आचार्य रामचंद्र शुक्ल: हिंदी साहित्य का इतिहास कृष्णभक्ति शाखा (वस्तुनिष्ठ प्रश्न)

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आचार्य रामचंद्र शुक्ल: हिंदी साहित्य का इतिहास – महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तरी

आचार्य रामचंद्र शुक्ल द्वारा रचित ‘हिंदी साहित्य का इतिहास’ (सगुण धारा: कृष्णभक्ति शाखा) पर आधारित 40 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) नीचे दिए गए हैं, जो UP PGT/TGT, DSSSB, lt grade, Assistant Professor जैसी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। यह प्रश्न-संग्रह सगुण काव्यधारा के कृष्णभक्ति शाखा के कवियों, काव्यधाराओं, ऐतिहासिक संदर्भों और साहित्यिक विशेषताओं आदि पर आधारित हैं।

1. श्री बल्लभाचार्य जी का जन्म कब हुआ था?
संवत् 1540
संवत् 1587
संवत् 1475
संवत् 1535
आचार्य शुक्ल के अनुसार बल्लभाचार्य जी का जन्म संवत् 1535, वैशाख कृष्ण 11 को हुआ था।
2. बल्लभाचार्य ने किस दार्शनिक मत का प्रतिपादन किया जो ‘अणुभाष्य’ में मिलता है?
विशिष्टाद्वैतवाद
द्वैतवाद
शुद्धाद्वैतवाद
आचार्य जी के शुद्धाद्वैतवाद का प्रतिपादक प्रधान दार्शनिक ग्रंथ ‘अणुभाष्य’ (ब्रह्मसूत्र भाष्य) है।
अद्वैतवाद
3. बल्लभाचार्य के अनुसार ‘जीव’ के कितने प्रकार हैं?
पाँच
तीन
बल्लभाचार्य ने जीव तीन प्रकार के माने हैं- पुष्टि जीव, मर्यादा जीव और प्रवाह जीव।
दो
चार
4. ‘अष्टछाप’ की स्थापना किसने की थी?
सूरदास
कुंभनदास
गोसाईं विट्ठलनाथ
गोसाईं विट्ठलनाथ जी ने आठ सर्वोत्तम कवियों को चुनकर ‘अष्टछाप’ की प्रतिष्ठा की थी।
बल्लभाचार्य
5. ‘अष्टछाप’ के कवियों में सूरदास के बाद दूसरा महत्वपूर्ण स्थान किसका माना जाता है?
नंददास
अष्टछाप में सूरदास जी के पीछे नंददास जी का ही नाम लेना पड़ता है।
परमानंददास
कृष्णदास
कुंभनदास
6. ‘और कवि गढ़िया, नंददास जड़िया’ – यह कहावत किस कवि के लिए प्रसिद्ध है?
सूरदास
नंददास
नंददास की रचनाओं के अनुप्रासादियुक्त और जड़ित शब्द विन्यास के कारण उनके लिए यह कहावत प्रसिद्ध है।
केशवदास
परमानंददास
7. सूरदास जी के ‘साहित्यलहरी’ ग्रंथ का रचनाकाल क्या माना गया है?
संवत् 1580
संवत् 1620
संवत् 1576
संवत् 1607
‘साहित्यलहरी’ के एक पद के अनुसार इसकी समाप्ति संवत् 1607 में हुई थी।
8. ‘भ्रमरगीत’ का मुख्य उद्देश्य क्या है?
योग की शिक्षा देना
उद्धव की प्रशंसा
प्रकृति वर्णन
निर्गुण का खंडन और सगुण का मंडन
सूर ने भ्रमरगीत में सगुणोपासना का निरूपण बड़े ही मार्मिक ढंग से हृदय की अनुभूति के आधार पर किया है। इस ग्रंथ का मुख्य उद्देश्य निर्गुण का खंडन और सगुण का मंडन है।
9. ‘सन्तन को कहाँ सीकरी सो काम?’ – यह प्रसिद्ध पंक्ति किस कवि की है?
परमानंददास
कबीर
कुंभनदास
अकबर द्वारा फतेहपुर सीकरी बुलाए जाने पर विरक्त कुंभनदास ने यह पद गाया था।
सूरदास
10. सूरदास को बल्लभाचार्य ने कहाँ दीक्षा दी थी?
गऊघाट पर
सूरदास पहले गऊघाट पर साधु के रूप में रहते थे, वहीं बल्लभाचार्य जी से उनकी भेंट हुई और वे उनके शिष्य बने।
गोकुल में
वृंदावन में
पारसोली में
11. ‘पुष्टिमार्ग’ का नामकरण किस आधार पर हुआ है?
कठोर तपस्या
भगवान का अनुग्रह
भगवान के अनुग्रह को ‘पोषण’ या ‘पुष्टि’ कहते हैं, इसी कारण इस मार्ग का नाम ‘पुष्टिमार्ग’ पड़ा।
पुष्ट शरीर
वेदों का ज्ञान
12. बल्लभाचार्य द्वारा अधूरा छोड़ा गया ‘अणुभाष्य’ किसने पूरा किया?
सूरदास
गोकुलनाथ
नंददास
विट्ठलनाथ
‘अणुभाष्य’ के अंत के डेढ़ अध्याय उनके पुत्र गोसाईं विट्ठलनाथ ने लिखकर पूरे किए।
13. ‘चौरासी वैष्णवों की वार्ता’ में किस कवि का वृत्त मिलता है?
तुलसीदास
केशवदास
बिहारी
सूरदास
सूरदास का वृत्त और उनके बल्लभाचार्य का शिष्य बनने की कथा ‘चौरासी वैष्णवों की वार्ता’ में दी गई है।
14. रसखान किस संप्रदाय में दीक्षित हुए थे?
निंबार्क संप्रदाय
गौड़ीय संप्रदाय
बल्लभ संप्रदाय
रसखान बल्लभ संप्रदाय में दीक्षित हुए थे, वे गोस्वामी विट्ठलनाथ जी के बड़े कृपापात्र शिष्य थे।
राधावल्लभ संप्रदाय
15. ‘रासपंचाध्यायी’ किस छंद में लिखी गई है?
दोहा
चौपाई
रोला
नंददास की प्रसिद्ध पुस्तक ‘रासपंचाध्यायी’ रोला छंदों में लिखी गई है।
सवैया
16. मीराबाई की उपासना किस भाव की थी?
दास्य भाव
सख्य भाव
वात्सल्य भाव
माधुर्य भाव
मीराबाई अपने इष्टदेव श्रीकृष्ण को प्रियतम या पति के रूप में मानती थीं, जिसे माधुर्य भाव कहा जाता है।
17. ‘हित चौरासी’ के रचयिता कौन हैं?
हितहरिवंश
राधावल्लभी संप्रदाय के प्रवर्तक हितहरिवंश के पदों का संग्रह ‘हित चौरासी’ के नाम से प्रसिद्ध है।
स्वामी हरिदास
ध्रुवदास
व्यास जी
18. ‘मुरली तऊ गोपालहि भावति’ – सूरदास के इस पद में क्या भाव है?
गोपी-मुरली डाह
गोपियाँ मुरली के प्रति अपनी ईर्ष्या और उसकी प्रगल्भता को कोसते हुए यह पद कहती हैं।
वात्सल्य
सख्य
निर्गुण भक्ति
19. अष्टछाप के किस कवि को तानसेन अपना गुरुवत् सम्मान देते थे?
छीतस्वामी
सूरदास
स्वामी हरिदास
गोविंदस्वामी
गोविंदस्वामी बड़े पक्के गवैये थे और तानसेन कभी-कभी उनका गाना सुनने आया करते थे।
20. ‘अष्टछाप’ के किस कवि को ‘अमीन’ के पद पर नियुक्त किया गया था और उन्होंने खजाना लुटा दिया था?
परमानंददास
सूरदास मदनमोहन
संडीले के अमीन सूरदास मदनमोहन ने सरकारी खजाना साधुओं की सेवा में लगा दिया था।
सूरदास
कृष्णदास
21. ‘जाके प्रिय न राम बैदेही’ – यह पद तुलसीदास ने किसे लिखकर भेजा था?
नंददास
मीराबाई
जनश्रुति के अनुसार मीराबाई के पत्र के उत्तर में तुलसीदास ने विनयपत्रिका का यह पद भेजा था (यद्यपि शुक्ल जी ने कालक्रम के अनुसार इसे कल्पना माना है)।
सूरदास
विट्ठलनाथ
22. अष्टछाप के किस कवि ने ‘जुगलमान चरित्र’ नामक ग्रंथ लिखा है?
चतुर्भुजदास
परमानंददास
नंददास
कृष्णदास
अष्टछाप के कवि कृष्णदास का ‘जुगलमान चरित्र’ नामक एक छोटा सा ग्रंथ मिलता है।
23. अष्टछाप के किस कवि का संबंध ‘अंतरी’ से था?
चतुर्भुजदास
नंददास
गोविंदस्वामी
गोविंदस्वामी अंतरी के रहने वाले सनाढ्य ब्राह्मण थे।
छीतस्वामी
24. ‘भक्तनामावली’ के रचयिता कौन हैं?
व्यास जी
गोकुलनाथ
ध्रुवदास
ध्रुवदास ने नाभा जी के भक्तमाल के अनुकरण पर ‘भक्तनामावली’ लिखी है।
नाभादास
25. श्री बल्लभाचार्य जी का देहावसान (गोलोकवास) कब हुआ?
संवत् 1587
आचार्य जी का गोलोकवास संवत् 1587, आषाढ़ शुक्ल 3 को हुआ था।
संवत् 1600
संवत् 1570
संवत् 1620
26. सूरदास की किस रचना में ‘दृष्टिकूट’ वाले पद मिलते हैं?
सूरसारावली
उपर्युक्त सभी में
साहित्यलहरी
‘साहित्यलहरी’ में अलंकारों और नायिका भेदों के उदाहरण प्रस्तुत करने वाले ‘कूट’ पद हैं।
सूरसागर
27. ‘परमानंद सागर’ में कितने पद संग्रहित हैं?
835
परमानंददास के 835 पद ‘परमानंदसागर’ में संकलित हैं।
500
1000
10,000
28. ‘युगल शतक’ किस कृष्णभक्त कवि की रचना है?
गदाधर भट्ट
हितहरिवंश
हरिराम व्यास
श्रीभट्ट
निंबार्क संप्रदाय के श्रीभट्ट का ‘युगल शतक’ कृष्णभक्तों में बहुत आदरणीय ग्रंथ है।
29. ‘तदबिंदु’ और ‘तत्वदीप निबंध’ किसकी रचनाएँ हैं?
नंददास
बल्लभाचार्य
‘तदबिंदु’ और ‘तत्वदीप निबंध’ बल्लभाचार्य जी के मुख्य ग्रंथों में से एक है।
विट्ठलनाथ
सूरदास
30. अष्टछाप के कौन से कवि कुंभनदास जी के पुत्र थे?
चतुर्भुजदास
चतुर्भुजदास जी कुंभनदास जी के पुत्र और गोसाईं विट्ठलनाथ जी के शिष्य थे।
परमानंददास
छीतस्वामी
कृष्णदास
31. ‘भयौ है मुदित सखी लाल को मराल मन’ – यह पंक्ति किसकी है?
सूरदास
हितहरिवंश
रसखान
ध्रुवदास
यह पंक्ति ध्रुवदास के ग्रंथ ‘सिंगारसत’ से उद्धृत है।
32. ‘प्रेमवाटिका’ का रचनाकाल क्या है?
संवत् 1580
संवत् 1671
रसखान की कृति ‘प्रेमवाटिका’ का रचनाकाल संवत् 1671 है।
संवत् 1600
संवत् 1643
33. बल्लभाचार्य ने श्रीकृष्ण के किस रूप को ‘परब्रह्म पुरुषोत्तम’ माना है?
लोक रक्षक
मर्यादा पुरुषोत्तम
निर्गुण ब्रह्म
दिव्य गुणों से संपन्न ‘आनंद’ स्वरूप
बल्लभ ने सगुण रूप को ही असली परमार्थिक रूप बताया जिसमें आनंद का पूर्ण आविर्भाव रहता है।
34. ‘अष्टछाप’ के किस कवि को मथुरा का ‘अक्खड़ पंडा’ कहा गया है?
गोविंदस्वामी
कृष्णदास
कुंभनदास
छीतस्वामी
छीतस्वामी पहले मथुरा के एक सुसंपन्न, अक्खड़ और उद्दंड पंडा थे, जो बाद में भक्त बन गए।
35. ‘हरिदास जी की बानी’ किस संप्रदाय से संबंधित है?
गौड़ीय संप्रदाय
बल्लभ संप्रदाय
सखी संप्रदाय
स्वामी हरिदास वृंदावन में निंबार्क मतांतर्गत टट्टी (सखी संप्रदाय) संप्रदाय के संस्थापक थे।
राधावल्लभ संप्रदाय
36. गदाधर भट्ट किस महाप्रभु के शिष्य थे?
हितहरिवंश
निंबार्काचार्य
चैतन्य महाप्रभु
गदाधर भट्ट चैतन्य महाप्रभु के शिष्य थे और उन्हें भागवत सुनाया करते थे।
बल्लभाचार्य
37. ‘मैया! कबहिं बढ़ैगी चोटी!’ – इस पद में सूरदास ने मुख्यतः किस भाव का वर्णन किया है?
कृष्ण की बाल स्पर्धा
सूरदास ने बालकों के स्वाभाविक भावों और उनकी स्पर्धा का इस प्रसिद्ध पद में बहुत सुंदर वर्णन किया है।
यशोदा का वात्सल्य
बालकों का क्षोभ
उपर्युक्त सभी
38. आचार्य शुक्ल ने ‘भ्रमरगीत’ को क्या संज्ञा दी है?
शुष्क दर्शन
उपालंभ काव्य
शुक्ल जी के अनुसार, सूरसागर का सबसे मर्मस्पर्शी अंश भ्रमरगीत है, जो एक उत्कृष्ट ‘उपालंभ काव्य’ है।
महाकाव्य
वीरता का काव्य
39. ‘आवत जात पहनियाँ टूटी, बिसरि गयो हरि नाम’ – कुंभनदास का यह पद किस प्रसंग में कहा गया है?
गरीबी के कारण
तीर्थ यात्रा के कारण
वृद्धावस्था के कारण
फतेहपुर सीकरी की यात्रा के दुख में
कुंभनदास को अकबर के बुलावे पर फतेहपुर सीकरी जाना पड़ा था, जिसकी व्यर्थता पर उन्होंने यह पद कहा।
40. ‘निर्गुन कौन देस को वासी?’ – गोपियों का यह प्रश्न उद्धव से क्या सिद्ध करने के लिए है?
निर्गुण की श्रेष्ठता
उद्धव का ज्ञान
मथुरा की महिमा
सगुण की सुगमता और निर्गुण की अनिश्चितता
गोपियों का यह प्रश्न सगुण की सुगमता और निर्गुण की अनिश्चितता सिद्ध करने के लिए है। गोपियाँ तर्क देती हैं कि जिसका कोई रूप-रेखा नहीं, उस निर्गुण का परिचय क्या है।

ये प्रश्न आचार्य रामचंद्र शुक्ल के इतिहास ग्रंथ के ‘कृष्णभक्ति शाखा’ प्रकरण के मुख्य तथ्यों को कवर करते हैं। यह quiz कैसी लगी, कॉमेंट कर हमें भी बताएं। आपकी परीक्षाओं के लिए शुभकामनाएँ!

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