामक वीररस के काव्य में केशवदास ने किसके शौर्य का वर्णन किया है?
इंद्रजीत सिंह
महाराजा रामसिंह
वीरसिंह देव
रत्नसिंह
‘रतनबावनी’ में केशवदास ने राजा इंद्रजीत सिंह के बड़े भाई रत्नसिंह की वीरता का छप्पयों में वर्णन किया है।
74. ‘लोटा तुलसीदास को लाख टका को मोल’ – यह प्रसिद्ध पंक्ति किस कवि की है?
रहीम
गंग
नरहरि
होलराय
अकबर के समय के कवि होलराय ने तुलसीदास जी द्वारा दिए गए लोटे पर यह प्रसिद्ध पंक्ति कही थी।
75. रीवाँ नरेश ने रहीम के किस ग्रंथ के एक दोहे से प्रभावित होकर याचक को एक लाख रुपये दिए थे?
रहीम दोहावली
रहीम ने रहीम दोहावली (स़तसई) का ‘चित्रकूट में रमि रहे…’ वाला दोहा लिखकर याचक को रीवाँ नरेश के पास भेजा था, जिसके बाद उसे एक लाख रुपये मिले।
बरवै नायिकाभेद
मदनाष्टक
नगरशोभा
76. रहीम कृत ‘नगरशोभा’ का मुख्य विषय क्या है?
विभिन्न जातियों की स्त्रियों का वर्णन
‘नगरशोभा’ में रहीम ने ब्राह्मणी, क्षत्राणी, बनियाइन आदि विभिन्न जातियों की स्त्रियों के रूप-रंग का वर्णन किया है।
नगर का भूगोल
राजा की प्रशंसा
भक्ति के पद
77. बनारसीदास जैन ने ‘अर्धकथानक’ में अपने जीवन के किस वर्ष तक का वृत्तांत दिया है?
संवत् 1643
संवत् 1706
संवत् 1698
बनारसीदास जैन ने संवत् 1698 तक का अपना जीवनवृत्त ‘अर्धकथानक’ नामक ग्रंथ में दिया है।
संवत् 1600
78. सेनापति ने अपने गुरु का नाम क्या बताया है?
गंगाधर
काशीनाथ
हीरामणि दीक्षित
सेनापति के अनुसार उन्होंने ‘हीरामणि दीक्षित’ से अपनी पंडिताई और विद्या प्राप्त की थी।
परशुराम दीक्षित
79. कायस्थ कवि ‘पुहकर’ किस मुगल शासक के समय में वर्तमान थे?
औरंगजेब
जहाँगीर
पुहकर कवि जहाँगीर के समय में थे और उन्होंने संवत् 1673 में कारागार में रहते हुए ‘रसरतन’ ग्रंथ लिखा था।
अकबर
शाहजहाँ
80. ‘सुंदर श्रृंगार’ नामक नायिकाभेद के ग्रंथ के रचयिता कौन हैं?
सुंदर
ग्वालियर के ब्राह्मण सुंदर कवि ने संवत् 1688 में ‘सुंदर श्रृंगार’ नामक ग्रंथ की रचना की थी।
सेनापति
केशवदास
रहीम
उपरोक्त सभी प्रश्न आचार्य रामचंद्र शुक्ल के इतिहास ग्रंथ के प्रकरण 6 (भक्तिकाल की फुटकल रचनाएँ) के गहन अध्ययन पर आधारित हैं। आपकी आगामी परीक्षाओं (UP PGT, TGT, DSSSB, NET) के लिए ये quiz जरूर अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे। आप सभी को आगामी परीक्षाओं के लिए शुभकामनाएँ!







