आपकी परीक्षाओं (UP PGT/TGT, DSSSB, Assistant Professor) की तैयारी के लिए आचार्य रामचंद्र शुक्ल के ‘हिंदी साहित्य का इतिहास’ के आधार पर 40 महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs) नीचे दिए गए हैं। शुक्ल जी के इतिहास ग्रंथ पर आधारित यह quiz कालविभाग, आदिकाल, वीरगाथा काल पर आधारित है।
1. ‘साहित्य का इतिहास जनता की चित्तवृत्ति का संचित प्रतिबिंब होता है’ – यह प्रसिद्ध कथन किसका है?
हजारीप्रसाद द्विवेदी
डॉ. नगेंद्र
रामविलास शर्मा
आचार्य रामचंद्र शुक्ल
शुक्ल जी के अनुसार, किसी भी देश का साहित्य वहाँ की जनता की मानसिक स्थिति (चित्तवृत्ति) का प्रतिबिंब होता है और इस चित्तवृत्ति के परिवर्तन के साथ साहित्य के स्वरूप में भी बदलाव आता है।
2. शुक्ल जी ने हिंदी साहित्य के 900 वर्षों के इतिहास को कितने कालों में विभक्त किया है?
चार
शुक्लजी ने इसे चार कालों में बाँटा है: आदिकाल (वीरगाथा काल), पूर्व मध्यकाल (भक्ति काल), उत्तर मध्यकाल (रीति काल) और आधुनिक काल (गद्य काल)।
तीन
पाँच
छह
3. आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार ‘आदिकाल’ (वीरगाथा काल) की समय सीमा क्या है?
संवत् 1100 – 1400
संवत् 750 – 1000
संवत् 1050 – 1375
शुक्ल जी ने आदिकाल का समय महाराज भोज के समय से लेकर हम्मीरदेव के समय के कुछ पीछे तक यानी संवत् 1050 से 1375 तक माना है।
संवत् 1000 – 1350
4. आचार्य शुक्ल के अनुसार ‘गाथा’ कहने से किस भाषा का बोध होता था?
पाली
प्राकृत
शुक्ल जी के अनुसार- जैसे ‘दोहा’ या ‘दूहा’ कहने से अपभ्रंश का बोध होता था, वैसे ही ‘गाथा’ कहने से प्राकृत भाषा का बोध होता था।
अपभ्रंश
हिंदी
5. आचार्य शुक्ल के अनुसार हिंदी साहित्य का आविर्भाव कब से माना जा सकता है?
खड़ी बोली के उदय से
प्राकृत की अंतिम अपभ्रंश अवस्था से
शुक्ल जी के अनुसार, प्राकृत की अंतिम अपभ्रंश अवस्था से ही हिंदी साहित्य का उदय माना जा सकता है।
संस्कृत की प्रारंभिक अवस्था से
वैदिक संस्कृत से
6. शुक्ल जी ने आदिकाल को ‘वीरगाथा काल’ नाम किन ग्रंथों की प्रचुरता के आधार पर दिया?
जैन साहित्य
सिद्ध साहित्य
सूफी काव्य
रासो ग्रंथ
शुक्ल जी ने 12 पुस्तकों को आधार माना, जिनमें से अधिकांश वीरगाथात्मक (रासो) थीं, इसलिए इसे ‘वीरगाथा काल’ कहा।
7. शुक्ल जी के अनुसार ‘सिद्धों’ की संख्या कितनी मानी गई है?
9
12
108
84
शुक्लजी ‘हिंदी साहित्य का इतिहास’ में लिखा है कि तांत्रिक योगियों में ‘चौरासी सिद्ध’ हुए हैं, जिनका प्रभाव जनता पर विक्रम की दसवीं शताब्दी से था।
8. आचार्य रामचंद्र के अनुसार सिद्धों में सबसे पुराने कौन माने जाते हैं?
सरहपा
आचार्य रामचंद्र के अनुसार सिद्धों में सबसे पुराने ‘सरह’ (सरोजवज्र) हैं, जिनका काल विक्रम संवत् 690 के आसपास माना गया है।
लुइपा
कण्हपा
गोरखनाथ
9. ‘देसिल बअना सब जन मिट्ठा’ – यह प्रसिद्ध पंक्ति किसकी है?
विद्यापति
विद्यापति ने अपनी भाषा के संदर्भ में कहा था कि ‘देशी भाषा’ (बोलचाल की भाषा) सबको मीठी लगती है।
अमीर खुसरो
कबीरदास
चंदबरदाई
10. ‘श्रावकाचार’ (संवत् 990) नामक ग्रंथ के रचयिता कौन हैं?
हेमचंद्र
जोइंदु
देवसेन
देवसेन नामक जैन ग्रंथकार ने संवत् 990 में ‘श्रावकाचार’ की रचना दोहों में की थी।
पुष्पदंत
11. ‘सिद्ध हेमचंद्र शब्दानुशासन’ किस प्रकार का ग्रंथ है?
ज्योतिष ग्रंथ
नाटक
व्याकरण ग्रंथ
हेमचंद्र ने एक बड़ा व्याकरण ग्रंथ बनाया जिसमें संस्कृत, प्राकृत और अपभ्रंश तीनों का समावेश किया गया।
काव्य ग्रंथ
12. ‘भल्ला हुआ जु मारिया बहिणि महारा कंतु’ – यह दोहा शुक्ल जी ने किस कवि के संदर्भ में उद्धृत किया है?
हेमचंद्र
यह अपभ्रंश का प्रसिद्ध दोहा हेमचंद्र के व्याकरण ग्रंथ में उदाहरण के रूप में मिलता है।
विद्यापति
सोमप्रभ सूरि
मुंज
13. ‘प्रबंधचिंतामणि’ के रचयिता कौन हैं?
धनपाल
मेरुतुंग
जैनाचार्य मेरुतुंग ने संवत् 1361 में ‘प्रबंधचिंतामणि’ नामक ग्रंथ बनाया था।
सोमप्रभ सूरि
शारंगधर
14. नाथ पंथ के प्रवर्तक कौन माने जाते हैं?
जालंधरनाथ
चौरंगीनाथ
गोरखनाथ
गोरखनाथ ने पतंजलि के उच्च लक्ष्य (ईश्वर प्राप्ति) को लेकर ‘हठयोग’ का प्रवर्तन किया और नाथ पंथ चलाया।
मत्स्येंद्रनाथ
15. ‘सधुक्कड़ी’ भाषा का ढाँचा शुक्ल जी ने क्या बताया है?
ब्रज मिश्रित अवधी
मैथिली मिश्रित अपभ्रंश
शुद्ध संस्कृत
खड़ी बोली लिए राजस्थानी
शुक्लजी के अनुसार नाथपंथ के जोगियों ने अपनी बानियों के लिए जिस भाषा का सहारा लिया, उसका ढाँचा खड़ी बोली युक्त राजस्थानी था।
16. ‘आधुनिक काल’ में सबसे प्रधान साहित्यिक घटना शुक्ल जी किसे मानते हैं?
नाटकों का लेखन
उपन्यासों की शुरुआत
गद्य का आविर्भाव
शुक्ल जी के अनुसार आधुनिक काल में ‘गद्य का आविर्भाव’ सबसे प्रधान साहित्यिक घटना है।
कविता का विकास
17. ‘मिश्रबंधु विनोद’ का उपयोग शुक्ल जी ने अपने इतिहास में किस रूप में किया?
कवियों के परिचयात्मक विवरण लेने के लिए
शुक्ल जी ने स्वीकार किया है कि रीतिकाल के कवियों का परिचयात्मक विवरण उन्होंने प्राय: ‘मिश्रबंधु विनोद’ से ही लिया है।
केवल आलोचना के लिए
काल-विभाजन के लिए
इसे इतिहास नहीं माना
18. ‘पंडिअ सअल सत्ता बक्खाणइ’ – यह फटकार पंडितों को किस सिद्ध ने दी थी?
डोम्भिपा
सरहपा
सरहपा ने अपनी बानियों में पंडितों को शास्त्र ज्ञान पर गर्व करने के लिए फटकारा था।
कण्हपा
लुइपा
19. शुक्ल जी ने ‘वीरगाथा काल’ में कितनी साहित्यिक पुस्तकों को प्रमाण स्वरूप स्वीकार किया है?
8
10
15
12
शुक्ल जी ने 4 अपभ्रंश और 8 देशभाषा की, कुल 12 पुस्तकों के आधार पर इस काल का नामकरण किया।
20. ‘आल्हाखण्ड’ का मूल रूप शुक्ल जी ने किस पुस्तक को माना है?
परमाल रासो
‘परमाल रासो’ को ही शुक्ल जी ने ‘आल्हा का मूल रूप’ माना है।
पृथ्वीराज रासो
खुमान रासो
विजयपाल रासो
21. ‘कीर्तिलता’ की भाषा को विद्यापति ने क्या कहा है?
पुरानी हिंदी
प्राकृत
मैथिली
अवहट्टा
‘कीर्तिलता’ की भाषा को विद्यापति ने ‘अवहट्टा’ कहा है। उन्होंने लिखा है- ‘तें तैंसन जंपओं अवहट्ठा’।
22. ‘वज्रयान’ शाखा में निर्वाण के कितने अवयव ठहराए गए हैं?
पाँच
तीन
वज्रयान में निर्वाण के तीन अवयव माने गए हैं- शून्य, विज्ञान और महासुख।
दो
चार
23. ‘सिद्धों’ की भाषा को क्या नाम दिया गया है?
डिंगल
संध्याभाषा
सिद्ध अपनी बानियों की भाषा को ‘संध्याभाषा’ (सांकेतिक भाषा) कहते थे।
सधुक्कड़ी
खिचड़ी
24. गोरखनाथ के गुरु का नाम क्या था?
निवृत्तिनाथ
मत्स्येंद्रनाथ
गोरखनाथ के गुरु मत्स्येंद्रनाथ (मछंदरनाथ) थे, जो प्रसिद्ध सिद्धों की सूची में भी आते हैं।
चूँकरनाथ
जालंधरनाथ
25. ‘नवनाथों’ की संख्या और उनके नाम किस ग्रंथ में मिलते हैं?
गोरक्ष-सिद्धांत-संग्रह
‘गोरक्षसिद्धांतसंग्रह’ में नौ नाथों के मार्ग प्रवर्तकों के नाम गिनाए गए हैं।
नाथ-सिद्धांत-संग्रह
हठयोग प्रदीपिका
विवेक मार्तंड
26. शुक्ल जी के अनुसार भक्ति काल को कितनी शाखाओं में विभाजित किया गया है?
दो
तीन
छह
चार
दो मुख्य धाराएँ (निर्गुण और सगुण) और प्रत्येक की दो-दो शाखाएँ (ज्ञानाश्रयी-प्रेममार्गी और रामभक्ति-कृष्णभक्ति), कुल चार शाखाएँ।
27. ‘हिंदी शब्दसागर’ की भूमिका के रूप में शुक्ल जी का कौन-सा लेख प्रकाशित हुआ था?
हिंदी साहित्य का विकास
जनवरी 1929 में ‘हिंदी साहित्य का विकास’ नाम से यह लेख प्रकाशित हुआ था, जो बाद में ‘हिंदी साहित्य का इतिहास’ बना।
हिंदी साहित्य का इतिहास
हिंदी भाषा का उदय
आधुनिक साहित्य
28. ‘शिवसिंह सरोज’ का प्रकाशन वर्ष क्या है?
1913 ई.
1883 ई.
ठाकुर शिवसिंह सेंगर ने सन् 1833 ई. में कवियों का वृत्तसंग्रह प्रस्तुत किया था।
1833 ई.
1900 ई.
29. ‘मॉडर्न वर्नाक्युलर लिटरेचर ऑव नार्दर्न हिंदुस्तान’ के लेखक कौन हैं?
मिश्रबंधु
विलियम जोन्स
जॉर्ज ग्रियर्सन
सन् 1889 में डॉ. (सर) ग्रियर्सन ने यह महत्वपूर्ण ग्रंथ लिखा था।
गार्सा द तासी
30. शुक्ल जी ने ‘रीतिकाल’ का नामकरण किस आधार पर किया?
दरबारी संस्कृति
रीतिबद्ध रचनाओं की प्रचुरता
रीतिबद्ध रचनाओं की परंपरा के कारण उन्होंने इसे ‘रीतिकाल’ कहा।
श्रृंगार की अधिकता
लक्षण ग्रंथों का अभाव
31. ‘हम्मीर रासो’ के रचयिता कौन माने जाते हैं?
जगनिक
शारंगधर
परंपरा के अनुसार शारंगधर ने ‘हम्मीर रासो’ की रचना की थी, जिसके कुछ पद ‘प्राकृत-पिंगल सूत्र’ में मिलते हैं।
चंदबरदाई
नरपति नाल्ह
32. ‘विद्यापति पदावली’ की रचना किस भाषा में हुई है?
मैथिली
विद्यापति ने अपनी ‘पदावली’ देशभाषा यानी मैथिली में लिखी है।
अपभ्रंश
अवहट्टा
ब्रज
33. शुक्ल जी ने सिद्धों और योगियों की रचनाओं को ‘शुद्ध साहित्य’ की कोटि में क्यों नहीं रखा?
क्योंकि वे गद्य में हैं।
क्योंकि उनकी भाषा बहुत पुरानी है।
क्योंकि वे विदेशी प्रभाव में लिखी गईं।
क्योंकि वे केवल सांप्रदायिक शिक्षा मात्र हैं।
शुक्ल जी का मानना है कि ये रचनाएँ योग साधना और सांप्रदायिक शिक्षा मात्र हैं, जिनका जीवन की स्वाभाविक अनुभूतियों से संबंध नहीं है।
34. ‘अमीर खुसरो’ का समय शुक्ल जी ने किस काल के अंतर्गत रखा है?
आदिकाल के अंत में
खुसरो की पहेलियों को उन्होंने आदिकाल की 12 महत्वपूर्ण पुस्तकों में स्थान दिया है।
भक्तिकाल के प्रारंभ में
रीतिकाल में
आधुनिक काल में
35. शुक्लजी ने संवत् 1050 से संवत् 1375 तक के काल को क्या कहा है?
भक्ति काल
रीति काल
आधुनिक काल
वीरगाथा काल
इस समय अवधि को शुक्ल जी ने वीरगाथा काल नाम दिया है।
36. ‘एक नार ने अचरज किया, साँप मार पिंजरे में दिया’ – यह पहेली किसकी है?
कबीर
चंदबरदाई
खुसरो
उपरोक्त पहेली खुसरो की है।
विद्यापति
37. बौद्ध धर्म विकृत होकर किस संप्रदाय के रूप में देश के पूर्वी भागों में फैला?
श्वेतांबर
वज्रयान
बौद्ध धर्म विकृत होकर वज्रयान संप्रदाय के रूप में देश के पूर्वी भागों में फैला।
हीनयान
दिगंबर
38. जैन आचार्य हेमचंद्र किसके दरबार में थे?
हम्मीरदेव
पृथ्वीराज
राजा सिद्धराज जयसिंह और कुमारपाल
जैन आचार्य हेमचंद्र ‘राजा सिद्धराज जयसिंह और कुमारपाल’ के दरबार में थे।
राजा मुंज
39. ‘प्राकृत-पिंगल सूत्र’ में किस राजा की वीरता के पद्य मिलते हैं?
राजा भोज
पृथ्वीराज चौहान
जयचंद
हम्मीरदेव
‘प्राकृत-पिंगल सूत्र’ में राजा ‘हम्मीरदेव’ की वीरता के पद्य मिलते हैं।
40. आचार्य शुक्ल ने आधुनिक काल को क्या नाम दिया है?
वर्तमान काल
विकास काल
आधुनिक काल
गद्य काल
आचार्य शुक्ल ने आधुनिक काल को ‘गद्य काल’ नाम दिया है।
41. शुक्लजी के अनुसार ‘दोहा’ या ‘दूहा’ कहने से किस भाषा का बोध होता था?
अपभ्रंश या पुरानी हिंदी
‘दोहा’ या ‘दूहा’ कहने से अपभ्रंश या पुरानी हिंदी भाषा का बोध होता था।
प्राकृत
अवधी
ब्रज
आशा करता हूँ कि ये प्रश्न आपकी परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे। ये पूरी तरह से आचार्य शुक्ल के मूल पाठ पर आधारित हैं। यदि किसी प्रश्न में कोई त्रुटि दिखे तो कॉमेंट कर सूचित करें। शुक्ल जी के इतिहास ग्रंथ पर आधारित आदिकाल संबंधी अगला quiz जल्द ही आएगा। धन्यवाद।








