आचार्य रामचंद्र शुक्ल: हिंदी साहित्य का इतिहास आधुनिक गद्य साहित्य (वस्तुनिष्ठ प्रश्न)

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आचार्य रामचंद्र शुक्ल: हिंदी साहित्य का इतिहास – महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तरी

इस ब्लॉग में हम आचार्य रामचंद्र शुक्ल के ‘हिंदी साहित्य का इतिहास’ से आधुनिक गद्य साहित्य पर आधारित 59 महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs) और दिए गए हैं। ये सभी quiz गद्य का प्रवर्तन और प्रथम उत्थान पर आधारित हैं जो PGT, TGT, DSSSB, LT Grade और Assistant Professor जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक होंगे। यहाँ दिए गए प्रश्न न केवल परीक्षा दृष्टि से उपयोगी हैं, बल्कि हिंदी साहित्य की गहराई को समझने में भी मदद करेंगे।

आइए, आधुनिक गद्य साहित्य के वस्तुनिष्ठ प्रश्न को Quiz के माध्यम से सरल और रोचक ढंग से जानें-

1. आचार्य शुक्ल के अनुसार, वर्तमान हिंदी गद्य का प्रवर्तक किसे माना जाता है?
भारतेंदु हरिश्चंद्र
शुक्ल जी के अनुसार भारतेंदु ने गद्य की भाषा को परिमार्जित करके उसे मधुर और स्वच्छ रूप दिया, इसलिए वे वर्तमान हिंदी गद्य के प्रवर्तक माने गए हैं।
राजा लक्ष्मण सिंह
मुंशी सदासुखलाल
लल्लूलाल
2. ‘हिंदी नए चाल में ढली, सन् 1873 ई.।’ यह कथन भारतेंदु ने अपनी किस पुस्तक में नोट किया है?
विद्यासुंदर
भारत दुर्दशा
कालचक्र
भारतेंदु ने ‘कालचक्र’ नामक अपनी पुस्तक में नोट किया है कि ‘हिंदी नए चाल में ढली, सन् 1873 ई.’।
हरिश्चंद्र चंद्रिका
3. शुक्ल जी ने किसकी भाषा को ‘साधु होते हुए भी पंडिताऊपन’ लिए हुए माना है?
लल्लूलाल
राजा शिवप्रसाद
मुंशी सदासुखलाल
शुक्लजी के अनुसार मुंशी सदासुख की भाषा साधु होते हुए भी पंडिताऊपन लिए थी।
सदल मिश्र
4. ‘आनंद रघुनंदन’ नाटक के रचयिता कौन हैं, जिसे शुक्ल जी ने नाटकत्व से युक्त माना है?
अमानत
महाराज विश्वनाथ सिंह
भारतेंदु से पहले ब्रजभाषा में लिखे गए नाटकों में केवल महाराज विश्वनाथ सिंह के ‘आनंद रघुनंदन’ में ही नाटकत्व था।
भारतेंदु हरिश्चंद्र
राजा लक्ष्मण सिंह
5. भारतेंदु मंडल के किस लेखक की शैली को शुक्लजी ने ‘चुलबुली और चपलतापूर्ण’ कहा है?
ठाकुर जगमोहन सिंह
प्रतापनारायण मिश्र
प्रतापनारायण मिश्र की प्रकृति विनोदशील थी, इसलिए उनकी भाषा में बोलचाल की चपलता और भावभंगिमा मिलती है।
बदरीनारायण चौधरी
बालकृष्ण भट्ट
6. ‘हिंदी प्रदीप’ पत्र के संपादक कौन थे?
प्रतापनारायण मिश्र
भारतेंदु हरिश्चंद्र
प्रेमघन
बालकृष्ण भट्ट
पं. बालकृष्ण भट्ट ने संवत् 1934 में प्रयाग से ‘हिंदी प्रदीप’ मासिक पत्र निकाला था।
7. ‘आठ मास बीते, जजमान! अब तौ करौ दच्छिना दान’ – यह पंक्तियाँ किस पत्र के चंदे के लिए लिखी गई थीं?
ब्राह्मण
‘ब्राह्मण’ पत्र के संपादक प्रतापनारायण मिश्र ने ग्राहकों से चंदा माँगने के लिए ये पंक्तियाँ लिखी थीं।
हिंदी प्रदीप
आनंद कादंबिनी
भारत मित्र
8. शुक्ल जी ने अंग्रेजी गद्य साहित्य के ‘एडीसन और स्टील’ की संज्ञा किन्हें दी है?
राजा शिवप्रसाद और राजा लक्ष्मण सिंह
श्रीनिवास दास और जगमोहन सिंह
प्रतापनारायण मिश्र और बालकृष्ण भट्ट
पं. प्रतापनारायण मिश्र और बालकृष्ण भट्ट ने हिंदी गद्य में वही काम किया जो अंग्रेजी में एडीसन और स्टील ने किया था।
भारतेंदु और प्रेमघन
9. अंग्रेजी ढंग का मौलिक उपन्यास ‘परीक्षागुरु’ के लेखक कौन हैं?
लाला श्रीनिवास दास
शुक्लजी के अनुसार हिंदी में अंग्रेजी ढंग का पहला मौलिक उपन्यास लाला श्रीनिवास दास का ‘परीक्षागुरु’ ही निकला था।
बालकृष्ण भट्ट
राधाकृष्ण दास
देवकीनंदन खत्री
10. ‘सत्य हरिश्चंद्र’ नाटक के संबंध में शुक्ल जी का क्या मत है?
यह संस्कृत के चंडकौशिक का अनुवाद है
यह अधूरा नाटक है
यह एक बँग्ला नाटक का अनुवाद है
शुक्ल जी के अनुसार ‘सत्य हरिश्चंद्र’ मौलिक समझा जाता है, पर उन्होंने एक पुराना बँग्ला नाटक देखा है जिसका वह अनुवाद कहा जा सकता है।
यह पूर्णतः मौलिक है
11. काशी नागरी प्रचारिणी सभा की स्थापना कब हुई?
संवत् 1900
संवत् 1950
संवत् 1950 में बाबू श्यामसुंदर दास, पं. रामनारायण मिश्र और ठा. शिवकुमार सिंह के उद्योग से इसकी स्थापना हुई।
संवत् 1941
संवत् 1925
12. ‘आनंद कादंबिनी’ पत्रिका के संपादक कौन थे?
बालकृष्ण भट्ट
प्रतापनारायण मिश्र
अंबिकादत्त व्यास
बदरीनारायण चौधरी ‘प्रेमघन’
मिर्जापुर से संवत् 1938 में उपाधयाय बदरीनारायण चौधरी ‘प्रेमघन’ ने इसे निकाला था।
13. भारतेंदु ने ‘विद्यासुंदर’ नाटक का अनुवाद किस भाषा से किया था?
मराठी
बँग्ला
संवत् 1925 में भारतेंदु ने ‘विद्यासुंदर’ का बँग्ला से हिंदी में अनुवाद किया था।
संस्कृत
प्राकृत
14. शुक्ल जी के अनुसार ‘संयोगिता स्वयंवर’ नाटक की ‘सच्ची समालोचना’ किसने की थी?
भारतेंदु हरिश्चंद्र
महावीर प्रसाद द्विवेदी
जगन्नाथ दास ‘रत्नाकर’
बालकृष्ण भट्ट
संवत् 1943 में बालकृष्ण भट्ट ने ‘संयोगिता स्वयंवर’ की ‘सच्ची समालोचना’ अपने पत्र ‘हिंदी प्रदीप’ में की थी।
15. ‘श्यामास्वप्न’ उपन्यास के रचयिता कौन हैं?
ठाकुर जगमोहन सिंह
ठाकुर जगमोहन सिंह ने ‘श्यामास्वप्न’ नामक उपन्यास लिखा, जिसमें ग्राम्य जीवन का सरस चित्रण है।
लाला श्रीनिवास दास
राधाचरण गोस्वामी
बालकृष्ण भट्ट
16. ‘हिंदी, हिंदू, हिंदुस्तानी’ का नारा किसने दिया था?
मदन मोहन मालवीय
पुरुषोत्तम दास टंडन
प्रतापनारायण मिश्र
प्रतापनारायण मिश्र ‘हिंदी, हिंदू, हिंदुस्तानी’ का राग अलापते फिरते थे और हिंदी प्रचार में संलग्न थे।
भारतेंदु हरिश्चंद्र
17. ‘ब्राह्मण’ पत्र कहाँ से प्रकाशित होता था?
कलकत्ता
कानपुर
पं. प्रतापनारायण मिश्र कानपुर से ‘ब्राह्मण’ पत्र निकालते थे।
प्रयाग
काशी
18. भारतेंदु का कौन सा नाटक अधूरा रह गया था जिसे राधाकृष्ण दास ने पूरा किया?
वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति
सती प्रताप
भारतेंदु का अधूरा नाटक ‘सती प्रताप’ उनके फुफेरे भाई राधाकृष्ण दास ने पूरा किया था।
नीलदेवी
भारत जननी
19. शुक्ल जी ने ‘गद्य काव्य के पुराने ढंग की झलक’ और ‘रंगीन इमारत की चमक-दमक’ किसके लेखों में मानी है?
बालकृष्ण भट्ट
प्रतापनारायण मिश्र
ठाकुर जगमोहन सिंह
बदरीनारायण चौधरी ‘प्रेमघन’
शुक्लजी के अनुसार ‘प्रेमघन’ के लेखों में गद्य काव्य के पुराने ढंग की झलक और रंगीन इमारत की चमक-दमक मिलती है।
20. ‘कविवचनसुधा’ पत्रिका का प्रकाशन वर्ष क्या है?
संवत् 1930
संवत् 1940
संवत् 1950
संवत् 1925
संवत् 1925 में भारतेंदु ने ‘कविवचनसुधा’ पत्रिका निकाली थी।
21. ‘नूतन ब्रह्मचारी’ और ‘सौ अजान एक सुजान’ किसके उपन्यास हैं?
बालकृष्ण भट्ट
ये उपन्यास पं. बालकृष्ण भट्ट द्वारा लिखे गए छोटे-छोटे उपन्यास हैं।
प्रतापनारायण मिश्र
लाला श्रीनिवास दास
राधाकृष्ण दास
22. ‘कलिकौतुक रूपक’ के रचयिता कौन हैं?
प्रतापनारायण मिश्र
प्रतापनारायण मिश्र ने ‘कलिकौतुक रूपक’ में पाखंडियों का चित्रण किया है।
भारतेंदु
बालकृष्ण भट्ट
बदरीनारायण चौधरी
23. ‘संयोगिता स्वयंवर’ की विस्तृत और कठोर आलोचना ‘आनंद कादंबिनी’ में कितने पृष्ठों में निकली थी?
5 पृष्ठों में
10 पृष्ठों में
50 पृष्ठों में
21 पृष्ठों में
बदरीनारायण चौधरी ‘प्रेमघन’ ने अपनी पत्रिका में इसकी 21 पृष्ठों की कठोर समालोचना की थी।
24. ‘हरिश्चंद्र मैगजीन’ का नाम 8 संख्याओं के बाद क्या हो गया था?
कविवचनसुधा
बालाबोधिनी
हिंदी प्रदीप
हरिश्चंद्र चंद्रिका
‘हरिश्चंद्र मैगजीन’ का नाम 8 संख्याओं के बाद ‘हरिश्चंद्र चंद्रिका’ हो गया था।
25. ‘रणधीर और प्रेममोहिनी’ नाटक किस विदेशी नाटक के ढंग पर लिखा गया है?
हैमलेट
मैकबेथ
रोमियो एंड जूलियट
‘रणधीर और प्रेममोहिनी’ नाटक का नाम और ढंग ‘रोमियो एंड जूलियट’ की याद दिलाता है।
मर्चेंट ऑफ वेनिस
26. भारतेंदु ने स्त्री शिक्षा के लिए कौन-सी पत्रिका निकाली थी?
कविवचनसुधा
सार सुधानिधि
बालाबोधिनी
संवत् 1931 में भारतेंदु ने स्त्री शिक्षा के लिए ‘बालाबोधिनी’ निकाली थी।
हरिश्चंद्र चंद्रिका
27. ‘भारतेंदु’ नामक पत्र वृंदावन से किसने निकाला था?
राधाकृष्ण दास
अंबिकादत्त व्यास
बालकृष्ण भट्ट
राधाचरण गोस्वामी
पं. राधाचरण गोस्वामी ने वृंदावन से ‘भारतेंदु’ नाम का पत्र निकाला था।
28. ‘सिंध देश की राजकुमारियाँ’ ऐतिहासिक रूपक के लेखक कौन हैं?
केशवराम भट्ट
काशीनाथ खत्री
काशीनाथ खत्री ने ‘तीन ऐतिहासिक रूपक’ लिखे थे, जिनमें ‘सिंध देश की राजकुमारियाँ’ पहला था।
कार्तिक प्रसाद खत्री
राधाकृष्ण वर्मा
29. निम्नलिखित में से कौन सी रचना लाला श्रीनिवास दास की है?
तप्त संवरण
‘तप्तासंवरण’ लाला श्रीनिवास दास का नाटक है, जो 1883 ई. में प्रकाशित हुआ था।
लोकोक्ति शतक
रणधीर प्रेम मोहनी
संयोगिता स्वयंवर
30. शुक्ल जी ने ‘स्वतंत्र उपन्यास लिखने की प्रवृत्ति और योग्यता’ का श्रेय किन्हें दिया है?
अंग्रेजी अनुवादों को
संस्कृत कथाओं को
पारसी नाटकों को
बँग्ला के अनूदित उपन्यासों को
बँग्ला के अनुवादों से नए ढंग के उपन्यासों का परिचय हुआ और स्वतंत्र उपन्यास लिखने की योग्यता आई।
31. ‘भारत मित्र’ पत्र कहाँ से निकलता था?
इलाहाबाद
दिल्ली
कलकत्ता
संवत् 1934 में कलकत्ता से ‘भारत मित्र’ निकला था, जिसके संपादक रुद्रदत्त थे।
काशी
32. ‘पीयूष प्रवाह’ के संपादक कौन थे?
प्रतापनारायण मिश्र
बालकृष्ण भट्ट
अंबिकादत्त व्यास
संवत् 1941 में काशी से पं. अंबिकादत्त व्यास ने ‘पीयूष प्रवाह’ निकाला था।
भारतेंदु
33. भारतेंदु ने ‘जानकीमंगल’ नाटक में कौन सा अभिनय (पार्ट) किया था?
सीता
रावण
लक्ष्मण
शुक्ल जी के अनुसार ‘जानकीमंगल’ के धूमधाम वाले अभिनय में भारतेंदु ने लक्ष्मण का पार्ट लिया था।
राम
34. नागरी प्रचारिणी सभा के प्रथम सभापति कौन थे?
श्यामसुंदर दास
मदन मोहन मालवीय
रामनारायण मिश्र
राधाकृष्ण दास
नागरी प्रचारिणी सभा के प्रथम सभापति भारतेंदु के फुफेरे भाई बाबू राधाकृष्ण दास हुए।
35. ‘अदालती लिपि और प्राइमरी शिक्षा’ पुस्तक लिखकर नागरी का मेमोरियल किसने तैयार किया था?
पं. मदन मोहन मालवीय
पं. मदन मोहन मालवीय ने ‘अदालती लिपि और प्राइमरी शिक्षा’ अंग्रेजी पुस्तक लिखकर नागरी प्रचार आंदोलन को गति दी थी।
बाबू श्यामसुंदर दास
अयोध्या नरेश
गौरीदत्त
36. शुक्ल जी के अनुसार, भारतेंदु की ‘असली भाषा’ का रूप किसमें मिलता है?
तथ्यनिरूपण की शैली में
अनुवादों में
भावावेश की शैली में
शुक्ल जी का मानना है कि भारतेंदु की असली भाषा का रूप उनके भावावेश वाले कथनों (जैसे चंद्रावली और प्रेमयोगिनी) में मिलता है।
नीलदेवी के वक्तव्य में
37. ‘मेवाड़ कमलिनी’ किस नाटक का दूसरा नाम है?
सती चंद्रावली
महारानी पद्मावती
राधाकृष्ण दास के नाटक का नाम ‘महारानी पद्मावती अथवा मेवाड़ कमलिनी’ है।
महाराणा प्रताप
नीलदेवी
38. इँगलिस्तान (इंग्लैंड) से ‘हिंदोस्थान’ नामक दैनिक पत्र किसने निकाला था?
प्रतापनारायण मिश्र
राजा रामपाल सिंह
कालाकाँकर के राजा रामपाल सिंह ने संवत् 1940 में इंग्लैंड से यह पत्र निकाला था।
मदन मोहन मालवीय
बालमुकुंद गुप्त
39. ‘दु:खिनी बाला’ रूपक के लेखक कौन हैं?
बालकृष्ण भट्ट
राधाकृष्ण दास
बाबू राधाकृष्ण दास ने ‘दु:खिनी बाला’ नामक छोटा सा रूपक लिखा था।
भारतेंदु
श्रीनिवास दास
40. ‘पाखंड विडंबन’ नाटक भारतेंदु ने किस भाषा से अनुवादित किया था?
संस्कृत
भारतेंदु के अनूदित नाटकों में ‘पाखंड विडंबन’ प्रमुख है। यह संस्कृत के प्रबोधचंद्रोदय का अनुवाद है।
बँग्ला
अंग्रेजी
प्राकृत
41. काशी नागरी प्रचारिणी सभा की स्थापना में मुख्य रूप से किसका हाथ था?
मदन मोहन मालवीय और राधाकृष्ण दास
महावीर प्रसाद द्विवेदी और बालकृष्ण भट्ट
बाबू श्यामसुंदर दास, पं. रामनारायण मिश्र और ठा. शिवकुमार सिंह
संवत् 1950 में इन तीन (बाबू श्यामसुंदर दास, पं. रामनारायण मिश्र और ठा. शिवकुमार सिंह) उत्साही छात्रों के उद्योग से सभा की स्थापना हुई थी और बाबू श्यामसुंदर दास इसके प्राणस्वरूप थे।
भारतेंदु हरिश्चंद्र और प्रताप नारायण मिश्र
42. शुक्ल जी के अनुसार, ‘नूतन और पुरातन का संघर्ष काल’ किस लेखक की भाषा में विशेष रूप से झलकता है?
लाला श्रीनिवास दास
बालकृष्ण भट्ट
शुक्ल जी के अनुसार, भट्ट जी की भाषा चटपटी और तीखी होती थी और वे पुराने विचारों को उखाड़ने और नए विचारों को जमाने में तत्पर रहते थे।
प्रतापनारायण मिश्र
बदरीनारायण चौधरी
43. ‘हिंदी, हिंदू, हिंदुस्तानी’ का राग अलापने वाले लेखक कौन थे?
भारतेंदु हरिश्चंद्र
मदन मोहन मालवीय
बालमुकुंद गुप्त
प्रतापनारायण मिश्र
पं. प्रतापनारायण मिश्र हमेशा ‘हिंदी, हिंदू, हिंदुस्तानी’ का नारा देते थे और हिंदी प्रचार में लगे रहते थे।
44. ‘श्यामास्वप्न’ उपन्यास में कहाँ के ग्राम्य जीवन का सुंदर चित्रण मिलता है?
विंध्याटवी और नर्मदा के दक्षिण प्रदेश का
ठाकुर जगमोहन सिंह ने ‘श्यामास्वप्न’ में नर्मदा के दक्षिण और दंडकारण्य के सौंदर्य तथा वहां के ग्राम्य जीवन का चित्रण किया है।
ब्रजमंडल का
अवध का
काशी का
45. ‘महारानी पद्मावती’ और ‘महाराणा प्रताप’ नाटकों के रचयिता कौन हैं?
बाबू राधाकृष्ण दास
बाबू राधाकृष्ण दास ने ‘महारानी पद्मावती’ और अपना सबसे उत्कृष्ट नाटक ‘महाराणा प्रताप’ लिखा था।
भारतेंदु हरिश्चंद्र
कार्तिकप्रसाद खत्री
प्रतापनारायण मिश्र
46. शुक्ल जी ने हिंदी गद्य साहित्य में ‘एडीसन और स्टील’ की संज्ञा किन्हें दी है?
प्रतापनारायण मिश्र और बालकृष्ण भट्ट
इन दोनों (प्रतापनारायण मिश्र और बालकृष्ण भट्ट) लेखकों ने हिंदी गद्य में वही महत्वपूर्ण स्थान बनाया जो अंग्रेजी साहित्य में एडीसन और स्टील का है।
भारतेंदु और प्रेमघन
राजा शिवप्रसाद और राजा लक्ष्मण सिंह
श्रीनिवास दास और जगमोहन सिंह
47. ‘हिंदी प्रदीप’ पत्र कहाँ से निकलता था और इसके संपादक कौन थे?
कानपुर, प्रतापनारायण मिश्र
मिर्जापुर, बदरीनारायण चौधरी
काशी, अंबिकादत्त व्यास
प्रयाग, बालकृष्ण भट्ट
पं. बालकृष्ण भट्ट ने संवत् 1934 में प्रयाग से ‘हिंदी प्रदीप’ मासिक पत्र निकालना शुरू किया था।
48. इंगलैंड से ‘हिंदोस्थान’ नामक दैनिक पत्र किसने और कब निकाला था?
बालकृष्ण भट्ट, संवत् 1941
राजा रामपाल सिंह, संवत् 1940
कालाकाँकर के राजा रामपाल सिंह ने इंगलैंड से यह पत्र निकाला था, जिसमें हिंदी और अंग्रेजी दोनों रहती थीं।
राजा शिवप्रसाद, संवत् 1930
मदन मोहन मालवीय, संवत् 1950
49. ‘अदालती लिपि और प्राइमरी शिक्षा’ नामक पुस्तक लिखकर नागरी का मेमोरियल किसने तैयार किया?
राधाकृष्ण दास
गौरीदत्त
पं. मदन मोहन मालवीय
पं. मदन मोहन मालवीय ने इस अंग्रेजी पुस्तक में नागरी को अदालतों से दूर रखने के दुष्परिणामों की विस्तृत व्याख्या की थी।
बाबू श्यामसुंदर दास
50. ‘रणधीर और प्रेममोहिनी’ नाटक किस विदेशी नाटक के ढंग पर लिखा गया है?
रोमियो एंड जूलियट
लाला श्रीनिवास दास का यह नाटक ‘रोमियो एंड जूलियट’ के ढंग पर लिखा गया है और यह एक दुखांत नाटक है।
मर्चेंट ऑफ वेनिस
हैमलेट
मैकबेथ
51. ‘आनंदकादंबिनी’ पत्रिका के संपादक कौन थे?
बालकृष्ण भट्ट
प्रतापनारायण मिश्र
अंबिकादत्त व्यास
बदरीनारायण चौधरी ‘प्रेमघन’
बदरीनारायण चौधरी ‘प्रेमघन’ ने संवत् 1938 में मिर्जापुर से यह मासिक पत्रिका निकाली थी।
52. ‘पाँचवें पैगंबर’ और ‘वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति’ के रचनाकार कौन हैं?
प्रतापनारायण मिश्र
बालकृष्ण भट्ट
लाला श्रीनिवास दास
भारतेंदु हरिश्चंद्र
‘पाँचवें पैगंबर’ भारतेंदु हरिश्चंद्र का एक प्रसिद्ध लेख था और ‘वैदिकी हिंसा…’ उनका पहला मौलिक प्रहसन नाटक था।
53. शुक्ल जी के अनुसार, भारतेंदु की ‘असली भाषा’ का रूप किन नाटकों में मिलता है?
नीलदेवी और भारत दुर्दशा
सत्य हरिश्चंद्र और मुद्राराक्षस
विद्यासुंदर और पाखंड विडंबन
चंद्रावली और प्रेमयोगिनी
शुक्ल जी का मानना है कि ‘चंद्रावली’ और ‘प्रेमयोगिनी’ के भावावेश वाले संवादों में ही भारतेंदु की असली परिष्कृत भाषा दिखाई देती है।
54. ‘ब्राह्मण’ पत्र के संपादक कौन थे, जिन्हें ग्राहकों से चंदा माँगने के लिए कविता लिखनी पड़ी थी?
बदरीनारायण चौधरी
राधाचरण गोस्वामी
प्रतापनारायण मिश्र
पं. प्रतापनारायण मिश्र ने ‘ब्राह्मण’ के लिए ‘आठ मास बीते, जजमान! अब तौ करौ दच्छिना दान’ जैसी पंक्तियाँ लिखी थीं।
बालकृष्ण भट्ट
55. ‘सती प्रताप’ नाटक को किसने पूरा किया था?
भारतेंदु हरिश्चंद्र
राधाकृष्ण दास
भारतेंदु के इस अधूरे नाटक को उनके फुफेरे भाई राधाकृष्ण दास ने पूरा किया था।
प्रतापनारायण मिश्र
अंबिकादत्त व्यास
56. मेरठ के किस विद्वान ने ‘नागरी प्रचार’ के लिए अपनी सारी संपत्ति दान कर दी और संन्यासी बन गए?
पं. गौरीदत्त
पं. गौरीदत्त ने चालीस वर्ष की उम्र में अपनी जायदाद नागरी प्रचार के नाम कर दी और ‘जय नागरी की’ का नारा दिया।
बाबू श्यामसुंदर दास
मदन मोहन मालवीय
सदानंद मिश्र
57. इंगलैंड में रहने वाले किस विद्वान ने भारतेंदु को ब्रजभाषा में पत्र लिखा था?
गार्सां द तासी
डॉ. ग्रियर्सन
कर्नल अलकाट
फ्रेडरिक पिन्काट
फ्रेडरिक पिन्काट इंगलैंड में रहकर भी हिंदी में रुचि रखते थे और उन्होंने भारतेंदु को ब्रजभाषा पद्य में पत्र लिखा था।
58. ‘परीक्षागुरु’ उपन्यास का प्रकाशन वर्ष (संवत्) क्या है?
संवत् 1934
संवत् 1950
संवत् 1939
लाला श्रीनिवास दास द्वारा लिखित ‘परीक्षागुरु’ उपन्यास का प्रकाशन वर्ष संवत् 1939 के आसपास का है, इसे हिंदी का पहला मौलिक उपन्यास माना जाता है।
संवत् 1925
59. ‘कलिकौतुक रूपक’ नाटक के रचयिता कौन हैं?
प्रताप सिंह
प्रतापनारायण मिश्र
प्रतापनारायण मिश्र ने इस नाटक में पाखंडियों और दुराचारियों के चरित्र का चित्रण किया है।
बालकृष्ण भट्ट
बदरीनारायण चौधरी

आशा है कि ये प्रश्न आपकी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक सिद्ध होंगे। यदि आपको किसी विशिष्ट प्रश्न पर कोई संदेह हो, तो कॉमेंट बॉक्स में अवश्य बताएँ।

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