आचार्य रामचंद्र शुक्ल: हिंदी साहित्य का इतिहास आदिकाल (वस्तुनिष्ठ प्रश्न सेट 1)

0
9
Ramchandra-Shukla-Hindi-Sahitya-Itihas-MCQs-Quiz
आचार्य रामचंद्र शुक्ल: हिंदी साहित्य का इतिहास – महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तरी

चार्य रामचंद्र शुक्ल ने अपने ग्रंथ ‘हिंदी साहित्य का इतिहास’ में आदिकाल की साहित्यिक परंपराओं को गहराई से प्रस्तुत किया है। ‘आदिकाल’ को हिंदी साहित्य की नींव माना जाता है, जहाँ वीरगाथा काव्य और धार्मिक प्रवृत्तियाँ प्रमुख थीं। इस ब्लॉग पोस्ट में दिए गए वस्तुनिष्ठ प्रश्न सेट 2 (कुल 40 प्रश्न) विशेष रूप से DSSSB, Hindi, UP TGT, UP PGT और Assistant Professor जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए तैयार किए गए हैं। सभी प्रश्न MCQs Quiz के रूप में दिए जा रहे हैं। यह प्रश्न-संग्रह आदिकाल के कवियों, काव्यधाराओं, ऐतिहासिक संदर्भों और साहित्यिक विशेषताओं को व्यवस्थित रूप से समझने में मदद करेगा।

42. ‘अपभ्रंश’ नाम का सबसे पहला उल्लेख कहाँ मिलता है?
भरत मुनि के नाट्यशास्त्र में
भामह के काव्यालंकार में
राजशेखर की कर्पूरमंजरी में
बलभी के राजा धारसेन द्वितीय के शिलालेख में
अपभ्रंश नाम सबसे पहले बलभी के राजा धारसेन द्वितीय के शिलालेख में मिलता है, जिसमें उन्होंने अपने पिता गुहसेन को संस्कृत, प्राकृत और अपभ्रंश तीनों का कवि कहा है।
43. शुक्ल जी के अनुसार, ‘प्रसिद्धि’ किसी काल की किस प्रवृत्ति की प्रतिध्वनि है?
धार्मिक उन्माद की
लोकप्रवृत्ति की
शुक्ल जी का मानना है कि किसी काल में जिस ढंग के बहुत अधिक ग्रंथ प्रसिद्ध होते हैं, वह प्रसिद्धि उस काल की लोकप्रवृत्ति की प्रतिध्वनि होती है।
व्यक्तिगत रुचि की
राजनैतिक उथल-पुथल की
44. शुक्ल जी ने ‘साहित्य की कोटि’ में आने वाली अपभ्रंश की कितनी पुस्तकें मानी हैं?
चार
शुक्ल जी ने अपभ्रंश की केवल चार पुस्तकें साहित्यिक मानी हैं: विजयपाल रासो, हम्मीर रासो, कीर्तिलता और कीर्तिपताका।
आठ
बारह
नौ
45. ‘बीसलदेव रासो’ को शुक्ल जी ने किस श्रेणी की पुस्तक माना है?
केवल नोटिस मात्र
धार्मिक ग्रंथ
वीरगाथात्मक श्रेणी से बाहर
शुक्ल जी के अनुसार, आदिकाल की 12 पुस्तकों में से बीसलदेव रासो, खुसरो की पहेलियाँ और विद्यापति पदावली को छोड़कर शेष ग्रंथ ही वीरगाथात्मक हैं।
वीरगाथात्मक
46. ‘वज्रयान’ में ‘महासुख’ की दशा का प्रतीक किसे माना गया है?
शून्य को
एकांत साधना को
मंत्र जाप को
युगनद्ध को
वज्रयान में ‘महासुख’ वह दशा है जिसमें साधक शून्य में विलीन हो जाता है और इसका प्रतीक ‘युगनद्ध’ (स्त्री-पुरुष का आलिंगनबद्ध जोड़ा) माना गया है।
47. ‘काआ तरुवर पंच बिड़ाल’ – इस पंक्ति में ‘पंच बिड़ाल’ का अर्थ शुक्ल जी ने क्या बताया है?
बौद्ध शास्त्रों के पाँच प्रतिबंध
‘पंच बिड़ाल’ बौद्ध शास्त्रों में निरूपित पाँच विकार / प्रतिबंधों (आलस्य, हिंसा, काम, विचिकित्सा और मोह) को कहते हैं।
पाँच सिद्ध पुरुष
पाँच प्रकार के जीव
पाँच इंद्रियाँ
48. शुक्ल जी के अनुसार ‘नाथपंथ’ का मूल कहाँ है?
सूफी मत में
बौद्धों की वज्रयान शाखा में
गोरखनाथ के नाथपंथ का मूल बौद्धों की वज्रयान शाखा ही है, जिससे अलग होकर उन्होंने अपना मार्ग बनाया।
जैन धर्म में
शैव संप्रदाय की प्राचीनता में
49. ‘बालनाथ का टीला’ कहाँ स्थित था, जिसका उल्लेख ‘पद्मावत’ में भी आया है?
बिहार में
नेपाल की तराई में
पंजाब में
पंजाब में नमक के पहाड़ों के बीच बालनाथ योगी का स्थान प्रसिद्ध था, जिसे जायसी ने ‘बालनाथ का टीला’ कहा है।
राजपूताना में
50. ‘सधुक्कड़ी’ भाषा के संबंध में कौन-सा तथ्य सही है?
इसका ढाँचा केवल ब्रजभाषा है।
इसमें केवल खड़ी बोली का प्रयोग है।
यह केवल अवधी भाषा का रूप है।
इसका ढाँचा खड़ी बोली लिए राजस्थानी है।
नाथपंथियों और सिद्धों ने परंपरागत साहित्य की भाषा से अलग ‘सधुक्कड़ी’ भाषा का सहारा लिया, जिसका ढाँचा खड़ी बोली युक्त राजस्थानी था।
51. ‘कीर्तिलता’ की खोज नेपाल के राजकीय पुस्तकालय में किसने की थी?
जॉर्ज ग्रियर्सन
राहुल सांकृत्यायन
रामचंद्र शुक्ल
महामहोपाध्याय पं. हरप्रसाद शास्त्री
पं. हरप्रसाद शास्त्री ने नेपाल जाकर ‘कीर्तिलता’ की प्रति खोजी और उसकी नकल ली।
52. ‘प्रबंधचिंतामणि’ में किसके दोहे ‘अपभ्रंश या पुरानी हिंदी के बहुत पुराने नमूने’ कहे जा सकते हैं?
हम्मीरदेव के
कुमारपाल के
राजा मुंज के
राजा भोज के चाचा मुंज के दोहे ‘प्रबंधचिंतामणि’ में संग्रहित हैं, जो अपभ्रंश के अत्यंत पुराने नमूने हैं।
राजा भोज के
53. ‘भक्तिकाल’ के भीतर शुक्ल जी ने कितनी मुख्य काव्यधाराएँ मानी हैं?
चार
छह
दो
शुक्ल जी ने पहले दो काव्यधाराएँ (निर्गुण और सगुण) निर्दिष्ट कीं और फिर प्रत्येक की दो-दो शाखाएँ कीं।
तीन
54. शुक्ल जी ने कवियों के परिचयात्मक विवरण के लिए किस ग्रंथ को मुख्य आधार बनाया?
ब्रजमाधुरी सार
मिश्रबंधु विनोद
शुक्ल जी ने स्वीकार किया है कि कवियों के परिचयात्मक विवरण उन्होंने प्राय: ‘मिश्रबंधु विनोद’ से ही लिए हैं।
शिवसिंह सरोज
कविता कौमुदी
55. ‘आधुनिक काल’ के संबंध में शुक्ल जी ने किसे ‘सबसे प्रधान साहित्यिक घटना’ माना है?
उपन्यासों का लेखन
गद्य का आविर्भाव
शुक्ल जी ने हिंदी साहित्य के इतिहास में लिखा है कि आधुनिक काल में ‘गद्य का आविर्भाव’ सबसे प्रधान साहित्यिक घटना मानी गई है।
खड़ी बोली का उदय
छायावाद का प्रारंभ
56. शुक्ल जी का ‘हिंदी साहित्य का इतिहास’ सर्वप्रथम किस नाम से प्रकाशित हुआ था?
हिंदी साहित्य का विकास
यह ग्रंथ ‘हिंदी शब्दसागर’ की भूमिका के रूप में ‘हिंदी साहित्य का विकास’ के नाम से जनवरी 1929 में निकला था।
हिंदी साहित्य का परिचय
हिंदी शब्दसागर की प्रस्तावना
हिंदी कोविद रत्नमाला
57. ‘पंडिअ सअल सत्ता बक्खाणइ’ – यह पंक्ति किस सिद्ध कवि की है?
सरहपा
यह पंक्ति सरहपा की है, जिसमें वे पंडितों को शास्त्र ज्ञान पर गर्व करने के लिए फटकारते हैं।
लुइपा
कण्हपा
डोम्भिपा
58. ‘सिद्धों’ की रचनाओं की भाषा को ‘संध्याभाषा’ क्यों कहा जाता है?
क्योंकि इनकी भाषा में अर्थ के संकेत छुपे होते थे।
सिद्ध अपनी बानियों के सांकेतिक अर्थ बताते थे और अंतर्मुख साधना के रहस्यों के कारण इसे ‘संध्याभाषा’ कहते थे।
क्योंकि ये शाम को गाई जाती थीं।
क्योंकि यह संध्या काल की बोली थी।
क्योंकि यह बहुत कठिन भाषा थी।
59. ‘नवनाथों’ में कौन-सा नाम ‘सिद्धों’ की सूची में भी आता है?
हरिश्चंद्र
सत्यनाथ
नागार्जुन
नागार्जुन, चर्पट और जलंधर ये तीन नाम सिद्धों और नाथों दोनों की सूचियों में मिलते हैं।
जड़भरत
60. शुक्ल जी के अनुसार, ‘सधुक्कड़ी’ भाषा का प्रयोग किन कवियों ने अधिक किया?
रीतिबद्ध कवियों ने
निर्गुणपंथी संतों और नाथपंथियों ने
नाथपंथियों ने और आगे चलकर कबीर जैसे निर्गुण संतों ने ‘सधुक्कड़ी’ भाषा का सहारा लिया।
छायावादी कवियों ने
कृष्णभक्त कवियों ने
61. ‘शारंगधर’ द्वारा रचित ‘हम्मीर रासो’ के कुछ पद किस ग्रंथ में सुरक्षित मिले?
हिंदी शब्दसागर
मिश्रबंधु विनोद
शिवसिंह सरोज
प्राकृत-पिंगल सूत्र
शुक्ल जी को ‘प्राकृत-पिंगल सूत्र’ में हम्मीर के युद्धों के वर्णन वाले कई ओजस्वी पद्य मिले, जिन्हें वे शारंगधर के हम्मीर रासो का हिस्सा मानते हैं।
62. ‘रत्नाकर जोपम कथा’ के अनुसार गोरखनाथ का समय राहुल सांकृत्यायन ने क्या माना है?
दसवीं शताब्दी
राहुल सांकृत्यायन ने इस पुस्तक के आधार पर गोरखनाथ का समय विक्रम की दसवीं शताब्दी माना है।
आठवीं शताब्दी
तेरहवीं शताब्दी
पंद्रहवीं शताब्दी
63. ‘ज्ञानदेव’ (संवत् 1358) ने अपनी शिष्य परंपरा में गोरखनाथ के बाद किसका नाम लिया है?
जालंधरनाथ
गैनीनाथ
ज्ञानदेव ने परंपरा इस प्रकार बताई है: मत्स्येंद्रनाथ, गोरखनाथ, गैनीनाथ, निवृत्तिनाथ और ज्ञानेश्वर।
मत्स्येंद्रनाथ
निवृत्तिनाथ
64. ‘सिद्धों और योगियों’ की रचनाओं को शुक्ल जी ने ‘शुद्ध साहित्य’ क्यों नहीं माना?
क्योंकि उनका छंद शास्त्र गलत है।
क्योंकि वे अप्रामाणिक हैं।
क्योंकि वे केवल सांप्रदायिक शिक्षा मात्र हैं।
ये रचनाएँ तांत्रिक विधान, योगसाधना और सांप्रदायिक शिक्षा मात्र हैं, जिनका जीवन की स्वाभाविक अनुभूतियों से संबंध नहीं है।
क्योंकि वे विदेशी भाषा में हैं।
65. ‘परमाल रासो’ के लेखक कौन हैं?
चंदबरदाई
नरपति नाल्ह
मधुकर कवि
जगनिक
जगनिक ने ‘परमाल रासो’ की रचना की थी, जिसे ‘आल्हा का मूल रूप’ माना जाता है।
66. शुक्ल जी ने ‘आदिकाल’ की समय सीमा कहाँ से कहाँ तक मानी है?
चंद्रगुप्त से हर्ष के समय तक
अकबर के समय से औरंगजेब तक
केवल पृथ्वीराज के समय तक
राजा भोज से हम्मीरदेव के समय तक
शुक्ल जी के अनुसार, आदिकाल महाराज भोज के समय से लेकर हम्मीरदेव के समय के कुछ पीछे तक (संवत् 1050-1375) माना जा सकता है।
67. ‘मिश्रबंधु विनोद’ कितने भागों में प्रकाशित हुआ था?
दो
चार
एक
तीन
सन् 1913 में मिश्रबंधुओं ने इसे तीन भागों में प्रकाशित किया था।
68. नागरीप्रचारिणी सभा ने हस्तलिखित पुस्तकों की खोज का काम कब प्रारंभ किया?
1913
1929
1900
नागरीप्रचारिणी सभा ने सन् 1900 से पुस्तकों की खोज का काम हाथ में लिया था।
1889
69. ‘कीर्तिलता’ में किस राजा की वीरता का वर्णन है?
राजा जयचंद
राजा शिवसिंह
राजा हम्मीर
राजा कीर्तिसिंह
‘कीर्तिलता’ में तिरहुत के राजा कीर्तिसिंह की वीरता और उदारता का वर्णन है।
70. ‘वज्रयान’ शाखा में निर्वाण के तीन अवयव कौन-से ठहराए गए हैं?
ज्ञान, कर्म, भक्ति
धरती, आकाश, पाताल
शून्य, विज्ञान, महासुख
वज्रयान में निर्वाण के तीन अवयव शून्य, विज्ञान और महासुख माने गए हैं।
सत, चित, आनंद
71. शुक्ल जी ने ‘वीरगाथा काल’ में देशभाषा काव्य की कितनी पुस्तकें प्रसिद्ध मानी हैं?
दस
आठ
उन्होंने देशभाषा काव्य की आठ पुस्तकें (जैसे खुमान रासो, बीसलदेव रासो आदि) प्रसिद्ध मानी हैं।
चार
बारह
72. ‘देसिल बअना सब जन मिट्ठा’ – यहाँ ‘देसिल बअना’ का क्या अर्थ है?
बोलचाल की देशी भाषा
विद्यापति ने प्रचलित बोलचाल की भाषा को ‘देशी भाषा’ (देसिल बअना) कहा है।
संस्कृत भाषा
विदेशी भाषा
शास्त्रीय अपभ्रंश
73. ‘द्वयाश्रय काव्य’ की रचना किसने की है?
शारंगधर
हेमचंद्र
हेमचंद्र ने अपने व्याकरण के उदाहरणों के लिए ‘द्वयाश्रय काव्य’ की रचना की थी।
मेरुतुंग
सोमप्रभ सूरि
74. ‘विराट पुराण’ (संस्कृत ‘वैराट पुराण’ का अनुवाद) किस पंथ से संबंधित है?
गोरखपंथ
‘विराट पुराण’ गोरखपंथियों (नाथपंथ) द्वारा हिंदी में लिखी गई पुस्तकों में से एक है।
जैन पंथ
सूफी मत
सगुण भक्ति
75. ‘सिद्धों’ की भाषा में ‘इला-पिंगला’ के बीच कौन-सी नाड़ी का मार्ग बताया गया है?
जमुना
सरस्वती
सुषुम्ना
इला-पिंगला के बीच सुषुम्ना नाड़ी के मार्ग से शून्य देश की ओर यात्रा का संकेत ‘गंगा-जमुना’ के रूपक से दिया जाता था।
गंगा
76. ‘अपभ्रंश’ को शुक्ल जी ने और क्या नाम दिया है?
पुरानी हिंदी
पुरानी हिंदी और प्राकृताभास हिंदी
शुक्ल जी ने अपभ्रंश को ‘पुरानी हिंदी’ और ‘प्राकृताभास हिंदी’ (प्राकृत की रूढ़ियों में बद्ध) दोनों कहा है।
प्राकृताभास हिंदी
देशी भाषा
77. ‘Modern Vernacular Literature of Northern Hindustan’ (1889) के लेखक कौन हैं?
गार्सा द तासी
शिवसिंह सेंगर
मिश्रबंधु
जॉर्ज ग्रियर्सन
उपर्युक्त पुस्तक के लेखक जॉर्ज ग्रियर्सन हैं।
78. विद्यापति की कौन-सी रचना ‘अवहट्ट’ (अपभ्रंश) में है?
कीर्तिलता
विद्यापति की कीर्तिलता रचना ‘अवहट्ट’ (अपभ्रंश) में है
पदावली
रामचरित
पृथ्वीराज विजय
79. आचार्य शुक्ल ने ‘रीतिकाल’ की समय सीमा क्या मानी है?
संवत् 1375-1700
संवत् 1900-1984
संवत् 1700-1900
आचार्य शुक्ल ने ‘रीतिकाल’ की समय सीमा संवत् 1700-1900 मानी है।
संवत् 1050-1375
80. ‘नवनाथों’ में कौन-सा नाम शामिल नहीं है?
हरिश्चंद्र
सरहपा
‘नवनाथों’ में सरहपा का नाम शामिल नहीं है।
नागार्जुन
जड़भरत
81. विद्यापति ने ‘अपभ्रंश’ से भिन्न प्रचलित बोलचाल की भाषा को क्या कहा है?
देशी भाषा
विद्यापति ने ‘अपभ्रंश’ से भिन्न प्रचलित बोलचाल की भाषा को देशी भाषा कहा है।
पुरानी हिंदी
अवहट्ट
प्राकृत
82. अपभ्रंश का पुराना पता तांत्रिक और योगमार्गी बौद्धों की सांप्रदायिक रचनाओं में कब लगता है?
विक्रम की पांचवीं शताब्दी
विक्रम की दसवीं शताब्दी
विक्रम की बारहवीं शताब्दी
विक्रम की सातवीं शताब्दी के अंतिम चरण में
अपभ्रंश का पुराना पता तांत्रिक और योगमार्गी बौद्धों की सांप्रदायिक रचनाओं में विक्रम की सातवीं शताब्दी के अंतिम चरण में लगता है।

ये प्रश्न शुक्ल जी के मूल वक्तव्य और ‘आदिकाल’ के प्रकरणों की गहरी समझ पर आधारित हैं, जो अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाते हैं। ये प्रश्न आपकी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे, ऐसी आशा है। यह quiz कैसी लगी, कॉमेंट कर हमें बताएं।

Previous articleआचार्य रामचंद्र शुक्ल: हिंदी साहित्य का इतिहास आदिकाल quiz 1