UPHESC Hindi Quiz: सुधियाँ उस चंदन के वन की पर महत्वपूर्ण MCQs

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UPHESC हिंदी प्रश्नोत्तरी

यदि आप UPHESC Assistant Professor Hindi परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो सिलेबस में शामिल महत्वपूर्ण संस्मरणों का अध्ययन बेहद आवश्यक है। ‘सुधियाँ उस चंदन के वन की’ के लेखक विष्णुकांत शास्त्री हिंदी साहित्य के प्रमुख रचनाकारों में गिने जाते हैं। इसी कृति पर आधारित यह 77 MCQs का quiz आपकी परीक्षा तैयारी को मजबूत बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें शामिल प्रश्न न केवल पाठ की समझ को परखते हैं, बल्कि परीक्षा में पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण topics को भी कवर करते हैं। यह quiz uphesc Hindi के अभ्यर्थियों के लिए एक प्रभावी अभ्यास सामग्री है, जो उन्हें अपने ज्ञान का मूल्यांकन करने और revision करने में मदद करेगा।

1. ‘सुधियाँ उस चन्दन के वन की’ किस विधा की रचना है?
उपन्यास
कहानी
यात्रा-वृत्तांत
संस्मरण
यह ग्रंथ संस्मरण विधा की रचना है, जिसमें लेखक विष्णुकांत शास्त्री ने अपने जीवन में आए विशिष्ट व्यक्तियों की स्मृतियों को लिपिबद्ध किया है।
2. ‘नामवर जी के विषय-प्रवर्तन से वैचारिक रक्तपात होने की मुझे आशंका थी किन्तु संतोष की बात है ऐसा नहीं हुआ। नामवर जी की उपलब्धि से मुझे हार्दिक हर्ष हुआ।’ / उपरोक्त कथन किस विद्वान का है?
देवराज का
धर्मवीर भारती का
अज्ञेय का
डॉ. नगेन्द्र का
उपर्युक्त कथन डॉ. नगेन्द्र का है।
3. ‘सुधियाँ उस चन्दन के वन की’ के संदर्भ में कौन-सा विकल्प सुमेलित नहीं है:
खंड-खंड फिर भी अखंड – स्वामी अखंडानंद सरस्वती
भारतीय साहित्य के प्रज्ञा-पुरुष – उमाशंकर जोशी
रणनीति को वरीयता – नामवर सिंह
द्वीप बुझ गया, शिखा अमर है – विद्यानिवास मिश्र
‘द्वीप बुझ गया, शिखा अमर है’ महादेवी वर्मा से संबंधित संस्मरण है।
4. विष्णुकांत शास्त्री के अनुसार किस लेखक में ‘परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत सामंजस्य’ था।
अज्ञेय में
नामवर सिंह में
स्वामी अखंडानंद सरस्वती में
हजारी प्रसाद द्विवेदी में
द्विवेदी जी काल की कसौटी पर खरे उतरे पुरातन का वे बहुत मान रखते थे। पुराने को नया बना लेने की कला में वे माहिर थे।
5. ‘सुधियाँ उस चन्दन के वन की’ संस्मरण का शीर्षक किस कवि की पंक्ति से लिया गया है?
महादेवी वर्मा
सुमित्रानंदन पंत
निराला
गिरिजाकुमार माथुर
इस कृति का शीर्षक प्रसिद्ध कवि गिरिजाकुमार माथुर की एक पंक्ति ‘सुधियाँ उस चन्दन के वन की!’ से लिया गया है।
6. निम्नलिखित में कौन-सा कथन विष्णुकांत शास्त्री का नहीं है:
दिल्ली में व्यक्ति की नहीं, कुर्सी की इज्जत होती है और कुर्सियाँ नामवर के विरुद्ध थीं
विरोधियों के सामने झुक जाना या हार मान लेना उनकी ‘ठकुराई’ के प्रतिकूल था
विवाद में जयी होना प्रमुख हो जाता है, न्याय-औचित्य आदि मूल्य गौण हो जाते हैं
मुक्त की शराब आदमी को कहीं का रहने नहीं देती
यह कथन नामवर सिंह जी का है।
7. विष्णुकांत शास्त्री ने ‘सुधियाँ उस चन्दन के वन की’ संस्मरण को किनकी पावन स्मृति को समर्पित की है?
महादेवी वर्मा एवं निराला जी
स्वामी अखंडानन्द सरस्वती
अपने पिता पं. गांगेय नरोत्तम शास्त्री
हजारीप्रसाद द्विवेदी एवं अज्ञेय जी
लेखक ने यह पुस्तक आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी एवं अज्ञेय जी की पावन स्मृति को समर्पित की है, जिनसे उन्हें साहित्य को समझने और सृजने की प्रेरणा मिली।
8. “जब अपनी दृष्टि क्षीण हो तो चश्में की सहायता लेनी पड़ती है। उसी तरह जगत् के व्यापारों को समझने के लिए बड़े मनीषियों की कृतियों का अध्ययन गौरव का विषय है, लज्जा का नहीं।” – यह कथन किस लेखक का है?
नामवर सिंह
हजारी प्रसाद द्विवेदी
विष्णुकांत शास्त्री
अज्ञेय
उपरोक्त विचार ‘अज्ञेय’ के हैं।
9. ‘सुधियाँ उस चन्दन के वन की’ संस्मरण संग्रह का प्रथम प्रकाशन किस वर्ष हुआ था?
1990
1995
1988
1992
‘सुधियाँ उस चन्दन के वन की’ संस्मरण संग्रह का प्रथम प्रकाशन वर्ष 1992 में हुआ था।
10. ‘चढ़िए हाथी ज्ञान को सहज दुलीचा डारि’ – कबीर का यह कथन किसे न केवल प्रिय था, बल्कि उनके जीवन का अभिन्न अंग बन गया था:
विष्णुकांत शास्त्री
नामवर सिंह
स्वामी अखंडानंद सरस्वती
हजारी प्रसाद द्विवेदी
कबीर का उपर्युक्त कथन हजारी प्रसाद द्विवेदी को न केवल प्रिय था, बल्कि उनके जीवन का अभिन्न अंग बन गया था।
11. ‘श्रद्धा और विवेक के ज्योतिर्वाही’ शीर्षक संस्मरण किस व्यक्तित्व पर आधारित है?
अज्ञेय
उमाशंकर जोशी
देवेन्द्रनाथ शर्मा
स्वामी अखंडानन्द सरस्वती
‘श्रद्धा और विवेक के ज्योतिर्वाही’ शीर्षक संस्मरण स्वामी अखंडानन्द सरस्वती पर आधारित है।
12. “पुस्तकों के निर्जीव माध्यम से नहीं, गुरु के सजीव संपर्क से ही ज्ञान की ज्योति से हृदय का दीपक ज्योतित हो उठता है।” कथन है:
नामवर सिंह
स्वामी अखंडानंद सरस्वती
हजारी प्रसाद द्विवेदी
विष्णुकांत शास्त्री
उपरोक्त कथन शास्त्री जी का है।
13. स्वामी अखंडानन्द सरस्वती के अनुसार ‘तप’ का व्यावहारिक अर्थ क्या है?
कठिन शारीरिक साधना
मौन व्रत धारण करना
तीर्थ यात्रा करना
अपने ऊपर कम-से-कम खर्च करना
स्वामी जी के अनुसार, अपने ऊपर कम-से-कम खर्च करना ही वास्तविक ‘तप’ है।
14. विष्णुकांत शास्त्री ने स्वामी अखंडानन्द सरस्वती से दीक्षा कब ग्रहण की थी?
15 अगस्त, 1970
10 जनवरी, 1965
2 अक्टूबर, 1972
25 नवम्बर, 1974
लेखक ने ने स्वामी अखंडानन्द सरस्वती से दीक्षा 25 नवम्बर, 1974 को ग्रहण की थी।
15. राजेन्द्र यादव के शब्दों में कलकत्ते का ज्ञान-गली है:
रूपा एंड कंपनी के किताबों के दुकाने
ग्रैंड होटल के नीचे की किताबों की दुकाने
पार्क स्ट्रीट की किताबों की दुकाने
लाइट हाउस के सामने की पंक्तिबद्ध किताबों की दुकाने
राजेन्द्र यादव के शब्दों में कलकत्ते के लाइट हाउस के सामने की पंक्तिबद्ध किताबों की दुकाने ज्ञान-गली हैं।
16. ‘दीप बुझ गया, शिखा अमर है’ संस्मरण किसके बारे में है?
सुभद्रा कुमारी चौहान
शिवानी
कृष्णा सोबती
महादेवी वर्मा
‘दीप बुझ गया, शिखा अमर है’ संस्मरण महादेवी वर्मा के बारे में है।
17. महादेवी वर्मा ने किस साहित्यकार को अपना ‘विक्षिप्तप्राय भाई’ कहा और उनकी देखभाल की?
पंत
प्रसाद
अज्ञेय
निराला
महादेवी वर्मा ने महाकवि निराला को अपना भाई माना था और उनके ‘विक्षिप्तप्राय’ होने की स्थिति में भी उनकी पूरी देखभाल की थी।
18. “मनुष्य केवल अपनी काया में नहीं जीता, वह अपनी कृति में जीता है, कीर्ति में जीता है, संतति में जीता है।” – विष्णुकांत शास्त्री ने यह उक्ति किसके बारे में कही है?
हजारी प्रसाद द्विवेदी
महदेवी वर्मा
स्वामी अखंडानंद सरस्वती
अज्ञेय
विष्णुकांत शास्त्री ने यह उक्ति हजारी प्रसाद द्विवेदी के बारे में कही है।
19. महादेवी वर्मा किस संस्था का संचालन करती थीं, जिसे लेखक ने उनका ‘पारस-स्पर्श’ कहा है?
हिंदी साहित्य सम्मेलन
साहित्य अकादमी
भारतीय भाषा परिषद
प्रयाग महिला विद्यापीठ
लेखक ने महादेवी जी के महिला विद्यापीठ के संचालन को उनका ‘पारस-स्पर्श’ कहा है।
20. ‘राज्य-सत्ता से निरपेक्ष रहते हुए भी हमारे भक्त कवियों ने संपूर्ण देश में सर्वमान्य चिंतन और अनुभूतियों को मुखरित किया था।’
उपर्युक्त विचार किसके हैं?
विष्णुकांत शास्त्री
हजारी प्रसाद द्विवेदी
नामवर सिंह
उमाशंकर जोशी
उपर्युक्त विचार उमाशंकर जोशी के हैं।
21. विष्णुकांत शास्त्री ने महादेवी वर्मा के साथ किन नाटकों को देखने के लिए इलाहाबाद की यात्रा की थी?
ध्रुवस्वामिनी
आषाढ़ का एक दिन
चन्द्रगुप्त
मनमाने की बात तथा एवं इन्द्रजित्
लेखक ने महादेवी वर्मा के साथ मनमाने की बात तथा एवं इन्द्रजित् नाटकों को देखने के लिए इलाहाबाद की यात्रा की थी।
22. स्वामी अखंडानंद सरस्वती के प्रिय शिष्य ‘शिवानंद’ के बारे में असत्य कथन है:
उनका शरीर स्वीडन का था
स्वामी जी उन्हें सन्यास की दीक्षा दी थी
उन्होंने शंकरभाष्य के साथ ब्रह्मसूत्र का गंभीर अध्ययन किया था
वे जितने गंभीर ज्ञानी थे, उतने ही भावुक भक्त थे
लेखक ने संस्मरण में यह विशेषता स्वामी अखंडानंद सरस्वती की बताई है।
23. ‘आलोक-छुआ अपनापन’ शीर्षक से किस साहित्यकार का संस्मरण लिखा गया है?
हजारीप्रसाद द्विवेदी
नामवर सिंह
उमाशंकर जोशी
अज्ञेय
‘आलोक-छुआ अपनापन’ शीर्षक से अज्ञेय का संस्मरण लिखा गया है।
24. ‘अंत के तम में बुझे क्यों आदि के अरमान मेरे’ – पंक्ति किसकी है?
मैथिलीशरण गुप्त
सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
सुमित्रानंदन पंत
महदेवी वर्मा
उपरोक्त पंक्ति महदेवी वर्मा का है।
25. अज्ञेय जी स्वयं को मूलतः क्या मानते थे?
उपन्यासकार
कहानीकार
आलोचक
कवि
अज्ञेय जी स्वयं को मूलतः एक कवि मानते थे।
26. निम्नलिखित में किस लेखक की इच्छा थी कि ‘श्रीराम पर लिख कर मैं अपनी लेखनी को विराम दे दूँगा।’
विद्यानिवास मिश्र
स्वामी अखंडानंद सरस्वती
विष्णुकांत शास्त्री
हजारी प्रसाद द्विवेदी
विष्णुकांत शास्त्री के अनुसार यह द्विवेदी जी की इच्छा थी, पर उसके पहले ही उन्हें चिरविश्राम मिल गया।
27. अज्ञेय जी के अनुसार उनके उपन्यास ‘अपने-अपने अजनबी’ को लिखने में कितना समय लगा था?
एक महीना
तीन दिन
उन्होंने अपना प्रसिद्ध उपन्यास ‘अपने-अपने अजनबी’ मात्र तीन दिनों में लिखा था। क्योंकि पूरी तरह संतुष्ट और तैयार हो जाने के बाद ही वे लिखने बैठते थे।
दस दिन
एक साल
28. निम्नलिखित में किस लेखक ने विष्णुकांत शास्त्री से अटपटा प्रश्न पूछा था, ‘यह कैसे संभव है कि आपके लेख धर्मयुग और आलोचना दोनों में छपते हैं?’
राजेन्द्र यादव ने
विष्णुकांत शास्त्री से अटपटा प्रश्न राजेन्द्र यादव ने पूछा था।
प्रभाकर माचवे ने
अज्ञेय ने
डॉ. नगेन्द्र ने
29. विष्णुकांत शास्त्री ने अज्ञेय जी के साथ किस विशेष यात्रा में भाग लिया था?
हिमालय यात्रा
उत्तर भागवत भूमि यात्रा
विष्णुकांत शास्त्री ने अज्ञेय जी के साथ उत्तर भागवत भूमि यात्रा में भाग लिया था।
मानसरोवर यात्रा
दक्षिण भारत यात्रा
प्रभाकर माचवे ने
अज्ञेय ने
डॉ. नगेन्द्र ने
30. “हिंदी में उनसे बढ़कर मर्म-स्पर्शी किन्तु विचारपूर्ण भाषण देने वाला कोई नहीं हुआ।” – विष्णुकांत शास्त्री ने यह कथन किसके बारे में लिखा है?
अज्ञेय
महादेवी वर्मा
विष्णुकांत शास्त्री ने उपर्युक्त कथन महादेवी वर्मा के बारे में लिखा है।
नामवर सिंह
हजारीप्रसाद द्विवेदी
31. निम्नलिखित में कौन महदेवी वर्मा को ‘भारतीय ज्ञानपीठ’ से सम्मानित करते हुए स्वयं को सौभाग्यशाली माना?
श्रीमती मार्गरेट थैचर
ब्रिटेन की प्रधानमंत्री श्रीमती मार्गरेट थैचर के हाथों महदेवी वर्मा को उक्त पुरस्कार दिलाया गया। उन्होंने अत्यंत शालीनता के साथ कहा कि, “मैं अपने को सौभाग्यशाली समझती हूँ कि भारतीय संस्कृति और कविता की प्रतिमूर्ति श्रीमती महदेवी वर्मा के सम्मान में सम्मिलित हो सकी”।
ज्ञानी जैल सिंह
इंदिरा गांधी
रामधारी सिंह दिनकर
32. ‘फूल की पहचान सरस सुवास केवल’ संस्मरण किस विद्वान पर केंद्रित है?
आचार्य रामचंद्र शुक्ल
हजारीप्रसाद द्विवेदी
‘फूल की पहचान सरस सुवास केवल’ संस्मरण आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी पर केंद्रित है।
डॉ. नगेन्द्र
विद्यानिवास मिश्र
33. निम्नलिखित कथनों में कौन-सा अज्ञेय का नहीं है:
कृतिकार की बातों का कम, उसकी कृतियों का अधिक विश्वास करना चाहिए
कृतिकार का अपना मूल्यांकन सब समय सही नहीं होता
भारत में रूस-चीन की तरह क्रांति नहीं हो सकती क्योंकि यह मूलतः हिन्दू देश है
नयेपन के नाम पर कविताओं को अनबूझ पहेली बना देने का समर्थन भी नहीं किया जा सकता
यह कथन विष्णुकांत शास्त्री का है।
34. हजारीप्रसाद द्विवेदी के अनुसार साहित्य का वास्तविक प्रयोजन क्या है?
मनोरंजन
केवल ज्ञान प्रदर्शन
मनुष्यता और लोक-मंगल
द्विवेदी जी साहित्य का प्रयोजन मनुष्यता और लोक-मंगल को मानते थे।
धनोपार्जन
35. विष्णुकांत शास्त्री के विधायक बन जाने के बाद किसने कहा कि, ‘राजनीति में डूबनेवाले की मनुष्यता प्रायः डूब जाती है। … साहित्य ही है जिसमें डूब कर पार हुआ जाता है।’
हजारी प्रसाद द्विवेदी
द्विवेदी जी ने आशीर्वाद देते हुए यह बात कही थी।
स्वामी अखंडानंद सरस्वती
नामवर सिंह
अज्ञेय
36. निम्नलिखित में कौन-सा साहित्यकार ‘भारतीय साहित्य परिषद’ की स्थापना में शामिल नहीं था:
महात्मा गाँधी
महात्मा गाँधी की प्रेरणा से भारतीय साहित्य परिषद की स्थापना हुई थी।
प्रेमचंद
कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी
राजेन्द्र बाबू
37. “संतों, लगा कुम्भ का मेला / एक हिलोर इधर से आयी / एक हिलोर उधर से आयी फँसा भँवर में चेला!” – हजारी प्रसाद द्विवेदी इस कविता में किस चेले की बात कर रहे हैं?
विष्णुकांत शास्त्री
विश्वनाथ त्रिपाठी
नामवर सिंह
उपरोक्त कविता नामवर सिंह को लक्ष्य करके यह विनोदपूर्ण सुनाई थी।
विद्यानिवास मिश्र
38. ‘पास रहते हुए भी दूर’ संस्मरण लेखक ने किसके लिए लिखा है?
अपने मित्र के लिए
अज्ञेय के लिए
अपने पिता पं. गांगेय नरोत्तम शास्त्री के लिए
‘पास रहते हुए भी दूर’ संस्मरण लेखक ने अपने पिता पं. गांगेय नरोत्तम शास्त्री के लिए लिखा है।
अपने गुरु के लिए
39. ‘वाग्मी विद्वत्ता की साकार मूर्ति’ संस्मरण किस व्यक्तित्व पर है?
नामवर सिंह
उमाशंकर जोशी
अमृतलाल नागर
देवेन्द्रनाथ शर्मा
‘वाग्मी विद्वत्ता की साकार मूर्ति’ संस्मरण देवेन्द्रनाथ शर्मा पर है।
40. विष्णुकांत शास्त्री ने संस्मरण में अपने पुरखों का नगर किसे बताया है?
बनारस
लेखक ने लिखा है की बनारस मेरे पुरखों का नगर है। वे अपने को निकाला हुआ बनारसी मानते हैं।
इलाहाबाद
कोलकाता
अयोध्या
41. ‘रणनीति को वरीयता’ शीर्षक संस्मरण किस आलोचक पर है?
रामविलास शर्मा
नामवर सिंह
‘रणनीति को वरीयता’ शीर्षक संस्मरण नामवर सिंह पर है।
डॉ. नगेन्द्र
हजारीप्रसाद द्विवेदी
42. “अपने ऊपर काम-से-कम खर्च करना ही तप है और इस प्रकार न्यायोपार्जित धन को दूसरों के हित के लिए व्यय कर देना ही यज्ञ है।” – ‘सुधियाँ उस चन्दन के वन की’ संस्मरण में यह कथन किसका है?
स्वामी अखंडानंद सरस्वती
उपरोक्त कथन स्वामी अखंडानंद सरस्वती का है।
विष्णुकांत शास्त्री
महदेवी वर्मा
देवेंद्रनाथ शर्मा
43. ‘सुधियाँ उस चन्दन के वन की’ संस्मरण में मानस का पाठ माँ को सुनाते-सुनाते मार्मिक प्रसंगों में ‘सजल नयन गदगद गिरा’ की स्थिति किसकी हो जाती थी?
स्वामी अखंडानंद सरस्वती
संस्मरण के अनुसार ‘स्वामी अखंडानंद सरस्वती’ को रामचरित मानस के मार्मिक प्रसंग आने पर ‘सजल नयन गदगद गिरा’ की स्थिति हो जाती थी।
विष्णुकांत शास्त्री
पं. गांगेय नरोत्तम शर्मा
उमाशंकर जोशी
44. विष्णुकांत शास्त्री ने नामवर सिंह के साथ किस नगर में लंबा समय बिताया और बहसें कीं?
दिल्ली
कलकत्ता
लेखक ने नामवर सिंह के साथ कलकत्ता में काफी समय बिताया और उनसे विभिन्न साहित्यिक विषयों पर बहसें कीं।
बनारस
पटना
45. निम्नलिखित में महदेवी वर्मा के बारे में कौन-सा कथन संस्मरणकार विष्णुकांत शास्त्री का नहीं है:
संस्मरणकार उन्हें बुआ कहा करता था
लेखक उनसे पहली बार तब मिल जब वह 10वीं का विद्यार्थी था
महदेवी वर्मा ने संघर्षरत साहित्यकार बंधुओं के लिए ‘साहित्यकार संसद’ की स्थापना की थी।
विष्णुकांत शास्त्री के लिए महादेवी के मन में अपार ममत्व था
दरअसल संस्मरणकार के अनुसार महादेवी के मन में निराला जी के लिए अपार ममत्व था।
46. ‘भारतीय साहित्य के प्रज्ञा-पुरुष’ संस्मरण किस गुजराती साहित्यकार पर है?
पन्नालाल पटेल
उमाशंकर जोशी
उमाशंकर जोशी प्रसिद्ध गुजराती साहित्यकार थे जिन्होंने भारतीय भाषा परिषद के विकास में योगदान दिया।
झवेरचंद मेघानी
गोवर्धनराम त्रिपाठी
47. निम्नलिखित में कौन-सा हजारी प्रसाद द्विवेदी का सही कथन नहीं है:
बड़ा कलाकार ही सरल रेखा खींच सकता है
ज्ञान के क्षेत्र में अंतिम सत्य तक कोई नहीं पहुँचा है
हममें से किसी को हठाग्रही नहीं होना चाहिए
परंपरा पुरातन को स्वीकार करके बलिष्ठ नहीं होती है
सही कथन- परंपरा भी सामयिक नवीनताओं को स्वीकार करके ही बलिष्ठ होती है।
48. विष्णुकांत शास्त्री किस राजनीतिक पद पर निर्वाचित हुए थे, जिसका वर्णन ‘विधायक की यातना’ अध्याय में है?
पार्षद
विधान सभा सदस्य
लेखक 1977 में पश्चिम बंगाल विधान सभा (MLA) के सदस्य चुने गए थे।
सांसद
मेयर
49. विष्णुकांत शास्त्री के अनुसार ‘स्वामी अखंडानंद सरस्वती’ के पास हिंदी के बड़े साहित्यकार और चिंतक जाया करते थे, उनमें से एक नहीं है-
निर्मला जैन
विद्यानिवास मिश्र
रामविलास शर्मा
विष्णुकांत शास्त्री के अनुसार ‘स्वामी’ जी से मिलने सेठ गोविंददास, जैनेन्द्र, वियोगी हरि, हजारीप्रसाद द्विवेदी, अज्ञेय, नगेन्द्र, विद्यानिवास मिश्र, यशपाल जैन, नामवर सिंह, डॉ. लक्ष्मीनारायण लाल, निर्मला जैन, मोहन अवस्थी जैसे साहित्यकार जाया करते थे।
जैनेन्द्र
50. विष्णुकांत शास्त्री ने पश्चिम बंगाल की विधान सभा में किस भाषा में अपना भाषण दिया था?
अंग्रेजी
संस्कृत
बंगला
उन्होंने विधान सभा में हमेशा बंगला भाषा में ही भाषण दिए।
हिंदी
51. “मनुष्य को ऐसे काम नहीं करने चाहिए जिनसे वह अपनी आँखों में स्वयं गिर जाये।” ‘सुधियाँ उस चन्दन के वन की’ संस्मरण में यह कथन किस अध्याय में है?
श्रद्धा और विवेक के ज्योतिवाही: स्वामी अखंडानंद सरस्वती
उपरोक्त कथन इसी अध्याय का है।
आलोक-छुआ अपनापन: अज्ञेय
वाग्मी विद्वता की साकार मूर्ति: देवेंद्रनाथ शर्मा
भागवत की भूमि: उत्तर यात्रा
52. स्वामी अखंडानन्द जी के अनुसार ‘श्रद्धा’ का क्या अर्थ है?
अंधभक्ति
सत् को धारण करने वाली वृत्ति
स्वामी अखंडानन्द जी के अनुसार ‘श्रद्धा’ का अर्थ सत् (अर्थात् सत्य) को धारण करने वाली वृत्ति है।
गुरु की आज्ञा मानना
केवल पूजा-पाठ करना
53. विष्णुकांत शास्त्री के अनुसार महदेवी जी की संचारिणी कौन थीं?
निहार
नीरजा
दीपशिखा
विष्णुकांत शास्त्री के अनुसार महदेवी जी की संचारिणी ‘दीपशिखा’ थीं।
सांध्यगीत
54. महादेवी वर्मा ने किस घटना के बाद कहा था कि “अब मेरा परमधाम जाने का समय आ गया है”?
अस्वस्थ होने पर
इलाहाबाद में हुए दंगों पर
इलाहाबाद में हुए दंगों पर महादेवी वर्मा ने उक्त कथन कहा था।
निराला की मृत्यु पर
इमरजेंसी लगने पर
55. ‘सुधियाँ उस चन्दन के वन की’ संस्मरण में आए निम्न कथनों में कौन-सा एक कथन ‘स्वामी अखंडानंद सरस्वती’ का नहीं है-
जिस पर क्रोध आता है उसे तो वह बाद में जलाता है, पहले क्रोध करने वाले को ही जला देता है।
जाति कोई हो, उसमें आत्मा एक है। चाहे महजहब कोई हो, उसमें आत्मा एक है।
चारों पुरुषार्थों में साध्य-साधन-विषयक विपर्यय रहित निश्चय को श्रद्धा कहते हैं।
किसी भी बड़े कार्य से जुड़े व्यक्ति को सच्चरित्र होना चाहिए अन्यथा उसके व्यक्तिगत दोषों के कारण कार्य की भी बदनामी होती है।
यह कथन संस्मरणकार विष्णुकांत शास्त्री का है।
56. अज्ञेय जी ने ‘नया प्रतीक’ के संपादन के दौरान विष्णुकांत शास्त्री को किस साहित्यकार पर संस्मरण लिखने का आदेश दिया था?
मोहन राकेश
अज्ञेय जी ने ‘नया प्रतीक’ के संपादन के दौरान विष्णुकांत शास्त्री को मोहन राकेश पर संस्मरण लिखने का आदेश दिया था।
राजेन्द्र यादव
कमलेश्वर
निर्मल वर्मा
57. हजारी प्रसाद द्विवेदी ने किससे कहा था कि, “चिंतामणि मणि है यानी पत्थर है और कल्पलता लता है यानी कोमल उद्भिज्ज।”
विष्णुकांत शास्त्री से
नामवर सिंह से
अपनी पुत्री भारती मिश्र से
शास्त्री जी की बेटी जया से
यह बात द्विवेदी जी ने तब कही जब शास्त्री जी की बेटी जया ने उनसे बोला की चिंतामणि कठिन लगती है और कल्पलता सारस।
58. हजारीप्रसाद द्विवेदी ने अपनी किस रचना के माध्यम से उपनिषदों के ज्ञान को सर्वजन-सुलभ बनाया?
बाणभट्ट की आत्मकथा
चारु चंद्रलेख
अनामदास का पोथा
द्विवेदी ने अपनी ‘अनामदास का पोथा’ के माध्यम से उपनिषदों के ज्ञान को सर्वजन-सुलभ बनाया।
पुनर्नवा
59. विष्णुकांत शास्त्री ने अपने संस्मरण में किसे आचार्य भामह के व्याख्याता और पाश्चात्य काव्यशास्त्र के सुसंगत प्रस्तोता के रूप में उनके कृत्रित्व को अत्यंत उच्च स्तरीय माना है?
नामवर सिंह
देवेन्द्रनाथ शर्मा
शास्त्री जी ने देवेन्द्रनाथ शर्मा को आचार्य भामह के व्याख्याता और पाश्चात्य काव्यशास्त्र के सुसंगत प्रस्तोता के रूप में उनके कृत्रित्व को अत्यंत उच्च स्तरीय माना है।
नगेन्द्र
हजारी प्रसाद द्विवेदी
60. लेखक के पिता पं. गांगेय नरोत्तम शास्त्री किस नगर के सुप्रसिद्ध विद्वान थे?
कलकत्ता
काशी
लेखक के पिता पं. गांगेय नरोत्तम शास्त्री ‘काशी’ नगर के सुप्रसिद्ध विद्वान थे।
जम्मू
प्रयाग
61. निम्नलिखित में कौन-सा कथन स्वामी अखंडानंद सरस्वती का नहीं है:
उपासना वाच्यार्थ की होती है, लक्ष्यार्थ की नहीं।
तुलसी ने काव्य के अंतरंग के निखार पर अधिक बल दिया है।
गृहस्थों को प्रभु पर आश्रित रह कर अपने धर्म का निर्वाह करते रहना चाहिए।
अधम व्यक्ति केवल धन की कमाना करता हैं, मध्यम कोटि के व्यक्ति धन और मान दोनों चाहते हैं किन्तु जो उत्तम व्यक्ति होते हैं, वे मान की ही कामना करते हैं।
यह स्वामी जी का कथन नहीं है, बल्कि संस्कृति का एक श्लोक है।
62. देवेन्द्रनाथ शर्मा किस विश्वविद्यालय के कुलपति रहे थे?
दिल्ली विश्वविद्यालय
पटना विश्वविद्यालय और मिथिला विश्वविद्यालय
देवेन्द्रनाथ शर्मा पटना और मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति रहे थे।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय
कलकत्ता विश्वविद्यालय
63. विष्णुकांत शास्त्री को अज्ञेय से सर्वप्रथम किसने मिलाया था?
नामवर सिंह
विष्णुकांत शास्त्री को अज्ञेय से सर्वप्रथम धर्मवीर भारती ने मिलाया था।
डॉ. नगेन्द्र
महदेवी वर्मा
धर्मवीर भारती
64. ‘पास दिखे पर दूर रहे जो, मैं वह क्षितिज नाम का देश’ – विष्णुकांत शास्त्री ने यह उक्ति किसके लिए प्रयुक्त किया है?
नामवर सिंह
हजारी प्रसाद द्विवेदी
अज्ञेय
उपर्युक्त उक्ति विष्णुकांत शास्त्री ने अज्ञेय के लिए प्रयुक्त किया है क्योंकि भागवत-भूमि यात्रा में वे तन से साथ रहते हुए भी मन से विचार-जगत् में लीन रहने के कारण अलग-से थे।
उमाशंकर जोशी
65. विष्णुकांत शास्त्री हिंदी में आधुनिकता के सबसे बड़े मसीहा किसे मानते हैं?
धर्मवीर भारती को
भारतेन्दु हरिश्चंद्र को
अज्ञेय को
विष्णुकांत शास्त्री हिंदी में आधुनिकता के सबसे बड़े मसीहा अज्ञेय को मानते हैं।
नामवर सिंह को
66. उमाशंकर जोशी ने किस संस्था की स्थापना और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया था?
हिंदी अकादमी
भारतीय भाषा परिषद
गुजराती कवि उमाशंकर जोशी ने ‘भारतीय भाषा परिषद’ संस्था की स्थापना और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया था।
साहित्य अकादमी
नागरी प्रचारिणी सभा
67. “यह संस्मरण ही है जो दूर गये को पास ला देता है, विगत को स्वगत कर देता है।” संस्मरण के संबंध में यह विचार है:
स्वामी अखंडानंद सरस्वती
महदेवी वर्मा
विष्णुकांत शास्त्री
उपरोक्त विचार विष्णुकांत शास्त्री का है।
नामवर सिंह
68. ‘भागवत-भूमि : उत्तर यात्रा’ में विष्णुकांत शास्त्री ने किस स्थान को ‘प्राचीन नगरी के अवशेष’ के रूप में वर्णित किया है?
अयोध्या
द्वारका
‘भागवत-भूमि : उत्तर यात्रा’ में विष्णुकांत शास्त्री ने द्वारका (बेट द्वारका) को ‘प्राचीन नगरी के अवशेष’ के रूप में वर्णित किया है।
काशी
मथुरा
69. “आज का हिंदी साहित्यकार विश्व का होना चाहता है, भारतीय नहीं। मेरा सौभाग्य है कि मैं आज का भी हूँ और भारतीय भी।” – यह विचार किसका है:
अज्ञेय का
उपरोक्त विचार अज्ञेय का है।
विष्णुकांत शास्त्री का
नामवर सिंह का
धर्मवीर भारती का
70. संस्मरण ‘पीढ़ियों से बिछड़े भाइयों के बीच चन्द रोज’ किस देश की यात्रा पर आधारित है?
सूरीनाम
संस्मरण ‘पीढ़ियों से बिछड़े भाइयों के बीच चन्द रोज’ विष्णुकांत शास्त्री की सूरीनाम यात्रा पर आधारित है, जहाँ वे ‘अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन’ में भाग लेने गए थे।
मारीशस
फिजी
गयाना
71. ‘जिसे खोजता था वर्षों से अब जाकर उसको पाया।’ – विष्णुकांत शास्त्री ने अपने संस्मरण में किसके लिए यह कहा है:
स्वामी अखंडानंद सरस्वती
विष्णुकांत शास्त्री ने अपने संस्मरण के अध्याय ‘खंड-खंड, फिर भी अखंड’ में यह बात ‘स्वामी अखंडानंद सरस्वती’ के लिए यह कहा है।
नामवर सिंह
हजारी प्रसाद द्विवेदी
महदेवी वर्मा
72. सूरीनाम में हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए विष्णुकांत शास्त्री ने किस विशेष अवसर पर भाग लिया था?
विश्व हिंदी सम्मेलन
निराला शताब्दी
अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन
सूरीनाम में हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए लेखक ने ‘अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन’ एवं ‘सूर पंचशती महोत्सव’ के विशेष अवसर पर भाग लिया था।
तुलसी जयंती
73. विष्णुकांत शास्त्री के सक्रिय राजनीति में चले जाने पर स्वामी अखंडानंद सरस्वती ने उन्हें क्या निर्देश दिया था?
वस्तुतः जो व्यक्ति राजनीतिक मिजाज का न हो, उसके लिए राजनीति बहुत भारी पड़ती है।
यदि सच्चा मनुष्य राजनीति में पड़ेगा तो उसको बाद में वैराग्य अवश्य होगा।
स्वयं चारित्र्य के पालन से लोगों को जितना फायदा होता है, उतना अन्य प्रकार से नहीं।
इस निर्देश के साथ राजनीति के फिसलनों से बचने, सबका हित हो इसका ध्यान रखने का भी निर्देश लेखक को उस समय स्वामी जी ने दिया था।
बिना भोग के राजनीतिक तीक्ष्णता का पता नहीं चलता।
74. विष्णुकांत शास्त्री ने हजारीप्रसाद द्विवेदी की हंसी को कैसा बताया है?
कुटिल
निश्छल
विष्णुकांत शास्त्री ने हजारीप्रसाद द्विवेदी की हंसी को निश्छल, धारा-प्रवाह और भास्वर बताया है।
व्यंग्यात्मक
बनावटी
75. विष्णुकांत शास्त्री ने पुस्तक की भूमिका में संस्मरण लिखने का कारण क्या बताया है?
प्रसिद्धि प्राप्त करना
स्मृतियों को लिपिबद्ध करने का उत्साह
विष्णुकांत शास्त्री ने पुस्तक की भूमिका में संस्मरण लिखने का कारण कृतज्ञता-बोध और स्मृतियों को लिपिबद्ध करने का उत्साह बताया है।
धन कमाना
मित्रों का दबाव
76. विष्णुकांत शास्त्री के पिता जी के जीवन का बड़ा व्रत क्या था?
गुरु पूर्णिमा
कृष्ण जन्माष्टमी
दुर्गा पूजा
गो-रक्षा
पं. गांगेय नरोत्तम शास्त्री जी जब तक जीवित रहे, घर में दो-तीन गायें बराबर रहीं।
77. किसकी मान्यता थी कि, ‘भारतीय धर्माचार्यों ने बुद्धि को जितना महत्त्व दिया है, उतना अन्य देशों के धर्माचार्यों ने नहीं दिया है।’
हजारी प्रसाद द्विवेदी
नामवर सिंह
महदेवी वर्मा
स्वामी अखंडानंद सरस्वती
यह मान्यता ‘स्वामी अखंडानंद सरस्वती’ की थी।

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