इस ब्लॉग में हम आचार्य रामचंद्र शुक्ल के ‘हिंदी साहित्य का इतिहास’ से आधुनिक काल गद्य खंड पर आधारित 59 महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs) और दिए गए हैं। ये सभी quiz गद्य खंड पर आधारित हैं जो PGT, TGT, DSSSB, LT Grade और Assistant Professor जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सहायक होंगे। यहाँ दिए गए प्रश्न न केवल परीक्षा दृष्टि से उपयोगी हैं, बल्कि हिंदी साहित्य की गहराई को समझने में भी मदद करेंगे।
आइए, आधुनिक काल- गद्य खंड के वस्तुनिष्ठ प्रश्न को Quiz के माध्यम से सरल और रोचक ढंग से जानें-
1. आचार्य शुक्ल के अनुसार, आधुनिक काल के पूर्व साहित्य की मुख्य भाषा क्या थी?
अपभ्रंश
ब्रजभाषा
शुक्ल जी के अनुसार, आधुनिक काल के पूर्व साहित्य की भाषा मुख्य रूप से ब्रजभाषा ही रही है और गद्य की जो पुरानी रचनाएँ मिलती हैं, वे भी ब्रजभाषा में ही हैं।
खड़ी बोली
अवधी
2. गोरखपंथी ग्रंथों का निर्माण काल शुक्ल जी ने किसके आस-पास माना है?
संवत् 1500
संवत् 1600
संवत् 1407
हिंदी पुस्तकों की खोज में हठयोग और ब्रह्मज्ञान से संबंधित कई गोरखपंथी ग्रंथ मिले हैं, जिनका निर्माण काल संवत् 1407 के आसपास माना गया है।
संवत् 1300
3. ‘श्रृंगाररस मंडन’ नामक ब्रजभाषा गद्य ग्रंथ के रचयिता कौन हैं?
नाभादास
गोसाईं विट्ठलनाथ
भक्तिकाल में कृष्णभक्ति शाखा के भीतर गोसाईं विट्ठलनाथ जी ने ‘श्रृंगाररस मंडन’ नामक ग्रंथ ब्रजभाषा गद्य में लिखा था।
गोसाईं गोकुलनाथ
बल्लभाचार्य
4. ‘चौरासी वैष्णवों की वार्ता’ का रचनाकाल आचार्य शुक्ल ने कब माना है?
सत्रहवीं शताब्दी का उत्तरार्द्ध
शुक्लजी के अनुसार ‘चौरासी वैष्णवों की वार्ता’ का रचनाकाल विक्रम की सत्रहवीं शताब्दी का उत्तरार्द्ध माना जा सकता है।
सोलहवीं शताब्दी का पूर्वार्द्ध
अठारहवीं शताब्दी
पंद्रहवीं शताब्दी
5. ‘अष्टयाम’ नामक ब्रजभाषा गद्य पुस्तक के लेखक कौन हैं?
सूरदास
वैकुंठमणि शुक्ल
लल्लूलाल
नाभादास
नाभादास जी ने संवत् 1660 के आसपास ‘अष्टयाम’ नामक पुस्तक ब्रजभाषा में लिखी, जिसमें भगवान राम की दिनचर्या का वर्णन है।
6. ‘अगहन माहात्म्य’ और ‘वैशाख माहात्म्य’ के रचयिता कौन हैं?
सुरति मिश्र
गंग कवि
सदल मिश्र
वैकुंठमणि शुक्ल
संवत् 1680 के लगभग वैकुंठमणि शुक्ल ने ब्रजभाषा गद्य में ये दो छोटी पुस्तकें लिखी थीं।
7. ‘आईने अकबरी की भाषा वचनिका’ के लेखक कौन हैं?
लल्लूलाल
इंशाअल्ला खाँ
लाला हीरालाल
जयपुर नरेश सवाई प्रतापसिंह की आज्ञा से लाला हीरालाल ने संवत् 1852 में इस ग्रंथ की रचना की थी।
मुंशी सदासुखलाल
8. खड़ी बोली में ‘चंद छंद बरनन की महिमा’ लिखने वाले कवि कौन थे?
गंग कवि
अकबर के समय में गंग कवि ने ‘चंद छंद बरनन की महिमा’ नामक गद्य पुस्तक खड़ी बोली में लिखी थी।
खुसरो
कबीर
भूषण
9. आचार्य शुक्ल ने ‘परिमार्जित गद्य की प्रथम पुस्तक’ किसे माना है?
प्रेमसागर
भाषायोगवासिष्ठ
संवत् 1798 में रामप्रसाद ‘निरंजनी’ द्वारा लिखित ‘भाषायोगवासिष्ठ’ को शुक्ल जी ने परिमार्जित गद्य की प्रथम पुस्तक माना है।
रानी केतकी की कहानी
नासिकेतोपाख्यान
10. रामप्रसाद ‘निरंजनी’ किस दरबार में कथावाचक थे?
जयपुर दरबार
दिल्ली दरबार
काशी दरबार
पटियाला दरबार
रामप्रसाद ‘निरंजनी’ पटियाला दरबार में थे और महारानी को कथा बाँचकर सुनाया करते थे।
11. संवत् 1818 में ‘जैन पद्मपुराण’ का भाषानुवाद किसने किया?
सदासुखलाल
लल्लूलाल
सदल मिश्र
दौलतराम
मध्य प्रदेश के बसवा निवासी पं. दौलतराम ने हरिषेणाचार्य कृत ‘जैन पद्मपुराण’ का भाषानुवाद किया था।
12. ‘उदयभानचरित’ किस पुस्तक का दूसरा नाम है?
रानी केतकी की कहानी
सैयद इंशाअल्ला खाँ ने ‘उदयभानचरित या रानी केतकी की कहानी’ की रचना संवत् 1855 और 1860 के बीच की थी।
प्रेमसागर
नासिकेतोपाख्यान
सुखसागर
13. फोर्ट विलियम कॉलेज के हिंदी-उर्दू अध्यापक कौन थे?
गार्सां द तासी
जॉन गिलक्राइस्ट
संवत् 1860 में फोर्ट विलियम कॉलेज (कलकत्ता) के हिंदी-उर्दू अध्यापक जॉन गिलक्राइस्ट ने गद्य पुस्तकें तैयार कराने की व्यवस्था की थी।
विलियम केरे
फ्रेडरिक पिंकाट
14. खड़ी बोली गद्य को एक साथ आगे बढ़ाने वाले ‘चार महानुभावों’ में कौन शामिल नहीं है?
लल्लूलाल
सदल मिश्र
राजा शिवप्रसाद
शुक्ल जी के अनुसार गद्य को आगे बढ़ाने वाले चार मुख्य लेखक मुंशी सदासुखलाल, इंशाअल्ला खाँ, लल्लूलाल और सदल मिश्र थे।
मुंशी सदासुखलाल
15. ‘सुखसागर’ के रचयिता कौन माने जाते हैं?
सदल मिश्र
लल्लूलाल
इंशाअल्ला खाँ
मुंशी सदासुखलाल ‘नियाज’
मुंशी सदासुखलाल ‘नियाज’ ने विष्णुपुराण से उपदेशात्मक प्रसंग लेकर अपनी पुस्तक लिखी थी।
16. ‘रस्मौ रिवाज भाखा का दुनिया से उठ गया’ – यह खेद किसने प्रकट किया था?
लल्लूलाल
भारतेंदु
राजा लक्ष्मण सिंह
मुंशी सदासुखलाल
उर्दू के बढ़ते प्रभाव के कारण संस्कृतमिश्रित हिंदी (भाखा) का चलन कम होते देख मुंशी सदासुखलाल ने यह खेद व्यक्त किया था।
17. इंशाअल्ला खाँ ने अपनी भाषा में किन शब्दों को न आने देने की प्रतिज्ञा की थी?
भाखापन (संस्कृत शब्द)
उपर्युक्त सभी
इंशा ने अपनी भाषा को बाहर की बोली, गँवारी और भाखापन तीनों से मुक्त रखने की प्रतिज्ञा की थी।
बाहर की बोली (अरबी, फारसी)
गँवारी (ब्रज, अवधी)
18. ‘प्रेमसागर’ के लेखक लल्लूलाल जी कहाँ के रहने वाले थे?
आगरा
लल्लूलाल जी आगरा के रहने वाले गुजराती ब्राह्मण थे।
दिल्ली
बिहार
बनारस
19. लल्लूलाल जी की भाषा को आचार्य शुक्ल ने क्या कहा है?
ब्रजरंजित खड़ी बोली
शुक्ल जी के अनुसार मुंशीजी की भाषा साफ-सुथरी है, पर लल्लूलाल की भाषा कृष्णोपासक व्यासों की ‘ब्रजरंजित खड़ी बोली’ है।
चटकीली-मटकीली भाषा
पंडिताऊ भाषा
ठेठ हिंदी
20. ‘नासिकेतोपाख्यान’ के रचयिता सदल मिश्र कहाँ के निवासी थे?
आगरा
राजस्थान
पंजाब
बिहार
सदल मिश्र बिहार के रहने वाले थे और फोर्ट विलियम कॉलेज में काम करते थे।
21. आधुनिक हिंदी गद्य का ‘पूरा-पूरा आभास’ शुक्ल जी को किन दो लेखकों की भाषा में मिलता है?
सदासुखलाल और सदल मिश्र
शुक्ल जी के अनुसार, व्यवहारोपयोगी आधुनिक हिंदी का पूरा आभास मुंशी सदासुखलाल और सदल मिश्र की भाषा में मिलता है।
लल्लूलाल और इंशा
राजा शिवप्रसाद और राजा लक्ष्मण सिंह
भारतेंदु और प्रतापनारायण मिश्र
22. ‘इंजील’ (बाइबिल) का हिंदी अनुवाद संवत् 1866 में किसने प्रकाशित किया?
जॉन गिलक्राइस्ट
फ्रेडरिक पिंकाट
मार्शमैन
विलियम केरे
सिरामपुर के पादरी विलियम केरे के उद्योग से इंजील का हिंदी अनुवाद संवत् 1866 में प्रकाशित हुआ था।
23. ‘उदंत मार्तंड’ नामक प्रथम हिंदी समाचार पत्र के संपादक कौन थे?
मुंशी सदासुखलाल
तारा मोहन मित्र
पं. जुगुलकिशोर
कानपुर के निवासी पं. जुगुलकिशोर ने संवत् 1883 में ‘उदंत मार्तंड’ निकाला, जिसे हिंदी का पहला समाचार पत्र माना जाता है।
राजा राममोहन राय
24. ‘बनारस अखबार’ किसने निकलवाया था?
राजा लक्ष्मण सिंह
राजा शिवप्रसाद ‘सितारेहिंद’
राजा शिवप्रसाद ने संवत् 1902 में काशी से ‘बनारस अखबार’ निकलवाया था, जिसकी भाषा उर्दू प्रधान थी।
भारतेंदु हरिश्चंद्र
नवीनचंद्र राय
25. संवत् 1909 में आगरा से ‘बुद्धि प्रकाश’ नामक पत्र किसके संपादन में निकला?
लल्लूलाल
पं. वंशीधर
शिवप्रसाद
मुंशी सदासुखलाल
मुंशी सदासुखलाल के प्रबंध और संपादन में आगरा से ‘बुद्धि प्रकाश’ निकला, जिसकी भाषा बहुत अच्छी थी।
26. किस वर्ष उर्दू को संयुक्त प्रांत के दफ्तरों की भाषा बना दिया गया?
संवत् 1894
शुक्ल जी के अनुसार मुसलमानों के प्रयास से संवत् 1894 (सन् 1837 ई.) में उर्दू संयुक्त प्रांत के दफ्तरों की भाषा बना दी गई।
संवत् 1860
संवत् 1902
संवत् 1925
27. हिंदी को ‘गँवारी बोली’ बताकर उसका विरोध करने वाले नेता कौन थे?
राजा लक्ष्मण सिंह
गार्सां द तासी
राजा शिवप्रसाद
सर सैयद अहमद खाँ
सर सैयद अहमद खाँ हिंदी को गँवारी बोली कहते थे और उर्दू का पक्ष लेते थे।
28. ‘राजा भोज का सपना’ और ‘आलसियों का कोड़ा’ कहानियों के लेखक कौन हैं?
राजा शिवप्रसाद ‘सितारेहिंद’
राजा शिवप्रसाद ने शिक्षा विभाग में रहते हुए पाठ्यक्रम के लिए ये कहानियाँ लिखी थीं।
भारतेंदु
राजा लक्ष्मण सिंह
श्रद्धाराम फुल्लौरी
29. ‘इतिहासतिमिरनाशक’ ग्रंथ के रचयिता कौन हैं?
पं. वंशीधर
सदल मिश्र
राजा शिवप्रसाद
यह राजा शिवप्रसाद का प्रसिद्ध ग्रंथ है, जिसकी भाषा में उर्दूपन अधिक था।
लाला हीरालाल
30. राजा लक्ष्मण सिंह ने ‘अभिज्ञान शाकुंतल’ का हिंदी अनुवाद कब प्रकाशित किया?
संवत् 1900
संवत् 1924
संवत् 1930
संवत् 1919
राजा लक्ष्मण सिंह ने संवत् 1919 में बहुत सरस और विशुद्ध हिंदी में ‘अभिज्ञान शाकुंतल’ का अनुवाद किया।
31. ‘हिंदी और उर्दू दो बोली न्यारी-न्यारी हैं’ – यह प्रसिद्ध मत किसका है?
राजा लक्ष्मण सिंह
राजा लक्ष्मण सिंह का मानना था कि हिंदी हिंदुओं की भाषा है और उर्दू मुसलमानों की।
राजा शिवप्रसाद
भारतेंदु हरिश्चंद्र
गार्सां द तासी
32. वह अंग्रेज विद्वान जो आजीवन हिंदी की सेवा और हितसाधना में तत्पर रहे?
फ्रेडरिक पिंकाट
पिंकाट साहब ने लंदन में रहकर हिंदी के प्रचार और लेखकों की सहायता के लिए बहुत कार्य किया।
जॉन गिलक्राइस्ट
विलियम केरे
लॉर्ड मेकाले
33. पंजाब में हिंदी और स्त्री शिक्षा का प्रचार करने वाले मुख्य व्यक्ति कौन थे?
नवीनचंद्र राय
बाबू नवीनचंद्र राय ने पंजाब में शिक्षा विभाग में रहकर हिंदी पुस्तकों और स्त्री शिक्षा का खूब प्रचार किया।
श्रद्धाराम फुल्लौरी
दयानंद सरस्वती
राजा राममोहन राय
34. स्वामी दयानंद सरस्वती ने ‘सत्यार्थप्रकाश’ की रचना किस भाषा में की?
संस्कृत
ब्रजभाषा
गुजराती
हिंदी
स्वामी जी ने अपना ग्रंथ ‘सत्यार्थप्रकाश’ हिंदी में ही प्रकाशित किया, जिसे वे ‘आर्यभाषा’ कहते थे।
35. ‘भाग्यवती’ नामक सामाजिक उपन्यास के लेखक कौन हैं?
लाला श्रीनिवास दास
देवकीनंदन खत्री
श्रद्धाराम फुल्लौरी
पंजाब के प्रसिद्ध विद्वान पं. श्रद्धाराम फुल्लौरी ने संवत् 1934 में ‘भाग्यवती’ उपन्यास लिखा था।
भारतेंदु
36. “भारत में भाषा के लेखक दो हैं- एक काशी में, दूसरा पंजाब में” – यह कथन किसका है?
राजा शिवप्रसाद का
नवीनचंद्र राय का
श्रद्धाराम फुल्लौरी का
अपनी मृत्यु के समय श्रद्धाराम जी ने यह कहा था, जहाँ काशी के लेखक से उनका अभिप्राय भारतेंदु से था।
भारतेंदु का
37. ‘प्रजाहितैषी’ नामक पत्र आगरा से किसने निकाला था?
मुंशी सदासुखलाल
सदल मिश्र
राजा लक्ष्मण सिंह
राजा लक्ष्मण सिंह ने संवत् 1918 में आगरा से ‘प्रजाहितैषी’ पत्र निकाला था।
राजा शिवप्रसाद
38. ‘ज्ञानप्रदायिनी पत्रिका’ का प्रकाशन किसने किया था?
दयानंद सरस्वती
भारतेंदु
जुगुलकिशोर
नवीनचंद्र राय
नवीनचंद्र राय ने ब्रह्मसमाज के सिद्धांतों और शिक्षा के प्रचार के लिए संवत् 1924 में यह पत्रिका निकाली थी।
39. आचार्य शुक्ल के अनुसार, गद्य के लिए खड़ी बोली को ग्रहण करने में संकोच क्यों नहीं हुआ?
क्योंकि ब्रजभाषा बहुत कठिन थी।
क्योंकि तब तक गद्य का कोई साहित्य नहीं खड़ा हुआ था।
शुक्लजी के अनुसार, जिस समय खड़ी बोली उठी, उस समय तक गद्य का विकास या साहित्य नहीं था, इसलिए इसे अपनाने में संकोच नहीं हुआ।
क्योंकि यह मुसलमानों की भाषा थी।
क्योंकि अंग्रेजों ने दबाव डाला था।
40. ‘शकुंतला नाटक’ की भाषा देखकर कौन अंग्रेज विद्वान बहुत प्रसन्न हुए थे?
हैवेल
फ्रेडरिक पिंकाट
राजा लक्ष्मण सिंह के ‘शकुंतला नाटक’ की भाषा से पिंकाट साहब बहुत प्रभावित हुए थे।
जॉन गिलक्राइस्ट
विलियम केरे
41. संवत् 1400 के आसपास के जिस ब्रजभाषा गद्य का नमूना शुक्ल जी ने दिया है, उसमें ‘पूछिबा’, ‘कहिबा’ जैसे प्रयोगों के आधार पर लेखक कहाँ का निवासी जान पड़ता है?
पंजाब
राजपूताना
शुक्ल जी के अनुसार, इन विशिष्ट प्रयोगों के कारण गद्य लिखने वाला राजपूताने का निवासी जान पड़ता है।
ब्रज क्षेत्र
बुंदेलखंड
42. ‘चौरासी वैष्णवों की वार्ता’ के बारे में शुक्ल जी का क्या मत है?
यह गोकुलनाथ जी की ही रचना है।
यह विट्ठलनाथ जी की रचना है।
यह औरंगजेब के समय लिखी गई थी।
यह गोकुलनाथ जी के किसी शिष्य की रचना जान पड़ती है।
पुस्तक में गोकुलनाथ जी का कई जगह बहुत भक्तिभाव से उल्लेख होने के कारण शुक्ल जी इसे उनके किसी शिष्य की रचना मानते हैं।
43. शुक्ल जी ने किसे ‘प्रथम प्रौढ़ गद्य लेखक’ माना है?
सदल मिश्र
मुंशी सदासुखलाल
रामप्रसाद ‘निरंजनी’
‘भाषायोगवासिष्ठ’ (संवत् 1798) जैसी परिमार्जित पुस्तक लिखने के कारण शुक्ल जी इन्हें प्रथम प्रौढ़ गद्य लेखक मानते हैं।
लल्लूलाल
44. ‘भाषायोगवासिष्ठ’ को परिमार्जित गद्य की प्रथम पुस्तक मानने का मुख्य कारण क्या है?
इसमें ब्रजभाषा का पुट है।
यह फोर्ट विलियम कॉलेज में लिखी गई थी।
इसकी भाषा साफ-सुथरी, श्रृंखलाबद्ध और व्यवस्थित है।
शुक्ल जी के अनुसार यह पुस्तक मुंशी सदासुखलाल और लल्लूलाल से 62 वर्ष पहले ही परिमार्जित गद्य का उदाहरण पेश करती है।
इसकी भाषा बहुत पुरानी है।
45. सैयद इंशाअल्ला खाँ का जन्म कहाँ हुआ था?
कश्मीर
मुर्शिदाबाद
इंशा के पिता दिल्ली से मुर्शिदाबाद चले गए थे, जहाँ इंशा का जन्म हुआ था।
दिल्ली
लखनऊ
46. इंशाअल्ला खाँ ने अपनी कहानी के लिए किस शब्द का प्रयोग किया है जो ‘साहित्यिक हिंदी’ के लिए मुसलमान प्रयुक्त करते थे?
भाखा
संस्कृतमिश्रित हिंदी को ही उर्दू-फारसी वाले ‘भाखा’ या ‘भाषा’ कहा करते थे, जिसे इंशा ने अपनी प्रतिज्ञा में शामिल किया था।
रेखता
हिंदवी
उर्दू
47. लल्लूलाल जी ने ‘प्रेमसागर’ की रचना किसके आदेश पर की थी?
राजा शिवप्रसाद
फ्रेडरिक पिंकाट
विलियम केरे
जॉन गिलक्राइस्ट
संवत् 1860 में फोर्ट विलियम कॉलेज के अध्यापक जॉन गिलक्राइस्ट के आदेश पर उन्होंने इसकी रचना की थी।
48. सदल मिश्र की भाषा में किन शब्दों का प्रभाव स्थान-स्थान पर मिलता है?
पूरबी
सदल मिश्र बिहार के निवासी थे, इसलिए उनकी भाषा में ‘इहाँ’, ‘मतारी’, ‘जौन’ जैसे पूरबी (बिहार की बोली) के शब्द मिलते हैं।
पंजाबी
राजस्थानी
ब्रजभाषा
49. ईसाई धर्मप्रचारकों ने अपने मत के प्रचार के लिए किस भाषा को आधार बनाया?
संस्कृतमिश्रित विशुद्ध हिंदी
पादरियों ने अनुभव किया कि साधारण जनता संस्कृतमिश्रित विशुद्ध हिंदी से अधिक परिचित है, इसलिए उन्होंने ‘उर्दूपन’ को दूर रखा।
उर्दूपन वाली हिंदी
फारसी मिश्रित हिंदी
अंग्रेजी मिश्रित हिंदी
50. ‘उदंत मार्तंड’ (संवत् 1883) में ‘खड़ी बोली’ को किस नाम से पुकारा गया है?
हिंदुस्तानी
आर्यभाषा
भाखा
मध्यदेशीय भाषा
इस पहले समाचार पत्र में खड़ी बोली का उल्लेख ‘मध्यदेशीय भाषा’ के नाम से किया गया है।
51. किस अंग्रेज विद्वान ने पूरबी साहित्य के प्रति उपेक्षा प्रकट की और अंग्रेजी शिक्षा का प्रबल समर्थन किया?
विलियम केरे
मैकाले
मैकाले के समर्थन के कारण ही संवत् 1892 (1835 ई.) में सरकार ने अंग्रेजी शिक्षा का प्रस्ताव पास किया था।
जॉन गिलक्राइस्ट
फ्रेडरिक पिंकाट
52. संवत् 1894 में किसे संयुक्त प्रांत के दफ्तरों की भाषा बना दिया गया?
अंग्रेजी
उर्दू
मुसलमानों के प्रयास से संवत् 1894 (1837 ई.) में हिंदी को हटाकर उर्दू को दफ्तरी भाषा बना दिया गया था।
हिंदी
फारसी
53. राजा शिवप्रसाद ने ‘बनारस अखबार’ (संवत् 1902) की भाषा उर्दू क्यों रखी थी?
वे हिंदी जानते ही नहीं थे।
क्योंकि अधिकांश नवशिक्षितों की भाषा उर्दू थी।
अखबार के संभावित पाठक वही लोग थे जो उर्दू पढ़ना जानते थे, इसलिए लिपि नागरी रखते हुए भी भाषा उर्दू रखी गई।
उन्हें उर्दू अधिक प्रिय थी।
अंग्रेज अधिकारियों के दबाव में।
54. फ्रांसीसी विद्वान ‘गार्सां द तासी’ ने अपना ‘हिंदुस्तानी साहित्य का इतिहास’ कब लिखा था?
संवत् 1860
संवत् 1909
संवत् 1925
संवत् 1896
तासी ने संवत् 1896 में यह इतिहास ग्रंथ लिखा था।
55. राजा शिवप्रसाद को हिंदी की रक्षा के लिए किस अंग्रेज विद्वान या अधिकारी के विरोध का सामना करना पड़ा?
जॉन गिलक्राइस्ट
फ्रेडरिक पिंकाट
विलियम केरे
हैवेल
हैवेल (M.S. Howell) का मानना था कि हिंदी एक ऐसी ‘बोली’ है जिसे अंततः उर्दू के सामने सिर झुकाना ही पड़ेगा।
56. ‘हिंदी और उर्दू दो बोली न्यारी-न्यारी हैं’ – यह प्रसिद्ध घोषणा राजा लक्ष्मण सिंह ने किस ग्रंथ की भूमिका में की थी?
अभिज्ञान शाकुंतल
प्रजाहितैषी
मेघदूत
रघुवंश
रघुवंश के गद्यानुवाद के प्राक्कथन (भूमिका) में उन्होंने अपना यह मत स्पष्ट किया था।
57. लंदन में ‘आईन सौदागरी’ नामक व्यापार पत्र का संपादन कौन करता था, जिसमें हिंदी के लिए भी पृष्ठ सुरक्षित थे?
राजा लक्ष्मण सिंह
फ्रेडरिक पिंकाट
पिंकाट साहब लंदन में बैठकर हिंदी की सेवा करते थे और इस पत्र का संपादन करते थे।
गार्सां द तासी
सर सैयद अहमद खाँ
58. स्वामी दयानंद सरस्वती के अनुयायी हिंदी को किस नाम से पुकारते थे?
आर्यभाषा
स्वामी जी ने अपने ग्रंथों और प्रचार में हिंदी के लिए ‘आर्यभाषा’ शब्द का प्रयोग किया।
देवभाषा
हिंदुस्तानी
राष्ट्रभाषा
59. पं. श्रद्धाराम फुल्लौरी ने ‘भाग्यवती’ नामक उपन्यास की रचना कब की?
संवत् 1930
संवत् 1938
संवत् 1934
पंजाब के प्रसिद्ध लेखक श्रद्धाराम जी ने संवत् 1934 में यह सामाजिक उपन्यास लिखा था।
संवत् 1920
ये Quiz प्रश्न आचार्य शुक्ल के इतिहास ग्रंथ से आधुनिक काल: गद्य खंड से संबंधित थे। आशा है कि ये प्रश्न आपकी परीक्षा की तैयारी में सहायक होंगे।

