हिंदी गद्य का विकास भाग 3 | Hindi Quiz

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Hindi Quiz for TGT PGT Assistant Professor and UGC NET Hindi
हिंदी क्विज प्रश्न श्रृंखला TGT, PGT, Assistant Professor एवं UGC NET हिंदी

हिंदी गद्य के विकास की प्रक्रिया अनेक साहित्यिक, सामाजिक और सांस्कृतिक परिवर्तनों से होकर आगे बढ़ी है। हिंदी गद्य की विभिन्न विधाओं, प्रमुख रचनाकारों, महत्त्वपूर्ण कृतियों, पत्र-पत्रिकाओं और साहित्यिक प्रवृत्तियों से जुड़े तथ्य प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार पूछे जाते हैं।

‘हिंदी गद्य का विकास – भाग 3’ में इस विषय से संबंधित 50 बहुविकल्पीय प्रश्न दिए गए हैं। यह क्विज विशेष रूप से UGC NET हिंदी, UPESSC सहायक प्रोफेसर, TGT, PGT तथा अन्य हिंदी साहित्य की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है।

इस प्रश्नावली में हिंदी गद्य के इतिहास और विकास से जुड़े महत्त्वपूर्ण तथ्यों के साथ प्रमुख लेखक, रचनाएँ, संस्थाएँ, पत्र-पत्रिकाएँ, साहित्यिक विधाएँ और कालक्रम संबंधी प्रश्न शामिल किए गए हैं। प्रत्येक प्रश्न के साथ सही उत्तर तथा आवश्यकतानुसार संक्षिप्त व्याख्या भी दी गई है, जिससे विद्यार्थी अपने ज्ञान की जाँच के साथ विषय का पुनरावर्तन भी कर सकें।

101. 1421 ई. में रचित ‘पृथ्वीचन्द्र चरित्र’ किस भाषा एवं किस लेखक की प्रमुख गद्य रचना है?
ब्रजभाषा — विट्ठलनाथ
मैथिली — ज्योतिश्वर ठाकुर
राजस्थानी गद्य — माणिक्यचन्द्र सूरि
1421 ई. में रचित ‘पृथ्वीचन्द्र चरित्र’ (वाग्विलास) राजस्थानी गद्य की प्रमुख रचना है, जिसके रचयिता माणिक्यचन्द्र सूरि हैं।
खड़ी बोली — गंग कवि
102. 1847 ई. में रचित राजस्थानी गद्य की रचना ‘पंचाख्यान’ के लेखक कौन हैं?
माणिक्यचन्द्र सूरि
सूरति मिश्र
लाला हीरालाल
फतहराम वैरागी
राजस्थानी गद्य ग्रंथ ‘पंचाख्यान’ (1847 ई.) के रचयिता फतहराम वैरागी हैं। हैं।
103. ‘पृथ्वीराजरासो’ में किस शीर्षक के अंतर्गत उपलब्ध गद्य को डॉ. वीरेन्द्रनाथ मिश्र ने ब्रजभाषा गद्य का प्राचीनतम रूप माना है?
वार्ता
ख्यात
टब्बा
वचनिका
डॉ. वीरेन्द्रनाथ मिश्र ने ‘पृथ्वीराजरासो’ में ‘वचनिका’ शीर्षक के अंतर्गत प्राप्त गद्य को ब्रजभाषा गद्य का प्राचीनतम रूप स्वीकार किया है। हैं।
104. ‘चौरासी वैष्णवों की वार्ता’ और ‘दो सौ बावन वैष्णवों की वार्ता’ का रचनाकाल विक्रम की किस शताब्दी का उत्तरार्द्ध माना जाता है?
14वीं शताब्दी
15वीं शताब्दी
17वीं शताब्दी
गोकुलनाथजी कृत इन दोनों वार्ता ग्रंथों का रचनाकाल विक्रम की 17वीं शताब्दी का उत्तरार्द्ध माना जाता है। हैं।
19वीं शताब्दी
105. गोस्वामी विट्ठलनाथ की ब्रजभाषा गद्य रचनाओं का सही समूह कौन-सा है?
श्रृंगार रस मंडन, यमुनाष्टक, नवरत्न सटीक
गोस्वामी विट्ठलनाथ ने ब्रजभाषा गद्य में ‘श्रृंगार रस मंडन’, ‘यमुनाष्टक’ तथा ‘नवरत्न सटीक’ की रचना की। हैं।
अष्टयाम, सेवक चरित्र, सोमवंश की वंशावली
अगहन माहात्म्य, वैशाख माहात्म्य, बैताल पचीसी
राजनीति, माधव विलास, लाल चंद्रिका
106. सूची-I के पत्रों एवं पत्रिकाओं को सूची-II के स्थानों से सुमेलित कीजिए—
पत्र/पत्रिका — स्थान
(a) प्रजामित्र — (i) आगरा
(b) बुद्धि प्रकाश — (ii) पंजाब
(c) अवध अखबार — (iii) लखनऊ
(d) ज्ञानदायिनी पत्रिका — (iv) कलकत्ता
सही विकल्प चुनिए—
विकल्प (a), (b), (c), (d)
(i), (iv), (iii), (ii)
(iv), (i), (ii), (iii)
(iv), (i), (iii), (ii)
प्रजामित्र (1834 ई.) साप्ताहिक था जो कलकत्ता से निकलता था। बुद्धि प्रकाश (1852 ई.) के संपादक मुंशी सदासुख लाल थे, यह साप्ताहिक पत्र था जो आगरा से निकलता था। वहीं अवध अखबार उर्दू भाषा का पत्र था जो लखनऊ से निकलता था। हैं।
(ii), (iii), (i), (iv)
107. 19वीं शताब्दी के सामाजिक जीवन के स्वरूप-चित्रण की दृष्टि से लल्लूलाल की कौन-सी ब्रजभाषा गद्य-पद्य मिश्रित रचना महत्त्वपूर्ण मानी जाती है?
प्रेमसागर
राजनीति
माधव विलास
लल्लूलाल कृत ‘माधव विलास’ (1817 ई.) ब्रजभाषा में रचित चंपू काव्य है, जो 19वीं सदी के सामाजिक जीवन के चित्रण के लिए महत्त्वपूर्ण है। हैं।
लतायफ़-ए-हिंदी
108. दक्खिनी हिंदी के सूफी संत ख्वाजा बंदानवाज गेसूदराज की किस रचना में सूफी धर्म का उपदेश दिया गया है?
शिकारनामा
तिलावतुल-वजूद
मेराजुल-आशकीन
गेसूदराज कृत ‘मेराजुल-आशकीन’ दक्खिनी हिंदी की प्रथम गद्य पुस्तक है जिसमें सूफी धर्म व अध्यात्म के उपदेश दिए गए हैं। हैं।
हिदायतनामा
109. “रस्मो रिवाज भाखा का दुनिया से उठ गया है।” – यह कथन खड़ी बोली गद्य के किस प्रारंभिक आचार्य का है?
इंशाअल्ला खाँ
लल्लूलाल
सदल मिश्र
मुंशी सदासुखलाल ‘नियाज’
मुंशी सदासुखलाल ‘नियाज’ ने तत्कालीन समय में फारसी के बढ़ते प्रभाव और भाखा (हिंदी) के ह्रास को देखते हुए यह टिप्पणी की थी। हैं।
110. सैयद हुसैन अली खाँ ने 1838 ई. में ‘चारदरवेश’ का फारसी से दक्खिनी में अनुवाद किसके लिए किया था?
फोर्ट विलियम कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए
राजा शिवप्रसाद के अनुरोध पर
ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकारियों के लिए
अपने पुत्रों के लिए
हुसैन अली खाँ ने ‘चारदरवेश’ का दक्खिनी अनुवाद विशेष रूप से अपने बेटों/पुत्रों के अध्ययन हेतु किया था। हैं।
111. गुरुमुखी लिपि में रचित ‘सचुंड पोथी’ लिखकर गुरुवाणी की व्याख्या किस लेखक ने प्रस्तुत की?
सोढ़ी मिहरिवानु
सोढ़ी मिहरिवानु (1581-1640 ई.) ने गुरुमुखी लिपि और खड़ी बोली गद्य में ‘सचुंड पोथी’ लिखकर गुरुवाणी की व्याख्या की थी। हैं।
हरजी
दयालु अनेमी
गुरु गोविंद सिंह
112. इंशाअल्ला खाँ ने अपनी प्रसिद्ध रचना ‘रानी केतकी की कहानी’ में किन तीन प्रकार के शब्दों से अपनी भाषा को मुक्त रखने की प्रतिज्ञा की थी?
अंग्रेजी, उर्दू, फारसी
बाहर की बोली, गोवारी, और भाषापन
इंशाअल्ला खाँ ने अरबी-फारसी (बाहर की बोली), ब्रज-अवधी (गोवारी) और संस्कृतनिष्ठता (भाषापन) से मुक्त ठेठ खड़ी बोली रखने की प्रतिज्ञा की थी। हैं।
तत्सम, तद्भव, देशज
अरबी, तुर्की, पंजाबी
113. 1867 ई. में जम्मू से प्रकाशित होने वाली मासिक हिंदी पत्रिका कौन-सी थी?
वृत्तांत विलास
1867 ई. में जम्मू से ‘वृत्तांत विलास’ नामक मासिक पत्रिका का प्रकाशन आरंभ हुआ था। हैं।
मालवा अखबार
सुधाकर
बुद्धिप्रकाश
114. लल्लूलाल के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—
(a) ‘ब्रजभाषा व्याकरण’ ही उनकी मौलिक रचना है।
(b) उन्होंने दिल्ली में ‘संस्कृत प्रेस’ नामक प्रेस खोला।
(c) वे उर्दू को ‘यामिनी भाषा’ कहते थे।
उपर्युक्त में कौन-से कथन सही हैं?
केवल (a) और (b)
केवल (b) और (c)
केवल (a) और (c)
लल्लूलाल द्वारा रचित 11 पुस्तकों में ‘ब्रजभाषा व्याकरण’ (भाषा कायदा) ही उनकी एकमात्र मौलिक रचना मानी जाती है। उन्होंने आगरा में एक प्रेस खोला जिसका नाम ‘संस्कृत प्रेस’ था। वे उर्दू को ‘यामिनी भाषा’ कहते थे। इन्होंने ‘प्रेम सागर’ की रचना करते समय ‘यामिनी भाषा’ को छोड़ने की बात कही थी। हैं।
(a), (b) और (c)
115. लल्लूलाल ने ‘प्रेमसागर’ (नागरी दशम) की रचना किस आधार ग्रंथ का खड़ी बोली में अनुवाद करके की?
यजुर्वेद का नचिकेता अध्याय
अध्यात्म रामायण
विष्णुपुराण
चतुर्भुज मिश्र के भागवत पुराण के दशम स्कंध का ब्रजभाषानुवाद
लल्लूलाल ने चतुर्भुज मिश्र के भागवत पुराण दशम स्कंध के ब्रज भाषा अनुवाद को आधार बनाकर खड़ी बोली में ‘प्रेमसागर’ लिखा। हैं।
116. लल्लूलाल ने खड़ी बोली, ब्रज और हिंदुस्तानी की 100 लघुकथाओं के संग्रह ग्रंथ ‘लतायफ़-ए-हिंदी’ को क्या नाम दिया?
बजुवान-ई-रेख़्ता
लल्लूलाल ने ‘लतायफ़-ए-हिंदी’ (1810 ई.) को ‘बजुवान-ई-रेख़्ता’ कहा है। हैं।
यामिनी भाषा
हिंदवी गद्य
चंपू काव्य
117. 1863 ई. में आगरा से ईसाई मिशनरियों द्वारा कौन-सा पत्र प्रकाशित किया गया था?
लोकमित्र
ईसाई धर्म के प्रचार-प्रसार हेतु 1863 ई. में आगरे से ‘लोकमित्र’ नामक पत्र निकला था। हैं।
ज्ञानदायिनी
वृत्तांत विलास
प्रजामित्र
118. “लल्लू लाल की भाषा कृष्णोपासक व्यासों की सो ब्रजरंजित खड़ी बोली है।” – यह प्रसिद्ध कथन किस आलोचक का है?
डॉ. रामविलास शर्मा
डॉ. हजारीप्रसाद द्विवेदी
आचार्य रामचंद्र शुक्ल
आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने लल्लूलाल की भाषिक शैली की समीक्षा करते हुए इसे ‘कृष्णोपासक व्यासों की सो ब्रजरंजित खड़ी बोली’ कहा है। हैं।
डॉ. श्यामानंद
119. सदल मिश्र ने अपनी प्रसिद्ध कृति ‘नासिकेतोपाख्यान’ (चंद्रावती) की रचना किस धार्मिक/दार्शनिक ग्रंथ के आधार पर की?
कठोपनिषद में वर्णित नचिकेता की कथा (यजुर्वेद)
सदल मिश्र ने यजुर्वेद के अंतर्गत आने वाले कठोपनिषद की नचिकेता कथा को आधार बनाकर ‘नासिकेतोपाख्यान’ (1803 ई.) लिखा। हैं।
श्रीमद्भागवत पुराण
वाल्मीकि रामायण
वायु पुराण
120. सदल मिश्र कृत ‘रामचरित्र’ (1806 ई.) किस ग्रंथ का खड़ी बोली गद्यानुवाद है?
रामचरितमानस
आनंद रामायण
वाशिष्ठ रामायण
अध्यात्म रामायण
सदल मिश्र ने संस्कृत के ‘अध्यात्म रामायण’ को आधार बनाकर खड़ी बोली में ‘रामचरित्र’ की रचना की। हैं।
121. हिंदी गद्य के प्रारंभिक चार आचार्यों को महत्त्व/स्थान की दृष्टि से ‘डॉ. श्यामसुंदर दास’ ने किस क्रम में रखा है?
सदासुखलाल, इंशाअल्ला खाँ, लल्लूलाल, सदल मिश्र
इंशाअल्ला खाँ, सदल मिश्र, लल्लूलाल, सदासुखलाल
डॉ. श्यामसुंदर दास ने पहला स्थान इंशाअल्ला खाँ को, दूसरा सदल मिश्र को, तीसरा लल्लूलाल को और चौथा सदासुखलाल को दिया है। हैं।
सदासुखलाल, सदल मिश्र, ईशाअल्ला खाँ, लल्लूलाल
लल्लूलाल, सदल मिश्र, सदासुखलाल, इंशाअल्ला खाँ
122. हिंदी गद्य के प्रारंभिक चार आचार्यों को महत्त्व की दृष्टि से ‘डॉ. बच्चन सिंह’ ने किस क्रम में व्यवस्थित किया है?
सदासुखलाल, सदल मिश्र, ईशाअल्ला खाँ, लल्लूलाल
डॉ. बच्चन सिंह का क्रम: (1) सदासुखलाल, (2) सदल मिश्र, (3) ईशाअल्ला खाँ, (4) लल्लूलाल। हैं।
लल्लूलाल, सदासुखलाल, सदल मिश्र, ईशाअल्ला खाँ
ईशाअल्ला खाँ, लल्लूलाल, सदासुखलाल, सदल मिश्र
सदल मिश्र, ईशाअल्ला खाँ, सदासुखलाल, लल्लूलाल
123. जॉन गिलक्राइस्ट ने अपनी पुस्तक ‘ए ग्रामर ऑफ दी हिन्दुस्तानी लैङ्ग्वेज’ में किन चार शब्दों को परस्पर समानार्थी माना है?
अवधी, ब्रज, मैथिली और राजस्थानी
पाली, प्राकृत, अपभ्रंश और अवहट्ठ
हिंदी, उर्दू, रेख़्ता और हिंदुस्तानी
गिलक्राइस्ट ने अपने व्याकरण ग्रंथ में हिंदी, उर्दू, रेख़्ता और हिंदुस्तानी को एक-दूसरे का समानार्थी स्वीकार किया था। हैं।
हिंदवी, दक्खिनी, गुजरी और भाखा
124. विलियम केरे ने सन् 1809 ई. में बाइबिल का हिंदी अनुवाद किस शीर्षक से प्रकाशित करवाया था?
ईश्वरोक्तशास्त्र धारा
नये धर्म नियम
विलियम केरे ने 1809 ई. में बाइबिल के न्यू टेस्टामेंट का हिंदी अनुवाद ‘नये धर्म नियम’ शीर्षक से कराया था। हैं।
सत्य मार्ग प्रकाश
धर्म पुस्तक
125. 1836 ई. में ‘दाऊद के गीत’ नामक ईसाई धर्म संबंधी पुस्तक का अनुवाद किसने किया था?
जे.टी. थॉम्पसन (आमसन)
जे.टी. थॉम्पसन (आमसन) ने 1836 ई. में ‘दाऊद के गीत’ शीर्षक से पुस्तक का अनुवाद प्रकाशित किया। हैं।
जॉन म्योर
जे.ए. शरमन
हेनरी मार्टिन
126. ‘ईश्वरोक्तशास्त्र धारा’ (1846 ई.) और ‘संतमत निरूपण’ (1848 ई.) नामक रचनाओं के लेखक कौन हैं?
जॉन म्योर
ईसाई मत प्रचारक जॉन म्योर ने ‘ईश्वरोक्तशास्त्र धारा’ और ‘संतमत निरूपण’ नामक गद्य ग्रंथ लिखे थे। हैं।
जे.ए. शरमन
फ्रेडरिक पिन्काट
विलियम प्राइस
127. ‘ए डिक्शनरी ऑव इंग्लिश ऐंड हिंदुस्तानी’ तथा ‘ए ग्रामर ऑव दि हिंदुस्तानी लैंग्वेज’ किसकी कृतियाँ हैं?
फ्रेडरिक पिन्काट
जॉर्ज ग्रियर्सन
गार्सा द तासी
जॉन गिलक्राइस्ट
पहली कृति शब्दकोश और दूसरी व्याकरण है, इनके लेखक जॉन गिलक्राइस्ट थे। हैं।
128. प्रतिवर्ष 30 मई को ‘राष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता दिवस’ किस ऐतिहासिक घटना के उपलक्ष्य में मनाया जाता है?
‘बनारस अखबार’ का प्रकाशन
‘समाचार सुधावर्षण’ का दैनिक प्रकाशन
‘उदंत मार्तंड’ का प्रथम प्रकाशन
हिंदी के प्रथम साप्ताहिक पत्र ‘उदंत मार्तंड’ के 30 मई 1826 को कलकत्ता से प्रकाशन की स्मृति में 30 मई को हिंदी पत्रकारिता दिवस मनाया जाता है। हैं।
‘हरिश्चंद्र मैगजीन’ का आरंभ
129. मुंशी सदासुखलाल द्वारा आगरा से प्रकाशित ‘बुद्धिप्रकाश’ (1852 ई.) पत्र किस फारसी पत्र का हिंदी रूपांतरण था?
आबेहयात
नूरुल अबसार
मुंशी सदासुखलाल का ‘बुद्धिप्रकाश’ पत्र मूलतः आगरा के ‘नूरुल अबसार’ फारसी पत्र का हिंदी रूपांतरण था। हैं।
मिरातुल अखबार
जामे जहाँनुमा
130. 1839 ई. में ‘तत्वबोधिनी सभा’ की स्थापना किसने की थी?
देवेंद्रनाथ ठाकुर
‘तत्वबोधिनी सभा’ की स्थापना 1839 ई. में देवेंद्रनाथ ठाकुर द्वारा की गई थी। हैं।
केशवचंद्र सेन
राजा राममोहन राय
ज्योतिबा फुले
131. सूची-I की संस्थाओं को सूची-II के संस्थापकों से सुमेलित कीजिए—
सूची-I (संस्था) — सूची-II (संस्थापक)
(a) सत्यशोधक समाज — (i) स्वामी विवेकानन्द
(b) आर्य समाज — (ii) मैडम ब्लावात्स्की एवं कर्नल ऑल्कॉट
(c) थियोसफिकल सोसाइटी — (iii) ज्योतिराव (ज्योतिबा) फुले
(d) रामकृष्ण मिशन — (iv) स्वामी दयानन्द सरस्वती
सही विकल्प चुनिए—
विकल्प (a), (b), (c), (d)
(iv), (iii), (ii), (i)
(iii), (iv), (i), (ii)
(ii), (i), (iii), (iv)
(iii), (iv), (ii), (i)
सत्यशोधक समाज की स्थापना 1873 ई. में ज्योतिराव (ज्योतिबा) फुले ने पुणे में की थी। आर्य समाज की स्थापना 1875 ई. में स्वामी दयानन्द सरस्वती ने बंबई में की थी। थियोसफिकल सोसाइटी की स्थापना 1875 ई. में न्यूयॉर्क में हुई थी; मैडम ब्लावात्स्की और कर्नल ऑल्कॉट इसके प्रमुख संस्थापक थे। 1882 ई. में इसका अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय अड्यार, मद्रास में स्थापित हुआ था। रामकृष्ण मिशन की स्थापना 1897 ई. में स्वामी विवेकानन्द ने की थी। हैं।
132. 1897 ई. में ‘रामकृष्ण मिशन’ की स्थापना किसने की?
स्वामी दयानंद सरस्वती
रामकृष्ण परमहंस
केशवचंद्र सेन
स्वामी विवेकानंद
स्वामी विवेकानंद ने अपने गुरु की स्मृति में 1897 ई. में ‘रामकृष्ण मिशन’ की स्थापना की। हैं।
133. पंजाब में स्त्री-शिक्षा के प्रचार और हिंदी गद्य के उत्थान हेतु ‘अंजुमन लाहौर’ सभा की स्थापना किसने की?
नवीनचंद्र राय
नवीनचंद्र राय ने पंजाब में हिंदी प्रचार व स्त्री शिक्षा हेतु लाहौर में ‘अंजुमन लाहौर’ सभा स्थापित की थी। हैं।
पं. श्रद्धाराम फिल्लौरी
अयोध्याप्रसाद खत्री
बालमुकुंद गुप्त
134. प्रसिद्ध सनातन आरती ‘ओम जय जगदीश हरे’ के रचयिता कौन हैं?
राजा शिवप्रसाद सितारेहिंद
पं. श्रद्धाराम फिल्लौरी
लोकप्रिय आरती ‘ओम जय जगदीश हरे’ की रचना पं. श्रद्धाराम फिल्लौरी ने की थी। हैं।
भारतेन्दु हरिश्चंद्र
अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’
135. राजा शिवप्रसाद सिंह ‘सितारे हिन्द’ के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—
(a) राजा शिवप्रसाद ‘सितारे हिन्द’ (1823–1895 ई.) भारतेन्दु के गुरु थे।
(b) वे सन् 1866 ई. में शिक्षा विभाग के इन्स्पेक्टर नियुक्त हुए।
(c) उनकी कृति ‘गुटका’ स्कूली विद्यार्थियों के लिए लिखी गई एक संग्रह-पुस्तिका है।
उपर्युक्त में कौन-से कथन सही हैं?
केवल (a) और (b)
केवल (b) और (c)
केवल (a) और (c)
राजा शिवप्रसाद सिंह ‘सितारे हिन्द’ (1823–1895 ई.) भारतेन्दु के गुरु थे। वे 1856 ई. में उत्तर-पश्चिम प्रांत के शिक्षा विभाग में संयुक्त इंस्पेक्टर नियुक्त हुए थे। हैं।
(a), (b) और (c)
136. खड़ी बोली गद्य की परंपरा किस लेखक की किस रचना से आरंभ मानी जाती है?
लल्लूलाल की ‘प्रेमसागर’
रामप्रसाद निरंजनी की ‘भाषा योगवाशिष्ठ’
खड़ी बोली गद्य की परम्परा रामप्रसाद निरंजनी की ‘भाषा योगवाशिष्ठ’ (1741 ई.) से मानी जाती है। हैं।
सदल मिश्र की ‘नासिकेतोपाख्यान’
वजही की ‘सबरस’
137. “प्रारंभ काल से ही वे ऐसी हिंदी के पक्षपाती थे जिसमें सर्वसाधारण के बीच प्रचलित अरबी-फारसी शब्दों का स्वच्छंद प्रयोग हो।” -रामचंद्र शुक्ल का यह कथन किसके संदर्भ में है?
राजा शिवप्रसाद सिंह
आचार्य शुक्ल ने राजा शिवप्रसाद की आमफहम, अरबी-फारसी मिश्रित भाषा नीति पर यह टिप्पणी की है। हैं।
राजा लक्ष्मण सिंह
लल्लूलाल
सदल मिश्र
138. राजा लक्ष्मण सिंह ने कालिदास कृत ‘ऋतुसंहार’ का हिंदी अनुवाद किस वर्ष प्रकाशित किया था?
1862 ई.
1878 ई.
राजा लक्ष्मण सिंह ने शकुंतला (1862), ऋतुसंहार (1878) और मेघदूत (1882) का अनुवाद किया। हैं।
1882 ई.
1890 ई.
139. “हमारे मत में हिंदी और उर्दू दो बोली न्यारी-न्यारी हैं…” -राजा लक्ष्मण सिंह ने यह प्रसिद्ध मत अपनी किस अनूदित पुस्तक के प्राक्कथन में लिखा था?
शकुंतला
मेघदूत
रघुवंश
राजा लक्ष्मण सिंह ने ‘रघुवंश’ के हिंदी गद्यानुवाद के प्राक्कथन (1878 ई.) में हिंदी और उर्दू के पृथक अस्तित्व पर यह ऐतिहासिक वक्तव्य लिखा था। हैं।
प्रजा हितैषी
140. भारतेन्दु हरिश्चंद्र ने धर्म और ईश्वर संबंधी विचारों के प्रचार हेतु 1873 ई. में किस संस्था की स्थापना की थी?
पेनी रीडिंग क्लब
कविता संवर्धिनी सभा
नागरी प्रचारिणी सभा
तदीय समाज
भारतेन्दु ने 1873 ई. में वैष्णव भक्ति और धार्मिक विचारों के प्रचारार्थ ‘तदीय समाज’ की स्थापना की थी। हैं।
141. भारतेन्दु हरिश्चंद्र ने वैज्ञानिक शब्दावली के निर्माण का कार्य आरंभ किया था, जिसमें उनके मुख्य सहयोगी कौन थे?
महावीर प्रसाद द्विवेदी
बिहारी चौबे
भारतेंदु हरिश्चंद्र ने पारिभाषिक व वैज्ञानिक शब्दावली निर्माण में पं. बिहारी चौबे का सहयोग लिया था। हैं।
प्रतापनारायण मिश्र
राधाचरण गोस्वामी
142. 1865 ई. में बरेली से किस सामाजिक/धार्मिक संस्था की प्रेरणा से ‘तत्वबोधिनी पत्रिका’ का प्रकाशन हुआ?
ब्रह्म समाज / तत्वबोधिनी सभा
तत्वबोधिनी सभा की शाखा के रूप में 1865 ई. में बरेली से ‘तत्वबोधिनी पत्रिका’ का संपादन-प्रकाशन हुआ था। हैं।
आर्य समाज
प्रार्थना समाज
थियोसॉफिकल सोसाइटी
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