हिंदी क्विज प्रश्न श्रृंखला TGT, PGT, Assistant Professor एवं UGC NET हिंदी
‘हिंदी गद्य का विकास – भाग 2’ में हिंदी गद्य के विकास से संबंधित 50 बहुविकल्पीय प्रश्न दिए गए हैं। ये प्रश्न विशेष रूप से UGC NET हिंदी, UPESSC सहायक प्रोफेसर, TGT, PGT तथा अन्य हिंदी साहित्य की प्रतियोगी परीक्षाओं को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं।
इस क्विज के माध्यम से विद्यार्थी हिंदी गद्य के विकास से जुड़े प्रमुख लेखकों, रचनाओं, संस्थाओं, पत्र-पत्रिकाओं, कालक्रम तथा महत्त्वपूर्ण साहित्यिक तथ्यों का अभ्यास कर सकते हैं। प्रत्येक प्रश्न के बाद सही उत्तर और आवश्यकतानुसार संक्षिप्त व्याख्या भी दी गई है, जिससे केवल उत्तर याद करने के बजाय विषय की समझ विकसित हो सके।
यह प्रश्नावली ‘हिंदी गद्य का विकास’ क्विज श्रृंखला का दूसरा भाग है। पहले भाग की तरह इसमें भी 50 प्रश्न रखे गए हैं। आगे इस विषय से संबंधित अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नों को नए भागों में जोड़ा जाएगा।
51. आधुनिक खड़ी बोली के प्रारंभिक काल में किन दो व्यक्तियों ने पंजाब में हिंदी का खूब प्रचार किया?
लल्लूलाल और सदल मिश्र
बालकृष्ण भट्ट और प्रतापनारायण मिश्र
नवीनचंद्र राय और पं. श्रद्धाराम फिल्लौरी
आधुनिक खड़ी बोली के प्रारंभिक काल में नवीनचंद्र राय और पं. श्रद्धाराम फिल्लौरी ने पंजाब में हिंदी का खूब प्रचार किया। नवीनचंद्र राय ने 1867 ई. में ‘ज्ञानदायिनी पत्रिका’ निकाली जो एक मासिक पत्र था।
राजा शिवप्रसाद और राजा लक्ष्मण सिंह
52. ‘हिंदी नए चाल में ढली’ -भारतेंदु हरिश्चंद्र का यह कथन 1873 ई. में किस पत्रिका में प्रकाशित हुआ था?
कविवचनसुधा
हरिश्चंद्र मैगजीन
भारतेंदु जी ने अपनी ‘हरिश्चंद्र मैगजीन’ (1873 ई.) में लिखा कि ‘हिंदी नए चाल में ढली’ (1873 ई.)।
बालाबोधिनी
हिंदी प्रदीप
53. 1882 ई. में मद्रास (अडयार) में ‘थियोसॉफिकल सोसाइटी’ का मुख्यालय स्थापित करने वाले प्रमुख व्यक्ति कौन थे?
मैडम ब्लावत्स्की और कर्नल ऑलकॉट
1875 में न्यूयार्क में गठित थियोसॉफिकल सोसाइटी का भारत में अंतरराष्ट्रीय कार्यालय 1882 ई. में अडयार (मद्रास) में स्थापित हुआ।
एनी बेसेंट और तिलक
राजा राममोहन राय
स्वामी विवेकानंद
54. काशी में 1893 ई. में ‘नागरी प्रचारिणी सभा’ की स्थापना में किन तीन विद्वानों की मुख्य भूमिका रही?
भारतेंदु, प्रतापनारायण मिश्र, बालकृष्ण भट्ट
श्यामसुंदर दास, रामनारायण मिश्र, शिवकुमार सिंह
1893 ई. में काशी में नागरी प्रचारिणी सभा की स्थापना श्यामसुंदर दास, रामनारायण मिश्र और शिवकुमार सिंह ने की थी।
रामचंद्र शुक्ल, महावीर प्रसाद द्विवेदी, हजारीप्रसाद द्विवेदी
प्रेमचंद, प्रसाद, निराला
55. खड़ी बोली गद्य के आरंभिक लेखकों और उनके निवास स्थानों का कौन-सा युग्म सुमेलित नहीं है?
मुंशी सदासुखलाल ‘नियाज’ — दिल्ली
इंशाअल्ला खाँ — पहले दिल्ली, बाद में लखनऊ
लल्लूलाल — आगरा
सदल मिश्र — बंगाल
मुंशी सदासुखलाल दिल्ली के निवासी थे। बाद में वे इलाहाबाद में सरकारी नौकरी में रहे। इंशाअल्ला खाँ का निवास-स्थान पहले दिल्ली, बाद में लखनऊ था। लल्लूलाल आगरा के रहने वाले गुजराती ब्राह्मण थे। वहीं सदल मिश्र का निवास स्थान आरा, बिहार था।
56. आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने पंजाब के किस लेखक को ‘अपने समय का सच्चा हिंदी हितैषी और सिद्धहस्त लेखक’ माना है?
नवीनचंद्र राय
अयोध्याप्रसाद खत्री
पं. श्रद्धाराम फिल्लौरी
शुक्ल जी ने पंजाब में हिंदी प्रचार व साहित्य सेवा के लिए श्रद्धाराम फिल्लौरी को सच्चा हिंदी हितैषी व सिद्धहस्त लेखक कहा।
लाला बाबू
57. दिए गए तथ्यों के आधार पर हिंदी पत्रकारिता संबंधी निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—
(a) ‘बंगदूत’ का प्रकाशन हिंदी के अतिरिक्त अंग्रेजी, फारसी तथा बंगला में होता था।
(b) मुंशी सदासुख लाल की पत्रिका ‘बुद्धि प्रकाश’, ‘नरुल बाजार’ का हिंदी रूपांतरण थी।
(c) पं. बंशीधर के आगरा से प्रकाशित हिंदी-उर्दू पत्र के हिंदी कॉलम का नाम ‘आबेहेयात’ तथा उर्दू कॉलम का नाम ‘भारत खण्डामृत’ था।
उपर्युक्त में कौन-से कथन सही हैं?
केवल (a) और (b)
पं. बंशीधर के आगरा से प्रकाशित हिंदी-उर्दू पत्र के हिंदी कॉलम का नाम ‘भारत खण्डामृत’ तथा उर्दू कॉलम का नाम ‘आबेहेयात’ था।
केवल (a), (b) और (c)
केवल (a), (b) और (c)
केवल (b) और (c)
58. ‘आगरा स्कूल बुक सोसाइटी’ द्वारा मार्शमैन के ‘प्राचीन इतिहास का अनुवाद’ किस नाम से प्रकाशित हुआ और इसके संपादक तथा अनुवादक कौन थे?
इतिहास तिमिरनाशक – संपादक जे.जे. मूर, अनुवादक लल्लूलाल
भूगोल हस्तामलक – संपादक विलियम प्राइस, अनुवादक पं. वंशीधर
कथासार – संपादक जे. जे. मूर, अनुवादक पं. रतनलाल
‘आगरा स्कूल बुक सोसाइटी’ द्वारा संवत 1896 (1839 ई.) में मार्शमैन के ‘प्राचीन इतिहास’ का अनुवाद ‘कथासार’ नाम से प्रकाशित हुआ और इसके संपादक जे.जे. मूर तथा अनुवादक पं. रतनलाल थे।
कथासार – संपादक गिलक्राइस्ट, अनुवादक सदल मिश्र
59. संयुक्त प्रांत के सभी सरकारी दफ्तरों व अदालतों की भाषा उर्दू कब की गई थी?
1800 ई.
1854 ई.
1900 ई.
1837 ई.
संयुक्त प्रांत (उत्तर प्रदेश) में ब्रिटिश सरकार ने सरकारी दफ्तरों से फारसी हटाकर उर्दू को एकमात्र आधिकारिक भाषा 1837 ई. में अनिवार्य किया, जिससे नागरी आंदोलन शुरू हुआ।
60. आगरा से हिंदी उर्दू का एक पत्र निकला था जिसके हिंदी कालम का नाम ‘भारत खंडामृत’ और उर्दू कालम का नाम ‘आबेहयात’ था। -इसके संपादक थे?
पं. वंशीधर
पं. वंशीधर द्वारा संपादित इस द्विभाषी पत्र का हिंदी भाग ‘भारत खंडामृत’ और उर्दू कालम भाग ‘आबेहयात’ कहलाता था।
श्यामसुंदर सेन
नवीनचंद्र राय
पं. जुगुलकिशोर
61. बाबू अयोध्या प्रसाद खत्री के ‘खड़ी बोली का पद्य’ की भूमिका किसने लिखी?
जॉर्ज ग्रियर्सन
फ्रेडरिक पिन्काट
इंग्लैंड निवासी प्रसिद्ध हिंदी सेवी फ्रेडरिक पिन्काट ने अयोध्याप्रसाद खत्री के ग्रंथ की भूमिका लिखी थी।
गार्सा द तासी
जॉन गिलक्राइस्ट
62. सदल मिश्र की प्रमुख रचनाएँ कौन-सी हैं?
प्रेमसागर, सभाविलास और लालचंद्रिका
सुखसागर, सुरासुर निर्णय और आत्मचिकित्सा
भाग्यवती, धर्मरक्षा और शतोपदेश
चंद्रावती या नासिकेतोपाख्यान, रामचरित्र और हिंदी-पर्शियन वोकेबुलरी
चंद्रावती/नासिकेतोपाख्यान (1803), रामचरित्र (1806) और हिंदी-पर्शियन वोकेबुलरी (1809) सदल मिश्र (1768–1848 ई.) की कृतियाँ हैं।
63. पं. श्रद्धाराम फिल्लौरी द्वारा रचित प्रसिद्ध उपदेशात्मक सिद्धांत ग्रंथ कौन-सा है?
नवीनचंद्र राय
राजा लक्ष्मण सिंह
पं. श्रद्धाराम फुल्लौरी
‘सत्यामृत प्रवाह’ नामक सिद्धांत ग्रंथ के रचयिता श्रद्धाराम फुल्लौरी हैं।
स्वामी दयानंद सरस्वती
64. “भारत में भाषा के लेखक दो हैं- एक काशी में, दूसरा पंजाब में। परंतु आज एक ही रह जायगा।” -यह प्रसिद्ध कथन किसका है?
भारतेंदु हरिश्चंद्र
नवीनचंद्र राय
राजा लक्ष्मण सिंह
पं. श्रद्धाराम फिल्लौरी
यह कथन स्वाभिमानी गद्यकार पं. श्रद्धाराम फिल्लौरी का है।
65. 1867 ई. में बॉम्बे में ‘प्रार्थना समाज’ की स्थापना में किन विद्वानों का मुख्य योगदान रहा?
स्वामी दयानंद व विवेकानंद
आत्माराम पांडुरंग, एम.जी. रानाडे व केशवचंद्र सेन
1867 ई. में आत्माराम पांडुरंग की अध्यक्षता में प्रार्थना समाज की स्थापना हुई जिसमें रानाडे का मुख्य योगदान था।
राजा राममोहन राय व देवेंद्रनाथ
ज्योतिबा फुले व सावित्रीबाई
66. 1875 ई. में न्यूयार्क में ‘थियोसॉफिकल सोसाइटी’ की स्थापना किसने की थी?
मैडम ब्लावत्स्की और कर्नल ऑलकॉट
1875 ई. में न्यूयार्क में मैडम ब्लावत्स्की और कर्नल ऑलकॉट ने थियोसॉफिकल सोसाइटी बनाई।
एनी बेसेंट और वाडिया
राजा राममोहन राय
स्वामी विवेकानंद
67. 13वीं-14वीं सदी के ‘अमीर खुसरो’ की कौन-सी रचना भाषा एवं गद्य के दृष्टिकोण से महत्त्वपूर्ण मानी जाती है?
सबरस
मेराजुल आशकीन
नूह-ए-सिपिहर
‘नूह-ए-सिपिहर’ अमीर खुसरो का ग्रंथ है जिसमें भारत और उसकी भाषाओं की प्रशंसा की गई है।
चारदरवेश
68. गिलक्राइस्ट के बाद फोर्ट विलियम कॉलेज के हिंदुस्तानी भाषा विभाग के अध्यक्ष कौन बने?
फ्रेडरिक पिन्काट
हेनरी मार्टिन
विलियम केरे
कैप्टन विलियम प्राइस
गिलक्राइस्ट के त्यागपत्र के बाद 1824 ई. में कैप्टन विलियम प्राइस हिंदुस्तानी विभाग के अध्यक्ष बने।
69. ‘सुरासुर निर्णय’ किसका लेख है?
लल्लूलाल
मुंशी सदासुखलाल
‘सुरासुर निर्णय’ मुंशी सदासुखलाल ‘नियाज’ का एक अप्रकाशित धार्मिक-वैचारिक लेख है।
इंशाअल्ला खाँ
सदल मिश्र
70. दिए गए तथ्यों के आधार पर गार्सा द तासी के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—
(a) वे एक अंग्रेज विद्वान थे और इंग्लैंड में हिन्दुस्तानी या उर्दू के अध्यापक थे।
(b) उन्होंने सन् 1836 में ‘हिन्दुस्तानी साहित्य का इतिहास’ पुस्तक की रचना की।
(c) वे उर्दू के पक्षधर थे और हिंदी को ‘भद्दी बोली’ कहते थे।
उपर्युक्त में कौन-से कथन सही हैं?
केवल (a) और (b)
केवल (b) और (c)
गार्सा द तासी फ्रेंच विद्वान थे और पेरिस में हिन्दुस्तानी या उर्दू के अध्यापक थे।
केवल (a) और (c)
(a), (b) और (c)
71. गिलक्राइस्ट ने खड़ी बोली की कितनी शैलियाँ मानी हैं?
4
3
गिलक्राइस्ट ने खड़ी बोली की तीन शैलियाँ मानी हैं- दरबारी अथवा फारसी शैली, हिंदुस्तानी शैली और हिंदवी शैली।
5
2
72. ‘विचार के क्षणों में मुझे गद्य लिखना ही अच्छा लगता रहा है, क्योंकि उसमें अपनी अनुभूति ही नहीं बाह्य परिस्थितियों के विश्लेषण के लिए भी पर्याप्त अवकाश रहता है।’
-उपर्युक्त कथन किसका है?
सुभद्राकुमारी चौहान
महादेवी वर्मा
उपर्युक्त कथन महादेवी वर्मा का है।
कृष्णा सोबती
मन्नू भंडारी
73. आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी से ‘अनस्थिरता’ शब्द को लेकर विवाद किससे हुआ था?
प्रतापनारायण मिश्र
बद्रीनारायण चौधरी ‘प्रेमघन’
बालमुकुंद गुप्त
‘अनस्थिरता’ शब्द पर ‘आत्माराम’ छद्मनाम से बालमुकुंद गुप्त और द्विवेदी जी के बीच तीखा विवाद हुआ था।
बालकृष्ण भट्ट
74. “व्याकरण की शुद्धता और भाषा की सफाई के प्रवर्तक द्विवेदी जी ही थे…” – यह कथन आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के संबंध में किसका है?
डॉ. रामविलास शर्मा
आचार्य रामचंद्र शुक्ल
शुक्ल जी ने महावीर प्रसाद द्विवेदी के भाषा-परिमार्जन के कार्य की सराहना करते हुए यह लिखा है।
डॉ. नगेन्द्र
डॉ. नामवर सिंह
75. ‘भारतेंदु युग के अन्य किसी लेखक ने अपनी लेखनी को जीभ की तरह इतना नहीं चलाया, अन्य किसी लेखक ने पाठक से इतनी आत्मीयता से और इतनी ज्यादा बातचीत नहीं की। और कोई भी लेखक अपनी भाषा को इतनी सरपट नहीं दौड़ा सका जितना प्रतापनारायण मिश्र।’ – यह कथन किसका है?
रामविलास शर्मा
उपर्युक्त कथन रामविलास शर्मा का है।
हजारीप्रसाद द्विवेदी
श्यामसुंदर दास
रामचंद्र शुक्ल
76. ‘निज भाषा उन्नति अहै सब उन्नति को मूल’ कथन किसका है?
प्रतापनारायण मिश्र
बालकृष्ण भट्ट
भारतेंदु हरिश्चंद्र
भारतेंदु जी ने अपनी कविता व गद्य में स्वभाषा की उन्नति को ही राष्ट्रीय प्रगति का मूल माना।
मैथिलीशरण गुप्त
77. जॉन गिलक्राइस्ट किस लिपि के पक्षपाती थे?
देवनागरी लिपि
कैथी लिपि
गुरुमुखी लिपि
रोमन लिपि
जॉन गिलक्राइस्ट को रोमन लिपि का पक्षपाती थे।
78. धर्म और ईश्वर संबंधी विचारों के प्रचार हेतु भारतेंदु ने 1873 ई. में किस समाज की स्थापना की?
आर्य समाज
तदीय समाज
भारतेंदु जी ने अपनी वैष्णव भक्ति व धार्मिक चेतना के प्रचारार्थ ‘तदीय समाज’ (1873 ई.) की स्थापना की थी।
प्रार्थना समाज
ब्रह्म समाज
79. भारतेंदु ने वैज्ञानिक शब्दावली के निर्माण का कार्य शुरू किया था, इस कार्य में उनके सहयोगी थे?
पं. बिहारी चौबे
भारतेंदु जी ने पारिभाषिक शब्दावली निर्माण हेतु पं. बिहारी चौबे के साथ मिलकर कार्य किया था।
पं. प्रतापनारायण मिश्र
बालमुकुंद गुप्त
महावीर प्रसाद द्विवेदी
80. भारतेंदु की किस प्रसिद्ध पत्रिका के मुखपृष्ठ पर ‘नवीन प्राचीन संस्कृत भाषा और अंग्रेजी में गद्य पद्यमय काव्य…’ का विवरण रहता था?
कविवचनसुधा
हरिश्चंद्र चंद्रिका
‘हरिश्चंद्र चंद्रिका’ (पूर्व नाम हरिश्चंद्र मैगजीन) के मुखपृष्ठ पर यह विस्तृत विवरण अंकित रहता था।
बालाबोधिनी
हिंदी प्रदीप
81. ‘हिंदी हिंदुओं की जबान है, जो बुतपरस्त है और उर्दू मुसलमानों की जिनके साथ अंग्रेजों का मजहबी रिश्ता है- दोनों ‘सामी’ या पैगम्बरी मत के मानने वाले हैं।’ -यह मत किसका है?
विलियम प्राइस
फ्रेडरिक पिन्काट
जॉन गिलक्राइस्ट
गार्सा द तासी
यह मत गार्सा द तासी का है।
82. 1846 ई. में कलकत्ता से मोहम्मद नासिरुद्दीन के संपादकत्व में कौन-सा पत्र निकला था?
जगत दीप भास्कर
1846 ई. में कलकत्ता से मो. नासिरुद्दीन ने ‘जगत दीप भास्कर’ नामक पत्र निकाला। यह एक साप्ताहिक पत्र था।
सुधाकर
नूरुल अबसार
अवध अखबार
83. 1849 ई. में मालवा क्षेत्र से प्रेमनारायण के संपादकत्व में कौन-सा पत्र प्रकाशित हुआ?
सुधाकर
लोकमित्र
मालवा अखबार
1849 ई. में मालवा (इंदौर, मध्य प्रदेश) से प्रेमनारायण ने ‘मालवा अखबार’ निकाला। यह एक साप्ताहिक पत्र था।
सत्यामृत प्रवाह, आत्मचिकित्सा, तत्त्व दीपक, धर्मरक्षा, उपदेशसंग्रह, शतोपदेश (दोहे), भाग्यवती (उपन्यास) आदि कृतियाँ श्रद्धाराम फुल्लौरी की हैं।
85. 1865 ई. में बरेली से किस पत्रिका का संपादन-प्रकाशन आरंभ हुआ था?
तत्वबोधिनी पत्रिका
बरेली से 1865 ई. में ‘तत्वबोधिनी पत्रिका’ का प्रकाशन आरंभ हुआ था।
ज्ञानदायिनी पत्रिका
वृत्तांत विलास
प्रजा हितैषी
86. 1867 ई. में जम्मू से निकलने वाली मासिक पत्रिका का नाम क्या था?
ज्ञानदायिनी
मालवा अखबार
वृत्तांत विलास
1867 ई. में जम्मू से ‘वृत्तांत विलास’ नामक मासिक पत्रिका प्रकाशित होती थी।
सुधाकर
87. निम्नलिखित में किन विद्वानों ने आधुनिक साहित्यिक खड़ी बोली गद्य का विकास गिलक्राइस्ट की अध्यक्षता में लल्लूलाल और सदल मिश्र द्वारा माना है?
श्यामसुंदर दास, महावीर प्रसाद द्विवेदी और बालमुकुंद गुप्त
रामविलास शर्मा, नगेन्द्र और रामचंद्र शुक्ल
रामचंद्र शुक्ल, हजारीप्रसाद द्विवेदी और नामवर सिंह
जॉर्ज ग्रियर्सन, आर.डब्ल्यू. फ्रेजर और नलिनी मोहन सान्याल
जॉर्ज ग्रियर्सन, आर.डब्ल्यू. फ्रेजर और नलिनी मोहन सान्याल ने आधुनिक साहित्यिक खड़ी बोली गद्य का विकास गिलक्राइस्ट की अध्यक्षता में लल्लूलाल और सदल मिश्र द्वारा माना है।
88. प्रसिद्ध हिंदी सेवी फ्रेडरिक पिन्काट का जन्म तथा मृत्यु कब और कहाँ हुआ?
जन्म 1826 ई., पेरिस और मृत्यु 1886 ई., काशी
जन्म 1836 ई., इंग्लैंड; मृत्यु 1896 ई., लखनऊ
प्रसिद्ध हिंदी सेवी फ्रेडरिक पिन्काट का जन्म इंग्लैंड (1836 ई.) और मृत्यु लखनऊ (1896 ई.) में हुआ था।
जन्म 1846 ई., दिल्ली और मृत्यु 1906 ई., लंदन
जन्म 1836 ई., लखनऊ और मृत्यु 1896 ई., इंग्लैंड
89. लल्लूलाल की रचना ‘लतायफ़-ए-हिंदी’ में किस प्रकार की सामग्री संकलित है?
खड़ी बोली, ब्रज और हिंदुस्तानी की 100 लघुकथाएँ
‘लतायफ़-ए-हिंदी’ (1810 ई.) में लल्लूलाल ने सौ हास्य-विनोदपूर्ण लघुकथाएँ संकलित की थीं।
केवल संस्कृत के स्तोत्र
उर्दू गज़लों का संग्रह
राजस्थानी ख्यात कथाएँ
90. सदल मिश्र ने ‘नासिकेतोपाख्यान’ में मुख्य रूप से किस पौराणिक/वैदिक चरित्र की कथा कही है?
प्रह्लाद
ध्रुव
नचिकेता
सदल मिश्र ने यजुर्वेद व कठोपनिषद में वर्णित ‘नचिकेता’ की प्रसिद्ध कथा को आधार बनाया है।
हरिश्चंद्र
91. लल्लूलाल ने किस रचना को ‘नागरी दशम’ भी कहा है?
प्रेमसागर
‘प्रेमसागर’ भागवत पुराण के 10वें स्कंध पर आधारित होने के कारण ‘नागरी दशम’ भी कहलाता है।
राजनीति
माधव विलास
सिंहासन बत्तीसी
92. ‘बैताल पचीसी’ के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—
(a) सुरति मिश्र ने संवत् 1777 में ‘बैताल-पचीसी’ की रचना की।
(b) ‘बैताल पचीसी’ की रचना संस्कृत कवि शिवदास की रचना से कथा लेकर की गई है।
(c) लल्लूलाल ने मजहर अली के साथ मिलकर 1801 ई. में ‘बैताल पचीसी’ का अनुवाद ब्रजभाषा में किया।
उपर्युक्त में कौन-सा कथन सही है?
केवल (a)
केवल (b)
सूरति मिश्र ने ‘बैताल पचीसी’ की रचना संस्कृत कवि शिवदास की कथा को आधार बनाकर ब्रजभाषा गद्य में संवत् 1767 में की थी। वहीं लल्लूलाल ने मजहर अली के साथ मिलकर 1801 ई. में ‘बैताल पचीसी’ का अनुवाद ‘खड़ीबोली’ हिंदुस्तानी में किया था।
केवल (c)
तीनों कथन
93. ‘चार दरवेश’ का फारसी से दक्खिनी में अनुवाद किसने किया था?
मुल्ला वजही
सैयद हुसैन अली खाँ
‘सैयद हुसैन अली खाँ’ ने 1838 ई. में प्रसिद्ध फारसी कथा ‘चारदरवेश’ का अनुवाद दक्खिनी में किया था।
मुहम्मद कुली कुतुबशाह
गेसूदराज
94. गुरुमुखी लिपि और खड़ी बोली गद्य में रचित- ‘अवगत उल्लास’, ‘असटावक्र भाषा’, ‘गीता भाषा’ की रचना किसने की है?
सोढ़ी मिहरिवानु
दयालु अनेमी
गुरुमुखी लिपि और खड़ी बोली गद्य में रचित- ‘अवगत उल्लास’ (1675 ई.), ‘असटावक्र भाषा’ (1679 ई.), ‘गीता भाषा’ (1721 ई.) की रचना ‘दयालु अनेमी’ ने लिखी है।
हरिजी
पं. दौलतराम
95. सोढ़ी मिहरिवानु के पुत्र ‘हरजी’ द्वारा रचित गद्य कृतियों का सही समूह कौन-सा है?
अवगत उल्लास, असटावक्र भाषा, गीता भाषा
सचुंड पोथी, जपुजी सटीक, विचारमाला
सुषमनी सहसंरनाम, गोसट गुरुमिहरिवानु, पोथी हरजी
गुरुमुखी लिपि में और खड़ी बोली गद्य में रचित ‘सुषमा सहस्रनाम’ (परमारथ), ‘गोसट गुरुमिहरिवानु’ और ‘पोथी हरिजी’ की रचना हरिजी (सोढ़ी हरिजी) ने की थी।
प्रेमसागर, सुखसागर, नासिकेतोपाख्यान
96. मुंशी सदासुखलाल ‘नियाज’ की कौन-सी रचना इतिहास विषयक फारसी/हिंदी ग्रंथ मानी जाती है?
सुखसागर
सुरासुर निर्णय
मुंताखबुतवारीख
‘मुंताखबुतवारीख’ मुंशी सदासुखलाल की एक इतिहास विषयक कृति है।
इतिहास तिमिरनाशक
97. राजा शिवप्रसाद किस भाषा के समर्थक थे?
अवधी
संस्कृतनिष्ठ हिंदी
दक्खिनी
उर्दू
राजा शिवप्रसाद की मिश्रित भाषा-नीति नीति थी, वे हिंदुस्तानी के समर्थक थे, जिसे मुख्यधारा के साहित्यकारों और आलोचकों ने उर्दू का पक्षकार मान लिया है।
98. राजा लक्ष्मण सिंह किस भाषा के समर्थक थे?
दक्खिनी
फारसीनिष्ठ हिंदुस्तानी
उर्दू
संस्कृतनिष्ठ हिंदी
राजा लक्ष्मण सिंह (1826–1896 ई.) संस्कृतनिष्ठ हिंदी के समर्थक थे।
99. हिंदी भाषा में प्रथम साहित्यिक/सांस्कृतिक आंदोलन खड़ा करने वाली पत्रिका ‘कविवचनसुधा’ का आरंभ भारतेंदु ने किस वर्ष किया?
1868 ई.
भारतेंदु जी ने 1868 ई. में काशी से ‘कविवचनसुधा’ पत्रिका निकाली जिसने हिंदी में नए युग की नींव रखी।
1873 ई.
1880 ई.
1893 ई.
100. 1874 ई. में भारतेंदु हरिश्चंद्र ने विशेष रूप से स्त्री-शिक्षा एवं नारियों के उत्थान हेतु किस पत्रिका का संपादन शुरू किया?
बालाबोधिनी
भारतेंदु जी ने 1874 ई. में महिलाओं के सर्वांगीण विकास एवं शिक्षा हेतु ‘बालाबोधिनी’ नामक मासिक पत्रिका निकाली।