आचार्य रामचंद्र शुक्ल के ‘हिंदी साहित्य का इतिहास’ (भक्ति काल: प्रकरण 1 और 2) के आधार पर ‘संत काव्यधारा’ या ‘ज्ञानाश्रयी शाखा’ से आपकी परीक्षाओं (PGT, TGT, DSSSB, lt grade, Assistant Professor आदि) के लिए 56 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) नीचे दिए गए हैं। यह प्रश्न-संग्रह निर्गुण काव्य के संत कवियों, काव्यधाराओं, ऐतिहासिक संदर्भों और साहित्यिक विशेषताओं को व्यवस्थित रूप से समझने में मदद करेगा।
1. शुक्ल जी के अनुसार भक्ति काल का समय क्या है?
संवत् 1375-1700
शुक्ल जी ने ‘भक्ति काल’ (पूर्व मध्य काल) की अवधि संवत् 1375 से 1700 तक मानी है।
संवत् 1050-1375
संवत् 1700-1900
संवत् 1350-1650
2. ‘अपने पौरुष से हताश जाति के लिए भगवान की शक्ति और करुणा की ओर ध्यान ले जाने के अतिरिक्त दूसरा मार्ग ही क्या था?’ यह कथन किसका है?
हजारी प्रसाद द्विवेदी
रामचंद्र शुक्ल
मुस्लिम साम्राज्य की स्थापना के बाद हिंदू जनता की निराशाजनक स्थिति को भक्ति के उदय का कारण बताते हुए शुक्ल जी ने यह प्रसिद्ध पंक्ति कही है।
डॉ. नगेंद्र
नामवर सिंह
3. ‘गोरख जगायो जोग, भगति भगायो लोग’ – यह पंक्ति किसकी है?
कबीरदास
गोरखनाथ
नामदेव
तुलसीदास
तुलसीदास जी ने नाथपंथ के प्रभाव के संदर्भ में कहा था कि योग मार्ग ने जनता के हृदय से स्वाभाविक भक्ति भाव को दूर कर दिया था।
4. शुक्ल जी के अनुसार भक्ति का जो सोता दक्षिण से आया, उसे उत्तर भारत में फैलने के लिए राजनैतिक परिस्थितियों ने कैसा स्थान दिया?
अवरुद्ध मार्ग
संघर्षपूर्ण स्थान
शून्य पड़ते हुए हृदय क्षेत्र में स्थान मिला
शुक्ल जी के अनुसार, दक्षिण से आती भक्ति की लहर को उत्तर भारत की राजनैतिक उथल-पुथल से रिक्त हुए जन-हृदय में फैलने का पूरा अवसर मिला।
कोई प्रभाव नहीं पड़ा
5. स्वामी मध्वाचार्य ने किस वैष्णव संप्रदाय का प्रवर्तन किया?
अद्वैतवाद
विशिष्टाद्वैतवाद
शुद्धाद्वैतवाद
द्वैतवाद
गुजरात में स्वामी मध्वाचार्य (संवत् 1254-1333) ने द्वैतवादी वैष्णव संप्रदाय चलाया था।
6. महाराष्ट्र के किस भक्त कवि ने हिंदू-मुसलमान दोनों के लिए एक सामान्य भक्ति मार्ग का आभास दिया?
एकनाथ
नामदेव
नामदेव (संवत् 1328-1408) ने कबीर से पहले ही हिंदू-मुसलमान दोनों के लिए एक सामान्य भक्ति मार्ग का संकेत दे दिया था।
ज्ञानदेव
तुकाराम
7. कबीर ने अपने निर्गुण पंथ में सूफियों से क्या ग्रहण किया?
अहिंसावाद
प्रपत्तिवाद
प्रेमतत्व
कबीर ने निराकार ईश्वर के लिए भारतीय वेदांत का सहारा लिया, लेकिन उसकी भक्ति के लिए सूफियों का ‘प्रेमतत्व’ अपनाया।
हठयोग
8. शुक्ल जी ने निर्गुण धारा को किन दो शाखाओं में विभक्त किया है?
निर्गुण और सगुण
ज्ञानाश्रयी और प्रेममार्गी शाखा
शुक्ल जी ने निर्गुण धारा दो भागों में बँटी: पहली ज्ञानाश्रयी (संत) और दूसरी शुद्ध प्रेममार्गी (सूफी)।
संत काव्य और सूफी काव्य
रामभक्ति और कृष्णभक्ति
9. ‘सत्यवती कथा’ (संवत् 1546-1574) के रचयिता कौन हैं?
कुतुबन
मंझन
ईश्वरदास
दिल्ली के बादशाह सिकंदर शाह के समय कवि ईश्वरदास ने दोहे-चौपाइयों में ‘सत्यवती कथा’ लिखी थी।
जायसी
10. सूफी कवियों ने अपने प्रेम प्रबंधों में किस भाषा का व्यवहार किया है?
अवधी
जायसी सहित इस संप्रदाय के सभी सूफी कवियों ने अपने प्रेम प्रबंधों के लिए अवधी (पूरबी हिंदी) का प्रयोग किया है।
ब्रजभाषा
खड़ी बोली
मैथिली
11. कबीरदास का जन्म काल क्या माना जाता है?
संवत् 1400
संवत् 1456
कबीर का जन्म संवत् 1456 की जेठ सुदी पूर्णिमा को माना जाता है।
संवत् 1375
संवत् 1500
12. कबीर को ‘राम नाम’ किससे प्राप्त हुआ?
स्वामी रामानंद
कबीर ने पंचगंगा घाट पर स्वामी रामानंद से दीक्षा पाई और राम नाम प्राप्त किया, हालांकि उनके ‘राम’ बाद में भिन्न हो गए।
शेख तकी
राघवेंद्र
विठोबा
13. ‘दसरथ सुत तिहुँ लोक बखाना। राम नाम का मरम है आना’ – इस पंक्ति के माध्यम से कबीर क्या कहना चाहते हैं?
वे दशरथ पुत्र राम के भक्त हैं।
वे केवल दशरथ की महिमा गा रहे हैं।
वे सगुण भक्ति का समर्थन कर रहे हैं।
उनके राम अवतार रूप से भिन्न हैं।
कबीर के राम अवतार रूप से भिन्न (ब्रह्म के पर्याय) हैं। वे स्पष्ट करते हैं कि उनके ‘राम’ दशरथ के पुत्र न होकर निराकार ब्रह्म के सूचक हैं।
14. कबीर की वाणी का संग्रह किस नाम से प्रसिद्ध है?
कबीर शब्दावली
बीजक
कबीर की वाणी का संग्रह ‘बीजक’ कहलाता है, जिसके तीन भाग हैं: रमैनी, सबद और साखी।
रमैनी
साखी ग्रंथ
15. कबीर की ‘साखी’ की भाषा क्या है?
अवधी
मैथिली
सधुक्कड़ी
साखियों में मुख्यत: सधुक्कड़ी (राजस्थानी, पंजाबी मिली खड़ी बोली) भाषा का प्रयोग है, जबकि रमैनी और सबद में ब्रज और पूरबी का प्रभाव है।
शुद्ध ब्रज
16. कबीर ने वैष्णव संप्रदाय से कौन-सा तत्व ग्रहण किया?
हठयोग
अहिंसावाद और शरणागति
कबीर ने वैष्णवों से अहिंसा और शरणागति (प्रपत्ति) का तत्व लिया।
मूर्तिपूजा
अवतारवाद
17. ‘नैया बिच नदिया डूबति जाय’ – इस पंक्ति में कबीर ने किस शैली का प्रयोग किया है?
उलटबाँसी
उपरोक्त पंक्ति में कबीर ने उलटबाँसी शैली का प्रयोग किया है। कबीर अपनी प्रखर प्रतिभा से ऐसी ‘उलटबाँसियाँ’ कहते थे जो असंभव प्रतीत होकर चकित करती थीं।
रूपक
उपमा
विशेषोक्ति
18. कबीर के गुरु के रूप में मुसलमानों में किसका नाम प्रचलित है?
मुल्ला दाऊद
अमीर खुसरो
शेख तकी
कबीरपंथ के मुसलमानों का मानना है कि कबीर ने सूफी फकीर शेख तकी से दीक्षा ली थी।
निजामुद्दीन औलिया
19. कबीर का मृत्यु स्थान कौन-सा है?
मथुरा
मगहर
कबीर ने मगहर में अपना शरीर त्याग किया था।
काशी
प्रयाग
20. ‘पंडित मिथ्या करहु बिचारा। ना वह सृष्टि, न सिरजनहारा’ – यह पंक्ति कबीर के किस स्वरूप को दर्शाती है?
निराकार निर्गुण ब्रह्म सत्ता
इस पंक्ति में कबीर ब्रह्म की निराकार और निर्गुण सत्ता की ओर संकेत करते हैं।
सगुण उपासना
अवतारवाद का समर्थन
केवल समाज सुधार
21. रैदास (रविदास) किसके शिष्य माने जाते हैं?
स्वामी रामानंद
रैदास रामानंद जी के बारह शिष्यों में गिने जाते हैं।
कबीर
नामदेव
मलूकदास
22. ‘जाके कुटुंब सब ढोर ढोवंत फिरहिं अजहुँ बानारसी आसपासा’ – यह पंक्ति किस कवि की है?
पीपा
रैदास
उपर्युक्त पंक्ति रैदास की है, उन्होंने अपनी जाति और काशी के परिवेश का उल्लेख अपने पदों में किया है।
कबीर
धन्ना
23. रैदास के कितने पद ‘आदिगुरुग्रंथ साहब’ में संकलित हैं?
20
60
100
40
रैदास का कोई स्वतंत्र ग्रंथ नहीं मिलता, उनके 40 पद गुरु ग्रंथ साहब में दिए गए हैं।
24. धर्मदास, जो कबीर के शिष्य थे, पहले किस मत के अनुयायी थे?
जैन
सगुण
धर्मदास पहले सगुण थे, मथुरा यात्रा और मूर्तिपूजा करते थे, कबीर से मिलने के बाद निर्गुण मत में आए।
सूफी
हठयोग
25. गुरुनानक देव का जन्म स्थान कहाँ है?
लाहौर
लुधियाना
तिलवंडी
गुरुनानक का जन्म संवत् 1526 में तिलवंडी (जिला लाहौर) में हुआ था।
अमृतसर
26. गुरुनानक देव के भजनों का संग्रह ‘ग्रंथ साहब’ में कब किया गया?
संवत् 1661
गुरुनानक के भजनों का संग्रह ‘ग्रंथ साहब’ में संवत् 1661 में किया गया, जिसमें पंजाबी और ब्रजमिश्रित हिंदी का प्रयोग है।
संवत् 1500
संवत् 1700
संवत् 1600
27. ‘जो नर दुख में दुख नहिं मानै। सुख सनेह अरु भय नहिं जाके, कंचन माटी जानै’ – यह पद किसका है?
कबीर
रैदास
दादूदयाल
गुरुनानक
यह प्रसिद्ध पद गुरुनानक देव द्वारा रचित है, जिसमें समत्व भाव की शिक्षा दी गई है।
28. दादूपंथी लोग दादूदयाल का जन्म स्थान कहाँ मानते हैं?
जयपुर
बनारस
दिल्ली
अहमदाबाद
दादू का जन्म संवत् 1601 में गुजरात के अहमदाबाद में माना जाता है।
29. दादूदयाल की बानी में किस तत्व की प्रधानता है?
प्रेमतत्व की सरस व्यंजना
कबीर के विपरीत दादू को वाद-विवाद में रुचि नहीं थी, उनकी वाणी में प्रेमभाव अधिक गंभीर और सरस है।
खंडन-मंडन
हठयोग के रहस्य
संस्कृत शब्दावली
30. निर्गुण पंथियों में सबसे अधिक शिक्षित और शास्त्रज्ञ कौन थे?
दादूदयाल
मलूकदास
सुंदरदास
सुंदरदास ने काशी में 30 वर्ष तक संस्कृत, वेदांत और पुराणों का अध्ययन किया था। निर्गुण पंथियों में वे सबसे अधिक शिक्षित और शास्त्रज्ञ थे।
कबीर
31. ‘सुन्दरविलास’ किसकी प्रसिद्ध रचना है?
रज्जब
मलूकदास
सुंदरदास
‘सुन्दरविलास’ सुंदरदास की प्रसिद्ध रचना है। इसमें उनके कवित्त और सवैये संगृहीत हैं, जो काव्यकला की दृष्टि से उत्कृष्ट हैं।
दादूदयाल
32. ‘बोलिए तौ तब जब बोलिबे की बुद्धि होय…’ – यह उक्ति किसकी है?
सुंदरदास
उपर्युक्त पंक्ति सुंदरदास की है। सुंदरदास सुशिक्षित थे और व्यर्थ की तुकबंदी या अज्ञानपूर्ण बानी के विरोधी थे।
कबीर
तुलसीदास
नानक
33. मलूकदास का जन्म स्थान कौन-सा है?
कड़ा
मलूकदास का जन्म संवत् 1631 में कड़ा (इलाहाबाद) में हुआ था।
बनारस
अयोध्या
मगहर
34. ‘अजगर करै न चाकरी, पंछी करै न काम। दास मलूका कहि गए, सबके दाता राम’ – यह पंक्ति किस कवि की है?
दादूदयाल
रैदास
मलूकदास
यह आलसियों का ‘मूल मंत्र’ कहा जाने वाला पद मलूकदास का है।
कबीर
35. ‘रत्नखान’ और ‘ज्ञानबोध’ के रचनाकार कौन हैं?
अक्षर अनन्य
सुंदरदास
धर्मदास
मलूकदास
ये मलूकदास की दो प्रसिद्ध पुस्तकें हैं।
36. महाराज छत्रसाल किसके शिष्य थे?
रामानंद
अक्षर अनन्य
अक्षर अनन्य पन्ना में रहते थे और प्रसिद्ध महाराज छत्रसाल इनके शिष्य थे।
मलूकदास
सुंदरदास
37. ‘राजयोग’, ‘विज्ञानयोग’ और ‘विवेकदीपिका’ जैसे वेदांत ग्रंथों के रचयिता कौन हैं?
अक्षर अनन्य
उपर्युक्त ग्रंथ अक्षर अनन्य के हैं। ये विद्वान थे और इन्होंने योग तथा वेदांत पर कई प्रामाणिक ग्रंथ लिखे।
सुंदरदास
कबीर
दादू
38. ‘निर्गुण पंथ’ में जो ‘सुरति’ और ‘निरति’ शब्द मिलते हैं, वे कहाँ से आए हैं?
वेदांत से
बौद्ध सिद्धों और योगियों की बानियों से
‘सुरति’ (सम्यक् स्मृति) और ‘निरति’ (सम्यक् समाधि) शब्द बौद्ध अष्टांग मार्ग से निकलकर योगियों के माध्यम से निर्गुण पंथ में आए हैं।
वैष्णव भक्ति से
सूफी मत से
39. शुक्ल जी ने निर्गुण पंथ के कवियों में किसे ‘काव्य कला में निपुण’ माना है?
मलूकदास
रैदास
सुंदरदास
शुक्ल जी ने निर्गुण पंथ के कवियों में सुंदरदास को ‘काव्य कला में निपुण’ माना है। सुंदरदास ही ऐसे निर्गुण पंथी थे जो काव्य रीति और अलंकारों की योजना में सिद्धहस्त थे।
कबीर
40. निर्गुण पंथ का लक्ष्य क्या था?
एक नया धर्म चलाना
संस्कृत भाषा का प्रचार करना
केवल मूर्तिपूजा का समर्थन करना
हिंदू-मुसलमानों के भेदभाव को मिटाकर शुद्ध ईश्वर प्रेम का प्रचार करना
निर्गुण पंथ का लक्ष्य हिंदू-मुसलमानों के भेदभाव को मिटाकर शुद्ध ईश्वर प्रेम का प्रचार करना था। कबीर और अन्य संतों का मुख्य उद्देश्य बाह्य आडंबरों को हटाकर हृदय की शुद्धि और सात्विक जीवन का प्रचार था।
41. शुक्ल जी के अनुसार ‘धर्म’ की पूर्ण सजीव दशा किन तीन धाराओं के सामंजस्य में रहती है?
प्रेम, भक्ति और सेवा
वैराग्य, ज्ञान और कर्म
कर्म, ज्ञान और भक्ति
शुक्ल जी के अनुसार धर्म का प्रवाह इन तीन (कर्म, ज्ञान और भक्ति) धाराओं में चलता है; इनके सामंजस्य से धर्म सजीव रहता है, अन्यथा वह विकलांग हो जाता है।
कर्म, उपासना और ज्ञान
42. ‘ज्ञान के अधिकारी तो कुछ थोड़े-से विशिष्ट व्यक्ति ही होते हैं, पर ‘कर्म’ और ‘भक्ति’ सारे जनसमुदाय की संपत्ति होती है।’ यह कथन किसका है?
आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी
डॉ. रामकुमार वर्मा
कबीरदास
आचार्य रामचंद्र शुक्ल
शुक्ल जी ने स्पष्ट किया है कि ज्ञान अत्यंत विकसित बुद्धि वालों के लिए है, जबकि कर्म और भक्ति सामान्य जनता के लिए सुलभ है।
43. शुक्ल जी ने किस शाखा की रचनाओं को ‘साहित्यिक’ नहीं माना है?
प्रेममार्गी शाखा (सूफी काव्य)
ज्ञानाश्रयी शाखा (संत काव्य)
शुक्ल जी के अनुसार संत कवियों की बानियाँ अधिकतर सांप्रदायिक शिक्षा के लिए थीं, उनमें साहित्यिक सरसता और व्यवस्था की कमी थी (कबीर और सुंदरदास जैसे अपवादों को छोड़कर)।
कृष्णभक्ति शाखा
रामभक्ति शाखा
44. भक्ति की निष्पत्ति किन दो तत्वों के योग से होती है?
श्रद्धा और प्रेम
शुक्ल जी के अनुसार जहाँ श्रद्धा (पूज्य बुद्धि) और प्रेम मिलते हैं, वहीं भक्ति का उदय होता है।
प्रेम और सेवा
ज्ञान और वैराग्य
कर्म और उपासना
45. ‘हिंदू अंधा तुरुकौ काना, दुहौ ते ज्ञानी सयाना’ – यह उक्ति किसकी है?
कबीरदास
दादूदयाल
रैदास
नामदेव
महाराष्ट्र के भक्त नामदेव ने अपनी ‘निर्गुण बानी’ में हिंदू और मुसलमान दोनों के बाहरी आडंबरों पर चोट करते हुए यह बात कही थी।
46. नामदेव ने किस नाथपंथी से दीक्षा ली थी?
बिसोबा खेचर
ज्ञानदेव के आग्रह पर नामदेव ने नागनाथ नामक स्थान पर जाकर बिसोबा खेचर (खेचरनाथ) से दीक्षा ली थी।
गोरखनाथ
ज्ञानदेव
निवृत्तिनाथ
47. कबीर की वाणी का सबसे पुराना नमूना किस ग्रंथ में मिलता है?
कबीर ग्रंथावली
आदिगुरुग्रंथ साहब
कबीर की वाणी के सबसे प्राचीन संग्रहों में ‘गुरु ग्रंथ साहब’ का स्थान महत्वपूर्ण है। शुक्ल जी के अनुसार कबीर की वचनावली की एक प्रति संवत् 1561 की भी मिली है।
बीजक
कबीर शब्दावली
48. शुक्ल जी ने कबीर की भाषा को क्या नाम दिया है?
अवधी
सधुक्कड़ी
शुक्ल जी के अनुसार कबीर की साखियों की भाषा ‘सधुक्कड़ी’ है, जिसमें राजस्थानी, पंजाबी और खड़ी बोली का मिश्रण है।
पंचमेल खिचड़ी
परिष्कृत ब्रज
49. ‘जाके कुटुंब सब ढोर ढोवंत फिरहिं अजहुँ बानारसी आसपासा’ – रैदास ने अपनी इस पंक्ति में किस शहर का उल्लेख किया है?
बनारस
रैदास बनारस (काशी) के रहने वाले थे और उन्होंने अपनी जाति और स्थान का गौरवपूर्ण उल्लेख इस पद में किया है।
प्रयाग
मथुरा
अयोध्या
50. धर्मदास कबीर की गद्दी पर कितने वर्ष तक रहे?
10 वर्ष
30 वर्ष
50 वर्ष
20 वर्ष
संवत् 1575 में कबीर के परलोकवास के बाद धर्मदास उनकी गद्दी पर लगभग 20 वर्ष तक रहे।
51. गुरुनानक देव के पुत्र ‘श्रीचंद’ ने किस संप्रदाय का प्रवर्तन किया?
सिख संप्रदाय
निर्मल संप्रदाय
खालसा पंथ
उदासी संप्रदाय
गुरुनानक के दो पुत्र थे- श्रीचंद और लक्ष्मीचंद। श्रीचंद ने ‘उदासी संप्रदाय’ चलाया था।
52. दादूदयाल की उत्पत्ति कथा किस संत से मिलती-जुलती है?
सुंदरदास
कबीरदास
कबीर की तरह दादू के बारे में भी कहा जाता है कि वे साबरमती नदी में बहते हुए लोदीराम नामक ब्राह्मण को मिले थे।
रैदास
नामदेव
53. ‘हाथ समेटा जब से’ – यह प्रसिद्ध उत्तर संत अक्षर अनन्य ने किसे दिया था?
महाराज छत्रसाल
जब छत्रसाल ने पूछा कि ‘पाँव पसारा कब से?’, तब विरक्त अक्षर अनन्य ने उत्तर दिया था, ‘हाथ समेटा जब से’ (अर्थात् जब से राजसी दान लेना बंद किया)।
राजा पृथ्वीचंद
औरंगजेब
सिकंदर लोदी
54. सुंदरदास ने किस स्थान पर 30 वर्ष तक रहकर संस्कृत और वेदांत का अध्ययन किया?
प्रयाग
मथुरा
काशी
सुंदरदास ने काशी में रहकर व्याकरण, वेदांत और पुराणों की विधिवत शिक्षा प्राप्त की थी।
जयपुर
55. निर्गुण पंथ के संतों में किसने ‘पतिव्रत’ और ‘शूरवीरों’ के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए सवैये रचे हैं?
कबीर
सुंदरदास
सुंदरदास ने अपनी शिक्षा के कारण लोकधर्म की उपेक्षा नहीं की और पतिव्रता स्त्रियों तथा रणबाँकुरों पर सुंदर काव्य रचना की।
दादू
नानक
56. ‘सत्यवती कथा’ की रचना किस शासक के समय में हुई थी?
अकबर
अलाउद्दीन खिलजी
शेरशाह सूरी
सिकंदर शाह
कवि ईश्वरदास ने संवत् 1546-1574 के बीच दिल्ली के सुल्तान सिकंदर शाह (लोदी) के समय यह कथा लिखी थी।
आचार्य रामचंद्र शुक्ल के ‘हिंदी साहित्य का इतिहास’ (भक्ति काल: प्रकरण 1 और 2) के मूल वक्तव्य और संत काव्यधारा पर आधारित हैं। ये वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs) आपकी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण हैं। यह quiz कैसी लगी, कॉमेंट कर हमें भी बताएं।







